कैसे मैं एक कलि से फूल बनी – पार्ट 1

By   September 28, 2017
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हेलो दोस्तों, मुझे इस वेबसाइट की Hindi sex kahaniya बहुत ही sexy लगती है, इसलिए मैंने सोचा मैं भी अपनी स्टोरी जो मैंने सालो पहले पढ़ी है, यहाँ पोस्ट कर दूँ| उम्मीद है ये Hindi Sex Story आपको पसंद आये|

कहानी के अन्य भाग–

पार्ट 1 

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पार्ट 2

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मैं श्रीनगर कश्मीर से महक अपने तजुर्बे आप लोगों से शेयर करना चाहती हूँ । कश्मीर को धरती पे स्वर्ग कहा जाता है । यहाँ कुदरती खूबसूरती की भरमार है और यह बात यहाँ की लडकियों मैं भी है । कश्मीरी लडकियों की खूबसूरती के चर्चे बोहुत दूर तक हैं और वोही चर्चे मेरे भी हैं । मैं कॉलेज ख़तम कर चुकी हूँ और नोकरी करती हूँ । सेक्स की आदत छोटी उम्र से लग गयी और उसका कारण था यहाँ के मर्दों की भूख ।
मेरी याद में सबसे पहली बार मेरा योंन-शोषण तब हुआ जब मैं # साल की थी । एक 18 साल का लड़का प्रकाश कुमार हमारे पड़ोस मैं रहता था और जब भी मैं बाकी बच्चो के साथ खेल रही होती तो वो मुजे साइड पे बुला के मेरे जिस्म पे हाथ फेरा करता और मेरे होंठों को चूसा करता । 10 मिनट ऐसा करने के बाद वह मुझे टॉफी दे देता और बोलता किसी को न सुनाना वरना टॉफी नही मिलेगी। ऐसा काफी दिनों तक चलता रहा और फिर एक दिन वो मुझे अपने घर ले गया। वहां सोफ़ा पे लिटा के उसने पहले 5 मिनट मुजे चूम चूम के बेहाल कर दिया। फिर अपनी पेंट उतार के मुझे अपना लिंग पकड़ा दिया। मैं हैरान थी क्युकी पह्की बार खड़ा लिंग देख रही थी। उसने मुझे पुछा की टॉफी पसंद है या चोकलेट तोह मेने कहा चाकलेट। उसने मुझसे कहा की अगर चाकलेट चाहिए तो उसका लिंग मसलना पड़ेगा। मैं भोली भाली कमसिन बच्ची थी मुझे क्या पता यह सब क्या होता हे। मैं उसका लिंग हिलाने और मसलने लगी और वोह भी मेरे जिस्म पे हाथ फेरने लगा । फिर उसने मुजे चुम्बन दे के लिटाया और मेरी frock उठा के* पेंटी उतार दी और मेरी टांगो के बीच अपना लिंग रख के आगे पीछे झटके देने लगा । साथ ही वोह हमारे मोहल्ले की सबसे सेक्सी सरदारनी जिसका नाम रोमा कौर था और जो मेरी दूर की cousin बेहेन थी उसका नाम ले ले के मुजे चोदने लगा । मैं हैरान परेशान सी सोफा पे लेटी हुई उसका यह कुकर्म झेलती रही । फिर उसने मुझे उलटी लिटा दिया पेट के बल और पीछे से मेरी टांगो में लिंग सटा के धक्कम रेल चलाता रहा। 5 मिनट बाद उसका सफ़ेद घाड़ा पानी निकला और मुझे सीधी करके मेरे पेट और झांघो पे गिरा दिया । मैं हैरान हो गयी क्युकी पहली बार वीर्य देखा था । मेने पुछा यह दही कहाँ से आया तोह वोह कमीना हस के बोला हाँ यह दही है स्वाद ले के देख । मेने ऊँगली से उठा के जीब पे रखा तो अजीव सा नमकीन स्वाद आया । फिर उसने अपनी ऊँगली पे लगा के सारा वीर्य पिला दिया । उसके बाद प्रकाश ने मुझे चोकलेट दी और बोल किसी से ना कहना । मुझे चोकलेट पसंद थी और फिर यह सिलसिला चल पड़ा। वह तक़रीबन हर दुसरे या तीसरे दिन मेरा योंन शोषण करता और बदले में चोकलेट या चिप्स दे देता । पर एक बात थी उसने कभी भी मेरे सुराख़ में लिंग डालने की कोशिश नही की ।
यह था मेरा पहले योंन सम्बन्ध जो 6 महीने चला । फिर प्रकाश के पापा का तबादला किसी और शेहर हो गया ।

