दो ठरकी बुड्ढ़े और मैं बेचारी – II

By   November 18, 2017
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सोनी अंकल के जबरदस्त किस के बाद मेरी चूत गीली हो चुकी थी, दोनों बुड्ढो के लंड भी तन चुके थे। लग नहीं रहा था की ये sex hindi stories का किस्सा किस तक ही रुकने वाला है-

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

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मेरी योनि गीली होने लगी। मुझे लग गया कि आज इन बूढो से अपना दामन बचाकर निकलना मुश्किल ही नही नामुमकिन है। सोनी जी अपने हाथों से मेरी कक्षी को एक ओर सरका कर मेरे एक नितंब को सहलाने लगे। सोनी जी ने मेरे दोनो नितंब सहलाने और मसलने के बाद अब उंगलिया मेरी कक्षी के भीतर डालने की कोशिश करने लगे। मैं उनके चंगुल से निकलने की जी तोड़ कोशिश कर रही थी। मुझे लग रहा था मानो उनका ये किस सारी जिंदगी ख़त्म नही होगा लेकिन उन्होने आख़िर में मुझे आज़ाद कर ही दिया। मैं उनकी गोद में बैठे बैठे ही लंबी लंबी साँसे लेने लगी। अपने हार्ट बीट्स को कंट्रोल करने लगी जो कि किसी राजधानी एक्सप्रेस की तरह दौड़ा जा रहा था।गुप्ता अंकल ने मेरी बाहों के नीचे से हाथ ले जाकर मेरे बदन को ठीक मेरे बूब्स के नीचे से पकड़ा। जिससे मेरे बड़े बड़े बूब्स सोनी अंकल की तरफ उँचे हो गये। सोनी अंकल ने ये देखकर मेरे बूब्स की चोटियों पर एक एक किस दिया। गुप्ता अंकल ने मुझे उनकी गोद से उठाया।

” सोनी उठ अब मेरी बारी है।”

मैं उनके सामने सिर झुकाए हुए खड़ी थी। सोनी अंकल चेयर से उठ गये। उन की जगह गुप्ता अंकल कुर्सी पर बैठ गये। मैं वापस अपने पैरों को फैला कर उनकी गोद में जा बैठी। मैने अपने होंठ अब गुप्ता अंकल के होंठों पर लगा दिए। इनके मुँह से सोनी अंकल की तरह मिंट की स्मेल नही बल्कि बियर की बदबू आ आ रही थी। मैने अपनी साँस को रोक कर उनके मुँह में अपनी जीभ डाल दी। गुप्ता अंकल के सीने से अब मेरे उँचे उँचे शिखर दबे हुए छटपटा रहे थे। सोनी अंकल मेरे पीछे ज़मीन पर बैठ गये और मेरी पेंटी के दोनो टाँगों के बीच के जोड़ को खींच कर तोड़ दिया। मेरी पेंटी के दोनो पल्ले अलग हो कर मेरे कमर से झूल रहे थे। उन्होंने मेरे निवस्त्र नितंबों के ऊपर से पेंटी के झूलते टुकड़े को ऊपर उठा कर मेरे नितंबों पर अपने होंठ लगा दिए। उनके होंठ अब मेरे नितंबों पर फिर रहे थे। कंदार अंकल के हाथ मेरे टॉप को ऊपर उठा कर मेरी नग्न पीठ पर हाथ फिराने लगे। उनके हाथ मेरे ब्रा के हुक पर आकर ठहरे और मेरे ब्रा के हुक को खोल कर मेरे बूब्स को आज़ाद कर दिया। फिर सामने की तरफ हाथ लाकर मेरे ब्रा को सीने से ऊपर कर के मेरे नग्न बूब्स को अपने हाथों में लेकर मसलने लगे। मेरे बूब्स को बुरी तरह मसलते हुए मेरे खड़े हो चुके निपल्स को अपनी उंगलियों के बीच लेकर ज़ोर ज़ोर से दबाने और खींचने लगे। मेरे मुँह से कराह की आवाज़ निकल कर उनके होंठों के बीच क़ैद हो जा रही थी।

