खेत में घमासान – II

By   December 25, 2016
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माँ को खेत में मस्त चोदा मैंने पर माँ के सवाल से मैं चौक गया. मेरी माँ मुझे अपनी बहन को चोदने की पूछ रही थी. मुझे यकीं था की माँ पक्का मामाजी से चुदवाती ही होगी. इन incest sex kahani का अगला मसालेदार भाग-

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4


उस दोपहर मैंने अपनी मां को अच्छा घंटे भर चोदा और चोद चोद कर उसकी चूत को ढीला कर दिया. आखिर पूरी तरह तृप्त होकर और झड़ कर जब मैं उसके बदन पर से उतरा तो मेरा झड़ा लंड पुच्च से उसकी गीली चिपचिपी बुर से निकल आया. मां चुद कर जांघें फ़ैला कर अपनी अपनी चुदी बुर दिखाते हुए हांफ़ते हुए पड़ी थी. वह धीरे से उठी और कपड़े पहनने लगी. मैंने भी उठ कर अपने कपड़े पहन लिये. हम खेतों के बाहर आ कर ट्रैक्टर तक आये और मां बर्तन उठाने में लग गयी. बरतन जमाते जमाते बोली “रात को मेरे कमरे में एक बार आ जाना.” मैंने पूछा “मां रात को फिर चूत मरवाएगी?” मां ने जवाब नहीं दिया, बोली “पूनम को तो तू चोदता होगा?”

पूनम मेरी छोटी बहन है, मुझसे एक साल छोटी है. मैंने आंखें नीची कर लीं. मां बोली “ठीक से बता ना. बहन को तो बहुत लोग चोदते हैं.”

मैं धीमी आवाज में बोला ” नहीं मां अभी तक तो नहीं”

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मां मेरे पास आकर बोली “बेटे, अपनी बहन को नहीं चोदा तूने आज तक? बहन को तो सबसे पहले चोदना चाहिये, बेटे, भाई का लंड सबसे पहले बहन की चूत खोलता है. बेटे पता है? गांव में जितने भी घर हैं, सब घरों में भाई बहनों की चूत नंगी कर के उनमें लंड देते हैं.” मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि मेरी मां खुद मुझे अपनी बहन को चोदने को कह रही थी.

“मुझे ही देख, तेरे मामाजी रोज चोदते हैं मुझे, दो दिन नहीं चुदी तो क्या हालत हो गयी मेरी. पूनम को मत सता, चोद डाल एक बार” मां ने फ़िर कहा.

मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ. हमारे गांव की यह प्रथा ही है. मामाजी को शादी की जरूरत क्यों नहीं पड़ी ये मुझे मालूम था.

बर्तन जमा कर के मां घर की ओर चल पड़ी. चुद कर उसके चलने का ढंग ही बदल ही गया था, थोड़े पैर फ़ैला कर वह चल रही थी. पीछे से उसकी चाल देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैं तेज चलने लगा कि उसके कानों में कुछ गंदी गंदी बातें कहूं.

तभी मैंने हमारी नौकरानी रज्जो को हमारी ओर आते देखा. वह हमारे यहां कई सालों से काम कर रही थी और मां के बहुत नजदीक थी. मुझे लगता है मां उससे कुछ भी छुपाती नहीं थी. उसके कई पुरखों से वहां की औरतें हमारे यहां काम करती थीं. करीब करीब वह मां की ही उम्र की थी. मां की ओर वह बड़ी पैनी निगाह से देख रही थी.

पास आने पर उसने मां से पूछा “क्यों मालकिन, छोटे मालिक को खाना खिला कर आ रही हैं?” मां ने हां कहा. वे दोनों साथ साथ चलने लगीं. मैं अब भी उनकी आवाज सुन सकता था. रज्जो सहसा मां की तरफ़ झुकी और नीचे स्वर में कहा “मालकिन आपकी चाल बदली हुई है.” मां ने धीरे से उसे डांटकर कहा “चुप चाप नहीं चल सकती है क्या”.

रज्जो कुछ देर तो चुप रही और फ़िर बड़ी उत्सुकता से सहेली की तरह मां को पूछा “मालकिन आप खेत में मरवा के आ रही हो?”

मां ने उसे अनसुना कर आगे जाने के लिये कदम बढ़ाये पर रज्जो कहां मां को छोड़ने वाली थी. मां ने उससे आंखें चुराते हुए कहा “अच्छा अब छोड़ बाद में बात करेंगे” रज्जो ने मां के कंधों को पकड़कर बड़ी उत्सुकता से पूछा “मालकिन किसका लंड है कि आपकी चाल बदल गई है”.

