भाड़े का पति – III

By   July 19, 2016
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सुहाग रात तो मैंने अपनी शर्त पर मना ली पर रहा मैं भाड़े का पति ही। अब देखिये हमारा ये शादी का नाटक और क्या क्या रंग लाता है। इस good sex story का अगला मस्त पार्ट-

Sex story in hindi के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5


मेरी शादी की कहानी तो पहले ही लिखी जा चुकी थी और कहानी के अनुसार ही मैं अपने चंद सालों की पत्नी संजना के साथ हनीमून सूईट में था और उसका प्रेमी अमित हमारे कमरे से थोड़ी ही दूर दूसरे कमरे में था।

मुझे अमित के कमरे में सोना था और अमित संजना के साथ उसके कमरे में। सब कुछ पहले से तय था। मेरे हनीमून का मतलब था कि संजना ज्यादा से ज्यादा समय अमित के साथ बिता सके। सब कुछ जानते हुए मैं अपने साथ बहुत सारी किताबें ले आया था जिससे मेरा समय कट सके।

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हर रात एक शादी शुदा जोड़े की तरह मैं और संजना किसी अच्छे रेस्तोराँ में खाना खाने जाते और किसी पब में जाकर नाचते जिससे लोगों की नज़र हम पर पड़ सके। पब से लौटते वक्त संजना शराब के नशे में ही होती जब होटल वापस पहुँचते तो मैं उसे सहारा देकर सीधा अपने कमरे में ले जाता और जब रात को पैसेज में कोई नहीं होता तो मैं अमित के कमरे में चला जाता और अमित संजना के कमरे में आ जाता। किसी दिन हम ऐसी जगह घुमने जाते जहाँ एकांत हो तो अमित वहाँ पर संजना का इंतज़ार करते हुए मिलता। मैं संजना को अमित के पास छोड़ कर पास में ही कहीं टहल कर अपना समय व्यतीत करता।

ये सब कुछ छः दिनों तक चला पर एक रात मैं हैरान रह गया। मैं अपने कमरे में गहरी नींद सोया हुआ था कि अचानक मैंने कमरे में संजना के सैंडलों की खटखटाहट सुनी। वो नशे में झूमती हुई आयी और मेरे बगल में आकर मेरे पास लेट गयी।

संजना मेरे पास लेटकर मेरे लंड से खेलने लगी। जब मैं नींद से जगा तो उसने मुझे सीधा किया और मेरे चेहरे पर बैठ कर अपनी चूत मेरे मुँह से लगा दी।

“मेरी चूत को चूसो राजऽऽऽ। खूऽऽब जोरसे चूसो। आज अमित ने मेरी चूत नहीं चूसी। अब एक अच्छे पति की तरह मेरी चूत को खूब चूसो और चाटो।”

खैर मैं क्या करता, इसी काम के लिये तो मुझे किराये पर रखा गया था और वैसे भी मैं पहले से जानता था कि ये सब तो होना ही था। मैं जोरों से संजना की चूत को चूसने और चाटने लगा। पता नहीं क्यों आज मुझे उतना मजा नहीं आ रहा था जितना कि मुझे अपनी सुहागरात को संजना की चूत चूसने में आया था। शायद इसलिये की वो अभी-अभी अमित से चुदवा कर आ रही थी।

हमारा पंद्रह दिन का हनीमून किसी भी विवाद के बिना खत्म हो गया। हम वापस घर आ गये। मैं हमेशा की तरह अपने काम पर जाने लगा। मुझे इस बात की परवाह नहीं थी कि मेरे स्टाफ में सब लोग क्या कहेंगे कि मैंने तरक्की के लिये कंपनी की बॉस से शादी कर ली। मुझे अपना काम पसंद था और मैं दिल लगा कर अपना काम करने लगा। सभी लोग मेरे काम की तारीफ़ भी किया करते थे।

कुछ नहीं बदला था, ना तो कंपनी का माहौल, ना काम। सिर्फ़ बदला था तो मेरा कंपनी पहुँचने का तरीका। अब मैं संजना के साथ उसकी गाड़ी में ऑफिस पहुँचता। दोपहर को हम खाना साथ खाते और शाम को साथ ही घर पहुँचते। जब घर पहुँचते तो अमित वहाँ इंतज़ार करते हुए मिलता। हम तीनों साथ-साथ खामोशी से खाना खाते। मैंने आज तक अमित से बात नहीं की थी, बल्कि सही कहूँ तो मैं उसे नज़र-अंदाज़ सा ही करता था। खाने के बाद मैं अपने कमरे में आ जाता या फिर स्टडी-रूम में चला जाता जहाँ मैंने अपना छोटा सा ऑफिस बनाया हुआ था। संजना अमित के साथ अपने कमरे में चली जाती।

