हवस की पुजारन – VI

By   October 28, 2016

दो-दो तगड़े बुड्ढो से चुदने की बात ही अलग थी. बुड्ढ़े तो बहुत ही गन्दगी पे उतर आये थे, पर क्या करूँ मुझ रंडी को भी तो बहुत मज़ा आ रहा था. मुझ randi ki kahani का अगला चुक्कड़ पार्ट-

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पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5

पार्ट 6

पार्ट 7


मिस्टर. शर्मा मेरी चूत अब और ज़ोरो से चाट रहे थे और मेरे मूह से ‘म्*म्म्मममह. …म्*म्म्मममह’ की सिसकियारी निकल रही थी. फिर अचानक मिस्टर वर्मा ने अपने बॉल मेरे मूह से निकाल दिए और थोड़ा उपर होके अपने गांद का छेद मेरे होटो के नज़दीक ला कर नीचे बैठने लगे.

मुझे पता चल गया के वो चाहते थे कि मैं उनके गांद के छेद को चाटलू. पर ये मुझे नही करना था और मैने अपना सिर मोड़ लिया.

‘क्या हुआ बेटी ‘

‘मैं ऐसा नहीं करूँगी, मुझे गंदा लगता हैं’

‘फिकर मत करो बेटी. मैने स्नान करने के वक़्त इससे साबुन से बहुत साफ कर के रखा हैं’. तब मुझे समझ में आया की मिस्टर. वर्मा अपनी गांड पे साबुन क्यूँ लगा रहें थे.

‘नहीं यानी नही. में नही करूँगी

यह सुन कर मिस्टर. शर्मा ने मेरी चूत से अपनी जीब निकाल दी और कहा ‘बेटी यह ग़लत बात हैं. ऐसे ज़िद नहीं करते. अगर तुम वर्मा की गांड नहीं चाटोगी तो में भी तुम्हारी चूत नहीं चाटूंगा’

‘प्लीज़ मिस्टर शर्मा, अपनी जीब फिर से अंदर डालो मुझे बहुत मज़ा आ रहा हैं’

‘मज़ा आ रहा हैं ना. अगर तुम्हे मज़ा लेना हैं तो मज़ा देना भी तो पड़ता हैं ना. ऐसा करो मैं तुम्हारी चूत चाटू तब तक तुम उसकी गांड के छेद को थोड़ा थोड़ा उपर से चाट लो, ठीक हैं’

‘मैने कह दिया ना नहीं मतलब नहीं’.

‘देखो बेटी ज़िद नही करते. अगर तुम वर्मा की गांड चॅटो गी तो वर्मा तुम्हारे बूब्स को अच्छी तरह से चोदेगा’ मुझे समझ में नहीं आया की बूब्स को कैसे चूदेन्गे ? ‘वो कैसे होता हैं’ मैने पूछा ‘तुम उसकी गांड को चॅटो और वो तुम्हे तुम्हारे बूब्स चोद के दिखाता हैं. ठीक हैं ?’

‘ठीक हैं’ मैने कहा. ‘लेकिन अगर आप बंद करदेंगे तो मैं भी बंद कर दूँगी’

‘ठीक है बेटी. चलो शुरू हो जाओ’ यह कह के मिस्टर शर्मा ने मेरी चूत को फिरसे चाटना शुरू कर दिया.

मैने अपना सिर सीधा कर लिया. मिस्टर वर्मा ने अपनी गांड धीरे से नीचे कर ली और गांड का छेद मेरे होंठो के करीब ला दिया.

मैने अपने होठ खोल के अपनी जीभ धीरे से बाहर कर ली और धीरे से उपर उपर से थोड़ा थोड़ा चाटना शुरू कर दिया. ‘थोड़ा ज़ोर से चॅटो बिटियाँ’ मिस्टर वर्मा ने कहा. ‘नहीं पहले आप करने वाले थे वो करिए’. ‘ठीक हैं’ यह कह के मिस्टर वर्मा ने अपना लंड मेरे दोनो बूब्स के बीच में रख कर मेरे दोनो बूब्स अपने हाथो से साइड से उनके लंड पे दबा दिए और धीरे धीरे अपना लंड बूब्स के बीच रगड़ने लगे.

अपनी उंगलियों से वो मेरे निपल खिच रहे थे. उनका गरम गरम लंड मेरे बूब्स के बीच और मेरे निपल का खिचना और साथ ही मिस्टर शर्मा का ज़ॉरो से मेरी चूत चाटना, ये सब एक साथ महसूस कर के मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. मैने सोचा कि ये दोनो मुझे इतना मज़ा दे रहे हैं तो मेरा भी फर्ज़ हैं की मैं उनको खुश करू. यह सोच के मैने मिस्टर वर्मा की गांड को थोड़ा ज़ोर से चाटना शुरू कर दिया, उनके गांड के छेद में भी काफ़ी सफेद बाल थे और उन बाल से मुझे थोड़ी गुदगुदी हो रही थी.

