बहन चुद गयी धोखे से – II

By   February 2, 2018
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इतना कहने के बाद आखिर श्रेया ने बाथरूम में अपना नाईटी गिरायी। पर  चलो बहन नंगी तो हुई, नहीं तो ऐसा लग रहा था की वो कल रात को भूल ही गयी है.. इस home sex story का अगला भड़काऊ भाग-

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2


अब हम दोनों नहाने लगे और नहाते नहाते मैं लगातार उसके मुम्में और झांटों वाली चूत देख रहा था.. हल्की रोशनी में भी मुझे अपनी छोटी बहन की नंगी जवानी और मादक बदन साफ़-साफ़ दिख रहा था और मुझे बहन की नंगे मुम्मों को पहली बार देख कर मज़ा आ रहा था। मैंने अब तक श्रेया को सिर्फ़ कपड़ों के ऊपर से देखा था और मुझे पता था की श्रेया का बदन बहुत सुडौल और भरा हुआ होगा, लेकिन इतनी अच्छी फिगर होगी ये नहीं पता था। श्रेया के गोल संतरे से मुम्में, पतली सी कमर और गोल-गोल सुंदर से चूतड़ों को देख कर मैं तो जैसे पागल ही हो गया। इस कारण मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और ये उसको भी पता चल गया.. क्योंकि कभी-कभी लंड उसके शरीर से सट जाता था..
श्रेया तुम्हारे मुम्में बहुत प्यारे हैं बहुत ही सुंदर और ठोस हैं। तू तो साली बनी ही चोदने के लिए है। अगर मुझे पता होता के तू मर्द को उसके नीचे लेट कर इतने मज़े देती हो तो तुझे घर में ही चोद देता जब त फ़्राक पहना करती थी और तेरी झांटें भी नहीं उगी थी… मैंने श्रेया से कहा
फिर हम कमरे में आ गए.. वो अपने कपड़े पहनने लगी.. तो मैंने फिर कहा- श्रेया.. मेरा लंड फिर खड़ा हो गया है.. अब क्या करूँ..?
उसने कहा- चल बिस्तर पर लेट जाओ फिर से मुठ्ठ मार देती हूँ।
तो मैं लेट गया और वो नाईटी पहन कर आईं और मेरी मुठ्ठ मारने लगी।
अब मैंने कहा- श्रेया एक बात कहूँ..
तो उसने कहा- क्या?
मैंने कहा- प्लीज़ कल रात जैसा फिर से चुदाई करने दो ना..
तो उसने कहा- नहीं..
मैं बार-बार बोल रहा था कि जब एक बार हो ही गया तो एक बार और करने से क्या हो जाएगा.. और मैं किसी से कहूँगा भी नहीं..
इतनी देर से वो मेरी मुठ्ठ मार रही थी.. इसलिए वो भी गर्म हो गई थी, इस बार वो मना नहीं कर सकी।
उसने कहा- ठीक है.. लेकिन सिर्फ़ एक बार.. और यह बात किसी से मत कहना भैया..
तो मैंने कहा- भला मैं किसी से क्यों कहूँगा श्रेया..
फिर मैंने झट से उठ कर उसकी नाईटी को खोल दिया.. अब उसने ब्रा और पैन्टी पहनी हुई थी।
मैंने जल्दबाजी में ब्रा को भी खोल दिया और उसे बिस्तर पर लिटा कर उसके मुम्में दबाने और चूसने लगा।
