हवस की पुजारन – III

By   October 9, 2016
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मेरा खुद पे कोई जोर नहीं रहा, मैं अपने हवस की कैदी बन चुकी थी. वो बड़ा लंड मुझे चाहिए ही था. मेरी ये हवस मुझे पता नहीं कहा ले जाएगी. इस hawas ki kahani का अगला हिस्सा..

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5

पार्ट 6

पार्ट 7


डिसूज़ा अब अपनी पूरी जीब मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहा था. में झार ने लगी. मैने उसका सर अपने हाथो से पकड़ लिया और अपनी गांद उछाल, उछाल के अपनी चूत उसके चेहरे पे ज़ोर से घिसने लगी. मेरे सारे बदन में सनसनी फैल गयी थी. तीन या चार मिनिट तक मैं ऐसे ही ज़ोर से झरती रही. डिसूज़ा ज़ॉरो से मेरी चूत को अपनी जीब से चोद्ता रहा. आख़िर मेरा झरना बंद हुआ और डिसूज़ा ने मुझे कंधो से उतार दिया.’मज़ा आया मेरी जान’ मैने अपना सर हां में हिलाया. मैं ज़ॉरो से साँस ले रही थी. इतनी ज़ोर से झार के में थक गयी थी.

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‘अब तेरी बारी हैं मेरी रानी मेरा लंड चुसेगी ?’ मुझे बहुत शरम आ रही थी ऐसी गंदी बात सुनकर. मैने अपना सिर हां में हिलाया.

उसने अब मेरे कंधो पे ज़ोर देके नीचे घुटनो तले बैठा दिया. और तुरंत ही अपना लंड मेरे मूह में डाल दिया. मैने अपना मूह पूरा फैलाया और उसका लंड चूसने लगी. पूरा ज़ोर लगा के मैने 6 इंच तक का लंड मूह मे ले लिया और उसे चूसने लगी. डिसूज़ा ने दोनो हाथ से मेरा सर पकड़ लिया और मुझे रोक कर कहा.

‘पूरा लंड लेगी मेरा मूह में ?’. उसके चेहरे का आभास डरावना था. मुझे समझ में आ गया कि वो मज़ाक नही कर रहा था.

‘कल तूने अछा चूसा था मेरा लंड पर अब में तुझे दिखाता हूँ कि 10 इंच का लंड पूरे का पूरा कैसे चूसा जाता हैं’. यह कह कर डिसूज़ा ने अपना लंड मेरे मूह में धीरे धीरे घुसेड़ना शुरू किया. मैने उसको अपने हाथो से दूर करने की कोशिश की पर उसने बहुत ज़ोर से मेरा सर पकड़ा था. उसका लंड अब 7 इंच तक मेरे मूह मे था.

मूह में ज़रा भी जगाह बाकी नही थी फिर भी डिसूज़ा मेरा सर पकड़ लंड आगे धकेल्ता रहा. अब लंड मुझे मेरे हलक में घुसते हुए महसूस होने लगा.

मैं ज़ोर से डिसूज़ा को मारती रही पर उसपे कोई असर नही था. उसने अपने लंड को आगे बढ़ाना जारी रखा. मेरी आँखों से आँसू निकल रहे थे पर डिसूज़ा बेरहमी से लंड आगे धकेलते गया. अब उसका 10 इंच का लंड पूरा मेरे मूह में था. मुझे अपने गले में उसका लंड महसूस हो रहा था. मुझे ख़ासी आ रही थी पर में ख़ास भी नही सकती ती. मेरे जबड़े और मूह में अब बहुत दर्द हो रहा था और मैं चीखना चाहती थी पर चीखती भी कैसे.

मैं अपने हाथ ज़ोर ज़ोर से डिसूज़ा पे मार रही थी और अपना सर उसके लंड से दूर लेने की कोशिश कर रही थी पर उसने अपने दोनो हाथो से मेरा सर पकड़ के रखा था. उसने मेरे सिर को अपनी तरफ इतना खीच लिया था कि मेरा चेहरा अब उसके पेट पे दब रहा था. पूरा लंड मूह में होने के बावजूद भी वो मेरा सर अपनी तरफ ओर खीच रहा था.

वो अब अपने लंड से मेरे मूह में धक्के लगाने लगा. वो सिर्फ़ एक आध इंच लंड बाहर निकालता और फिर उसे अंदर घुसेड देता. वो ऐसा दस मिनिट तक मेरे मूह को चोद्ता रहा. मेरा दर्द कम हनी का नाम नहीं ले रहा था.

दस मिनिट बाद अचानक उसने अपना लंड लगभग पूरे का पूरा निकाल दिया. एक सेकेंड के लिए मेरे दिल में थोड़ी सी राहत हुई पर अगले ही पल उसने पूरा लंड फिर से अंदर डाल दिया. अब वो मेरे मूह को अपने पूरे 10 इंच लंड से ऐसे ही चोदने लगा.

