दीदी के घर छुट्टियाँ

By   April 29, 2017
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मैं छुट्टियों में अपनी चचेरी दीदी के घर गया था। लेकिन जीजाजी की गैरमौजूदगी मैं हम दोनों के बीच वो हो गया जो मैंने सोचा भी नहीं था। पर हम दोनों को इस बात का अफ़सोस नहीं था। एक जबरदस्त didi sex story पढिये।


मेरा नाम समीर है , लोग प्यार से भी समीर कहते हैं । जब मेरी बी.ऐ की परीक्षा ख़तम हो गई तो मै अपनी चचेरी दीदी के यहाँ घूमने गया। उनसे मिले हुए मुझे कई साल हो गए थे। जब में सातवीं में पढता था तभी उनकी शादी हो गई। अब वो लोग में रहते थे। मेंने सोचा चलो दीदी से मिलने के साथ साथ भी घूम लूँगा। वहां पहुँचने पर दीदी बहूत खुश हुई।

बोली – अरे तुम इतने बड़े हो गए। मैंने तुम्हे जब अपनी शादी में देखा था तो तुम सिर्फ़ ११ साल के थे।

मैंने कहा – जी दीदी अब तो मै बीस साल का हो गया हूँ।

दीदी ने मुझे खूब खिलाया पिलाया। जीजा जी अभी पिछले तीन महीने से अपनी ड्यूटी पर थे। दीदी की शादी हुए आठ साल हो गए थे। दीदी की एक मात्र संतान तीन साल की जूही थी जो बहूत ही नटखट थी। वो भी मुझसे बहूत ही घुल -मिल गई। शाम को जीजा जी का फ़ोन आया तो मैंने उनसे बात की। वो भी बहूत खुश थे मेरे आने पर।

बोले – एक महीने से कम रहे तो कोर्ट मार्शल कर दूँगा।

रात को यूँ ही बातें करते करते और पुरानी यादों को ताज़ा करते करते मै अपने कमरे में सोने चला गया। दीदी ने मेरे लिए बिस्तर लगा दिया और बोली – अब आराम से सो जाओ।

मै आराम से सो गया। किंतु रात के एक बजे नैनीताल की ठंडी हवा से मेरी नींद खुल गई। मुझे ठण्ड लग रही थी। हालाँकि अभी मई का महिना था लेकिन मै मुंबई का रहने वाला आदमी भला नैनीताल की मई महीने की भी हवा को कैसे बर्दाश्त कर सकता। मेरे पास चादर भी नही था। मैंने दीदी को आवाज लगाई । लेकिन वो शायद गहरी नींद में सो रही थी। थोडी देर तो मै चुप रहा लेकिन जब बहूत ठण्ड लगने लगी तो मै उठ कर दीदी के कमरे के पास जा कर उन्हें आवाज लगाई। दीदी मेरी आवाज़ सुन कर हडबडी से उठ कर मेरे पास चली आई और

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कहा – क्या हुआ समीर?

वो सिर्फ़ एक गंजी और छोटी सी पेंट जो की औरतों की पेंटी से थोडी ही बड़ी थी। गंजी भी सिर्फ़ छाती को ढंकने की अधूरी सी कोशिश कर रही थी। में उनकी ड्रेस को देख के दंग रह गया। दीदी की उमर अभी उनतीस या तीस की ही होती रही होगी। सारा बदन सोने की तरह चमक रहा था। में उनके बदन को एकटक देख ही रहा था की दीदी ने फिर
कहा- क्या हुआ समीर?

मेरी तंद्रा भंग हुई।

मैंने कहा -दीदी मुझे ठण्ड लग रही है। मुझे चादर चाहिए।
दीदी ने कहा – अरे मुझे तो गर्मी लग रही है और तुझे ठंडी?
मैंने कहा -मुझे यहाँ के हवाओं की आदत नही है ना।
दीदी ने कहा -अच्छा तू रूम में जा , में तेरे लिए चादर ले कर आती हूँ।

मै कमरे में आ कर लेट गया। मेरी आंखों के सामने दीदी का बदन अभी भी घूम रहा था। दीदी का अंग अंग तराशा हुआ था। थोडी ही देर में दीदी एक कम्बल ले कर आयी और मेरे बिस्तर पर रख दी।

बोली – पता नही कैसे तुम्हे ठण्ड लग रही है। मुझे तो गर्मी लग रही है। खैर , कुछ और चाहिए तुम्हे?
मैंने कहा- नही, लेकिन कोई शरीर दर्द की गोली है क्या?
दीदी बोली- क्यों क्या हुआ र वि?
मैंने कहा – लम्बी सफर से आया हूँ। बदन टूट सा रहा है।
दीदी ने कहा- समीर, गोली तो नही है। रुक में तेरे लिए कॉफ़ी बना के लाती हूँ। इससे तेरा बदन दर्द दूर हो जायेगा.
मैंने कहा- छोड़ दो दीदी , इतनी रात को क्यों कष्ट करोगी?