उधर सोनी अंकल की जीभ अब मेरी योनि के दोनो ओर फिर रही थी। गुप्ता अंकल ने बैठे बैठे अपने दोनो पैरों को फैला दिया था जिसके कारण मेरे पैर भी फैल गये थे और मेरी योनि अब सोनी अंकल की हरकतों के लिए बेपर्दा थी। मैं उनकी हरकतों से गर्म हो गयी थी। अब मेरा अंग अंग छटपटा रहा था इनके लंड के लिए। कुछ देर तक इसी तरह मुझे किस करते रहने के बाद हम तीनो उठे। दोनो ने सबसे पहले मुझे पूरी तरह नग्न किया। मैंने उनका किसी तरह भी विरोध किए बिना उनके काम में मदद की जब मैं पूरी तरह नग्न हो गयी तो मैने पहले सोनी अंकल के और उसके बाद गुप्ता अंकल के सारे कपड़े उतार दिए। मैने पहली बार दोनो के लिंग को देखा। दोनो के लिंग इस उम्र में भी किसी 30 साल के नौजवान से बड़े और मोटे ताजे थे। सोनी अंकल का लिंग तो पूरी तरह ताना हुआ झटके खा रहा था। उनके लिंग से एक एक बूँद लासा निकल रहा था। गुप्ता अंकल का लिंग अभी तक पूरी तरह खड़ा नही हुआ था। मैने दोनो के लिंग अपने हाथों से थाम लिए और बारी बारी से दोनो के लिंग के टिप को अपने होंठों से चूमा। उनके लिंग को सहलाते हुए मैने नीचे लटकते हुए उनकी गेंदों को भी अपनी मुट्ठी में भर कर सहलाया।फिर हम तीनो बेड रूम की ओर बढ़े मानो हमारे बीच पहले से ही तय हो की अब क्या होने वाला है। बेडरूम में जाकर मैं पलंग पर लेट गयी। अपने हाथों को उठा कर मैने उन्हे बुलाया। दोनो कूद कर बिस्तर पर चढ़ गये।

” एक एक करके।” मैने दोनो से कहा।”ठीक है” कहते हुए सोनी अंकल मेरी टाँगों के बीच आ गये और उन्होंने अपने हाथों से मेरी दोनो टाँगों को फैलाया। फिर आगे बढ़कर झुकते हुए मेरी योनि पर अपने होंठ रख दिए। उनकी जीभ पहले मेरी योनि के ऊपर फिरी फिर उन्होंने अपने हाथों से मेरी योनि की फांकों को अलग किया और मेरी रस टपकाती हुई योनि में अपनी जीभ डाल कर उसे चाटने लगे। मैं उत्तेजना में उनके अधपके बालो को सख्ती से अपनी मुट्ठी में भर कर उनके मुँह को अपनी योनि पर दबा रही थी। साथ साथ अपनी कमर को ऊपर उठाकर उनके जीभ को जितना अंदर तक हो सके उतना अंदर घुसा लेना चाहती थी। इस प्रकार का सेक्स मैने पहले कभी महसूस नही किया था। राहुल के लिए सेक्स भी एक तरह से ऐसा काम था जिसे पूरी गंभीरता से अपनी मर्यादा में रहकर करना चाहिए। जब की सेक्स चीज़ ही ऐसी है की इसमें जितनी सीमाओं का उल्लंघन होता है उतना ही मज़ा आता है।

do tharki buddhe aur mai bechari sex hindi stories

अंकल का बुड्ढा लंड मेरे मुंह में..

