दादी की कहानी – V

By   May 8, 2017
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मेरी दादी तो ज़ोरदार है, पहले पोते के साथ चुदाई की, बेटे बहु को चुदते देखा और अब बहु के साथ लेस्बियन सेक्स भी कर लिया.. मेरी मॉडर्न दादी की threesome hindi sex story का अगला पार्ट..

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5

पार्ट 6

पार्ट 7

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पार्ट 8

पार्ट 9


अब तो लगता हे,कब रात हो मेरी बहु मुझसे मस्ती करें। अपनी कहानी सुनाते हुए मेरे लंड को मुठिया रही थी। फिर कड़ी हो गई। और साड़ी उठाके पिच्छ्वाडा दिखाने लगी। मेने अपना लंड पेल दिया। चुदाई करने लगा। हरबार कि तरह वो झड गई और मेरा माल मुहमे चूस कर पी गई। .कपडे ठीक किये।  इतनेमे चाची आ गई।

सब बेठे थे बाते करने लगे..चाची ने कहा मयंक मांजी ने गाउन पहना तब केसी लग रही थी..मेने कहा एकदम मस्त। चाची ने कहा मेरे कोलेज में मेरी एक सहेली आपके जेसे ही दिखती थी। दादी– मतलब ..मोटी…चाची– नहीं मांजी..उसका फिगर आपसे काफी मिलता था। वो कभी-कभी मेरे घर आती कभी में भी उसकेघर जाती..और हम दोनो बहुत मस्ती करते। दादी– मेंरी बच्ची। में भी तो तेरी सहेली जेसी हूँ। क्या, मेने कभी साँस होने का हक्क किया हे..??.कभी रॉब झाड़ा हे..??.चाची– नहीं मांजी आप तो बहुत अच्छी हे। दादी–अच्छी नहीं, बेटी.. में तो तुम दोनों बहुओ की सहेली हूँ। और दादीने पैर उठा दिए। चूत दिखाने लगी। चाची देखते हुए मुस्कुराई। दादी—क्याहुआ बहु..कुछ नहीं मांजी। दादी उठी। चाची से बोली बहु में बेडरूम में जरा सो जाती हूँ। चाची कहा हाँ मांजी, कोई काम होतो आवाज लगा देना।
थोड़ी देरबाद दादी की आवाज आई बहु। मानो इसी का इन्तजार था। आई मांजी।  करके चाची चली गई। बेडरूम में गई तो दादी ने कहा बेटी बहुत गरमी लग रही हे साड़ी निकाल दू। हाँ मांजी, क्या, आपको गाउन दू..?चाचीने मुस्कुराते कहा..मांजी नही रे..यहाँ कोण आयेगा..चाची कोई नहीं आयेगा मांजी, मयंक तो टीवी देखरहा हे.कह कर चाची ने दरवाजा बंदकर दिया। मेने टीवी का वोल्यूम बढ़ा दिया। और बेडरूम के दरवाजे की चटकनी जरासी बाहर से चढा दी। की होल से नजारा देखने की कोशिश की..