हवस की पुजारन – IV

By   October 22, 2016
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‘सर धीरे से करना मैं कुँवारी हूँ’ मैने कहा

‘मज़ाक क्यूँ कर रही हो पायल’ टीचर ने हस्ते हुए कहा

‘नहीं में सच कह रही हूँ’. यह सुनते ही टीचर के चेहरे से हँसी गायब हो गयी. उसको अपने नसीब पर विश्वास नही हो रहा था. उसने आज तक किसी कुँवारी को नही चोदा था. उसकी बीवी भी शादी से पहले चुदवा चुकी थी. और अब उसके सामने एक कुँवारी चूत थी वो भी मुझ जैसी लड़की की.

उसने जब से मुझे स्कूल में देखा था मेरे बारे मैं सोच सोच के कई बार मूठ मारी थी और अब वो मेरी कुँवारी चूत को चोदने वाला था. उसके आखों में चमक आ गयी थी.

‘फिकर मत करो में तुम्हे धीरे से चोदुन्गा’. टीचर बोला और मंन में सोचा ‘आज तो साली की चूत फाड़ के रख दूँगा’. टीचर के अंदर का जानवर जाग गया था. उसे सोलाह साल की कुँवारी चूत मिल रही थी.

टीचर ने मेरी चूत के मूह पे अपने लंड रखा. मुझे डर के मारे पसीना आ गया था और साथ ही लंड चूत में लेने की बैचैनि भी हो रही थी.

एक ज़ोरदार धक्का लगा के साथ टीचर ने अपना लंड मेरी चूत में 3 इंच तक घुसा डाला. मैं इतने दर्द के लिए तैयार नहीं थी और चीख पड़ी.

‘अभी तो शुरुआत है पायल’ टीचर ने कहा. उसे देख के लग रहा था कि उसे मेरी तकलीफ़ से मज़ा आ रहा था. टीचर 3 इंच लंड अंदर बाहर कर रहा था. धीरे धीरे मेरा दर्द कम हुआ.

‘और लंड चाहिए पायल’ टीचर ने हंसते हुए पूछा.

‘नही टीचर. बहुत बड़ा है’

‘अरे अभी तो आधा भी नही गया’

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‘प्लीज़ नही टीचर. आप और अंदर डालोगे तो मुझे बहुत दर्द होगा’

‘अरे दर्द होगा लेकिन बादमें मज़ा भी बहुत आएगा मेरी जान’. उसके चेहरे पे मुस्कुराहट थी. उसको अभी मेरी कोई परवाह नही थी सिर्फ़ अपनी हवस का ख़याल था. उसने और एक धक्का लगाया और 6 इंच तक मेरी चूत में घुस गया. मुझे ऐसा लगा कि किसी ने मेरे अंदर चाकू मार दिया हो. मैं अब चीख रही थी.

‘आआआआआईयईईईईईईई…. निकालो इसे .. आआआआआईयईईईईईईईई……..’ मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे.

टीचर ‘आआआआअहह. …….आआआआआआआआहह’ कर रहा था. मुझे जितना दर्द हो रहा था टीचर को इतना ही मज़ा आ रहा था.

रोहित आँखें फाड़ के देख रहा था. उसके सामने सेक्सी कटरीना कैफ़ जैसी बहुत ही खूबसूरत जवान लड़की ज़मीन पे पैर फैला कर लेटी थी और चिल्ला रही थी और उसके उपर था एक गेंड जैसा काला मोटा आदमी जिसका लंबा लंड उसकी छोटी सी चूत में था.

टीचर अब सब सुध्बुध गवा बैठा था उसकी आँखे आधी बंद थी, उसका मूह आधा खुला था, उसकी जीब थोड़ी सी बाहर थी और क़िस्सी जानवर की तराह जीब से थूक टपक के नीचे मेरे गालों पे गिर रही थी. नीचे में दर्द के मारे चिल्ला रही थी और अपने दोनो हाथो को टीचर की छाती पे मार उससे दूर हटाने की कोशिश कर रही थी. मेरे मारने से टीचर को कुछ असर नही हो रहा था.

वो अपना लंड एक आध इंच बाहर निकालता और फिर से अंदर डाल देता.

फिर अचानक टीचर ने एक धक्के में पूरा 8 इंच का मोटा लंड मेरी छोटी सी चूत में घुसेड दिया. इतना दर्द हुआ कि मेरा चिल्ला ना बंद हो गया. मेरी आँखों के सामने एक ढुँधलापन छाने लगा और मैं बेहोश होने वाली थी. तभी टीचर नीचे झुक अपनी मोटी जीब मूह से निकाल मेरे चेहरे को नीचे से उपर चाटने लगा.

मेरी आँखे खुल गयी और मेने टीचर से रोते रोते भीक माँगी ‘प्लीज़ टीचर, अब और नही सहा जाता’. पर टीचर तो जैसे अपनी ही दुनिया में था. उसे कुछ सुनाई या देखाई नही दे रहा था. सिर्फ़ अपने मोटे लंड पे एक टाइट चूत का एहसास हो रहा था.