मैं उसके दूध कुछ ज्यादा ही ज़ोर से चूस और दबा रहा था.. कि तभी श्रेया ने कहा- थोड़ा धीरे करो नीरज भैया.. मैं कहीं भाग नहीं रही हूँ।
मुझे अपनी चुदास के चलते उसके ये शब्द सुनाई नहीं पड़े और मैं ज़ोर-ज़ोर से उसके मुम्में चूसता और दबाता रहा।
वो लगातार ‘आआहह.. आआअहह.. ओह नीरज भैया..’ करती रहीं।
मुझे उसके मुँह से अपना नाम सुनकर बड़ा मज़ा आ रहा था।
अब मैं नीचे आकर बहन की नाभि चाटने लगा।
उसका चुदास भरा जोश बढ़ता ही जा रहा था।
फिर मैंने अपना हाथ ले जाकर उसकी चूत पर रख दिया.. तो उसने कहा- प्लीज़ नीरज भैया.. छोड़ दो.. ये ग़लत है..
तो मैंने उसके होंठों पर अपने हाथ रख कर उसे चुप करा दिया और फिर अचानक एक उंगली बहन की चूत में पेल दी। इससे वो चीख पड़ी और बोलीं- धीरे-धीरे डालो.. दर्द होता है..
फिर मैं उसकी मुम्में चाटता रहा और उंगली तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगा।
वो गीली होने लगी और मेरा हाथ भी गीला हो गया.. तभी मैंने अचानक अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया.. तो वो चौंक पड़ीं.. और बैठ गईं.. अब वो मुझे हटाते हुए बोलीं- यह क्या कर रहे हो भैया?
तो मैंने कहा- तेरी चूत चाट रहा हूँ.. और इसका पानी पीना चाहता हूँ.. क्यों संजय ने.. कभी तेरी चूत नहीं चाटी है क्या?
तो उसने कहा- नहीं..
मैंने कहा- तब तो तूने 2 साल शादी के बाद भी सेक्स का असली मज़ा लिया ही नहीं.. खैर अब आराम से मज़ा लो..
वो सिसकारियाँ लेने लगीं और अब वो पूरी तरह से तैयार होती जा रही थीं, उसके मुँह से आवाज निकल रही थी ‘आआ.. आआ.. आहह.. नीरज.. ओह भैया.. पूरा पानी पी जाओ भैया..’ वो ये बहुत ही कामुकता से बोल रही थी।
मेरे इस काम से वो इतनी उत्तेजित हो गई थी कि दस मिनट बाद वो झड़ गईं और मैंने उसका पूरा पानी पी लिया। जब उसके रस की अंतिम बूँद निकल रही थीं.. तो मैंने उसका पानी अपने मुँह में लेकर उसे मुँह खोलने को कहा और उसके मुँह में बहन की चूत का माल उगल दिया.. और कहा- श्रेया अपना पानी तुम भी तो टेस्ट करो..
जिसे वो बड़े मजे से पी गईं.. उसने कहा- बड़ा मज़ा आया..
तो मैंने कहा- लेकिन मेरा लंड तो अभी भी खड़ा है..
अब वो हाथ से मेरा लंड पकड़ कर तेज़ी से मुठ्ठ मारने लगीं तो मैंने कहा- बस करो.. नहीं तो मैं झड़ जाऊँगा।
यह कह कर मैंने उसे लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया। मैंने लंड को बहन की बुर के मुहाने पर रख कर बिना पूछे ही एक जोरदार धक्का लगा दिया.. मेरे इस अचानक के धक्के से वो चीख पड़ीं- धीरे करो भैया.. दर्द होता है..