दादी को शायद मालुम था की में ऐसाही कुछ करूंगा..तो उन्होंने खिडकी की और इशारा किया। मेने देखा खिड़की खुली थी..पर्दा डाला हुआ था। में दोड़कर खिड़की के पास खड़ा हो गया..पर्दा थोडा उचा किया..दादी खड़ीथी साड़ी निकाल रही थी. चाची सामने खड़ी थी..दादी का मुह खिड़की की और था..चाची का उनकी तरफ। जसे ही दादी ने साड़ी निकाल दी चाची ने कहा मांजी अगर ब्लाउज भी निकाल देती तो अच्छा लगता..दादी हंसने लगी..ब्लाउज के हुक खोलने लगी..चाची ने कहा लाओ मांजी में खोल देती हूँ..और चाची उनका ब्लाउज खोलने लगी। वो खिड़की और देखकर मुस्कुराने लगी। चाची ने कहाँ क्या,आप सच में मुझे अपनी सहेली मानती हो। हाँ बेटी क्यों ?? तो क्या में थोड़ी मस्ती कर सकती हूँ..??। उन्होंने हंसकर कहा क्या करना चाहती हे तू। .चाची-में आपके बुब्ब्स को..सहलाना चाहती हु। वो बोली –इसमें क्या हे तुतोमेरी बच्ची हे दुदू पिना कहेंगी तो भी मना नहीं करुँगी। चाची उनके बुब्ब्स दबाने लगी। मुहमे लेकर चूसने लगी। मेरा हल बुरा था..में लेस्बियन सेक्स लाइव देख रहाथा। चाची ने कहा—क्या में अपने पति का जन्मस्थल देखूं..??। उन्होंने कहा हाँ,.. ले..और पेटीकोट को ऊपर उठाने लगी। तो चाची ने कहा एसे नही में पेटीकोट का नाडा खोल देती हूँ। .नाडा खुलते ही पेटीकोट निचे गिरगया..बापरे..कितनी बड़ी थी..मांजी..में पहली बार उनको जन्मजात नंगी देख रहाथा। उन्होंने अपने हाथो से मुह को छुपालिया। चाची– ये क्या मांजी। आप तो शरमा गई..आपके पास जो हे वही सब तो मेरे पास भी हे इसमें क्या शरमाना । मांजी – लकिन बेटी तेरे पास हे सब ढका हुआ हे और मेरा खुला हुआ..चाची– इतनी सी बात लो मेभी सब खोल देती हूँ। चाची ने जल्दीसे गाउन निकाल दिया। फिर ब्रा। और पेंटी भी निकाल दी। मांजी खिड़की के सामने देखकर मुस्कुरा रही थी। चाची -– क्या हुआ मांजी,, मांजी- कुछ नहीं बेटी तेरा तो सब छोटा-छोटा हे..ओर मेरा तो सब कितना बडा-बड़ा हे..चाची- क्या बड़ा-बड़ा हे..? मांजी –देखना तेरे बुब्ब्स कितने छोटे हे और मेरे बड़े-बड़े..चाची उनके बुब्ब्स पर अपने बुब्ब्स दबाके बोली..देखोना मांजी, मेरे तो आपके बुब्ब्स में समा जाते हे। ऐसे बुब्ब्स पे बुब्ब्स दोनों। रगड़ने लगी..हाथ पीठ को सह्ला रहेथे।

