दीदी की रसीली चूत

By   February 18, 2017
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क्या बताऊँ दोस्तो,.. उनकी चूत इतनी टेस्टी थी कि जी करता था कि कच्चा ही खा जाऊँ.. सो चाटने के बीच में मैंने अपने दांतों से धीरे से उनके दाने को काट लिया। इस पर उनकी ‘आह’ निकल गई और मुझसे बोलीं- ओह.. धीरे भैया जी.. सच में खा जाओगे क्या? थोड़ी देर में ऐसे ही चूत चाटता रहा.. अब उनकी चूत की खुश्बू और भी मादक हो गई थी.. क्योंकि अब उनकी चूत पानी छोड़ रही थी और वो अब आँखें बन्द करके इसका मजा ले रही थीं। इस बीच मैंने अपना लण्ड पैन्ट से बाहर निकाल दिया था.. जो कि अब पूरी तरह टाईट हो गया था, शायद उतना जितना पहले कभी नहीं हुआ था। अब मैंने अपने हाथों से उनकी चूत की दोनों फलक चौड़े किए और अन्दर तक जीभ घुसेड़ कर उनकी चूत चाटने लगा। इस बीच मैंने चूत में उंगली करनी शुरू कर दी। पहले तो वो थोड़ा कसमसाईं.. फिर अपनी टाँगें ऐसे चौड़ी कर लीं.. ताकि मुझे उसमें उंगली डालने में आसानी हो। मैं एक तरफ उनकी चूत चाट रहा था और एक तरफ उंगली डाल कर उनका जी-स्पॉट भी टटोल रहा था, अब वो पूरी तरह मेरे काबू में आ चुकी थीं और लगातार अपना पानी छोड़ रही थीं। जब वो चरमसीमा तक पहुँच जाती थीं.. तो गाण्ड ऊँची करके मेरा सर इतना दबा देतीं कि मुझे घुटन होने लगती थी। लेकिन दोस्तो, चूत के अन्दर घुटन का भी अपना एक अलग ही मजा है। मेरा पाठकों से एक ही निवेदन है कि अब तक आपने चूत नहीं चाटी.. तो आपने कुछ नहीं किया.. आपका जीवन व्यर्थ है और मेरी प्यारी बहन, आंटी और लड़कियों.. अगर अब तक आपने अपनी चूत नहीं चटवाई.. तो जरूर चटवाना। यहाँ पर मैं एक बात कहना चाहूँगा दोस्तो.. कि मैं हमेशा से ही लड़कियों को सेक्स के बारे में किस्मत वाला समझता हूँ क्योंकि वो जितनी देर चाहें सेक्स कर सकती हैं, लड़कियाँ जितनी बार चाहें चर्म सीमा पर पहुँच कर परम आनन्द लेकर अपना पानी छोड़ सकती हैं। हमें तो चोदते वक्त भी यह ख्याल रखना पड़ता है कि कहीं झड़ न जाएं.. वर्ना दोबारा लण्ड महाराज को तैयार होने में वक्त लग जाएगा और शायद चूत फिर चोदने दे या नहीं। दोस्तो, बीवियाँ तो अक्सर रात को दोबारा चोदने ही नहीं देतीं.. लेकिन मेरी प्यारी बहन की बात ही कुछ और है। मैंने सोचा शायद मैं सीधा बोलूँगा तो वो मुझे चोदने नहीं देगीं.. इसलिए कोई आईडिया लगाना पड़ेगा तो मैंने थोड़ा और आगे बढ़ने का सोचा।

अब मैं अपने दोनों हाथों से उनके मम्मों को मसलने लगा। क्या कमाल के मम्मे थे.. दोस्तों एकदम मुलायम और नर्म.. बर्फ के गोले.. जो एकदम सफ़ेद और उत्तेजित अवस्था में सख्त हो जाने वाले मस्त चूचे थे। दोस्तो, चूत की तरह मम्मों का भी एक अलग ही मजा होता है। कुल मिलाकर ऊपर वाले ने औरत चीज ही अद्भुत बनाई है। उनकी चूत.. उनके मम्मे.. उनकी मटकती गाण्ड.. उनके मांसल मदमाते चूतड़.. उनकी मखमली त्वचा.. हर एक चीज अवर्णनीय होती है। थोड़ी देर बाद उन्होंने चुदास के चलते खुद ही अपनी कमीज़ ऊपर कर दी.. ताकि मैं अच्छे से उनके मम्मों को मसल सकूँ। अब मैं भी थोड़ी हिम्मत करके उनकी ब्रा ऊपर करके उनकी निप्पल की ट्यूनिंग करने लगा.. जैसे हम रेडियो में स्टेशन मिलाने के लिए किया करते थे। मुझे यहाँ अपनी बहन का स्टेशन सैट जो करना था। इस बीच मैंने थोड़ा आगे बढ़ते हुए उनकी नाभि को चूमना शुरू कर दिया। मैं कभी उनकी नाभि में जीभ घुसाता.. तो कभी चूत में घुसेड़ देता।  दोस्तो, वो सच में अब अपने आपे से बाहर थीं और मेरे काबू में आ गई थीं, वो अपनी आँखें बन्द किए हुए मजा ले रही थीं। मैंने चालाकी करते हुए अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा के हुक खोलने की कोशिश की.. लेकिन मैं नाकामयाब रहा। दोस्तो, मैं आज भी ब्रा के हुक नहीं खोल पाता हूँ.. पता नहीं ब्रा वाले भी क्यों ये हुक लगाते हैं। कुछ देर मैंने ट्राई किया.. लेकिन सफलता नहीं मिली.. तो बहन ने मेरे हाथ पकड़ लिए। करीब आधे घंटे बाद हम दोनों की नजरें एक हुईं.. उनकी आँखों में एक अजब सी चमक थी और चेहरे पर कातिल मुस्कान छाई हुई थी। मैंने कहा- बहन प्लीज़.. और वो मान गईं.. उन्होंने खुद अपना कुर्ता उतार फेंका और अपनी ब्रा खोल दी।

——-क्रमशः——

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मेरी किस्मत बस खुल ही गयी थी, अब देखिये मैं इसको अंजाम तक ले जा पता हूँ या नहीं. इस sex story का आखिरी पार्ट जल्द ही..

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Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

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