कंप्यूटर टीचर ने फीता काटा

By   November 29, 2016
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हेल्लो दोस्तों मेरा नाम शीतल यादव हैं. उन दिनों मुझे कंप्यूटर सीखने का शौक लगा था. एक दिन जब मैं कंप्यूटर सेंटर पहुची तो अकेली थी, बारिश की वजह से और कोई आया भी नहीं था. एक hot sex story जो आपको उत्तेजित कर देगी..

सब से पहले मैं अपने बारें में आप लोगों को बता दूँ. मैं हरियाणा के यमुनानगर की रहनेवाली हूँ. मैं एक मिडल क्लास फेमली से बिलोंग करती हूँ और मेरे फाधर जॉब करते हैं. मेरी माँ एक हाउसवाइफ हैं. मेरी बड़ी सिस्टर की मेरेज को 4 साल हो गए हैं और मेरे से छोटा एक भाई हैं जो अभी कोलेज में हैं. मेरी हाईट 5 फिट 6 इंच हैं और मेरा रंग साफ़ गोरा हैं. अब स्टोरी स्टार्ट करते हैं.

बात कुछ 5 साल पहले की हैं यानी की 2009 की. मैं कंप्यूटर सिखने के लिए सेंटर जाती थी. सेंटर पर कई सर और मेडम थे. उनमे से कुछ कुछ एक दुसरे से गंदे इशारे और बातें करते थे. लेकिन जिस सर की मैं बात कर रही हूँ उनकी उम्र कुछ 22-23 की थी. उनका नाम अविनाश हैं. उन्हें कंप्यूटर की बड़ी नोलेज थी. कुछ भी इश्यु हो फोरन गलती बता देते थे. उनका रंग सांवला था और उनका पेट थोडा बहार आया हुआ था. सर का फेमली बेकग्राउंड बहुत सॉलिड था और वो सिर्फ टाइम पास के लिए ही जॉब करते थे. उनसे बाकी के सर और मेडम बहुत डरते थे क्यूंकि वो थोड़े गुस्सेवाले थे. वो जॉब के साथ साथ आगे स्टडी भी करते थे.

जब वो क्लास लेते तो कोई शोर नहीं करता और चुपचाप जो बताया जाएँ वो कर लेते थे. मुझे अभी यहाँ 8 महीने हो गए थे. एक दिन सर का फोन आया की वो आधा घंटा लेट आयेंगे. मैंने सर को चिढाने के लिए जानबूझ के एक हार्ड मिस्टेक निकाल के रखी थी. मैं अक्सर उन्हें ऐसे हैरान करती लेकिन वो फट से जवाब दे देते थे. जब सर आये तो मैंने उन्हें मिस्टेक दिखाई, उन्होंने दूसरी ही मिनिट उसे पकड ली. मैं हंस पड़ी और उन्होंने मेरी और देका. मुझे लगा की वो मेरी टी-शर्ट के उभार को देख रहे थे. मेरे बदन में एक ठंडी सी लहर दौड़ उठी ऊपर से निचे तक. सर  भी हंस पड़े. मैं थोड़ी सी डर गई थी. और इसी वजह से मैं अगले दो दिन क्लास नहीं गई.

तीसरे दिन सुबह 9 बजे मेरे फोन पर रिंग आई. मैं फोन उठाया.

हेल्लो.

किस से डर गई हो, मेरे से या अपनी गलती पकडे जाने से….!

सामने अविनाश सर ही थे.

मैंने कहा, नहीं सर ऐसी बात नहीं हैं, मैं बहार गई थी. कल से जरुर आउंगी सेंटर पर.

ठीक हैं, यह मेरा नम्बर हैं कुछ काम हो तो.

सर ने लास्ट वाला सेंटेस ऐसे बोला जैसे उसमे ढेर सारी वासना भरी हुई हो. मुझे लगा की शायद यह मेरा भ्रम ही हैं. क्यूंकि आजतक कभी भी सर ने कभी कोई गंदी बात नहीं की थी. दुसरे दिन मैं सेंटर पर गई. अविनाश सर आये तो मुझे देख के बड़े ही खुश हुए. उन्होंने स्टाफ वाले केबिन से ही मुझे मेसेज किया और अपनी ख़ुशी जताई. मैंने देखा की अब सर मुझे नियमित एसएम्एस करने लगे थे. कभी जोक्स तो कभी शायरी. कभी कभी माइल्ड डबल मीनिंग भी भेज देते थे. उनकी शायरी दिल वाली होती थी और मैं भी कभी कभी उन्हें शायरी रिप्लाय कर देती थी. अब सर के मेसेज डेली 50 से ऊपर होने लगे थे. मैंने उनका नाम बदल के लड़की का कर दिया था मोबाईल में ताकि कोई शक ना करें.

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और एक दिन तो सर ने हद ही कर दी. उन्होंने एक गंदी शायरी भेजी, मैंने कोई रिप्लाय नहीं किया उस पुरे दिन में. शाम को 8:30 बजे उनकी कॉल आई. मैंने ऊपर के कमरे में छिप के कॉल उठाई.

क्या बात हैं शीतल, तुम रूठ गई क्या?

