हवस की पुजारन

By   October 5, 2016
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मैं अपनी ज़िन्दगी की sex kahani सुनाती हूँ. ये सब शुरू होता है एक पब्लिक टॉयलेट के किस्से से जिसने मुझे हवस की पुजारन बना दिया था. पेश है एक जबरदस्त public sex story..

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5

पार्ट 6

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पार्ट 7


मेरा नाम पायल हैं. मैं 24 साल की हूँ. मुंबई के एक मशहूर और बहुत राईस परिवार में मेरी 6 साल पहले शादी हुई. मेरे घर में मेरे ससुर जो 66 साल के हैं, मेरे पति जो 44 साल के हैं और मेरा सौतेला बेटा जो अब 17 साल का हैं रहतें हैं. नौकर चाकर तो इतने हैं कि मैं गिनने की कोशिश भी नहीं करती. मेरे पति का नाम देश के टॉप राईसो मैं आता है.

में दिखने में बहुत ही गोरी और क्यूट हूँ. लोग कहते है कि में बिल्कुल कटरीना कैफ़ जैसी दिखती हूँ. मेरा फिगर भी एक मॉडेल की तरह सेक्सी हैं. मेरे बूब्स बड़े हैं और मेरी कमर पतली. में अपने फिगर का बहुत ख़याल रखती हूँ और हर रोज़ एक घंटा उसको मेनटेन करने के लिए एक्सर्साइज़ करती हूँ. मुझे बचपन से ही मेरी सुंदरता पे नाज़ रहा हैं. सारे लड़के मुझ पे मरते थे और मुझ से बातें करने की कोशिश करते थे.

मेरी मा ने मुझे बचपन से सीखा के रखा था कि ‘किसी भी लड़के के चक्कर में मत पड़ना, तू इतनी सुंदर है कि बड़ी होकर तुझे बहुत अछा और राईस पति में ढूंड के दूँगी. मेरी बात याद रखना बेटी. यह सेक्स वेक्स से शादी से पहले दूर ही रहना. यह सेक्स एक गहरी खाई की तरह हैं. अगर इस में गिरगी तो गिरती ही चली जाऊगी’. मुझे अपने आप पर पूरा विश्वास था. में अपने मा से कहती ‘फिकर मत करो मा. तुम्हारी बेटी बहुत स्ट्रॉंग हैं. मेरे मनोबल को कोई नही तोड़ सकता’ . उस वक़्त मुझे वासना की ताक़त का अंदाज़ा नही था.

आज जब मैं उस समय के बारे में सोचती हूँ तो लगता हैं कि कितनी बेवकूफ़ थी में. मेरी मा की सलाह कोई आम लड़की के लिए ठीक होगी लेकिन में आम लड़कियों के जैसे नही हूँ. में सेक्स की पुजारन हूँ. मेरा ज़िंदगी का एक ही मकसद हैं और वो हैं चुदाई.

यह कहानी तब से शुरू होती हैं जब मैं 18 साल की थी और 10थ क्लास में पढ़ती थी. मैं एक अमीर घर में बड़ी हुई थी. मेरे घर में सिर्फ़ मैं और मेरी मा थे. पिताजी का स्वरगवास कई साल पहले हो चुक्का था. पढ़ाई में ठीक ठाक ही थी लेकिन मेरी मा की तरह दुनियादारी के मामले काफ़ी होशियार थी. उस वक़्त सारी लड़कियों की तरह मुझे भी सेक्स मैं बहुत इंटेरेस्ट था पर में अपनी मा की सलाह मानते हुए लड़को से दूर ही रहती थी.

मेरी सारी सहेली कहती थी की मेरा फिगर बहुत ही सेक्सी हैं. मेरे बड़े बूब्स और पतली कमर काफ़ी लड़को को पागल कर रहा था पर मेने मेरी मा की बात मान कर ठान लिया था के शादी से पहले में लड़को के चक्कर में नहीं पाड़ूँगी. मेरी सारी सहेली अपनी अपनी चुदाई की बातें करती थी. दो लड़कियाँ ने तो अपने बाप के साथ भी चुदाई का मज़ा लिया था. उनकी बातें सुनकर मुझे बहुत जलन होती थी.

में उन सबसे से कई ज़्यादा सेक्सी थी फिर भी में ने आज तक किसी लड़के को कपड़े बिना नही देखा था. मुझे कई बार अपनी सहेली के सेक्स के किस्से सुन कर बहुत सेक्स चढ़ जाता. ऐसे मोके पे में अपने आप को अपनी उंगलियाँ से संतुष्ट कर लेती. पर में जानती थी के जो मज़ा किसी मर्द के लॉड से मिल सकता हैं वो उंगलियों से कभी नही मिल सकता हैं. मैं कई बार सारी सारी रात सेक्स के बारे में सोच कर अपनी चूत से खेलती रहती लेकिन हमेशा मन मे यह बात रखती की कुछ भी हो जाए शादी से पहले में किसी लड़के को हाथ नहीं लगाने दूँगी और अपने होने वाले पति के लिए बिल्कुल कुँवारी रहूंगी.