उन्होने वाकेइ अपनी गांड अछी तरह से सॉफ की थी. मिस्टर. शर्मा अब ज़ोरो से मेरी चूत चाट रहे थे. में पागल सी हो रही थी. मैने भी अपनी जीब को मिस्टर. वर्मा की गांड के छेद पे ज़ोर दे कर अंदर डाल दिया. मिस्टर. वर्मा के मूह से ‘आआआआआआआहह’ करके आवाज़ निकल गयी ‘बहुत अच्छे बेटी, और ज़ोर से चॅटो’. मैने अपनी जीब को मिस्टर. वर्मा की गांड में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

मिस्टर. वर्मा पागल हो रहे थे और ‘आआआहह….आआआआहह’ की आवाज़े निकाल रहे थे. मुझे आश्चर्या हो रहा था कि में इस बुड्ढे आदमी की गांड में अपनी जीब डाल के हिला रही थी पर मुझे ज़रा भी बुरा नहीं लग रहा था. उपर से मुझे मज़ा आ रहा था. कुछ मिनूटों तक हम तीनो ऐसा ही करते रहे.

मिस्टर. वर्मा मेरे बूब्स के बीच लंड रगड़ते रहे और में अपनी जीब उनकी गांड में पूरा डाल के हिलाती रही. इतनी देर जीब को कड़क रख के गंद के छेद में रखने से अब मेरी जीब में दर्द होने लगा था. मैने उसे बाहर निकाला. मिस्टर वर्मा ने कहाँ ‘अंदर से मत निकालो बेटी, बहुत मज़ा आ रहा हैं’

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‘अब मुझ से और नही होगा, जीब को कड़क रखते रखते मुझे दर्द हो रहा हैं’

‘ठीक हैं मेरी गांड के अंदर नहीं लेकिन छेद को चाटना बंद मत करो’

‘ठीक हैं’ कहके मैने उनके गांड के छेद को चाटना ज़ारी रखा.

‘थोड़ा ज़ोर से चॅटो बेटी. और अपने होठ भी लगाओ उससे’. मेने अपने होंठ आगे कर के उनके गांड के छेद को होंठो से चूमने लगी और ज़ोर से चाटने लगी.

कुछ मिनूटों के बाद मिस्टर. शर्मा ने मेरी चूत से जीब निकाल दी. मैं सोच ही रही थी की वो अब क्या करेंगे की उन्होने मेरी दोनो टांगे उठा कर अपने कंधे पे डाल दी और मुझे अपनी गांड के छेद पे उनका लंड रगड़ता महसूस हुआ.

मैने सोचा के अगर उनका इतना बड़ा लंड मेरी गांड में घुसा तो में तो मर जाऊंगी. मैने तो सिर्फ़ एक बार रोहित का छोटा सा लंड अपनी गांड में लिया था और वो भी बहुत मुश्किल से. मुझे पता नही चला लेकिन वर्मा और शर्मा ने एक दूसरे को इशारा कर के तैयार कर दिया था. में कुछ कहूँ उससे पहले ही मिस्टर. वर्मा ने अपनी गांड और नीचे कर ली और पूरी तरह मेरे चेहरे पर बैठ गये और अपनी गांड का छेद मेरे चेहरे पे रगड़ने लगे.

मैने अपना सर हटाने या मोड़ ने की कोशिश की पर उनका पूरा वजन मुझ पे था और मैं अपना सर बिल्कुल हिला नही पा रही थी. मिस्टर. शर्मा ने एक बहुत ज़ोर का धक्का मारा और मुझे उनका लंड 4 इंच तक मेरे गांड मे जाता महसूस हुआ. मे ज़ोर से चीखना चाहती थी पर मेरा मूह तो मिस्टर वर्मा की गंद से दब गया था.

मिस्टर शर्मा ने अपने लंड को थोड़ा अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और मेरा दर्द कम हो गया. लेकिन में जानती थी के किसी भी वक़्त वो अपना बाकी का लंड भी मेरी गांड में डाल ही देंगे. और ऐसा ही हुआ. उन्होने और एक ज़ोरदार धक्का लगाया और उनका लंड पूरा का पूरा मेरी गांड में चला गया.

मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे, में अपने हाथो से कभी मिस्टर शर्मा तो कभी मिस्टर वर्मा को मार के हटाने की कोशिश कर रही थी पर उनपर कोई असर नही हुआ, में दर्द से छटपटा रही थी. वो अब खुशी से ‘आआआआअहह… आआआआआआआअहह’ चिल्ला कर मेरी गांड में अपना लंड धीरे धीरे अंदर बाहर कर रहे थे. ‘बहुत टाइट हैं बिटियाँ रानी, लगता हैं कभी गांड नही मरवाई आआआ आह ह…