dadi ki kahani threesome hindi sex story

सास, बहु और पोता

चाची के हाथ चुत्तड़ो पर पहुच गये वो चुत्तड़ो को दबाने सहलाने लगी..मांजी भी एसा करने लगी। चाची आपके ये भी कितने बड़े हे..हाँ बहु। इसे क्या कहते हे। मांजी ??..बहु मेने तो चुत्तड नाम सुना हे। चाची—माजी, इसे चुत्तड क्यों कहते हे..??मांजी –देखना दोनों चूत से जुड़े हेना इसलिए। किस्स्से जुड़े हे मांजी ?? अरे पगली चूत की दो फोंको से ही दो हिस्सों में बंट गये हे।  चाची–मांजी आपकी चूत दिखाओ न तो देख लेना..खुली ही तो हे। चाची बेठ गई ओर देखने लगी। माजी खिड़की और देखकर ऊँगली मुहमे डालने लगी..दोनों को नंगा देखकर मेरे तो बुरे हाल थे। लोडा खड़ा था। में भी खड़ा था.चाची का गोरा बदन..छोटे –छोटे संतरे जैसे गौरे-गौरे बुब्ब्स । और संतरों से थोड़ी मोटी गांड। चिकनी जांगे। पुरा बदन मानो मख्खन में सिंदूर घोल दिया हो ऐसा गोरा-चिट्टा। इसवक्त वो ओरत नहीं लड़की दिख रहीथी..लड़की क्या ..परी दिख रही थी। मांजी ने सच कहा था..वो..तो कच्ची कलि हे। चाची ने कहा मांजी येतो गीली हो गई हे। में साफ़ करदूं। मांजी करदे। मेरी बच्ची..चाची –आप लेट जाइए में अच्छी तरह से साफ़ कर देती हूँ। माजी बेड पर लेट गई। चाची ने उनके पैर खोल दिए। और गांड के नीचे दो तकिये लगा दिए । एसाकरने से उनकी बड़ी चूत साफ़ नजर आ रही थी। छोटे-छोटे बाल। उपर से काली। अंदर से गुलाबी। दोनों फोंको की चमड़ी कुछ ज्यादा ही बहर निकली हुई। .चाची ने उंगली डाली । मांजी येतो और गीली हो रही हे। इससे तो रस निकल रहा हे। मांजी क्या बोलती उनकी साँसे तेज चलने लगी थी। चाची – क्या में इस रस का स्वाद चख लूँ।  मांजी हाँ जरा जल्दी कर। ओह मांजी लीजिए में आपको तडपता नहीं देख सकती..और वो चुतको चाटने लगी। मांजी आह्ह्ह..आह्ह्ह.करने लगी। चाची चूत में मुह भराए दोनों हाथो से बुब्ब्स को भी दबा रही थी। मांजी आह्ह्ह्ह.सस्स्स्स । आह्ह्ह। कर रहीथी..और अपने हाथोसे खुद ही बुब्ब्स दबाने लगी। चाची समज गई मांजी आउट होने वाली हे..तो जोर-जोर से चूत को चोटने-चूसने लगी। मांजी की सासे तेज हो गई..सस्स्स्स। आअह्ह्ह्ह। ओह्हह्ह। ऊऊ। ऊऊ..ऊऊऊ ..करने लगी चाची का मुंह उनके काम रस से भर गया। चाची उनके पास लेट गई । मांजी हांफ रहीथी।
चाची उनके बदन को चहेरे को चूम रही थी..थोड़ी देरबाद मांजी बहु ये सब क्या किया तूने .?.चाची- क्यों । आपको अच्छा नहीं लगा..? मांजी –अच्छा?..बहुत अच्छा लगा..मर्दों वाला काम तूने किया। मेरी गरमी निकाल दी । बता तेरे लिए में क्या करू ?एसा बोलते हुए मांजी चाची की चूत में उंगुली करने लगी। चाची मांजी आप लेटी रहे में अपना काम खुद कर लेती हु। एसा बोलके चाची ने मांजी का पैर उठाया और अपनी चूत को मांजी की चूत पर रगड़ने लगी। मांजी- बहु मजे तो बहुत मजा आरहा हे। मुझे भी। सस्स्स्स। स्स्स। मांजी अपने हाथ मेरे चुत्तड़ो को सहलाइए..