चलती ट्रेन में माँ-बेटी की ठुकाई

By   December 28, 2016
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दोस्तों, मैं अपने साथ हुए एक गज़ब के ट्रेन सफ़र के बारे में desi kahani सुनाने जा रहा हूँ। इसमें मैंने एक साथ 2 औरतो के साथ ऐश किये, एक अनुभवी माँ और एक जवानी की दहलीज पर कदम रखती देती। अब मैं अपनी desi kahani पर आता हूँ-

Hindi sex story के अन्य भाग-

पार्ट 1

आखिरी पार्ट

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इंजिनियरिंग पास करने के बाद मेरी नयी नौकरी लगी थी और अपने ऑफिस के काम से मैं नई दिल्ली से बंगलौर जा रहा था। ऑफिस वालों ने मेरा रेलवे टिकट कर्नाटक ऐक्सप्रेस में फर्स्ट ऐ-सी में करवा दिया था। मैं अपनी यात्रा के दिन शाम को आठ बजे नई दिल्ली स्टेशन पर पहुँच गया। दिसंबर का महीना था, इसलिये बाहर ठंड बहुत पड़ रही थी और मैं अपनी सीट में बैठ गया। थोड़ी देर के बाद ट्रेन चल पड़ी और टी-टी आया और टिकट चेक कर के चला गया। हमारे कूपे में एक ही परिवार की दो औरतें थीं और उनके साथ एक आदमी था। मेरा अपर बर्थ था और ट्रेन छूटने के बाद मैं थोड़ी देर तक नीचे बैठा रहा और फिर मैं अपनी बर्थ पे जाकर कंबल तान कर आँख बँद करके सो गया। नीचे वो अदमी और औरतें गप-शप लड़ा रहे थे। उनकी बात सुन कर मुझे लगा कि वो आदमी एक मल्टी नैशनल कंपनी में सीनियर ऐक्ज़िक्यूटिव पोस्ट पर काम करता है और जो औरत बड़ी उम्र की थी, उसके ऑफिस से संबंध रखती है। मैं आँखें बंद कर के उनकी बातें सुन रहा था। पहले तो मुझे लगा था कि दोनों औरतें बहने हैं लेकिन फिर उनकी बातों से लगा कि दोनों औरतों में माँ और बेटी का संबंध है और वो सब मस्ती करने के लिये बंगलौर जा रहे हैं, लेकिन घर पर ऑफिस का काम बता कर आये हुए हैं।

छोटी उम्र वाली लड़की की उम्र लगभग इक्कीस-बाईस साल थी और दूसरी की उम्र लगभग पैंतालीस-छियालीस साल थी।मुझे उनकी बातों से मालूम पड़ा कि माँ का नाम माला और लड़की का नाम शिखा है। दोनों माँ और बेटी उस आदमी को सर कह कर पुकार रही थीं। दोनों ही औरतें देखने में बहुत सुंदर थीऔर दोनों ने अच्छे और फ़ैशनेबल सलवार कमीज़ पहने हुए थे और सभ्य औरतों की तरह शालीनता सिर को दुपट्टे से ढका हुआ था। दोनों ने हल्का और उचित मेक-अप किया हुआ था और दोनों के पैरों में काफी ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने हुए थे। दोनों का फिगर भी बहुत सैक्सी था। छोटी वाली के मम्मे उसके कमीज़ के ऊपर से दिखने में भारी-भारी और तने हुए दिखते थे और उसके चुत्तड़ गोल-गोल लेकिन कम उभरे थे। दूसरी औरत के मम्मे भी बहुत बड़े-बड़े थे और उसके चुत्तड़ भी खूब बड़े-बड़े और फैले हुए थे। उनके साथ के आदमी की उम्र लगभग तीस-बत्तीस साल रही होगी और देखने में बहुत स्मार्ट और यंग था। तीनों आपस में काफी घुल मिल कर बातें कर रहे थे।