हर बार वो अपना लंड बाहर लेता मैं ज़ोर से खाँसती पर दूसरे ही सेकेंड वो लंड फिर मेरी मूह में होता. अब मैने हार मान के अपने हाथ नीचे कर लिए थे.

दर्द इतना बढ़ गया था कि मुझे लग रहा था कि में शायद बेहोश हो जाऊंगी. पता नही कितनी देर उसने मेरे मूह को ऐसे ही अपने 10 इंच के लंड से चोदा.

आख़िर उसका झरना शुरू हुआ और वो कुत्ते की तरह और तेज़ी से मेरे मूह को चोदने लगा. इससे मेरा दर्द और भी भाड़ गया और मैने फिर से उसको हाथों से मार के दूर करने की कोशिश की. हरेक धक्के पे मेरे जबड़े से होकर मेरे सारे बदन में एक दर्द फैल जाता. वो आवाज़े निकालने लगा ‘आआआआहह…. आआआआआअहह…..’. उसके लंड से वीर्य बहने लगा. उसका लंड झटके मारते मारते वीर्य छोड़ता रहा.

hawas ki pujaran hawas ki kahani

मेरी हवस की बढती आग

उसका लंड मेरे गले के अंदर तक था और मेरे निगले बिना ही सीधा अंदर चला गया. वो तकरीबन 3 या 4 मिनिट तक झरता रहा. सारे वक़्त में डिसूज़ा को अपने हाथो से मार मार के अपने से दूर करने की कोशिश कर रही थी लेकिन इससे उसको और मज़ा मिल रहा था. उसके झरने के बाद उसकी पकड़ कुछ कमज़ोर हुई और में अपना मूह उससे दूर करने में कामयाब हो गयी.

मूह से लंड निकालने के बाद मैं ज़मीन पर तक के गिर पड़े और अब रो रही थी और ज़ॉरो से खांस रही थी. ख़ास खाते खाते मेरे मूह से थूक के साथ डिसूज़ा का वीर्य भी निकल रहा था. में कुछ देर ऐसे ही खांस. रही. मेरी खाँसी बंद हुई तो देखा की डिसूज़ा ने कपड़े पहेन लिए थे. ‘कल यहाँ मिलना इसी वक़्त’ ऐसा कह के वो चला गया. में उसपे चिल्ला ना चाहती थी पर दर्द के मारे मेरे मूह से आवाज़ भी नही निकल रही थी.

में वहाँ ज़मीन पर ही लेटी रही. मुझ में अब खड़े होने की ताक़त नहीं थी.

मेरा मूह, जबड़ा और गला ज़ॉरो से दर्द कर रहा था. बाजू की टाय्लेट से मुझे टीचर और लड़के की आवाज़ आई.रोहित मेरे मूह की चुदाई देख झार गया था पर टीचर का लंड अभी भी टाइट हो कर खड़ा था. उसने कहा. ‘चल घूम जा’रोहित की गांद अभी भी चुदाइ से लाल थी.

‘नहीं सर प्लीज़. मुझे अभी भी दर्द हो रहा है’

टीचर अब खड़ा हो गया था. ‘ज़्यादा नखरे मत कर मादेर्चोद’ उसने रोहित को खड़ा कर लिया और उसका हाथ पकड़ के मोड़ दिया. हाथ ऐसे मोड़ने पे वो घूम गया. टीचर ने उसको आगे धकेल के दीवार से चिपका दिया और पीछे से आ कर अपना लंड उसके गांद पे रख ज़ोरदार धक्का लगाया. लंड गांद को चीरते हुए अंदर घुस गया. टीचर अब रोहित की खड़े खड़े गांद मार रहा था. हरेक धक्का इतना ज़ोरदार था कि रोहित के पैर हवा में उछाल. जाते. वो ज़ोर से चीख रहा था…

मैं टाय्लेट की ज़मीन पर लेटी हुई थी और रोहित की चीख सुन रही थी. मेरी ऐसी हालत मे भी मुझे वो चुदाई सुन कर मज़ा आ रहा था. मैं चुदाई सुनते सुनते वैसे ही ज़मीन पर लेटी रही. कुछ देर बाद टीचर लड़के की गांद में झार गया.

उस के बाद दो मिनिट बाद दोनो वहाँ से चले गये. कुछ देर और लेटी रहने के बाद मैं धीरे से खड़ी हो गयी और अपने कपड़े पहेन लिए. मेरे शर्ट के एक दो बटन बाकी थे और मैने वो लगा दिए और वहाँ से निकल घर चली गयी. घर जा कर मैने अपने शर्ट के बटन सी लिए और मेरी मा के घर आने से पहले ही सोने को चली गयी. मेरे जबड़े में इतना दर्द था कि मुझे सारी रात नींद नहीं आई. अगले दिन में स्कूल नहीं जा पाई.

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