दबाएँ। मांजी चाची की पीठ से लेकर चुत्तड़ो तक सहला रही थी..आह्ह। आह्ह। ओह्ह। मांजी..आप कितनी अच्छी हे। सस्स्स्स..आह.ह्ह्ह। चाची मांजी के खड़े पैर पर अपने बुब्ब्स मसल रहीथी। ओह्ह..आह्ह्ह। आपकी चूत की फोंके बहुत बड़ी और मस्त हे। आह्ह्ह। में आसमान में उड़ रही..हु। आह्ह्ह्ह..ओह्ह। ओह्ह्ह्ह ऊऊ। ऊऊऊ। चाची ने अपना माल छोड़ दिया। मांजी के पास पड़ी हांफने लगी..मांजी उनके बद्नको सहला रही थी। बेटी तूने तो मेरी जवानी को जगा दिया। दोनों नंगे बिस्तर पर पड़े थे बातें कर रहे थे। एक-दुसरेके बदन को सहला रहेथे..
चाची–मांजी आपके बदन को ठंडा करने केलिए तो अच्छा सा मर्द चाहिए।
मांजी -बेटी क्या करू कभी-कभी उंगुलीसे काम चला लेती हूँ..पर आज तो तूने बहुत मजा करवाया। पर ..
चाची– पर क्या मांजी ??..
मांजी– मर्द आखिर मर्द होताहे..(मे लंड को दबाने लगा। )
चाची– मांजी आप बुरा न माँ ने तो एक बात बोलूं । क्या..?.मयंक । ??
मांजी– नहीं-नहीं..
चाची –क्या नहीं-नहीं मांजी, जरा सोचिये..घरकी बात घर में रहेंगी..
मांजी– पर बहु वो मेरा पोता लगताहे।
चाची–वो थोड़ा आपका सगा हे??..आपका खून का रिश्ता तो हे नहीं और आज कल खून के रिश्ते में भी सब कुछ होता हे।
मांजी –मेरा मन नहीं मान रहा।
चाची- देखिये मांजी बाहर का तो कोई मिले तोभी आप भरोसा नहीं कर पाएंगी और उससे मिलने में बदनामी भी हो सकती हे..आप कहती हे मन नहीं मान रहा। लेकिन येतो मान जायेगी..चाचिने चूत पर हाथ फिराते हुए कहा..
मांजी – पर वो केसे माँ नेगा।
चाची– आप उसे अपनी चूत एक-दो बार दिखा दिजीऐ जवान हे सब समज जायेगा।
मांजी– ठीक हे। तू कहती हे तो..
चाची– ट्राय कीजिए..
मांजी–बहु वेसे तुम दोनों डॉ.के पास गये थे..क्या कहा। ?
चाची– एक ही बात करते हे सबकुछ ठीक हे..किसी में कोई कमी नहीं..हे बस महेनत करते रहो।
मांजी ने हँसते हुए कहा – तो, मेरा बेटा ठीक से महेनत नहीं करता क्या। ?
चाची–उनकी तो बात ही छोड़िये..अभी दो दिन की ही गेप हुई हे । वो उन तिन दिनों को छोड़ कर हर रात चुदाई करते हे। फिर भी।
मांजी– तो बहु तू भी। क्या?.. मयंक से। .
चाची– नहीं,मांजी ऐसा तो आपके बेटे से विश्वासघात होगा. वो मुझे बहुत प्यार करते हे।
मांजी– देख बेटी में तुजे मजे करने के लिए नहीं कहती..अपनी सुनी गोद केलिए कहती हूँ। ये बात हम तीनो तक ही रहेगी। वेसे वो कोई बाहर का नहीं हे अपना ही खून हे। एक दो-बार की ही बात हे फिर भूल जाना।
चाची– पहले आप उसे सेट कर लीजिए..में बाद में सोचूंगी..
मांजी– ठीक हे..वो उठने लगी..दोनों कपडे पहनने लगी..चाची दादी के नग्न बदन को घुर रही थी..फिर चुत्तड़ो पर हाथ फेर दिया और दोनों हंसने लगी..में बाहर जाकर आती हूँ।  आप जरा मयंक ??? से ..ट्राय कीजिए। में खिड़की से भागा अंदर आया बेडरूम की चटकनी खोल दी। टीवी देखने लगा..
