दोस्त की नायाब बीवी

By   June 19, 2016
loading...

मैं एक दोस्त के घर पर पेइंग गेस्ट बना। पर उसकी हीरोइन सी बीवी ने मुझपे जादू सा कर दिया। मैं अपने dost ki biwi ki chudai करने को आतुर हो रहा था..


दोस्तो, मेरा नाम हर्ष है, शादीशुदा हूँ, एक बेटी है जो चौथी क्लास में पढ़ती है, सुंदर बीवी है।
सेक्स तो घर में और बाहर भी बहुत बार किया है, पर मैंने कभी औरत के अलावा किसी और जीव से कभी नहीं किया।

मैं एक प्राइवेट कम्पनी में दिल्ली में जॉब करता हूँ।

जब मेरी बदली जयपुर से दिल्ली हुई तो सबसे पहली समस्या थी दिल्ली में रहने की।

शुरू के कुछ दिन तो एक रेस्ट हाउस में रहा, बाद में मेरे ऑफिस के ही एक दोस्त नीरज ने कहा कि उसके घर में एक रूम एक्सट्रा है, वो मुझे मिल सकता है।

एक दिन वो मुझे अपने घर ले गया, मुझे उसका घर और मेरा कमरा दोनों पसंद आए, पर सबसे ज़्यादा पसंद आई उसकी बीवी, औरत क्या बस फिल्मी हीरोइन कहिए।

खूबसूरत चेहरा, गदराया बदन और मदमाता यौवन।
बस यह समझो कि मैंने सिर्फ उसको देख कर ही हामी भर दी।
अगले दिन ही मैं अपना सारा समान अपने रेस्ट हाउस से उठा कर उसके घर आ गया।

नीरज की बीवी शालिनी और एक बेटा गोलू ही उस घर में रहते हैं। गोलू भी चौथी क्लास में पढ़ता है।
दोनों मियां बीवी ने मेरा खूब ख्याल रखा, घर का खाना, दूध चाय, हर बात में मुझे ऐसे ट्रीट किया जैसे मैं उनके घर का ही मेम्बर हूँ।
एक खास बात जो मैंने नोटिस की शालिनी जब कभी भी मेरे सामने आती और अगर उसका दुपट्टा या साड़ी का पल्लू उसके बदन से थोड़ा बहुत खिसका होता तो उसने कभी इस चीज़ के परवाह नहीं की कि कोई पराया पुरुष उसके यौवन को घूर रहा है।

मैं भी पूरी शराफत से पेश आता, पर अगर किसी सुंदर औरत के अंग आपको दिख रहे हों तो आप कितनी देर उसको अनदेखा कर सकते हो, कभी न कभी तो निगाह पड़ ही जाती है।

खैर हम दोनों शरीफ ही बने रहे।

अब दिल्ली से जयपुर रोज़ रोज़ तो जाया नहीं जा सकता था, सो दिन तो कट जाता था पर रात को मुश्किल होती थी, अपनी बीवी की और अपनी सहेलियों की बड़ी याद आती।

ऑफिस में भी एक-दो पर लाईन लगाई, पर इतनी जल्दी कौन पटती है।

वैसे ही एक दिन बातों बातों में मैंने नीरज से कहा- यार बाकी सब तो ठीक है पर साली रात को बड़ी मुश्किल होती है।

‘तो तू क्या चाहता है? कि घर तो दे दिया अब अपनी बीवी भी तुझे दे दूँ?’

‘अरे पागल है क्या, ये बात नहीं यार… कोई सहेली हो, कोई पैसे लेकर ही दे दे साली?’ मैंने कहा।

loading...

‘तो इसका भी इंतेजाम करें फिर!’ नीरज बोला।

‘हो सकता है क्या, कहाँ?’ मैंने पूछा।

‘अरे लल्ला धीरज धरो, देखते हैं कुछ!’

मुझे लगा कि चलो साला पानी तो निकलने का इंतजाम हुआ, बाकी देखी जायेगी।

वैसे तो मैं हर शनिवार जयपुर चला जाता हूँ, पर इस बार नीरज ने मुझे रोक लिया।
नई चूत के चक्कर में मैं भी रुक गया।

शनिवार शाम को हम दोनों बाज़ार गए और शाम को रंगीन बनाने के लिए व्हिस्की, नमकीन और बहुत सा समान लाये।
मगर नीरज ने मुझे यह नहीं बताया कि लड़की कौन है।

पीते पिलाते 9 बज गए।

उसके बाद खाना खाया, उसके बाद शालिनी अपने बेटे को लेकर अपने बेडरूम में सोने चली गई, और मैं अपने बेडरूम में आ गया।
अभी लेटा ही था कि नीरज ने आकर कहा- सोना मत, मैं लेने जा रहा हूँ, अभी बस 10-15 मिनट में आता हूँ, ऊपर पोर्च वाले कमरे में उसे बैठा कर तुम्हें फोन कर दूँगा, बस चुपके से ऊपर आ जाना।

