दो बहनों को एक साथ चोदा

By   September 1, 2017
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मेरी दो बहने है. मैंने किसी तरफ बड़ी मेहनत करके दोनों को पटाया और चोद डाला. पर अब मुझे दोनों की एक साथ लेनी थी. मेरी incest sex story पढके आपका निकल जायेगा..

मैंने दिया और दीप्ती दोनों की चूत चोदा है, लेकिन उन दोनों को यह नहीं पता था कि मैं दोनों को चोदता हूँ. मुझे दो दो चूतें मिल रही हैं, जब मौका मिला चूत सामने… दिया या दीप्ती जहाँ भी मिलती, अगर कभी सीढ़ियों में मिलती या फिर गैलरी में मिलती मैं कभी उनके चूचियों को दबा देता, कभी चूत पर हाथ लगा देता.

 

एक दिन मैंने दिया को बोला- मुझे दीप्ती की चूत लेनी है.

 

पहले तो वो मना करती रही, लेकिन मेरे बार बार बोलने पर वो बोली- इसमें मैं क्या कर सकती हूँ? खुद कोशिश करो… अगर वो तैयार हो तो मुझे कोई परेशानी नहीं है.

 

इस पर मैं बोला- मैं दीप्ती को तुम्हारे सामने चोदूँगा.

 

दिया बोली- यह कैसे संभव है? दीप्ती कभी तैयार नहीं होगी.

 

इस पर मैं बोला- यह तुम मेरे ऊपर छोड़ दो.

 

वो बोली- चलो ठीक है, जब तैयार होगी तो देखूँगी.

 

एक दिन दीप्ती मेरे कमरे में कंप्यूटर पर बैठी थी, मैं उसके चूचियों को सहला रहा था, मैंने उससे बोला- यार, तेरी बहन बड़ी मस्त माल है, मजा आ जाये उसकी चूत मिल जाये तो!

 

तो वो बोली- मैं क्या करूँ, उससे पूछो.

 

मैंने उससे कहा- मुझे तेरी और दिया दोनों की चूत एक साथ मारनी है.

 

दीप्ती बोली- यह नहीं हो सकता!

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मैंने कहा- यह तुम मेरे ऊपर छोड़ दो.

 

इस तरह कुछ दिन निकल गए और दिया से बात करने का मौका नहीं मिला.

 

एक दिन जब मैं ऑफिस से वापिस आया तो दीप्ती मेरे पास आई और कंप्यूटर पर कुछ करने लगी.

 

मैं दिया के कमरे में गया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया, उसकी चूचियाँ दबाने लगा और उसके होंठ चूसने लगा.

 

मैंने उसे बोला- दीप्ती तैयार हो गई है.

 

पहले तो उसे यकीन नहीं हुआ, लेकिन मैंने जब उसे बताया कि मैंने उसकी चूत मार ली है तो वो बोली- उसके सामने मुझे तो बहुत शर्म आएगी. मैं दिया को अपने कमरे में ले गया, जहाँ दीप्ती बैठी थी. मैंने जाते ही दीप्ती की चूचियों को हाथ लगा दिया, तो वो गुस्सा करने लगी और बोली- यह क्या बदतमीजी है.

2 bahno ko ek sath choda incest sex story

दोनों को एक साथ चोदने का मज़ा

मैं कुछ बोला नहीं और दिया की चूचियों को मसल दिया.

 

दिया भी गुस्सा हो गई.

 

फिर मैंने कहा- गुस्सा मत करो, तुम दोनों को एक दूसरी के बारे में यह नहीं पता कि मैं तुम दोनों को चोद चुका हूँ, इसलिए तुम दोनों गुस्सा कर रही हो. यह सुन कर दोनों चुप हो गई. मैंने फिर दीप्ती को उठाया और एक हाथ दीप्ती की कमर पर और दूसरा दिया की कमर पर रख दिया और बोला- देखो, मैं तुम दोनों के साथ अलग अलग चुदाई कर चुका हूँ और अब मेरा मन है कि दोनों के साथ एक साथ सेक्स करूँ. दोनों कुछ नहीं बोली.

 

तो फिर मैं बोला- आज बुधवार है, शनिवार को मेरी छुट्टी होगी तो उस दिन हम मजे करेंगे.

 

इस तरह मैं इन्तजार करने लगा शनिवार का.

 

आखिर शनिवार आ गया और मैं इन्तजार करने लगा कि कब दिया का पति ऑफिस जाये. दस बजे वो चला गया. मैं थोड़ी देर के बाद दिया के कमरे में गया. दिया और दीप्ती दोनों बैठी थी.

 

मैंने पूछा- तैयार हो ना?