चाची ने चाय बनादी दादी सोफे पर बेठी थी..चाची चाय पी और दादी की और देखा बोली मांजी में बाहर कुछ काम से जाती हु। आप.साथ चलेंगी। दादी नहीं में और मयंक यहीं बेठे हे। चाची और दोनों मुस्कुराने लगी..में बुध्धू की तरह देखने लगा..चाची चली गई। मेने दादी से पूछा क्या-क्या हुआ। बहुत कुछ पर मजा आया। में—बताई ये ना। .मुझे सब मालुम हे तूने देखा-सुना भी हे। में हंस ने लगा। अपने लंड क बाहर निकाला। दादी ने सोफे पर लिटा दिया और उपर चढ़ गई। काम करने लगी। में-एसा ही मजा आ रहा था..वो बोली नहीं। ये मजा तो सिर्फ तेरे साथ ही आता हे। आगे कम ख़त्म किया। वो माल पी गई।  शाम को खाना खाने के बाद सब बेठे थे। बातें चलती रही कभी –कभी दादी साडी उपर-नीचे करती पर में ध्यान नहीं देता। चाची की नजरे मेरी और रहती..
में और चाचाजी वही सो गये..वो दोनो कमरे में चले गये..आज तो दरवाजा। बंद करके। सो गये। थोड़ी देर बाद चाचाजी भी सो गये। में. उठा दरवाजे के पास गया। की होल से देखने की कोशिश करने लगा। खिड़की खुली थी..तो बाहर चला गया। मेने देखा दोनों नंगे हो कर मनो कुस्ती खेल रहे थे। एकदम गुथम-गुत्था ..एक दुसरे को चुम रहे थे.चाटरहे थे..कभी दादी उपर चढ़ जाती, तो कभी चाची उपर चढ़ जाती। दादीने चाची को अपने पेरों पर लिटा दिया..और चूत में उंगुली करने लगी साथ में चाट रही थी। चाची..अपने बुब्ब्स की निप्पल..मसल रही थी। फिर चाची ने वही पोज लिया और उनकी चूत चूसने लगी। थोड़ी देरबाद दोनों ऐसे पेरो को फेलाकर लेट गई। चाची का सिर माजी के पेरो में था..मांजी का सिर चाची के पेरो में । दोनों की चूत एक दुसरे से मिली हुई थी।  दोनों चुतो को एकदूसरे के साथ मसल रहे थे। मांजी चाची का पेर अपने बड़े-बड़े बुब्ब्स पर रगद रहीथी। चाची भी उनके पैर से अपने बुब्ब्स को सहला रही थी। .इस मस्ती में कभी-कभी चुते दूर होती तो चिकने पानी का ताँता..दिखाई देता.. दोनों की साँसे तेज हो ने लगी और स्पीड भी बढ़ने लगी। फिर दोनों रुक गई शायद झड गई थी। थोड़ी देर इसे ही पड़ी रही फिर एक दुसरे का पेटीकोट से साफ़ किया..और नंगी ही साथ में सोगई ..चाची क्या मयंक..??
मांजी–नहीं। कुछ.. ध्यान नहीं दे रहा..
चाची—हाँ,मेने भी नोट किया। लेकिन..वो..
मांजी – मुझे तो बुध्धू लगता हे। दोनों हंसने लगी..
चाची- नहीं मांजी..एसा भी होसकता हे। शायद उसे सेक्स के बारे में कुछ मालूम ही ना हो। कुछ सोचते हे..
चाची- मांजी आपने कभी बेंगन,खीरा या केला ट्राय किया हे..??
मांजी –में कुछ समजी नहीं..
चाची—क्या,आपने चूत में बेंगन या केला डाला हे..?
मांजी- नहीं रे, डर लगता हे कहीं हम जोश में आ जाऊ और वो अंदर टूट जाये तो। ??? ना बाबा..डॉ.के पास जाना पड़े और बदनामी हो ..उपरसे लोग हंसेगे।
