एक लड़की के सेक्स जीवन की महागाथा – पार्ट 2

By   January 21, 2016
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दोस्तों.. मैं अपनी Hindi Sex Kahani ‘एक लड़की के सेक्स जीवन की महागाथा’ का दूसरा भाग पेश करने जा रही हूँ. आपको पहला पार्ट कैसा लगा? सच सच बताना कितनी बार मुठ मारी? और लड़कियों, तुम कितनी बार झड़ी? अब ज्यादा देर नहीं करती और Hindi Sex Kahani पर आती हूँ..

कहानी के अन्य भाग–

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

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उस दिन ज्योति के साथ जो कुछ भी किया , उससे मैंने एक लड़की की जिंदगी के उस छिपे हुए पहलु को जान लिया था और अब जब भी कभी सेक्सुअल फ्रस्ट्रेशन होती तो मैं हस्तमैथुन कर लेती थी. तीन – चार महीने तक हम लोग साथ मिल कर इस तरह से अपने इस नए प्रयोग को अंजाम देते रहे. इससे आगे नहीं बड़े. पर अब हम एक दुसरे के प्रति और खुल गए थे.

अब बात करती उन दिनों की जब मैं हस्तमैथुन नियमित करती थी, पर सिर्फ उत्पन्न हुयी उत्तेजना शांत करने के लिए. अभी तक मैंने कोई पेनिस नहीं देखा था (मेरा मतलब मेरी उम्र के लड़कों का) पर अंदाज था की छोटे बच्चों के पेनिस से थोडा बड़ा ही होगा. ज्योति बताती थी की उसके भैया का पेनिस काफी बड़ा है, तो मैंने पुछा की तुझे कैसे पता? तो उसने बताया की उसकी स्वाति भाभी में बताया बातों बातों में. अब मन मैं पेनिस को लेकर कई सवाल उठने लगे थे. और यह सवाल हल हुआ लगभग एक साल बाद, जब हम दोनों अपने स्कूल के एक फंक्शन की तयारी कर रहे थे. मैं रिहर्सल में ज्योति की हेल्प कर रही थी और हम लोग एक ड्रामा प्रेसेंट करने वाले थे. मुझे बहुत जोर से टॉयलेट लगी, हमारे स्कूल का टॉयलेट खेल के मैंदान की दूसरी और था और में वहां तक नहीं जाना चाह रही थी और ज्योति भी व्यस्त थी और वो भी नहीं जा रही थी साथ में. तभी ज्योति ने पवन को मेरे साथ वहां तक जाने और वापस लाने को कहा और मैं उसके साथ चली गयी. वहां पहुंची तो पता चला की सारे टोइलेट्स भरे हुए थे. मुझसे रुका नहीं जा रहा था तो पवन ने सुझाव दिया की मैं किसी खाली क्लास रूम में टॉयलेट कर सकती हूँ. मुझे आईडिया अच्छा लगा. हम तुंरत एक खाली क्लास रूम की और चले. और मैं क्लास रूम में अन्दर गयी और दरवाजा फेरते हुए बोली, ‘मैं अभी आती हूँ, देखना कोई आये न..!’

वो बाहर ही रुक गया और में अन्दर एक कोने में आ कर अपने पायजामे की गाँठ खोलने लगी. मेरा टॉयलेट का प्रेस्सर बढता ही जा रहा था और घबराहट में मेरे से नारे की गाँठ भी नहीं खुल पा रही थी और जैसे ही नारे की गाँठ खुली मेने पायजामा नीचे किया और पैंटी नीचे घुटनों तक की और बैठने से पहले ही टॉयलेट करना चालू कर दिया. धार मेरी टांगों के बीच से होती हुयी फर्श पर गिरने लगी और कमरे में एक हलकी सी Sshhhhhhh….. की आवाज आने लगी, अभी तीन चार सेकेंड ही हुए थे की अचानक पवन अन्दर आया और चिल्लाया ,’जल्दी सौम्या, पाठक मैडम आ रही हैं इस तरफ!’

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सौम्या के सेक्स जीवन की महागाथा