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bahan chud gaye dhokhe se home sex story

मेरी माल बहन

तो मैंने कहा- क्यों.. तू तो चुदती रहती है ना..?
इस पर उसने कहा- लेकिन संजय का लंड केवल 4 इंच का है.. और आपका 6 इंच का है.. और आपका लंड मोटा भी है.. मुझे मोटे और लंबे लंड की आदत नहीं है।
मैंने कहा- ठीक है.. फिर धीरे चोदता हूँ।
यह कह कर मैंने और जोरदार धक्का मारा तो मेरा 6 इंच का लंड.. पूरा उसकी चूत की जड़ में चला गया।
वो बहुत जोर से चीख पड़ीं- आआआहह.. नीरज भैया.. तूने मेरी चूत फाड़ दी साले.. ऊऊऊओहह.. क्या कर दिया तूने.. ओहह.. ओहह..
मैंने फिर से लंड को सुपारे तक बाहर निकाला और फिर एक जोरदार धक्का दे दिया और इस तरह से मैं उसे चोदता रहा और वो चीखती रही।
फिर मैंने कहा- अब मैं लेट जाता हूँ.. और तुम मेरे लंड पर बैठ कर ऊपर-नीचे करो..
तब वो वैसे ही करने लगीं।
फिर काफ़ी देर के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने उससे पूछा- मैं झड़ने वाला हूँ.. कहाँ गिराऊँ?
श्रेया ने कहा- भैया मेरी चूत में ही डाल दो और मैं भी बस आ ही रही हूँ..
करीब 5 मिनट के बाद मैं और मेरी बहन दोनों झड़ गए।
झड़ने के बाद मैं वैसे ही पड़ा रहा.. दो मिनट के बाद मेरा लंड छोटा होकर खुद ही बाहर आ गया और हम दोनों वैसे ही नंगे लेटे रहे।
फिर 5 मिनट के बाद मैंने फिर से अपना हाथ श्रेया की मुम्मों पर रख कर उसे सहलाने लगा.. तो उसने मेरा हाथ हटा दिया।
मैंने फिर रखा.. तो उसने फिर मेरा हाथ हटा दिया.. लेकिन जब मैंने फिर से हाथ रखा.. तो वो कुछ नहीं बोलीं और चुपचाप लेटी रहीं।
तब मैं एक हाथ से एक दूध को दबाने लगा.. और दूसरे को मुँह में लेकर चूसने लगा। मैंने श्रेया की चूचियों का दबाते हुए कहा- श्रेया, तू बड़ी मस्त है ! संजय को तो खूब मज़े देती होगी तू !
श्रेया- तू भी ले न मज़े ! तू  तो मेरा सगा भाई है, तेरा भी उतना ही हक बनता है मुझ पर ! अब से तू मेरा दूसरा खसम है !
मैंने कहा हाँ श्रेया ! क्यों नहीं !
श्रेया बोली हाय, कितना अच्छा लगता है अपने बड़े भाई से ये सब करवाना, सच बता कितनियों को चोदा है तूने अब तक?
मैंने कहा अब तक एक भी नहीं श्रेया डार्लिंग, आज तुझसे ही अपनी ज़िंदगी की पहली चुदाई शुरू करूँगा।
मैंने उसकी घुंडियों को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। श्रेया सिसकारियाँ भरने लगी। मैंने उसे लिटा लिया, उसके बदन के हर अंग को चूसते हुए उसकी चूत पर आया, वो बिल्कुल गीली हो चुकी थी। मैं ही बहन की फ़ुद्दी को चूसने लगा।
श्रेया पागल सी हो रही थी।
आह ! क्या शानदार चूत थी ! लगता ही नहीं था कि इसकी चुदाई हो रही थी ! बहन की गोरी गोरी चूत पर काली काली झांटें ! ऐसा लगता था चाँद पर बादल छा गए हों ! मैंने झांटों को हाथ से बगल किया और उसके चूत को उँगलियों से फैलाया, अन्दर एकदम लाल नजारा देख कर मेरा दिमाग ख़राब हो रहा था। मैंने झट से उसकी लाल लाल चूत में अपनी लपलपाती जीभ डाली और स्वाद लिया, फिर मैंने अपनी पूरी जीभ जहाँ तक संभव हुआ उसकी चूत में घुसा कर चूस चूस कर स्वाद लेता रहा।
श्रेया जन्नत में थी, उसने अपनी दोनों टांगों से मेरे सर को लपेट लिया और अपनी चूत की तरफ दबाने लगी। दस मिनट तक उसकी चूत चूसने के बाद उसकी चूत से माल निकलने लगा। मैंने बिना किसी शर्म के सारा माल को चाट लिया।
श्रेया बेसुध होकर पड़ी थी, वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी।
मैंने कहा सच बता श्रेया, संजय से पहले कितनों से चुदवाया है तूने?
श्रेया- संजय से पहले सिर्फ दो ने चोदा है मुझे !
मैंने कहा- हाय, किस किस ने तुझे भोगा री?