चाची- ऐसा नहीं होता मांजी बेगन,खीरा या केला जो भी लो थोड़ा ज्यादा लंबा होना चाहिए।  जो हमारे हाथों में ठीक से पकड़ा जाये और फिसलकर अंदर छुट न जाए। दूसरीबात उसके ऊपर कोंडोम चढ़ा देना जरूरी हे..ताकि चूत के अंदर आसानी से आता-जाता रहे। अगर तकलीफ होतो..कोंडोम के ऊपर थोडा तेल लगा देना चाहिए जिससे ..अंदर-बाहर करने में कोई तकलीफ नहीं होगी। (में सोच रहा था..अंदर चला जाऊ..और लंड दिखाकर बोल दू तो फिर इसे। किचन में मुसल की जगह रह दो मस्साला कूट ने में काम आयेगा..).चाची नए जमाँ ने की थी..दादी को लेस्बो..का खेल सिखा दिया..अब साली इंस्ट्रूमेंट..सिखा देगी…..अच्छा हे घरमे कुत्ता नहीं हे वरना ये। एनिमल सेक्स भी करवा देती। अब मेरा माल यानी मांजी मेरे हाथ से निकलता नजर आ रहा था।  में डरने लगा। मेने सोचा कल तो दादी को लाईन दे देता हूँ.. वरना हाथ से जाएगी। फिर वो सोने लगे..मेभी अंदर आ गया और सोने ..लगा। लेकीन मेरी नींद उड़ गई थी..केसे..? रोकू इनको। अगर मांजी इससे आगे बढ़गई और किसी गैर मर्द से रिश्ता बना लिया तो..मेतो साइड हीरो ही बन जाउंगा। इन सब ख्यालो से मेरी नींद उड़ गई थी। इतने में माँ का ख्याल आया । वो तो मेरे साथ ही रहेगी..में माँ को बहुत मिस कर रहा था। और जाने कब नींद आ गई..
सुबह उठा तो आज चाचाजी जल्दी निकल गयेथे..में तैयार हुआ मेरे दिमाग में व्ही रातवाले विचार घुमारा रहे थे..मेने माँ को फोन किया..माँ ने कहा बड़े दिनों बाद माँ की याद आई..केसा हे तू सब ठीक तो हे ना..ले छोटा भी आया हुआ हे उससे बात कर। मेने छोटे से बात की वो अभी सातवी कक्षा में पढता हे वो हॉस्टल में रहता हे..शायद छुट्टी लेकर आया था। फिर माँ से बात करने लगा.. मुझे रोना आ गया..में रो पड़ा। माँ ने पूछा क्या हुआ तू रो क्यों रहा हे मेने ..माँ से कहा कुछनही तेरी याद आ गई.. माँ ने कहा तू माजी को फोन दे में बात करती हूँ..मेने कहा नहीं माँ मुझे किसीने कुछ नहीं कहा..तेरे साथ बात करते हुए यूँ ही रोना आ गया। और कुछ बातें की ..फोन रख दिया. तभी दादी आ गई मुझे रोंता देख कर उन्होंने मुझे अपनी बाहोंमे भर लिया.. कहने लगी..क्या हुआ मेरे लाल। क्यों?..रो रहा हे। ?? किसीने कुछ कहा। क्या हुआ। में फिर जोर से रोने लगा। चाची भी वहां आ गई दादीने मुझे अपनी बाहों में भर रखा था..मेरे सिर को चूम रही थी..पूछ रही थी..क्या हुआ??..चाची भी।  क्यों?..रो रहा हे। ??। क्या हुआ..तुजे.?? में दादी से लिपटा हुआ था..चाची मेरे पीछे आई दादी से कुछ इशारा किया..दादीने मुझे जोर से दबा दिया। रो मत मेरे बच्चे..अगर तुजे घर जाना हे तो हम ..एक-दो दिन में चले जायेंगे। चाची पानी लेके आई..दादीने मुझे छोड़ दिया। में सोफे पर बेठ गया..चाचिने अपने हाथ से पानी पिलाया..दादी और चाची मेरे पास खड़ी थी.. में शांत हुआ तो चाची ने पूछा क्यों?..रो रहा था। ??। क्या हुआ। तबियत तो ठीक हे..ना..या कुछ हो रहा हे। ? में शांत रहा..दादी ने इशारा किया। चाची..सोफे पर बेठ गई..