छोटी बहन की छोटी सी चूत – III

By   August 6, 2017
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वैशाली की सील तोड़ने पे जो असीम तृप्ति का अहसास हुआ था, अब त्रिशा के चेहरे की वो मुस्कान देखके दुगुना हो गया। बस थोड़ी सी सावधानी और, फिर शायद एक और उद्घाटन.. इस virgin sister sex kahani का आखिरी  भाग..

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3


मैं अपने कमरे में लेटा टीवी देख रहा था, लेकिन मेरा दिमाग त्रिशा की तरफ ही था। पता नहीं उसने मेरा फ़ोन देखा भी होगा या नहीं।

 

करीब 2 घंटे के बाद मेरे कमरे में हल्की सी आहट हुई मैंने पलट कर देखा तो त्रिशा थी।

 

वो तुरंत बोली- भैया आपका फ़ोन, आप शायद भूल आए थे !

 

मैंने उसके हाथ से फ़ोन ले लिया, उसके चहरे पर हल्की सी मुस्कान थी..

मैं समझ गया कि इसने खूब अच्छी तरह से मेरा फ़ोन देखा है।

 

मैं तो चाहता भी यहीं था, उसके बाद वो मुड़ी और मेरी माँ के कमरे में चली गई।

 

थोड़ी देर बाद वैशाली भी स्कूल से वापस आ गई, मौका मिलते ही वैशाली ने मुझसे पूछा- कुछ हुआ?

 

मैंने कहा- नहीं !

 

और उसको पूरी बात बता दी, सुनने के बाद वो बोली- जो करना है कल कर लो, क्योंकि कल के बाद त्रिशा अपने घर चली जाएगी !

 

अब मैं अभी से कल की प्लानिंग में लग गया क्योंकि कल तो मुझे त्रिशा की कुंवारी चुनमूनियाँ की सील किसी भी हाल में तोड़नी होगी।

 

दूसरे दिन सुबह, वैशाली फिर अकेले ही स्कूल जा रही थी, मेरी नजर मिलते ही उसने मुझे इशारे से फिर याद दिला दिया कि आज शाम को त्रिशा अपने घर चली जाएगी।

 

थोड़ी देर बाद मैं अपनी माँ के कमरे की तरफ गया तो माँ ने बताया कि अभी मेरे मामा जी, जो घर के पास में ही रहते हैं, उनकी तबियत ठीक नहीं हैं और वे उनको देखने जायेंगी।

 

मैंने कहा- ठीक है और इधर मेरे दिमाग ने योजना बनाना शुरू कर दिया क्योंकि अब चाचा के जाने के बाद पूरे घर में सिर्फ मैं और त्रिशा ही बचेंगे।

 

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करीब नौ बजे मेरी माँ, मामा के यहाँ गईं, मैं उनको गेट तक भेज कर वापस सीधे चाचा के पोर्शन में गया, चाचा ऑफिस जाने के लिए बिल्कुल तैयार थे।

 

त्रिशा शायद बाथरूम में थी। मैंने चाचा से बात करते हुए धीरे से अपना मोबाइल मेज पर जहाँ त्रिशा की एक किताब रखी थी, उसी के बगल में रख दिया।

 

चाचा ने त्रिशा को आवाज दी- मैं ऑफिस जा रहा हूँ !

 

मैं भी उनके साथ ही बाहर निकल आया, उनके जाने के बाद गेट बंद करके मैं सीधा अपने कमरे में चला गया।

 

मेरे पास कुछ चुदाई वाली फिल्मों की सीडी थीं, उनमें से एक मैंने सीडी प्लेयर में लगा कर प्ले कर दिया और सिर्फ चड्डी और बनियान पहन कर सोफे पर बैठ कर चुदाई वाली फिल्म का आनन्द उठाने लगा।

मैं देख तो रहा था टीवी, लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ त्रिशा का बदन ही घूम रहा था।

 

मैं सोच रहा था कि पता नहीं आज त्रिशा मेरे मोबाईल को देखेगी या नहीं !

 

यही सब सोचते हुए करीब एक घंटा गुजर गया। इधर त्रिशा को चोदने के ख्याल से ही मेरा लंड बिल्कुल सीधा खड़ा हो गया था। मैं अपनी चड्डी के अंदर हाथ डाल कर उसको सहला रहा था, तभी मुझे दरवाजे पर कुछ आहट महसूस हुई।

 

मैं समझ गया कि त्रिशा ही होगी, लेकिन मैं वैसा ही सोफे में पसरा रहा, टीवी में इस समय भयकंर चुदाई का सीन चल रहा था।

 

मेरे कमरे में ड्रेसिंग टेबल इस तरह सेट है कि उसमें कमरे के दरवाजे तक का व्यू आता है।

 