मैं फर्श पर टॉयलेट करते हुए उसे गुस्से से देखती हुयी बोली, ‘ये क्या पवन ? तुम अन्दर क्यों आये…मैं टॉयलेट कर रही हूँ.’ वो बोला,’मैं क्या करता ? बाहर रहता तो मैडम पूछती की यहाँ क्या कर रहे हो? तो मैं क्या जवाब देता ?’ वो वास्तव मैं सही कह रहा था. मैं इस तरह बैठी थी की मेरी पीन्थ उसकी तरफ थी, मैंने काफी कोशिश की उससे अपने हिप्स छिपाने की पर वो मुझे शुशु करते देख चूका था. उसने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया था. मेने टॉयलेट कर लिया था और अब मैं यही सोच रही थी इसके सामने खड़े होकर पायजामा और पैंटी कैसे पहनू? पर मैंने हिम्मत की और कड़ी हुयी और जैसे ही खड़ी होकर अपनी पैंटी चडानी चाही तो मुझे कुछ पानी सा गिरने की आवाज आयी..तो मुड़कर देखा तो पवन भी शुशु कर रहा था. पर जो देखा उसे देख कर मेरे हाथ पैंटी चडाना भूल गए. पवन मेरे पीछे खड़े होकर एक और टॉयलेट कर रहा था. उसने अपने पेनिस को अपने हाथ में ले रखा था और उस में से शुशु निकल कर फर्श पर गिर रही थी. oh my god..पहली बार देखा था ऐसा….तो एक शोक सा लगा था, मेरी पैंटी मेरे घुटनों में थी और पयाजामी उससे भी नीचे.. सिर्फ कुर्ती थी जिसने मेरी पूसी को और मेरी जाँघों को ढाका हुआ था.

वो मेरे को देखता हुआ बोला, ‘सॉरी सौम्या..मुझे भी लगी थी….तुम्हे बुरा तो नहीं लगा…प्लीज मुझे माफ़ कर देना…’
पर में तो एकटक उसके लिंग (पेनिस) को देखे जा रही थी. वो १५ साल का था उस समय और उसका पेनिस करीब ५ इंच का हो चूका था जिसे उसने अपनी पेंट की जिप में से बाहर निकाल रखा था. मैंने सिर्फ उस से यही पुछा उस समय, ‘यह क्या इतना…ब.. बड़ा होता है..?’

और वो हस्ते हुए बोला,’वैसे तो छोटा ही रहता है, पर तुम्हे अभी जैसे देखा तो यह बड़ा हो गया!’ मुझे यह बात उस समय बिलकुल समझ नहीं आयी. वो टॉयलेट कर चूका था और अपने लिंग को धीरे धीरे मल रहा था. मेरी पूसी भी गीली होने का एहसास देने लगी और तभी उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लिंग पर रख दिया. मेरे पूरे बदन में जैसे बिजली का करेंट लग गया. मेने उसके लिंग को पकडा और दबाया भी. उसका भी बुरा हाल हो गया. मेने वो चीज पहली बार हाथ में पकड़ी थी सो में उसे ऊपर नीचे आगे पीछे करने लगी और उसने मुझे अपने पास किया और अपने हाथ मेरे हिप्स पर रख दिए जो की अभी भी नंगे थे. उसने कुर्ती ऊपर की और मेरे हिप्स , मेरी जाँघों और आखिर में मेरी गीली हो चुकी पूसी पर पहुँच गया. हम एक दुसरे से कुछ भी नहीं बोल रहे थे. बस वो मेरी पूसी लिप्स को मसल रहा था, रगड़ रहा था, और में उसके लिंग को पकड़ कर जोर जोर से हिला रही थी…न जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा था की अभी उसका लिंग और बढता जा रहा है…वो एकदम पत्थर की तरह कठोर हो गया था…और मोटा भी…मेरे पूरा ध्यान उसी पर था…तभी उसकी उँगलियों ने मेरी क्लिटोरिस पर अपना कमाल दिखाना शुरू कर दिया, वो उसे बुरी तरह रगड़ रहा था और मेरी पूसी के लिप्स की दरार पर अपनी ऊँगली फिराता हुआ मेरी योनी के ऊपर से निकास्वाति. उसके हर बार ऐसा करने पर मेरी योनी संकुचन ले रही थी और योवन रस बहे जा रहा था. मुझे ओर्गास्म की फीलिंग हुयी पर एक नए अंदाज मैं , आज एक लड़के ने ओर्गास्म दिया था. उसकी इन हरकतों से मुझे पता नहीं क्या हो गया , मेने उसके लिंग को और जोरों से हिलाना शुरू कर दिया और…..

एक राज और खुला, ……..उसके लिंग ने एक जोरदार झटका लिया और एक सफ़ेद धार उसके लिंग से निकल कर सीधे मेरे हाथ में आ लगी…मैं जब तक कुछ समझ पाती तब तक…..दूसरी……तीसरी…..चौथी ….धार निकल गयी…और उसका मुह फटा हुआ था…उसका हाथ मेरी पूसी से हटा और उसने मेरा हाथ अपने लिंग से हटा दिया…

मेरी तो समझ में नहीं आया की यह हुआ क्या…और यह सफ़ेद सफ़ेद चिपचिपा क्या है? वो बस इतना बोला, ‘सौम्या, ओह्ह तुमने यह क्या किया , में झड़ गया…!’ मेने अपने कपडे ठीक किये ओर उसने भी, और ५ मिनट बाद हम बाहर आ गए. रास्ते में हम चुपचाप थे, उसने बस यही कहा की किसी को मत बताना की क्या हुआ था…

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