दादी..मेरे नजदीक बेठ गई..मेरे सिर में हाथ फेरने लगी..कुछ देर बाद कहा..क्या..हुआ..?..पेट में दर्द हो रहा.हे..?? में-नहीं..तो?? मेंने लंड की और इशारा किया..यहाँ..दर्द हो रहा था..दादीने चाची की और देखा चाचीने पूछा..कहाँ दर्द हो..रहा हे। -सु-सु..में..दिखा तो..मेंने कुछ नहीं किया..दादी की और देखता रहा। उनकी समज में भी कुछ नहीं आ रहा था..तो ऊहोने भी कहा..दिखा..तो..सही..मेने चाचीकी और देखा..तो दादीने कहा..बहु तूजे किचन में काम था..न..चाची समज गई..हा,,.में तो भूल गई..उठकर चली गई..मेने पेंट खोला। अंडरवियर..भी घुटनों तक उतार दिया..मेरा खड़ा लंड मांजी के सामने था..चाची भी दरवाजे से देख रही थी।
दादी –क्या हो रहा हे..तेरे सु-सु..मे।
में -पता नहीं ये फुल गया हे..और भारी लगता हे .
चाची। दरवाजे से ही बोली..क्या , उसमे दर्द हो रहा हे..??
मेने उनकी तरफ देखे बगैर कहा ना। दर्द नहीं हो रहा..
चाची- कोई बात नहीं बेटे इसमें पानी भर गया होगा..इसलिए..
में- लेकिन पेशाब रेग्युलर तो हो रहा हे..
चाची- कोई बात नहीं बेटे। अभी में तेल लाती हूँ..मांजी तेरे सूसू..की मालिस कर देगी..तो पानी नीकल जाएगा..और अच्छा भी लगेगा। चाची किचन में चली गई । और आवाज दी..मांजी आइये तो। दादी झट से खड़ी हुई..चली गई..
चाची – मांजी.. कितत..ना बड़ा..हे..आपकी तो लाटरी लग गई।
दादी–तू..क्या?? कह रही हे..में समजी नहीं..
चाची-मयंक का लंड देखा नहीं क्या??..घोड़े जेसा हे..आपकी चूत के लिए ऐसा हु कद्दावर लोडा..चाहिए..
दादी-तू भी..न..उसको दर्द हो रहा हे..और तुजे..मज़ाक दिखती हे..
चाची –मज़ाक नहीं मांजी,आपकी चुदाई दिखती हे..मुझे..अब जाइए ..में तेल लेके आती हूँ। आप उसके लोडे की एसी मालिस करना। की माल। निकल जाए।  दादी कमरे में आई.. मेरी और देखने लगी..में मुस्कुराया और आँख मार दी। ..वो समज गई। ये।  सारा नाटक हे।  चाची आई तेल मांजी को दिया और कहा आप इसकी अच्छी मालिस कर दे। मयंक का। पानी निकल जाएगा..और अच्छा लगेगा। दादी मालिस करने लगी। चाची लंड को देख रही थी। मांजी कमालकी मुठ मार रही थी..उपर सुपाडे से ले कर लंड की जड़ तक हाथ उपर निचे कर रही थी। कुछ देर बाद मुझसे रहा नहीं गया । मेने कहा..मुझे गुदगुदी। हो रही हे। आह्ह..कुछ हो रहा.हे। आह्ह..ओह्ह्ह। और लंड ने पिचकारी मार दी माल दादी के मुह पर गिरा। चाची मुस्कुराने लगी। में अनजान बनकर देखता रहा.. दादी हाथ धोने चली गई।
चाची- अब केसा लगा..??
में- चाची मांजी मालिस करती थी ..तब तो मुझे मजा आरहा था। और जब पानी निकल रहा..था। .तब तो कुछ अजीब सा मजा आया। जेसे। ??
चाची-जेसे, आसमान में उड़ रहा हो। ..
में- हाँ..चाची ऐसा ही लग रहाथा.. चाची तो ठीक हे..अब जब भी तेरी सूसू ..भारी हो जाए तो मांजी को बता देना..अब पेंट पहन.. ले। में तेरे लिए दूध बनाती हूँ। .दादी आई मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई। अब तुजे अच्छा लगा। हाँ..बहुत अच्छा लगा..मांजी..चाची दूध ले कर आई मुझे दिया..में पीने लगा..दोनों एक दुसरे की और देखकर हंस रही थी।
