चाची की घनघोर चुदाई – IV

By   July 1, 2016
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चाची की चुदाई तो खूब की, अब उनकी जवान बेटी, मेरी ऋतू दीदी की बारी थी। हम बैठ के प्लान बना रहे थे की ऋतू didi ki chudai कैसे की जाये। आप भी बैठिये हमारे साथ..

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5

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पार्ट 6


विनीता चाची मेरे होंठों को प्यार से चूमते हुए बोली, “सुनील तूने बात तो बहुत सही कही है और मैं नहीं चाहती कि ऋतू भी मेरी तरह इसी आग में जले। चल तू चिंता मत कर उसे वापस आने दे। मैं मौका देख कर उसे तैयार कर लुँगी!”

बातें करते और सिगरेट पीते हुए काफी देर हो चुकी थी और इस दौरान विनीता चाची बारबार अपने हाथ से मेरा लंड रगड़ते हुए अपनी चूचियाँ मेरे ऊपर घिस रही थीं और ऋतू की चूत मिलने की खबर से मेरा लंड फिर से तन कर मैदान में आ गया था। विनीता चाची ने तो सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी मेरा लंड फिर से तैयार हो जायेगा। इस बार विनीता चाची ने कहा कि वोह अपने तरीके से मुझे चोदेंगी, और आराम से एक सिगरेट जला कर मुझे नीचे लिटा कर अपनी दोनो टाँगें चौड़ी कर के मेरे लंड के उपर खड़ी हो गयीं और धीरे-धीरे अपने घुटनों के बल बैठने लगीं। जब उनकी चूत मेरे लंड तक पहुँची तब उन्होंने एक हाथ बड़ा कर मेरा लंड पकड़ा और चूत के मुँहाने पर घिसने लगी, और थोड़ी देर घिसने के बाद गपाक से अपनी जाँघें चौड़ी कर के मेरे लंड पर बैठ गयीं और उछल-उछल कर मुझे चोदने लगीं। मुझे तो इस आसन में बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने लेटे हुए अपने हाथ आगे बढ़ा कर उनके फूले हुए मस्त गुबारे जो मदमस्त हो कर झूल रहे थे, पकड़ कर मसलने चलू कर दिये। विनीता चाची ने मुझे करीब आधा घँटा तक इस आसन में चोदा और खूब अपनी चूत का पानी निकाला।

हमने उस रात दो बार और संभोग करा और पस्त हो कर एक दूसरे की बाहों में सो गये। हफ़्ते भर तक, जब तक ऋतू वापस नहीं आयी हम लोग दिन भर नंगे पड़े रहते थे और एक दूसरे को जी भर के भोगते थे। इस दौरान विनीता चाची ने मुझे कई नये आसन और चोदने के तरीके बताय। हमने ब्लू फ़िल्म भी देखी और उसमें देख-देख कर हम भी उनकी नकल करते हुए एक दूसरे को चोदते थे। ऋतू के वापस आने के एक दिन पहले विनीता चाची को अपने भाई के घर जाना पड़ा।

जाने से पहले मुझे समझा के गयीं कि “देख कल सुबह ऋतू आ जायेगी और मैं परसों से पहले नहीं आ पाऊँगी। अपने मस्ताने पर काबू रखना और यह मत सोचना कि मैंने ऋतू को चोदने कि इजाज़त दे दी है तो तू उसे अकेले में पा कर चोद लेगा। मैं बड़े तरीके से उसे समझा कर तेरे साथ चुदवाऊँगी। डार्लिंग मज़ा चुदाई में तब आता है जब मर्द और औरत मिल के संभोग करें!”

इतना समझा कर विनीता चाची चली गयीं। अगले दिन सुबह ही ऋतू को आना था। मैं ड्राइवर के साथ कार में उसे कॉलेज से दस बजे जाकर ले आया। अबकी बार ऋतू को देखने का मेरा नज़रिया ही कुछ और था। मैं रास्ते भर उसे अपनी आँखों से नंगा करता रहा, और ऋतू मुझे अपनी ट्रिप के बारे में बताती जा रही थी। उसे क्या मालूम था कि उसकी माँ और मेरे बीच में क्या संबंध बन चूके थे जिस के कारण मुझे उसके बदन की कुँवारी नशीली शराब पीने को मिलने वाली थी।

घर आ कर ऋतू बोली, “सुनील मैं तो नहा धो कर एक कोक पीयूँगी और सोऊँगी। मैं इतने नहा कर आती हूँ, तुम मेरे लिये एक गिलास में कोक और बर्फ निकाल दो!”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं दीदी आराम से नहा लो!”