थोड़ी देर के बाद मेरी आँख लग गयी। रात के करीब बारह बजे मेरी आँख खुल गयी क्योंकि मुझे बहुत प्यास लगी हुई थी। मैंने अपनी आँख खोली तो देखा कि कूपे में नाईट लैंप जल रहा है और वो तीनों अभी भी बातें कर रहे हैं। फिर मेरी नाक में शराब की महक आयी तो मैंने धीरे से नीचे झाँका तो मेरी आँखें फैल गयीं। वहाँ तो नज़ारा ही बदल गया था। उस समय शिखा खिड़की के साथ मेरे नीचे वाले बर्थ पर बैठी हुई थी और दूसरे बर्थ पर माला और सर बैठे हुए शराब पी रहे थे। शिखा के हाथ में भे शराब का पैग था। दो खिड़कियों के बीच में छोटी सी फोल्डेबल टेबल पे व्हिस्की की बोतल रखी हुई थी। उस समय दोनों माँ और बेटी अपने कपड़े बदल चुकी थीं। माला एक हल्के नीले हाऊज़ कोट में थी और शिखा एक गुलाबी रंग की मैक्सी पहने हुए थी। उनके पैरों में पेन्सिल हील के सैंडल अभी भी मौजूद थे। मज़े की बात यह थी कि मुझको लग रहा था कि दोनों माँ और बेटी अपने-अपने हाऊज़ कोट और मैक्सी के अंदर कुछ नहीं पहन रखी हैं| सर सिर्फ़ टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे। मुझे लगा कि तीनों काफी शराब पी चुके हैं क्योंकि तीनों काफी झूम रहे थे। शराब पीते-पीते सरने माला को अपने और पास खींचा तो माला पहले शिखा की तरफ देखी और फिर सरके बगल में कंधे से कंधा मिला कर टाँग के ऊपर टाँग चढ़ा कर बैठ गयी। माला जैसे ही सर के पास बैठी तो सरअपना हाथ माला के कंधे पर रख कर माला के कंधे को सहलाने लगे। माला ने एक बार शिखा की तरफ देखा और चुप-चाप अपना ड्रिंक लेने लगी। शिखा भी सर और मम्मी की तरफ देख रही थी। उसकी आँखें शराब के सुरूर में भारी सी लग रही थीं।

थोड़ी देर के बाद सर अपना एक हाथ माला के पेट के ऊपर रख कर माला के पेट को सहलाने लगे। ऐसा करने से माला तो पहले कुछ कसमसायी और फिर चुप-चाप अपना ड्रिंक लेने लगी। फिर सर ने माला के पेट से हाथ को और थोड़ा ऊपर उठाया और अब उनका हाथ माला के मम्मों के ठीक नीचे था। उनकी इस हरकत से माला सिर्फ़ अपने सर को देख कर मुस्कुरा दी। फिर सर ने अपना हाथ माला के मम्मों पर रख दिया और अपना हाथ घुमाने लगे। अब सर का हाथ माला के मम्मो को उसके हाऊज़ कोट के ऊपर से धीर- धीरे सहला रहा था। अपनी मम्मी और सरका कामकाज शिखा बड़े गौर से बिना पलक झपकाये देख रही थी और उसके गाल लाल हो गये थे। । थोड़ी देर के बाद सरने अपना ड्रिंक सामने की टेबल पर रख दिया और अपने दोनों हाथ से माला के दोनों मम्मे पकड़ लिये और उन्हें जोर-जोर से दबाने लगे। अब माला भी चुप नहीं बैठ सकी और उसने फौरन एक घूँट में अपना ड्रिंक खतम करके गिलास टेबल पे रख कर सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया, लेकिन सर अपने दोनों हाथों से माला के दोनों मम्मे पकड़ कर दबाते रहे। थोड़ी देर के बाद सर अपना मुँह माला के मम्मे के ऊपर लाये और उसके मम्मे को उसके हाऊज़ कोट के ऊपर से ही अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगे। सर ने माला के मम्मे को हाऊज़ कोट के ऊपर से चूमते-चूमते अपना एक हाथ माला के हाऊज़ कोट के अंदर डाल दिया और अपना हाथ घुमा-घुमा कर उसकी चूचियों को मसलने लगे।

chalti train me maa beti ki thukai desi kahani

माँ-बेटी दोनों एक से बढ़कर एक थी

फिर उन्होंने माला के कान में कुछ कहा और माला ने अपने हाथ के इशारे से अपनी बेटी शिखा को अपने पास बैठने को कहा। शिखा शर्मीली सी मुस्कान के साथ उठ कर सर और माला के बगल में बैठ गयी। फिर सर ने माला को और खिसकने को कहा और खुद भी माला के साथ खिसक गये। अब उन्होंने शिखा को अपनी दूसरी तरफ बैठने के लिये कहा। जब शिखा उठ कर सरके दूसरी तरफ बैठी तो उसके बैठते ही सर ने अपना दूसरा हाथ उसके कंधों के पीछे रख दिया। सर का एक हाथ अब माला की चूचियों से खेल रहा था और दूसरा हाथ शिखा के पीछे था। उनका पीछे वाला हाथ अब उन्होंने धीरे-धीरे आगे की तरफ किया और अब उनका दूसरा हाथ शिखा की चूँची के ठीक ऊपर था। जैसे ही सर का हाथ शिखा की चूँची को छूने को हुआ तो उसने सर का हाथ रोक दिया। शिखा के ऐसा करने से उन्होंने माला के कान में फिर कुछ कहा। अब माला उठ कर शिखा के सामने खड़ी हो गयी और सर का हाथ लेकर शिखा की चूँची पर रख दिया और सरसे उन्हें दबाने को कहा।

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