टीवी चालु कर दिया..सब टीवी देखरहे थे। दोपहर हो गई थी। में ने फिर अपना लंड खड़ा किया..और। पेंट की उपर से दबाने लगा। चाची की नजर मेरी और थी..दादी को इशारा किया..
चाची – क्या..हुआ..फिर से फुल गई.क्या..??..में- हाँ..
चाची- दिखा तो..मेने पेंट निकाल दी..चाची- हाँ..मांजी ये फिर से तैयार हे। और चाची सहलाने लगी..वाह क्या स्पर्श था। ??पतली-पतली उंगुलिया..के बीच लंड..मजे ले रहा था..चाची-माजी..आप जरा कमरेमें आइये..चाची उठी..बेडरूम में दोनों गये..चाची- अब में आपको चुदवा देती हूँ। जेसा में कहू वेसा ही करते रहना। आप लेट जाइए।
चाची- मयंक,आजा बेटा। में अंदर गया..दादी बेड पर लेटी थी..चुत्तड़ो के निचे दो तकिये लगाए थे।  .अब पेंट उतार दे। मेने पेंट उतार दी ।
चाची-अब तुजे कुछ दिखाती हूँ। और। चाची ने मांजी की साडी उठादी। में दंग रहगया..मांजी की चूत मेरे सामने थी। काली..फूली हुई। और निचे लगाये तकिये क वजह से खुल भी गई थी..गुलाबी हिस्सा दिख रहाथा.. चूत के दो होंठ। खुले हुए थे। क्या..मस्त नजारा था। मेरा लंड सलामी दे रहाथा..
में– चाची मांजी की सूसू..कितनी बड़ी हे..आप मुझे ये क्यों दिखा रही हे..??..
चाची– हाँ ,बेटे। अब तेरे सूसू। का पानी हम । .कुछ अलग तरीके से निकाल देते हे। केसे..??तू अपना टीशर्ट निकाल दे। और..मांजी के टांगो बीच बेठ जा। में पूरा नंगा हो गया। और मांजी के टांगो की बीच बुध्धू की तरह। बेठ गया।
चाची– तुजे मालुम हे मांजी की सूसू। को क्या कहते.हे ?? मेने ना में मुंडी हिलाई..
चाची – इसे चूत कहते हे। और भोस भी कहते हे।  और तेरे सूसू। को क्या कहते मालुम हे..?? में- ना..
चाची—इसे लंड कहते..हे..तेरा.. सूसू.. भारी हो गया हे। इसे..लंड का खड़ा होना कहते..हे।
में—चाची ये क्या गालियाँ बोल रही हे आप।
चाची- नहीं बेटे.में गालियां नहीं बोल रही तुजे समजा रही हूँ।  अब में जेसा कहती हु वेसा करते जा। मांजी क चूत पर अपना लंड रख..और उसका आगे का गोल सुपाड़ा..चूत पर घीस। में घिसने लगा। चूत मेसे पानी निकल रहा था।
मेने कहा..चाची चूत में से पानी निकल रहाहे।
चाची –- शाबाश बेटे, वो तो तेरे लंड का स्वागत कर रही हे। अब थोडा सा लंड को दबा। और लंड के उपर का जो लाल हिस्सा हे वो सुपाड़ा अंदर जाने दे।

——–क्रमशः——–

इतनी बार देख लेने के बाद अब दादी के निगरानी में ही मैं चाची की चूत भेदने जा रहा हूँ. वाह क्या अहसास है. इस threesome hindi sex story का अगला हिस्सा जल्द ही आएगा..

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5

पार्ट 6

पार्ट 7

पार्ट 8

पार्ट 9

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