चाची की घनघोर चुदाई – V

By   July 2, 2016

ऋतू दीदी की चूत गरम तो कर दी थी मैंने, अब उस गरम चूत पर लौड़ा मारने की राह देख रहा था। कोशिश है की चाची भी साथ हो, क्या मस्त माहौल होगा। अपनी चाची के सामने अपनी कजिन bahan ki chudai करने की सोच के ही लंड खड़ा हो रहा है।

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5

पार्ट 6


“सुनील तुमने किसी को चोदा है पहले?”

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तब मैंने उसे सच-सच बताना ठीक समझा और बोला, “ऋतू दीदी! मैं मन ही मन में आपको और आपकी मम्मी से बहुत प्यार करता हूँ और रात को आप दोनो के ख्वाब देख कर मुठ मारा करता था…” और फिर मैंने उसे पूरी कहानी बता दी।

ऋतू बड़े आश्चर्य के साथ बोली, “क्या??? सुनील तुम मम्मी को चोदते हो? मैं नहीं मानती।”

तब मैंने कहा, “चलो ठीक है, कल जब आपकी मम्मी घर पर आयेंगी और मुझे जब अंदर बूलायेंगी तब आप बालकोनी से देखना… आपकी मम्मी कितने प्यार से मुझसे चुदवाती है। हमने तो प्लैन भी बनाया है कि आपकी मम्मी आपके साथ मेरी चुदाई करवायेंगी।”

ऋतू इतना सब सुन कर थोड़ी सी गरम हो गयी थी और अपनी चूत उसने मेरी टाँगों पर घिसनी चालू कर दी थी। मैंने कहा, “ऋतू दीदी! मैं आपको बड़े प्यार से चाची के प्लैन वाले दिन ही भोगना चाहता हूँ। इस लिये आज सिर्फ एक दूसरे की चूसाई करेंगे…” और इतना कह कर फिर से हम लोग ६९ के आसन में हो कर एक दूसरे को चूसने लगे। उस रात हम दोनों एक ही कमरे में एक दूसरे को बाहों में भर कर सोये। अगली सुबह मुझे विनीता चाची को लेने जाना था तो मैं सोती हुई नंगी ऋतू को प्यारी से पप्पी दे कर विनीता चाची को लाने के लिये एयरपोर्ट चला गया।

कार में बैठते ही विनीता चाची ने मुझे किस करा और बोली, “सुनील मैं तो बूरी तरह से मचल रही हूँ चुदाई के लिये। ऋतू जब तक सो कर उठेगी तब तक तू मेरी जम कर चुदाई कर दे।”

मैंने कहा, “विनीता डार्लिंग! मैं भी तो तड़प रहा हूँ तुम्हें चोदने के लिये और तुम अब ऋतू की चिंता छोड़ दो!” और मैंने विनीता चाची को सारी कहानी बता दी।

विनीता चाची ने आगे बढ़ कर मुझे किस कर लिया और बोली, “मैं तो ऋतू के साथ तेरी चुदाई कल करवाऊँगी। आज तो तू दिन भर सिर्फ मुझे चोद कस कर। मेरा तो पूरा बदन तरस रहा है तेरे हाथों से मसलवाने के लिये।”

हम जब घर पहुँचे तो ऋतू उठ गयी थी। थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करने के बाद विनीता चाची बोलीं, “ऋतू देख मैं सुनील के साथ सोने जा रही हूँ, तो कोई भी फोन या कोई घर पर आये तो उसे मना कर देना और मुझे डिस्टर्ब मत करना।”

ऋतू मेरी तरफ देख कर मुस्कराई और समझ गयी कि उसकी मम्मी कमरे में जा कर मुझसे चुदवायेंगी। विनीता चाची ने उसे देख लिया और बोली “ऋतू बेटा! मुझे सुनील ने सब बता दिया है। तू घबरा मत… कल मैं तुझे ज़िंदगी का वो सुख दिलवाऊँगी जिसकी तूने कल्पना भी नहीं करी होगी।”

इतना बोल कर विनीता चाची ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और मैंने उनको। फिर हम दोनों कमरे में घुस गये और घुसते ही एक दूसरे पर ऐसे टूट पड़े जैसे कितने दिनों के भूखे हों। मैं विनीता चाची को अपनी बाहों में भर कर बुरी तरह से मसलते हुए चूस रहा था और विनीता चाची मेरी पैंट खोल रही थी। मैंने देखा कि ऋतू बालकोनी में खड़ी हो कर हम दोनों को देख रही थी। इस ख्याल से कि ऋतू अपनी मम्मी को मुझ से चुदाते हुए देखेगी, मेरा लंड कुछ ज्यादा ही अकड़ गया और मैंने विनीता चाची के कँधे दबा कर उन्हें वहीं बिस्तर पर बिठा दिया और सिर को पकड़ कर अपना लंड विनीता चाची के मुँह में उतार दिया और ऋतू को देखते हुए विनीता चाची का मुँह चोदने लगा और अपना पूरा लंड उनके मुँह में फँसा कर झड़ गया।