नहीं सर, लेकिन ऐसे मेसेज से मुझे प्रॉब्लम हो सकती हैं.

ठीक हैं मैं नहीं भेजूंगा. लेकिन प्लीज़ कोंटेक मत छोडो, मुझे चेन नहीं आता.

सर अब खुला फ्लर्ट करने लगे थे. मैं भी उन्हें धीरे धीरे पसंद करने लगी थी. वो अब मुझे अपनी लाइफ की बहुत सी चीजें शेर करने लगे थे. उन्होंने मुझे यह भी बताया की उनका पहला अफेर उनकी मामा की बेटी के साथ ही था. वो मुझे भी मेरे बॉयफ्रेंड वगेरह के बारे में पूछते थे. मैंने उन्हें कहा की मेरा कोई बोयफ्रेंड नहीं हैं. अक्सर वो मस्ती में मुझे कहते की मुझे बना लो ना फिर.

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बारिश में भीगी हुई शीतल की जवानी

मैं हंस के उनकी बात को टाल देती थी. लेकिन होनी तो होनी होती हैं और हो के रहती हैं. ऐसा ही कुछ उस दिन हुआ. मैं घर से निकल चुकी थी और रास्ते में ही बिन मौसम के बरसात हो गई. उपर से मैं हलके रंग की टी-शर्ट और अंदर काली ब्रा पहनी थी. मैं आधे से ज्यादा भीग गई थी. कैसे कर के मैं सेंटर पहुंची. वहां देखा तो लाईट नहीं थी और एक दो सर बहार घूम रहे थे. वो लोग मेरी और बड़े ही अलग भाव से देख रहे थे. मेरे बूब्स जो बहार छलक रहे थे उनके यह भाव आने ही थे. तभी अविनाश सर दौड़ते हुए आये और उन्होंने वो दोनों सर के सामने देखा. वो दोनों वहां से खिसक लिए. सर ने मुझे देखा और हंस पड़े.

आज छुट्टी कर लेती, वैसे भी तुम्हारी बेच का कोई नहीं आया हैं अभी तक. मैं क्लास में मख्खियाँ ही मार रहा था. और अगर कोई आया भी तो लाईट नहीं हैं.

मैंने कहा, फिर मैं जाती हूँ घर वापस.

सर ने कहा, बारिस में और भीगने का इरादा हैं क्या. बारिस कम हो लेने दो मैं तुम्हे अपनी बाइक से लिफ्ट दे दूंगा.

इतनी बात कर के हम लोग क्लास में जा बैठे. सर ने सही कहा था वहाँ कोई भी नहीं था. ऊपर से क्लास का एक कौन अँधेरे की वजह से पूरा डार्क था. सर मेरे साथ ही बेंच पर बैठे और मुझे देखने लगे.

शीतल तुम सच में मस्त दिखती हो.

मैंने शर्म से अपना मुहं निचे किया.

और आज तो तुम्हारा बदन भीगने के बाद कयामत बना हुआ हैं…! सच में किसी की भी गलती नहीं हैं अगर वो तुम्हें देखता रहे.

सर की तारीफ़ से मेरी चूत गीली होने लगी थी अब. सर बिना रुके बोलते रहे.

काश मेरी एक गर्लफ्रेंड होती तुम्हारे जैसी!

अब मैंने उनकी और देखा और हंस पड़ी.

और मेरे हंसने से जैसे सर के अंदर हिम्मत का दरिया फुट निकला. उन्होंने मुझे अपनी और खिंच के अपने होंठ मेरे होंठो से लगा दिए. एक पल के लिए तो मुझे जैसे कुछ पता ही नहीं चला. मेरे होंठो को जैसे सर ने जादू किया था, वो उनके साथ हो गए थे. मैंने मुश्किल से सर का माथा अपने से दूर किया.

सर कोई देख लेंगा, प्लीज़.

शीतल, आई लव यू यार, मैं सच्चे दील से तुम्हे चाहता हूँ….!

मेरे पास सर की बात का कोई जवाब नहीं था. मैंने मुड़ के दरवाजे की और देखा और फिर सर की और देखा.

कोई नहीं आयेंगा इधर, और आया तो हमें कदमों की आहट से खबर हो जाएंगी. इतना कहते ही उनके होंठ वापस मेरे होंठो पर आ गए. वो मेरे होंठ चूस रहे थे खिंच खिंच के. मैं पहले तो कुछ नहीं कर रही थी लेकिन फिर मेरा बदन भी सर के साथ हो लिया. मैंने भी उनके बाल अपने हाथ में पकडे और उन्हें खिंच के मैं उनके किस को साथ देने लगी. सर का हाथ मेरे बूब्स पे आ गया और वो उसे जोर से दबाने लगे. यह मेरा पहला स्पर्श था मर्द का अपने बूब्स के ऊपर. मुझे बहुत ही हॉट फिल हो रहा था पुरे बदन के अंदर. सर ने मेरे दोनों चुंचे मस्त मसले और फिर उनका हाथ मेरी जांघो को सहलाने लगा. तभी किसी के कदमों किआ आहट हुई. सर फट से उठ के बेंच के सामने खड़े हो गए.