मेरे दिमाग में तो सिर्फ़ ऋतू को चोदने का नज़ारा घूम रहा था। एका एक मुझे एक आइडिया सुझा जो मैंने एक किताब में पढ़ा था। सोचा क्यों ना ट्राई मार के देखूँ। यही सोच के मैं चुप-चाप विनीता चाची के कमरे में गया और नींद की चार-पाँच टेबलेट ला कर ऋतू की कोक में मिला दी। मुझे विनीता चाची ने कल ही बताया था कि जब कईं बार वोह रात को चुदाई के लिये बहुत परेशान हो जाती थीं और सो नहीं पाती थीं तो वोह नींद की गोली लेकर सो जाती थीं। इतने में ऋतू भी नहा-धो कर बाहर आ गयी थी। मुझे आज तक पता नहीं चल पाया है कि लड़कियाँ और औरतें, बहन की लौड़ियाँ इतने सैक्सी कपड़े क्यों पहनती हैं कि जिससे मर्द बे-काबू हो जाये। क्या हर औरत मन ही मन यह चाहती है कि कोई उसे चोदे? ऋतू ने भी ऐसी नाइटी पहनी हुई थी जो फ़्रंट ओपेन थी और जिस से सिर्फ उसके चूत्तड़ और आधी जाँघें छिप रही थी और स्लीवलेस होने के कारण उसकी साफ चिकनी बगलें दिख रही थीं।

नाइटी का कपड़ा इतना मोटा नहीं था, जिसके कारण उसकी छाती पर उठ रही नोकों से मालूम पड़ रहा था कि उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी, और जब वोह चौंकड़ी मार कर मेरे सामने पलंग पर बैठी तो मेरा तो बुरा हाल हो गया। उसकी चिकनी जाँघें और पैंटी में कसे हुए उसके चूत्तड़ और चूत की मछलियों को देख कर मेरा लंड तन गया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपने ऊपर चद्दर डाल कर खुद को शरमिन्दा होने से बचाया। कोक पीते समय ऋतू ने बताया कि अबकी बार उसे ट्रिप में बहुत मज़ा आया और उसने अपनी सहेलियों के साथ खूब मस्ती करी। थोड़ी देर में वोह बोली, “सुनील मुझे बहुत जोर से नींद आ रही है, मैं तो अपने कमरे में सोने जा रही हूँ!”

मैंने करीब आधा घंटा वेट करा और अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर अपने लंड को विनीता चाची के हाई हील के सैंडल से सहलाता रहा। उसके बाद मैं उठा और ऋतू के कमरे कि तरफ गया। ऋतू ए.सी. चला के आराम से दरवाज़ा बंद करके सो रही थी। मैंने चुप-चाप दरवाज़ा खोला और कमरे में घुस गया। ऋतू बड़े आराम से बिस्तर पे पीठ के बल सो रही थी और उसकी नाइटी जो पहले से ही छोटी थी, और उठ कर उसकी नाभी तक चढ़ गयी थी, जिससे कमर के नीचे का सब कुछ दिख रहा था। उसकी पैंटी में छुपी हुई चूत के उभार साफ-साफ दिखाई दे रहे थे। मेरा तो मादरचोद लंड साला हरामी ये देख कर ही खड़ा हो गया।

मैंने ऋतू के पास जा कर उसके कँधे पकड़ कर थोड़ा जोर से हिलाया और बोला, “दीदी देखो आपकी सहेली का फोन आया है!”

ऋतू को कुछ फरक नहीं पड़ा। वोह तो बस बे-खबर हो कर सोती रही। मैंने फिर भी अपने को पक्का करने के लिये फिर से उसे जोर से आवाज़ दी और हिलाया पर उसको नींद की गोली के कारण कोई असर नहीं हुआ। मैंने सबसे पहले अपने कपड़े उतारे और पूरा नंगा हो कर ऋतू की नाइटी के आगे के बटन खोलने लगा और एक-एक करके सारे बटन खोल दिये। दोस्तों, उस समय मेरे हाथ काँप रहे थे क्योंकि आज मैं इतनी हिम्मत करके ऋतू का गोरा दूधिया बदन देखने जा रहा था जिसकी पैंटी और ब्रा सूंघ-सूंघ कर खूब मुठ मारा करता था। ऋतू एक दम दूध की तरह गोरी थी और आज से पहले मैं बहुत तड़पा था उसका नंगा बदन देखने के लिये।

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