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फिर मैंने विनीता चाची कि साड़ी, ब्लाऊज़, पेटीकोट उतारे और ऋतू को दिखाते हुए उनकी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से पहले खूब मसलीं और बाद में उनकी ब्रा उतार के उनके दोनों निप्पल अपनी उँगलियों के बीच में मसले। विनीता चाची तो सितकार उठी और बोली, “मादरचोद इतना क्यों भड़का रहा है मेरी चूत की आग? पहले से ही चूत में आग भड़की हुई है।”

मैंने विनीता चाची को खड़ी कर के उनके चूत्तड़ बालकोनी की तरफ कर दिये ताकि ऋतू आराम से देख सके। विनीता चाची के हाई हील सैण्डलों में कसे पैर जमीन पर थे और मैंने उन्हें चूचियों के सहारे बिस्तर पर टिका दिया जिससे उनकी चूत और गाँड के छेद खुल कर सामने आ गये। मैंने ऋतू की तरफ़ देखते हुए विनीता चाची की चूत और गाँड के छेद पर उँगली फेरनी चालू कर दी और एक हाथ से अपना लंड सहलाने लगा। उसके बाद मैने झुक कर विनीता चाची के सैण्डलों में कसे पैर चाटने लगा और फिर धीरे-धीरे उनकी टाँगों और जाँघों को चाटते हुए ऊपर बढ़ा और फिर उनकी उभरी हुई चूत को अपनी जीभ से चटना शुरू कर दिया जिससे विनीता चाची की सितकारियाँ निकलनी चलू हो गयी और वोह अपनी गाँड के धक्के मेरे मुँह पर देने लगी।

विनीता चाची की चूत अपने मुँह में झड़वाने के बाद मैंने खड़े-खड़े ही अपना लंड ऋतू को दिखाते हुए विनीता चाची की चूत पर रखा और झुक कर उनकी मदमस्त लटकती हुई चूचियों को पकड़ कर मसलते हुए जोर से धक्का मारा जिससे मेरा पूरा लंड विनीता चाची की चूत में समा गया। विनीता चाची इस पोज़ में अपने चूत्तड़ मटकाती हुई मेरा लंड ले रही थी और मैं भी पूरे जोश में उनकी चूत चोद रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड निकाल कर विनीता चाची की टाँगें फैला कर बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ कर दना-दन चोदने लगा। करीब आधा घँटा चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़े और विनीता चाची ने अपनी जाँघें बंद करके मेरा लंड अपनी चूत में ही रहने दिया और बोली, “डार्लिंग! ऐसे ही मेरे ऊपर सो जा ताकि जब तेरा दोबारा खड़ा हो तो बिना वक्त गंवाये मुझे चोदना चलू कर देना। मेरी चूत को इतनी ठंडक मिली है कि मैं तो एक सिगरेट पी कर सोऊँगी।”

मैं तो मस्ती में था और विनीता चाची कि गुदाज़ चूचियों पर लेट कर सुस्ताने लगा। दिन भर हम दोनों ने जी भर के एक दूसरे के साथ चुदाई की और अपने बदन की हवस को पूरा शाँत की।

chachi ki ghanghor chudai bahan ki chudai

दीदी की मस्त कच्ची जवानी

शाम को विनीता चाची बिस्तर पर सिर्फ हाई हील वाले काले और चमचमाते सैण्डल पहने, नंगी पसरे हुए ड्रिंक पी रही थीं और मैं अपने होंठ और जीभ उनके सैण्डलों और पैरों पर फिरा रहा था। मुझे उनके सैण्डलों और पैरों की महक और टेस्ट बहुत अच्छा और उत्तेजक लग रहा था, जिसकी वजह से मेरा लौड़ा तन कर सीधा खड़ा था। विनीता चाची बोली, “डार्लिंग अब और चूदाई नहीं करेंगे ताकि तेरा लंड कल ऋतू की चूत के लिये एकदम तैयार और बे-करार रहे। मैं चाहती हूँ कि जब उसे तेरा लंड मिले तो एक दम ताज़ा और मस्त मिले। कल दिन में ऋतू के साथ अपना हनीमून मना लेना।”

मैंने उनकी सैण्डल चाटते हुए कहा, “विनीता चाची! दिदी मेरे लिये एकदम तैयार कर देना और हनीमून मैं उनके साथ मॉडर्न ड्रैस में मनाऊँगा।”

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