 

तो दोनों मुस्कुरा दी.

 

दिया नाइटी पहने थी और दीप्ती सूट. मैंने दीप्ती को अपने गोद में बिठा लिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा, वो थोड़ा शर्मा रही थी तो मैंने दिया को पास खींच लिया और उसकी चूचियाँ भी दबाने लगा. धीरे धीरे वो आपस में खुल रही थी, सामान्य हो रही थी. मैंने दीप्ती की पजामी का नाड़ा खोल दिया, उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया और उसकी चूत सहलाने लगा. उसे भी मजा आ रहा था, वो गर्म भी हो गई थी.

 

अब मैंने उसकी ब्रा और पैंटी छोड़ कर सारे कपड़े उतार दिए. अब दीप्ती ब्रा और पैंटी में थी. अब मैंने दिया को अपनी तरफ खींचा और उसकी नाईटी उतार दी. अब दोनों बहनें ब्रा और पैंटी में थी. मैंने दीप्ती की ब्रा खोली और उसकी चूचियों को चूसने लगा और अपना लंड निकाल कर दिया को चूसने बोला. दिया मेरा लंड चूस रही थी और मैं दीप्ती की चूचियाँ चूस रहा था.

 

दिया मेरी गोद में सर रख कर मेरा लंड चूस रही थी और मेरा एक हाथ दीप्ती की पीठ पर था और दूसरा दिया की चूत सहला रहा था. अजीब सा रोमांच का अनुभव हो रहा था, एक बहन मेरा लंड चूस रही थी और दूसरे की चूचियाँ मेरे मुँह में थी. अब मैंने दोनों की ब्रा और पैंटी उतार दी और दोनों को बेड पर लिटा दिया.

 

दोनों पैर मोड़ कर लेटी थी, क्या हसीन नजारा था, दो दो फ़ुद्दियाँ मेरे सामने थी, दिया के पास ओलिव आयल था, मैंने उसे निकाला और दोनों की चूत की मसाज की तैयारी में लग गया. दोनों की चूत मस्त थीं, दिया थोड़ा ज्यादा चुद चुकी थी इसलिए उसकी चूत थोड़ी काली होनी शुरू हो गई थी, लेकिन दीप्ती की चूत मस्त थी, एकदम गोरी. किसी का भी दिल उसकी चूत चाटने के लिए मचल जाए.

 

वैसे भी चूत चाटना मुझे बहुत पसंद है. मैंने सोचा कि तेल लगाने से पहले दोनों की चूत चाट लूँ. मैंने दिया के पैरों को अपने कंधे पर रखा और उसकी चूत पर झुक गया और धीरे-धीरे उसकी चूत चाटने लगा.

 

उसकी चूत के होंठों को एक-एक करके मुँह में लेकर चूसने लगा. उसे मजा आ रहा था पर दीप्ती थोड़ी शर्मा रही थी. वो पास में लेटी थी और बड़े गौर से चूत को चाटते हुए देख रही थी. मैंने देखा वो अपने पैरों को सिकोड़ रही है, शायद वो भी उत्तेजित हो गई थी.

 

मैंने दिया की कमर के नीचे तकिया लगा दिया ताकि उसकी चूत थोड़ी ऊपर उठ जाए, वाकयी उसकी चूत ऊपर आ गई थी. बिल्कुल फूली हुई, मेरे आँखों के सामने, मेरे होठों के करीब. मैं थोड़ा सा झुका, दिया के पैरों के बीच से हाथ ले जाकर उसके दोनों नितम्बों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया.

 

अब उसकी चूत मेरे होठों के करीब थी. मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के बीच में रखी और धीरे-धीरे चाटने लगा, फिर मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत में घुसेड़ दिया और अन्दर-बाहर करने लगा.

 

उसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन इसी बीच मैंने दीप्ती को देखा, वो बार-बार अंगड़ाई ले रही थी, मैं समझ गया. किसी को भी ऐसा देखकर खुद पर काबू रख पाना मुश्किल होता है. अब मैंने दिया की जगह दीप्ती को लिटा दिया और फिर उसकी चूत वैसे ही चाटने लगा और कुछ देर तक उसकी चूत चाटी.

 

मैंने महसूस किया कि जब मैं एक की चूत चाट रहा होता हूँ तो दूसरी एक तरफ लेट कर मुझे देखती है, तो मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि दोनों साथ में मजे लें. यह सोच कर मैं लेट गया और दिया को अपना लंड चूसने बोला, वो मेरा लंड चूसने लगी और मैंने दीप्ती को बोला- वो मेरे ऊपर दोनों पैर दोनों तरफ करके आ जाए और अपनी चूत मेरे मुँह के सामने लाए.

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