टीचर अब पूरा मुझ पे लेट गया था और मेरे चेहरे को कुत्ते के जैसे चाट रहा था. मुझे उसके पूरे शरीर का वज़न अपने पर महसूस हो रहा था.

उसने अपना 8 इंच का लंड धीरे से आधा बाहर खीचा और वापस अंदर डाला. में फिर से चीख पड़ी. मेरी चीख रोकने के लिए टीचर ने अब अपने होंठ मेरे होठों को लगा दिए और चूसने लगा. मैं अपने सारे शरीर से टीचर को अपने उपर से धकेलने की कोशिश कर रही थी. लेकिन इतनी तो मुझ में ताक़त थी नही. रोहित अपने छोटे से लंड को सहला कर नज़रो का मज़ा ले रहा था.

टीचर अब मेरी चुदाई की रफ़्तार बढ़ाने लगा और खटखट मेरी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा. मैं उसके नीचे फड़फड़ाती रही और चीखने की कोशिश करती रही पर उसने अपने होंठ मेरे होंठो पे ज़ोर से चिपका के रखे.

15 मिनिट तक टीचर मुझे ऐसे ही चोद्ता रहा. आख़िर मेरा दर्द थोड़ा कम होने लगा और मैने चीख ने की कोशिश करना बंद कर दिया. मैने रोना भी अब बंद कर दिया था. टीचर ने अपने होंठ मेरे होठों से दूर ले कर कहा ‘अब मज़ा लेना शुरू कर’

मुझे अब थोड़ा थोड़ा मज़ा आ रहा था. टीचर ने अचानक अपना लगभग पूरा लंड बाहर निकाल के फिर से अंदर डाला और मुझे ऐसे चोदने लगा. मेरा मज़ा और बढ़ गया.

मुझे अभी भी काफ़ी दर्द हो रहा था पर बहुत मज़ा आ रहा था. टीचर का गरम लंड मेरे चूत में अंदर बाहर हो रहा था. हरेक धक्के पे मेरा दर्द कम और मज़ा ज़्यादा हो रहा था. में सिसकारियाँ भरने लगी ‘आआआआआअहह…. .आआआआआआआहह…म्*म्म्मममम म………….

आआआआआआआआअहह……’ टीचर जम कर मेरी चुदाई कर रहा था. कुछ देर चुदाई होने के बाद टीचर ने लंड निकाले बिना मुझे अपने उपर ले लिया. मैं अब टीचर के उपर लेटी मेरे बूब्स टीचर के चाहती पे थे और में टीचर के लंड पे उपर नीचे हो रही थी. मेरे बूब्स टीचर के चाहती पे रगड़ रहे थे.

टीचर ने अपने दोनो हाथो से मेरी गांद मसलना शुरू कर दिया. टीचर के मोटे शरीर पे मेरा छोटा सा बदन था. टीचर का काला लंड मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था. मैं अब मस्त हो गयी थी और चुदाई का मज़ा ले रही थी. मैने कभी ज़िंदगी में इतना आनंद नहीं पाया था. मैने अब टीचर का पूरा लंड अपनी चूत में ले कर अपनी कमर गोल गोल घुमाने लगी

‘आआआआहह…… बहुत खूब पायल’

टीचर अब झरने के बहुत करीब था. अचानक टीचर ने अपने दोनो हाथों से मुझे ज़ोर से जाकड़ लिया. मैं हिल नही पा रही थी और टीचर भी लंड अंदर बाहर नही कर रहा था. मुझे कुछ समझ नही आया. तभी मैने रोहित के हाथों को मेरी गांद मसल्ते हुए महसूस किया. फिर उसने अपना छोटा सा लंड मेरी गांद के छेद पे लगा दिया. मैं समझ गयी कि ज़रूर टीचर और रोहित ने पहले से ये प्लान बनाया होगा.

‘साले कुत्ते ये क्या कर रहा है’ मैं चिल्लाई रोहित पर.

‘वाह मेरे चेले. चोद डाल इसकी गांद को जैसे मैं तेरी चोद्ता हू. कोई रहम

मत करना’ टीचर ने कहा

‘नही प्लीज़, मुझे जाने दो’ मैं बहुत डर गयी थी अब. रोहित ने दोनो हाथो से मेरी गांद फैलाई हुई थी और अपने लंड को मेरी गांद के छेद में घुसेड़ने की कोशिश कर रहा था.

‘ज़ोर लगा साले कुत्ते’ टीचर ने उसको चिल्ला के कहा. रोहित ने एक ज़ोरदार धक्का लगाया और उसके लंड का उपर का हिस्सा मेरी गांद में घुस गया ‘आआआआऐययईईईईईईई’ में ज़ोर से चीख पड़ी. मुझे बेहद दर्द हो रहा था. मैने आज तक गांद में उंगली भी नही डाली थी. रोहित ने और एक धक्का लगाया और एक और इंच लंड अंदर चला गया.

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