मैंने उसमें देखा कि त्रिशा की नजर टीवी पर पड़ गई थी और वो दरवाजे पर ही रुक गई, पर उसकी नजरें अभी भी टीवी पर ही थीं। मैंने जानबूझ कर अपनी चड्डी नीचे खिसका दी, अब मेरा नंगा लंड मेरे हाथ में था। मैं उसको सहला रहा था, मेरे हिलने से शायद त्रिशा का ध्यान मेरी तरफ गया और मुझे लगा कि वो मुड़ कर जाने वाली है।

 

मैंने अपना सर घुमा कर दरवाजे की ओर देखा और तुरंत उसी पोजीशन में खड़ा हो गया।

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त्रिशा का मस्त बदन

 

त्रिशा वापस जाने के लिए मुड़ चुकी थी। मैंने तुरंत उसको आवाज दी, वो मुड़ी मेरी तरफ देखा और जब उसने मुझे उसी हाल में (मेरी चड्डी नीचे खिसकी हुई थी और मेरा लंड खड़ा था) पाया तो मैंने देखा उसका चेहरा बिल्कुल लाल हो रहा था।

 

उसने हल्की सी मुस्कान दी और बिना रुके वापस चाचा जी के पोर्शन की तरफ भागती हुई चली गई।

 

मैंने एक-दो मिनट सोचा और फिर एक तौलिया लपेट कर उधर गया।

 

धीरे से अन्दर गया तो देखा कि त्रिशा वैशाली के बेड में उलटी लेटी थी, उसकी पीठ मेरी तरफ थी और वो मेरे मोबाइल में शायद कुछ कर रही थी।

 

मैंने तुरंत निर्णय लिया, मैंने अपनी तौलिया हटाई और कूद कर त्रिशा के पास बेड पर पहुँच गया। मेरी नजर सीधे मोबाइल में गई, उसमें एक चुदाई वाली फिल्म चल रही थी।

 

मेरे इस तरह पहुँचने से त्रिशा एकदम चौंक गई। इसके पहले कि वो मोबाइल बंद करती, मैंने उसके हाथ से मोबाइल ले लिया। वो सब इतना अप्रत्याशित था कि त्रिशा एकदम स्तब्ध रह गई।

 

मैंने उसको गौर से देखा तो उसने अपनी नजरें नीची कर लीं।

 

आज शायद उसने अपने बालों में शैम्पू किया था क्योंकि उसके बाल खुले थे जो उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे।

 

आज उसने वैशाली का गुलाबी स्कर्ट और टॉप पहना था।

 

शायद वो थोड़ी देर पहले ही नहा कर आई थी, वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।

 

मैंने सीधे उससे पूछ लिया- कैसी लगी पिक्चर?

 

वो कुछ नहीं बोली, मैंने थोड़ी हिम्मत कर उसको ठोढ़ी को हाथ से ऊपर उठाया और फिर पूछा- त्रिशा तुमको यह मोबाइल वाली पिक्चर कैसी लगी?

 

अबकी वो थोड़ा मुस्कराई और उठ कर भागने की कोशिश करने लगी।

 

मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ कर बेड में गिरा दिया और ताबड़-तोड़ चुम्बन करना शुरू कर दिया।

 

इसके पहले कि वो कुछ समझ पाती, मैंने उसके ऊपर छा गया और बहुत सारे चुम्बन कर दिए।

 

अब वो छटपटाने लगी, पहली बार उसने बुरा सा मुँह बनाते हुए कहा- छोड़िए मुझे !

 

मैंने कहा- क्यों केवल मोबाइल में चुदाई देखनी है?

 

कहने के साथ ही मैंने अपना हाथ नीचे स्कर्ट के अन्दर डाल दिया, उसने चड्डी नहीं पहनी थी, इसलिए मेरा हाथ सीधे चुनमूनियाँ पर ही पहुँच गया।

 

त्रिशा बहुत जोर से चिहुंक गई, उसने पूरा जोर लगा कर मुझे अपने ऊपर से हटाना चाहा, लेकिन मैंने अपने हाथ से उसकी चुनमूनियाँ को सहलाना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसके हाथों को संभालता रहा।

 

त्रिशा की चुनमूनियाँ पर एक भी बाल नहीं था, बहुत ही हल्के-हल्के रोयें थे, ऐसा मुझे अपने हाथ से अहसास हुआ।

 

खैर.. अब उसने अपने पैरों को क्रॉस करना चाहा, तो मैंने उसके दोनों पैरों के बीच अपना एक पैर डाल दिया और उसका एक पैर दबा भी लिया। अब मेरी उंगलियां उसकी चुनमूनियाँ की कसी हुई फांकों को अलग करने में व्यस्त हो गईं।

 

मेरी उंगलियाँ उसकी कसी हुई चुनमूनियाँ की फांकों को अलग नहीं कर पाईं, तो मैंने उसकी चुनमूनियाँ की पतली सी दरार में अपनी उंगली से रगड़ना शुरू कर दिया। इस दौरान मैं उसके भग्न को भी रगड़ रहा था।

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