“आआआआअहह….म्*म्म्ममममममम म………उंकलीईई…….ऊऊफोफ़ फ्फूफ्फ………नहियीईईईई…….म्*म्म्मममममाआआ………क्य्आअ काआरररर रहीई हूऊऊऊओ…..चछूड्डू………मुझीईए”इस तरह की आवाज़ें मेरे मुँह से निकल रही थी।गुप्ता अंकल कुछ देर तक हम दोनो के खेल देखते रहे। उनका लिंग पूरी तरह तन चुका था। पूरी तरह तना हुआ उनका लिंग काफ़ी मोटा और लंबा था। वो अपने लिंग को हाथों में लेकर सहला रहे थे। मुझे उनपर दया आ गयी और मैने हाथ बढ़ा कर उनके लिंग को अपने हाथों में थाम लिया। अब मैं अपने हाथों से उनके लिंग को सहला रही थी। मेरी आँखें उत्तेजना से बंद हो गयी थी। गुप्ता अंकल मेरे बूब्स को सहला रहे थे। फिर उन्होंने झुक कर मेरे निपल को अपने मुँह में भर लिया और हाथों से उस बूब को मसलते हुए मेरे निपल को चूसने लगे। मानो मेरे स्तन से दूध पी रहे हों।अचानक मेरे बदन में ऐसा लगा मानो किसी ने बिजली का तार छुआ दिया हो। मैं ज़ोर से तड़पी और मेरी योनि से रस बह निकला। मैं खल्लास हो कर बिस्तर पर गिर पड़ी। अब गुप्ता अंकल ने आगे बढ़ कर मेरे सिर को बालो से पकड़ा और मेरे होंठों पर अपने लिंग को रगड़ने लगे।

” ले मुँह खोल। इसे मुँह में लेकर चूस” मैने अपना मुँह खोल दिया और उनका मोटा लिंग मेरे मुँह में घुस गया। मैने उनके लिंग को अपने हाथों से पकड़ रखा था जिससे एक बार में पूरा लिंग मेरे मुँह में ना ठूंस दें। पहले वो धीरे धीरे अपने कमर से धक्के मार रहे थे लेकिन कुछ ही देर में उनके धक्कों की गति बढ़ती गयी। वो अब ज़ोर ज़ोर से मेरे मुँह में धक्के लगाने लगे। मेरे हाथ को अपने लिंग से उन्होंने हटा दिया जिससे उनका लिंग जड़ तक मेरे मुँह में घुस सके। उनका लिंग मेरे मुँह को पार करके मेरे गले के अंदर तक घुस रहा था। लेकिन आगे कहीं फँस जाने के कारण लिंग का कुछ भाग बाहर ही रह रहा था। मैं चाह रही थी की वो मुँह में ही खल्लास हो जाए जिससे मेरी योनि को करने लायक दम नही बचे। लेकिन उनका इरादा तो कुछ और ही था।” सोनी तू रुक क्यों गया फाड़ दे साली की चूत।” गुप्ता अंकल ने कहा। सोनी अंकल कुछ देर सुस्ता चुके थे सो अब वापस मेरी टाँगों के बीच आकर उन्होंने अपने लिंग को मेरी योनि के छेद पर सटाया और एक धक्के में पूरे लिंग को जड़ तक अंदर डाल दिया। अपने लिंग को पूरा अंदर करके वो मेरे ऊपर लेट गये। उनके बॉल्स मेरी योनि के नीचे गाँड़ के छेद के ऊपर सटे हुए थे। मैने उनके लिंग को अपनी योनि में काफ़ी अंदर तक महसूस किया। गुप्ता अंकल मेरे मुँह में अपना लिंग ठूंस कर धक्के मारना कुछ समय के लिए भूल कर सोनी अंकल के लिंग को मेरी योनि के अंदर घुसता हुआ देख रहे थे। फिर दोनो एक साथ धक्के लगाने लगे। दोनो दो तरफ से ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहे थे। मेरा बदन दोनो के धक्कों से बीच में आगे पीछे हो रहा था। कुछ देर इसी तरह करने के बाद गुप्ता अंकल का लिंग फूलने लगा। मुझे लगा की अब उनका रस निकलने वाला ही है। मैं उनके लिंग को अपने मुँह से उगल देना चाहती थी लेकिन उन्होंने खुद ही अपना लिंग मेरे मुँह से निकाल लिया। वो मेरे मुँह में नही शायद मेरी चूत में अपना रस डालना चाहते थे। दो मिनिट अपने उत्तेजना को काबू में कर के वो सोनी अंकल के करीब आए।

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