दीदी ने कहा -इसमे कष्ट कैसा समीर? तुम मेरे यहाँ आए हो तो तुम्हे कोई कष्ट थोड़े ही होने दूँगी।
कह कर वो चली गई। थोडी ही देर में वो दो कप कॉफ़ी बना लायी। रात के डेढ़ बाज़ रहे थे। हम दोनों कॉफ़ी पीने लगे।
कॉफ़ी पीते पीते वो बोली – ला समीर, में तेरा बदन दबा देती हूँ। इस से तुम्हे आराम मिलेगा।

मैंने कहा – नही दीदी, इसकी कोई जरूरत नही है। सुबह तक ठीक हो जाएगा।

लेकिन दीदी मेरे बिस्तर पर चढ़ गई
और बोली – तू आराम से लेटा रह मै अभी तेरी बदन की मालिश कर देती हूँ .

कहते कहते वो मेरे जाँघों को अपनी जाँघों पे रख कर उसे अपने हाथों से दबाने लगी। मैंने पैजामा पहन रखा था। वो अपनी नंगी जाँघों पर मेरे पैर को रख कर उसे दबाने लगी।

दबाते हुए बोली – समीर , एक काम कर, पैजामा खोल दे, सारे पैर में अच्छी तरह से तेल मालिश कर दूँगी। ।

अब मैं किसी बात का इनकार करने का विचार त्याग दिया। मैंने झट अपना पैजामा खोल दिया। अब मैं अंडसमीरयर और बनियान में था। दीदी ने फिर से मेरे पैर को अपनी नंगी जांघों पे रख कर तेल लगा कर मालिश करने लगी। जब मेरे पैर उनकी नंगी और चिकनी जाँघों पे रखी थी तो मुझे बहूत आनंद आने लगा। दीदी की चूची उनकी ढीली ढीली गंजी से बाहर दिख रही थी. उसकी चूची की निपल उनकी पतली गंजी में से साफ़ दिख रही थी. मै उनकी चूची को देख देख के मस्त हुआ जा रहा था. उनकी जांघ इतनी चिकनी थी की मेरे पैर उस पर फिसल रहे थे.

उनका हाथ धीरी धीरे मेरे अंडसमीरयर तक आने लगा। उनके हाथ के वहां तक पहुंचने पर मेरे लंड में तनाव आने लगा। मेरा लंड अब पूरी तरह से फनफनाने लगा। मेरा लंड अंडसमीरयर के अन्दर करीब छः इंच ऊँचा हो गया। दीदी ने मेरी पैरों को पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच लायी और मेरे दोनों पैर को अपने कमर के अगल बगल करते हुए मेरे लंड को अपने चूत में सटा दी. मुझे दीदी की मंशा गड़बड़ लगने लगी. लेकिन अब मै भी चाहता था कि कुछ ना कुछ गड़बड़ हो जाने दो.

दीदी ने कहा – समीर , तू अपनी बनियान उतर दो न। छाती की भी मालिश कर दूँगी।

मैंने बिना समय गवाए बनियान भी उतर दिया। अब मैं सिर्फ़ अंडसमीरयर में था। वो जब भी मेरी छाती की मालिश के लिए मेरे सीने पर झुकती उनका पेट मेरे खड़े लंड से सट रहा था. शायद वो जान बुझ कर मेरे लंड को अपने पेट से दबाने लगी. एक जवान औरत मेरी तेल मालिश कर रही है। यह सोच कर मेरा लंड महाराज एक इंच और बढ़ गया। इस से थोडा थोडा रस निकलने लगा जिस से की मेरा अंडसमीरयर गीला हो गया था.

अचानक दीदी ने मेरे लंड को पकड़ कर कहा – अरे समीर , ये तो काफी बड़ा हो गया है तेरा।

दीदी ने जब मुझसे ये कहा तो मुझे शर्म सी आ गयी कि शायद दीदी को मेरा लंड बड़ा होना अच्छा नही लग रहा था. मुझे लगा शायद वो मेरे सुख के लिए मेरा बदन मालिश कर रही है और मै उनके बदन को देख कर मस्त हुआ जा रहा हूँ और गंदे गंदे ख़याल सोच कर अपना लंड को खड़े किये हुआ हूँ.

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