श्रेया- जब मैं स्कूल में थी तब स्कूल की एक सहेली के भाई ने मुझे तीन बार चोदा। फिर जब मैं सोलह साल की थी तो कालेज में मेरा एक फ्रेंड था, हम सब एक जगह पिकनिक पर गए थे, तब उसने मुझे वहाँ एक बार चोदा। उसके बाद तो मेरी शादी ही संजय से हो गई।
मैंने- तब तो मैं चौथा मर्द हुआ तेरा न?
श्रेया- हाँ ! लेकिन सब से प्यारा मर्द !
मैं उसके बदन पर लेट गया आर उसके रसीले होंठ को अपने होंठों में लिए और अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। कभी वो मेरी जीभ चूसती, कभी मैं उसकी जीभ चूसता। इस बीच मैंने बहन की दोनों टांगों को फैलाया और बहन की चूत में उंगली डाल दी। श्रेया ने मेरा लंड पकड़ा और उसे अपने चूत के छेद के ऊपर ले गई और हल्का सा घुसा दिया। अब शेष काम मेरा था, मैंने उसकी जीभ को चाटते हुए ही एक झटके में अपना लंड बहन की चूत में पूरा डाल दिया। वो दर्द में मारे बिलबिला गई। बोली- अरे, फाड़ देगा क्या रे? निकाल रे !
लेकिन मैं जानता था कि यह कम रंडी नहीं है, इसे कुछ नहीं होगा, मैंने उसकी दोनों बाहें पकड़ी और अपने लंड को उसकी चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए। वो कस कर अपनी आँखें बंद कर रही थी और दबी जुबान से कराह रही थी लेकिन मुझे उस पर कोई रहम नहीं आ रहा था बल्कि उसकी चीखों में मुझे मजा आ रहा था।
70-75 धक्कों के बाद उसकी चीखें बंद हो हो गई। अब उसकी चूत पूरी तरह से मेरे लंड को सहने योग्य चौड़ी हो गई थी, अब वो मज़े लेने लगी। उसने अपनी आँखे खोल कर मुस्कुरा कर कहा- हाय रे मेरे दूसरे खसम, बड़ा जालिम है रे तू ! मुझे तो लगा मार ही डालेगा !
मैंने कहा- श्रेया डार्लिंग, मैं तुझे कैसे मार सकता हूँ रे ! तू तो अब मेरी जान बन गई है और तुझे तो आदत होगी न बचपन से?
श्रेया हंसने लगी. बोली- लेकिन इतना बड़ा लंड की आदत नहीं है मेरे शेर राजा ! मज़ा आ रहा है आपसे चुदवा कर !
करीब दस मिनट तक चोदने के बाद मेरे लंड से माल निकलने पर हो गया, मैंने कहा- श्रेया डार्लिंग, माल निकलने वाला है।
श्रेया- निकाल दे ना वहीं अन्दर !
अचानक मेरे लंड से माल की धार बहने लगी और मैंने पूरा जोर लगा कर बहन की चूत में अपना लंड घुसा दिया। श्रेया कराह उठी।
थोड़ी देर बाद हम दोनों को होश आया, मेरा लंड उसकी चूत में ही था।
श्रेया आँख बंद करके लेटी थीं.. करीब दस मिनट के बाद हम दोनों उठे और बाथरूम जाकर.. फिर से नहाने लगे। दोनों ने एक-दूसरे को साबुन लगाया और मालिश करने लगे। फिर हम नहा कर नंगे ही कमरे में आ गए।
मैंने उससे कहा- मैं तुझे कपड़े पहनाता हूँ.. और वो मुझे कपड़े पहना दें।
मैंने उसे पैन्टी.. ब्रा और सूट पहना दिया। उसके होंठों पर लिपिस्टिक भी लगा दी..
इसके बाद जब वो मुझे अंडरवियर पहनाने लगीं.. तो मेरा लंड फिर से खड़ा होकर उसे सलामी देने लगा लेकिन किसी तरह से दोनों ने कंट्रोल करके कपड़े पहन लिए और तैयार हो गए।
चुदाई करते-करते भूख भी लग आई थी और थक भी गया था। जब मैंने घड़ी पर नज़र डाली.. तो 2 बज चुके थे। अब हम दोनों ने एक साथ खाना खाया और फिर बिस्तर पर आ गए।
करीब 5 मिनट लेटने के बाद मैंने श्रेया को अपनी ओर घुमाया और उसके गाल पर चुम्बन करने लगा और उसके मम्मों सहलाने लगा।
फिर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चुम्बन करने लगा। मैं उसका होंठ चूस रहा था और वो मेरा..
फिर कुछ देर बाद मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और कुछ देर बाद उसने मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी।
अब हम बहुत ही सनसनाहट वाली चूमा-चाटी करने लगे।
हमने करीब आधे घंटे तक चूमा-चाटी की, फिर मैंने कहा- श्रेया रात को चुदवाओगी ना?