एक दिन में स्कूल से निकल कर घर जा रही थी. मुझे बहुत ही जोरो से मूत लगी थी. मुझे स्कूल के मूत्रालय में जाना अछा नही लगता था क्यों कि वहाँ बहुत बदबू आती थी. मेने सोचा कि स्कूल के बगल में ही पब्लिक टाय्लेट था में वाहा मूत लूँगी. वाहा जाने पर पता चला कि लॅडीस टाय्लेट पे ताला लगा था.

मुझसे अब रुका नही जा रहा था. मेने सोचा क्यों ना जेंट मूत्रालय में मूत लूँ अगर कोई अंदर ना हो तो किसी को पता नही चले गा. मेने जेंट्स मूत्रालय के पास जा कर उसका दरवाज़ा खोल दिया. वहाँ अंदर काफ़ी अंधेरा था और में 1 मीं. तक दरवाज़े पर ही खड़ी रही. धीरे धीरे मुझे दिखाई देने लगा. अंदर सामने तीन टाय्लेट थे.

तीन मैं से एक कोने वाला टाय्लेट बंद था और उसके अंदर से कुछ अजीब सी आवाज़ आ रही थी. मुझे और कोई नज़र नही आया तो मैने 2 कदम अंदर बढ़ा लिए. अंदर जाने पे पता चला के दूसरे कोने में एक और आदमी मूत रहा था, उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और वो हस्ते हुए बोला ‘कुछ चाहिए बेबी?’

यह कह हर वो मेरी तरफ मूड गया. मेरी नज़र उसके लंड पे गिरी जो उसके पॅंट के ज़िप से बाहर लटक रहा था. वो आदमी लगभग 50 साल की उमर का होगा और दिखने में मुझे कादर ख़ान जैसा लग रहा था. उस आदमी का लंड खड़ा नही था पर फिर भी इतना बड़ा था कि मुझे यकीन नही हुआ. मैने आज तक किसी आदमी का लंड नहीं देखा था. में डर गयी और डर के मारे भाग के बीच वाले टाय्लेट में जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया.

अंदर जा कर में चुप चाप 2 मिनिट खड़ी रही. फिर में ने मूत लिया. मुझे बाजू वाले टाय्लेट की आवाज़ अब सॉफ सुनाई दे रही थी. ऐसा लग रहा था कि कोई चीखने की कोशिश कर रहा हो पर उसका मूह किसी ने दबा के रखा हो. मैने देखा कि टाय्लेट के साइड में कई बड़े छेद थे. में अपने हाथ और घुटनो के बल कुत्ति की तरह ज़मीन पर बैठ कर आपनी आँखे ऐसे ही एक छेद पर लगा कर बाजू की टाय्लेट के अंदर का नज़ारा देखने लगी. अंदर मैने जो देखा वो देखकर मेरे होश उड़ गये. मेने देखा की अंदर एक लड़का जो मेरी क्लास में पढ़ता है और लगभग मेरी ही उमर का होगा, अपने घुटनो तले ज़मीन पर बैठा था.

लड़के का नाम रोहित था. उसके सामने हमारा स्पोर्ट्स का टीचर जो एक बड़ा काला सा मोटा आदमी हैं अपने लंड को उसके मूह में घुसेडे हुए था. रोहित एक दम ही गोरा और चिकना था और पूरा नंगा था. मेने देखा कि उसका का छोटा सा लंड खड़ा था. वो अपने हाथो से टीचर को दूर धकेलने की कोशिश कर रहा था.

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डिसूज़ा का लंड और मेरी प्यास

लेकिन टीचर ने अपने दोनो हाथ लड़के के सर पे रख के उसके सर को अपने लंड की ओर खीच लिया था और पूरा लंड उसके मूह में घुसेडे हुआ था. दो मिनिट बाद किसी तरह से रोहित ने अपना मूह टीचर के लंड से दूर किया. जब स्पोर्ट्स टीचर का लंड उसके के मूह से निकला तो में दंग रह गयी. वो लगभग 8″ लंबा होगा और मोटा भी बहुत था और एकदम काला था. मुझे यकीन नही हो रहा था कि इतना बड़ा लंड उस लड़के के मूह में समा केसे गया. रोहित अब ख़ास रहा था.