मैंने पूछा- अरे घर में ही? अगर शालिनी ने देख लिया तो? साले मरवाएगा मुझे भी।

‘तू उसकी चिंता मत कर, बस तैयार रह, मैं अभी आया।’ कहकर वो चला गया।

और मेरे सोये अरमान फिर से जाग गए।

मैं बेसब्री से उसके फोन का इंतज़ार करने लगा।

कोई 20 मिनट बाद उसकी काल आई- हैलो, ऐसा कर चुपके से ऊपर आ जा।

मैं धीरे धीरे से चलता हुआ, ऊपर पोर्च के कमरे में पहुँचा तो कमरे में बड़ी हल्की सी लाइट थी।

मैंने देखा सामने बेड पर एक कोई 30 एक साल की गोरी सी औरत बैठी थी, उसकी पीठ मेरी तरफ थी, लाल साड़ी और पीछे ले बेकलेस लाल ब्लाउज़, सच कहूँ तो मैं तो उसकी पीठ देख कर ही हिल गया।

मैंने नीरज को देखा।

‘देखता क्या है, जाकर पकड़ ले और ठोक दे।’

उसके कहने पर मैं आगे बढ़ा और पीछे से उस औरत को बाहों में भर लिया, अपने दोनों हाथों से उसके दोनों विशाल स्तन पकड़ के दबाये और उसकी नंगी पीठ पर बेतहाशा चुम्बनों की बौछार कर दी।

‘ओह जानेमन, यू आर सो ब्यूटीफुल… ओह गॉड तुम्हारे ये विशाल स्तन, जी करता है इन्हें काट कर खा जाऊँ…’ और पता नहीं क्या क्या बोलते मैंने उसके गाल पर भी चुम्बन ले लिया।

dost ki nayab biwi dost ki biwi ki chudai sex story

शालिनी भाभी का नायाब बदन

पर जब मैंने उसके होंठों को चूमने के लिए उसका मुँह अपनी तरफ घुमाया तो मुझे तो जैसे बिजली का झटका लगा।

‘शालू… भाभी जी आप?’ मेरा तो मुँह खुला रह गया।

मैंने नीरज से पूछा- यह सब क्या है यार?

तो वो हँसते हुये बोला- देख यार, हम दोनों मियां बीवी बहुत अडवेंचरस हैं, हमेश कुछ न कुछ नया करते रहते हैं।

‘पर यह क्या बकवास है?’ मैंने थोड़ा बनावटी गुस्सा दिखाते हुये कहा, हालांकि शालिनी के बूब्स दबाते हुये और उसको चूमते हुये मुझे बहुत मज़ा आया था।

‘बकवास नहीं माई फ्रेंड, हम दोनों एक स्वप्पेर्स क्लब के भी मेम्बर्स हैं, मुझे यह देखना अच्छा लगता है कि कोई मेरे सामने मेरी खूबसूरत बीवी को चोदे और इसके सामने मैं और औरतों से सेक्स करूँ।

इसके बाद शालिनी बोली- जब नीरज ने मुझे आपकी प्रोब्लम बताई तो मैंने ही नीरज को यह आइडिया दिया। दरअसल नीरज को कुछ शौक और भी हैं जो मैं पूरे नहीं कर सकती उसके लिए हमें आपकी मदद चाहिए।

‘और शौक?’ मैंने आश्चर्यचकित होकर पूछा।
हालांकि मैं समझ तो गया था कि नीरज गाण्डू है पर मैं उनके मुँह से सुनना चाहता था।

‘देख भोला मत बन, मुझे चोदने के साथ साथ चुदवाने का भी शौक है। और यह बात मैंने शालिनी को सुहागरात पर ही बता दी थी।’
शालिनी ने भी स्माइल देकर अपनी पति की बात में हामी भरी।

‘पहले तो सेक्स के दौरान यह कोई मोमबत्ती या प्लास्टिक की कोई चीज़ मेरी गाण्ड में डाल कर मुझे सुख देती थी, पर मुझे तो असली लौड़ा चाहिए था। इसी लिए हम स्वपेर्स क्लब के मेम्बर बने, पर वहाँ भी सबने शालिनी को चोदने में दिलचस्पी रखी, मुझे किसी ने नहीं चोदा।’

मैं हैरान सा खड़ा ये सब सुन रहा था।

नीरज ने आगे कहना शुरू किया- देखो, हम दोनों तुम्हारे गुलाम बन कर रहेंगे, तुम जब चाहे शालिनी को इस्तेमाल करो, इसके सारे छेद तुम्हारे लिए खुले हैं, पर इसकी एवज़ में तुम्हें मेरे दो छेदों को भी शांत करना पड़ेगा। गाण्ड तो शालिनी भी मरवा लेती है, पर मैं चाहता हूँ चूत तुम इसकी मारो पर गाण्ड मेरी मारो।

इससे पहले कि मैं कुछ भी कहता, शालिनी उठके खड़ी हुई और उसने अपनी साड़ी उतारनी शुरू की।
साड़ी उतार के उसने अपना ब्लाउज़ और पेटीकोट भी उतार दिया, अब मेरे सामने वो सिर्फ ब्रा पेंटी में खड़ी कोई अप्सरा लग रही थी।
मगर दिक्कत यह थी कि अगर मैं उसको चोदता हूँ तो नीरज की भी गाण्ड मारनी पड़ेगी।

loading...