इसी तरह एक हफ़्ता गुज़र गया। अमित और मेरे बीच खामोश युद्ध सा चल रहा था। फिर एक दिन वही हुआ जिसका मुझे अंदाज़ा था। उसने वही किया जो मैंने पहले से सोच रखा था। खाने के बाद जब सोने का समय हुआ तो उन दोनों ने काफी शराब पी रखी थी। अमित ने मुझे घूरते हुए कहा, “राज, हम सोने जा रहे हैं, सुबह मिलेंगे। मैं तुम्हारी बीवी को उपर कमरे में ले जा रहा हूँ और आज मैं उसकी चूत का बैंड बज़ा दूँगा। तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा ना?”

दूसरी सुबह ऑफिस जाते वक्त संजना ने मुझसे अमित के व्यवहार के लिये माफ़ी माँगी।

“माफ़ी माँगने की कोई बात नहीं है संजना, मैं तो ये सब पहले से ही जानता था। मैंने जैसा सोचा था उसने वैसे ही व्यवहार किया। मुझे कोई तकलीफ़ नहीं हुई। पर हाँ, अब तुम दूसरा वादा पुरा करो जो तुमने किया था, मुझे भी अपनी सैक्स लाइफ़ चाहिये।”

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संजना बॉस की मतवाली चूत

“ठीक है, ऑफिस पहुँचते ही मैं सब इंतज़ाम कर दूँगी।” संजना ने मेरा हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा।

दोपहर को खाना खाते समय संजना ने मुझसे कहा, “राज सब तय हो चुका है, जिस लड़की को तुमने चुना था वो कल से आ सकती है। पर वो सिर्फ़ दिन में ही आ सकती है इसलिये कल से तुम खाना घर पर खाना। ऑफिस में बहाना बना दूँगी कि तुम किसी मिटिंग में व्यस्त हो या फिर किसी क्लायंट के साथ लंच पर गये हो। मैं बस ये चाहती हूँ कि ये सब एक राज़ रहे।”

“लगता है मुझे भी कहानी सोच कर रखनी होगी, कहीं उस लड़की ने मुझसे ये पूछ लिया कि एक नये शादी शुदा पति को किराये की लड़की की क्या जरूरत पड़ गयी तो? अगर मैं उसे ये कह दूँ कि तुम्हें मर्दों में कम और लड़कियों में ज्यादा दिलचस्पी है तो कैसा रहेगा?”

मेरी बात सुनकर संजना हँस दी, “राज मैं तुमसे कहीं आगे हूँ। जिस दिन तुमने उस लड़की को चुना था मैंने अगले दिन ही उससे मुलाकात कर ली थी। मैंने उससे कहा था कि मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ पर किसी खास बिमारी की वजह से मैं उनके साथ सैक्स नहीं कर सकती इसलिये मुझे उसकी मदद की जरूरत है। मैंने उससे कहा कि मुझे पता है कि उसकी भी कुछ जरूरतें है जिसे मैं पूरा कर सकती हूँ।”

संजना थोड़ा सा झुकी और मेरी जाँघों को थपथपाते हुए कहा, “राज, वो काफी सुलझी हुई लड़की है और उसे उसके काम के लिये मैंने मुँह माँगी कीमत दी है, देखना मेरा पैसा व्यर्थ ना जाने पाये।”

उस रात जब मैं सो चुका था तो संजना मेरे कमरे में आयी और मेरे लंड से खेलने लगी। मैं अपनी आँख मलते हुए उठा तो मैंने उसे कहते सुना, “राज, मेरी चूत बह रही है, इसे जोर जोर से चूसो राज। मेरी रसीली चूत का सारा पानी पी जाओ।”

दूसरे दिन मैं खाने के वक्त घर पहुँचा तो सादिया सोफ़े पर बैठी कोई मैगज़ीन पढ़ते हुए सिगरेट पी रही थी। उसे देखते ही मेरे लंड में सनसनाहट होने लगी। उसने शिफॉन की प्रिंटेड साड़ी बहुत ही सैक्सी तरीके से नाभि के बहुत नीचे बाँधी हुई थी और उसका मैचिंग चोली-नुमा ब्लाऊज़ बहुत ही छोटा सा था और पैरों में बहुत ही खूबसूरत हाई हील सैंडल पहने हुए थे। साथ ही उसने उपयुक्त शृंगार किया हुआ था। जैसे ही मैं हॉल में घुसा, उसने चौंकते हुए मेरी तरफ़ देखा, “राज, तुम यहाँ पर क्या कर रहे हो?”

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