मां ने उसे चुप कराने की कोशिश की. “क्या बेकार की बात करती है, चल हट.” पर मां के चेहरे ने सारी पोल खोल दी. अचानक रज्जो ने मुड़ कर एक बार मेरी तरफ़ देखा और फिर उसका चेहरा आश्चर्य और एक कामुक उत्तेजना से खिल उठा और उसने धीमी आवाज में मां से पूछा “हाय मालकिन आखिर आपने बेटे का ले लिया?”

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अब माँ की गांड मारी

मां ने बड़ी मस्ती से मुस्करा कर उसकी ओर देखा. नौकरानी खुशी से हंस पड़ी और मां को लिपट कर उसके कान में फ़ुसुफ़ुसाने लगी “मालकिन मैं कहती थी ना कि बेटे का लो तभी सुख मिलता है.” फ़िर मां के चूतड़ प्यार से सहलाते हुए उसने कहा “लगता है पूरी फ़ुकला कर दी है. मालकिन मैं कहती थी ना, अपने बेटे को चूत दे दो तो चूत का भोसड़ा बना देते हैं”

मां ने पहली बार माना कि वह खेत में मरवा कर आई है “मेरा तो पूरा भोसड़ा हो गया है री.” फ़िर उत्तेजित होकर उसने रज्जो के कानों में कहा “हाय रज्जो मैं भी अब भोसड़ी वाली हो गई हूं.” दोनों अब बड़ी मस्ती में बातें कर रही थीं “मालकिन अब तो तुम रोज रात बेटे के कमरे में अपना भोसड़ा ले के जाओगी” मां ने उसे डांटा “साली अपने बेटे से तू गांड भी मरवाती है और मुझे बोल रही है.”

रज्जो ने जवाब दिया “मालकिन मैं तो एक बेटे का गांड में लेती हूं और दूसरे का चूत में और फिर रात भर दोनों बेटों से चुदवाती हूं” फ़िर उसने कहा “मालकिन छोटे मालिक का लंड कैसा है?” मेरी मां ने कहा “चल खेत में चल के बोलते हैं, मेरी फिर चू रही है.”

मैं समझ गया कि मां भी रज्जो के साथ गंदी गंदी बातें करना चाहती है. दोनों औरतें खेत में चली गईं. मैं उनके पास था, पर खेत की मेड़ के पीछे छिपा हुआ था. मां और रज्जो एक दूसरे के सामने खड़ी थीं. रज्जो मां को उकसा रही थी कि गंदा बोले. मां ने आखिर उसकी आंखों में आंखें डाल कर कहा “हाय मेरा भोसड़ा, देख रज्जो मेरे बेटे ने आज मेरा भोसड़ा मार दिया, हाय मेरे प्यारे बच्चे ने आज मार मार के मेरी फ़ुद्दी का भोसड़ा बना दिया. रज्जो, मेरे बेटे ने चोद दी मेरी. मेरा भाई तो रोज चोदता है, आज बेटे ने चोद दिया रज्जो” रज्जो मां को और बातें बताने को उकसा रही थी “मालकिन आप अपने बेटे के सामने नंगी हो के लेटी थी? मालकिन जब आपके बेटे ने अपना लंड पकड़ के आपको दिखाया था तो आप शरमा गई थी क्या? भाई से तो आप मस्त होकर चुदाती हो”

रज्जो अब मां को विस्तार से मुझसे चुदने का किस्सा सुनाने की जिद कर रही थी. मां बोली “रज्जो मेरी चूत चू रही है, रज्जो कुछ कर.” रज्जो बोली “मालकिन छोटे मालिक को कहूं? वो अपना लौड़ा निकाल के आ जायें और अपनी मां की चूत में डाल दें”. मां बोली “हाय रज्जो उसको बुला के ला, मुझे उसका मोटा लंड चाहिये.”

मैं यह सुनकर मेड़ के पीछे से निकल कर उनके सामने आ कर खड़ा हो गया. दोनों मुझे देख कर सकते में आ गयीं. मैंने उन्हें कहा कि मैंने उनकी सारी बातें सुन ली हैं और मैं फ़िर से मां को चोदना चाहता हूं.

मां थोड़ी आनाकानी कर रही थी कि कोई देख न ले. पर रज्जो ने मेरा साथ दिया “मालकिन जल्दी से अपना भोसड़ा आगे करो” और फ़िर मुझे बोली “बेटे जल्दी से अपना लंड बाहर कर”. मां ने अपनी सलवार और चड्डी अपने घुटनों तक नीचे की और अपनी चूत आगे कर के खड़ी हो गयी. मैंने भी अपना खड़ा लंड बाहर निकाल लिया.