तो वो कहने लगीं- अगर संजय हुए तो नहीं करवाऊँगी।
मैंने कहा- कुछ भी बहाना करके नीचे आ जाना..
तो उसने कहा- ठीक है कोशिश करूँगी..
इसके बाद मैंने श्रेया की पूरे दम से चुदाई की और झड़ने के बाद मैं सो गया। श्रेया वहाँ से चली गईं।
फिर मैं सोकर 3.30 बजे उठा और पूनम को लाने चला गया और उसे लेकर 4.30 बजे मैं घर आया।
अभी तक सब नॉर्मल था.. पूनम का एक्जाम भी खत्म हो चुके थे।
इसलिए वो भी आराम के मूड में थी और एंजाय कर रही थी। मैं जब पूनम को लाने गया था.. तो मैंने एक डब्बा ‘कोहिनूर एक्सट्रा टाइम’ वाला कंडोम का ले लिया था। यह सेफ्टी के लिए आवश्यक था।
फिर जब रात हुई.. तो हम सब सो गए। मैं नीचे सोया था.. संजय-श्रेया ऊपर और पूनम कमरे में सो रही थी।
करीब एक घंटे बाद मुझे कुछ हल्की सिसकारियाँ सुनाई दे रही थीं.. क्योंकि संजय श्रेया को चोद रहा था। इससे मेरी नींद खुल गई.. करीब आधा घंटे बाद जब उसकी चुदाई रुकी.. तो श्रेया ने कपड़े ठीक करने के बाद संजय से कहा- अब हो गया ना.. मुझे बहुत गर्मी लग रही है और मैं फर्श पर सोने नीचे जा रही हूँ।
कह कर वो नीचे मेरे बगल में आकर लेट गईं।
अब सब सोने लगे.. करीब 5 मिनट के बाद मेरा हाथ मेरी बहन के शरीर पर रेंगने लगा और मैंने उसकी नाईटी ऊपर तक उठा दी और उसके मुम्में चूसने और दबाने लगा।
आधा घंटे बाद मैंने अपनी एक उंगली बहन की चूत में डाल दी और आगे-पीछे करने लगा। अभी कुछ पल पहले ही चुदने के कारण श्रेया की चूत गीली थी और वो झड़ने का नाम भी नहीं ले रही थीं.. तभी उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।
आधा घंटे के बाद मैं झड़ गया.. पर श्रेया को झड़ाने में मुझे पूरा एक घंटा लगा.. फिर हम सो गए।
सुबह मैं 8 बजे सो कर उठा.. तो मैंने सुना कि संजय को ऑफिस के काम से एक हफ्ते के लिए मधुबनी जाना है। श्रेया की सास घर भी वहीं है.. तभी पूनम भी जाने को ज़िद करने लगी।
अब तय हुआ कि संजय के साथ पूनम भी जाएगी और पूनम का एक्जाम हो चुके थे.. इसलिए संजय ने वहाँ दस दिन का प्रोग्राम बना लिया.. क्योंकि वो ऑफिस के टूर पर जा रहा था.. इसलिए कोई तनाव नहीं था और उसी शाम का रिज़र्वेशन हो गया।
श्रेया मेरे कारण नहीं जा सकीं.. क्योंकि मेरे एक्जाम 15 दिन बाद शुरू होने वाले थे।
मैंने जब उन लोगों के जाने की बात सुनी तो मैं अन्दर से बहुत खुश था और उन लोगों के जाने का इंतजार करने लगा।
आख़िर वो घड़ी आ ही गई और मैं और श्रेया दोनों उन लोगों को छोड़ने स्टेशन गए और ट्रेन निकल जाने के बाद जब मैं श्रेया के साथ बाइक से लौट रहा था तो मैंने श्रेया से कहा- अब दस दिन तक हमारी रोज सुहागरात होगी.. और अब तुम थोड़ा सट कर बैठ जाओ न!
तो वे अपनी चूचियां मेरी पीठ से चिपका कर बैठ गई। तभी मैंने मार्केट में एक जगह बाइक रोकी और श्रेया से कहा- दो मिनट में आता हूँ।
फिर मैं श्रेया को वहीं छोड़ कर.. जाकर 2 पैकेट सिगरेट और एक बॉटल वाइन की ले आया।
श्रेया ने कहा- बैग में क्या लाया है?
तो मैंने कहा- घर चलकर देख लेना।
रास्ते में मैंने ढेर सारे फूल और सजावट का सामान लिया.. एक दुकान में श्रेया के साथ गया और सेल्समैन से कहा- स्टाइलिश पैन्टी.. ब्रा और नाइट हाफ सूट दिखाओ..
श्रेया मेरा मुँह देखने लगीं.. मैंने उसका हाथ पकड़ कर दबा दिया और फिर हमने 6 पैन्टी.. ब्रा और 2 नाइट सूट खरीदे।
श्रेया ने कहा- इन सबका क्या करोगे?
तो मैंने कहा- सब घर चल कर पता चल जाएगा..

———क्रमशः———-

अब तो श्रेया भी रंग में आ गयी है, अब तो उसको छोड़ने में और मज़ा आएगा। इस home sex story का आखिरी भाग जल्द ही..

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