प्रकाश के चले जाने के बाद अगले कई साल मेरी जिंदगी में कोई नया लड़का नही आया। मैं अब बड़ी हो रही थी और मेरे अंदर नई नई उमंगें जवान होने लगी थी। टीवी पे फिल्मो में दिखने वाले सीन्स मुझे मस्त कर देते। रोमांटिक सीन्स देख देख के मैं भी अपने हीरो की राह देखने लगी थी। कोई भी लड़का मुझे देखता तोह मैं अंदर ही अंदर उम्मीद लगा बैठती की क्या येही हे मेरा राजकुमार।
फिर वोह पल आ ही गया जब मेरा राजकुमार मेरे सपनो को पूरा करने चला आया। मैं अपनी उम्र नही बता सकती क्युकी admin ने warning दी है। आप समझ लें यह वोह उम्र थी जब पहली बार लड़की बच्ची से जवान कहलाने लगती है। हमने अपना घर बदल लिया था और नये मोहल्ले में एक किराये के सेट में रहने चले आये थे। यह पुराने मोहल्ले से बड़ा और ज्यादा पोश एरिया था। मैंने ध्यान दिया की दो लड़के आते जाते मुझे घूर के आपस में बातें करते हैं। वह दोनों classmate थे और मेरे स्कूल के सीनियर्स भी। मैं भी उनसे बात करना चाहती थी पर उनकी और से पहेल का इंतजार कर रही थी। कुछ दिन बीत गये और मेरी उस मोहल्ले में नई सहेलियां बन गयी। उनमे से सोना दीदी मेरी बेस्ट फ्रंड थी। वोह एकदम खुल्ले ख्यालों वाली पंजाबी कुड़ी थी। मोहल्ले के लडको से उसकी खूब पटती थी।
एक शाम को हम पार्क में खेल रहे थे की तभी सोना दीदी कहीं गायब हो गयी। उनको ढूँढने के लिए मैं पार्क के पिछले कोने में गयी तोह वहां झाड़ियों से मुजे सोना दीदी के हस्सने की आवाज़ आई। मैं चोकन्नी हो गयी और बड़े ध्यान से करीब गयी। वहां जो हो रहा था उस से मेरे होश उड़ गये। सोना दीदी को दो लडको ने अपने बीच दबोच रखा था और उनकी स्कर्ट उठी हुई थी कमर तक। मेरे दिमाग में प्रकाश के साथ बिताये पल याद आने लगे और मेरा जिस्म मस्ती के सैलाब में बहने लगा।

मैं सोना दीदी की हरकतों को देख के हैरान भी थी और उनकी हिम्मत की दाद भी दे रही थी। तभी वह दोनों लडको पे मेरी नजर पड़ी तोह देखा की यह वही दोनों हैं जो मुझे घूरते थे। मैने ध्यान से उनकी बातों को सुना तोह पता चला की वह मेरे ही बारे में बातें कर रहे थे। सोना दीदी ने उनको मेरा नाम बताया और कहा की वह दोनों सबर रखें तोह मेरी उनसे दोस्ती करवा देंगी। यह बात सुन के मेरा दिल मस्ती से कूदने लगा और मैं वहां से चली आई। 15 मिनट बाद वह तीनो भी आ गये और सोना दीदी ने मुझे बुला के अपने दोनों दोस्तों से परिचय करवाया। उनके नाम विजय और पियूष था। विजय ऊँचा लम्बा हट्टा कट्टा लड़का था। रंग सांवला और चेहरे पे शेव बनाई हुई थी जिस से अंदाजा हो गया की वह व्यस्क हो चूका था। मोहल्ले के सभी लड़ों पे उसका दबदबा था क्युकी वह बॉडी बिल्डिंग करता था gym में और अमीर माँ बाप का इकलोता बेटा था। उसके पापा पंजाबी ब्राह्मण और माँ कश्मीरी पंडित थी। पियूष कश्मीरी पंडित लड़का था। एकदम गोरा चिट्टा और चिकना पर बातों का उतना ही तेज़ और चिकनी चुपड़ी बातें करने वाला। विजय ने दोस्ती का हाथ मेरी और बढाया और मैंने भी बिना देरी के अपना हाथ उसके हाथ में दे दिया पियूष भी मेरे पास आया और हाथ आगे बढाया पर विजय मेरा हाथ छोड़ने को तयार ही नही था। सोना दीदी हस्स्ते हुए बोली महक विजय का हाथ छोड़ेगी या बेचारा पियूष खड़ा रहे। मैं शर्म से लाल हो गयी पर विजय ने बेशर्मो की तरह मेरा हाथ पकडे रखा। मुझे मजबूरी में अपने बायें हाथ से पियूष का हाथ थामना पड़ा। यह देख के सोना दीदी बोली की तुम दोनों नई सरदारनी के चक्कर में पुरानी को भूल तोह नही जाओगे। इस्पे विजय ने हस के कहा की चिकनी सिखनियो का साथ नसीब वालों को मिलता है। इस बात पे हम सब खूब खिलखिला के हस दिए और हमारी दोस्ती का सफ़र शुरू हो गया

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