किरायेदार की लेस्बियन बीवी और बहन

By   June 8, 2017
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विक्रम शुरू से ही चूत का भूखा था और 2 चूतों को आपस में चटवाते देख के उसका लंड रह न सका। ये मस्त lesbian threesome sex story आपको जरूर पसंद आएगी..


“स्नेहा जल्दी करो, स्कूल के लिए देर हो रही है !” कहते हुये विक्रम अपने किरायेदार संजय सिंह की बहन के कमरे में दाखिल हुआ, स्नेहा उस समय स्कूल ड्रेस पहन कर झुकी अपने जूते पहन रही थी।

झुकी हुई स्नेहा के स्कूल शर्ट से बाहर आने को बेताब उसकी मुसम्मियों के उभार और झुके होने से घुटने के ऊपर तक के स्कर्ट से झांकती उसकी गोरी सुडोल नंगी टाँगों को देख विक्रम के अंदर एक अजीब सी कसमसाहट हुई। विक्रम बहुत दिनों से स्नेहा को चोदने की ताक में था।

25 साल का विक्रम एक जवान युवक था और संजय की बीवी शीतल और संजय की छोटी बहन स्नेहा को अपने मकान में किरायेदार के रूप में रखे हुये था। विक्रम के परिवार में सिर्फ उसकी माँ ही रहती थी और विक्रम एक सरकारी नौकरी करता था। घर में खाना की दिक्कत थी तो उसने संजय को इसी शर्त पर अपने घर में रखा हुआ था कि उसकी बीबी शीतल ही उसके और उसकी माँ के लिये खाना बनाएगी और बदले में वो उनसे किराया नहीं लेगा।

संजय की नौकरी पक्की नहीं थी और वो एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता था और उसको कम्पनी के काम से कई कई दिन बाहर टूर पर रहना पड़ता था, तो उसको यह शर्त सहर्ष मंजूर भी हो गई थी और संजय को दारु पीने की लत भी थी, विक्रम अपने पैसे से उसको दारु पिला कर उसकी इस तलब को पूरी करता था।

स्नेहा पढ़ाई के लिए शहर आई हुई थी और अपने भैया और भाभी के साथ ही रहती थी, वो एक कमसिन और खूबसूरत 17 साल की किशोरी थी जो गाँव में रहने के कारण अभी बारहवीं में पढ़ रही थी। जवानी में कदम रखती वो लड़की दिखने में ग़ज़ब की सुंदर तो थी ही, उस पर उसके अल्लहड़पन, शोखी और चंचलता ने उसको और भी खूबसूरत बना दिया था।

स्कूल की ड्रेस में उसकी चूचियों के बड़े उभार साफ दिखाई देते थे और उसके ड्रेस की स्कर्ट के नीचे दिखती गोरी-गोरी चिकनी टाँगें विक्रम को पागल बना देती थी। विक्रम जानता था कि शीतल भाभी की ननद को भोगने की इच्छा करना ठीक नहीं है पर वो वासना के अधीन हो चुका था और उसकी जवानी का रस लेने के लिए बेताब था पर कोई सही मौका हाथ नहीं लग रहा था।

एक बात और थी कि वो अपनी शीतल भाभी से छुपा कर यह काम करना चाहता था क्योंकि उसको डर था कि कहीं उसकी भाभी शीतल गुस्सा न हो जाए।

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शीतल जैसी हरामी और चुड़क्कड़ औरत उसने कभी नहीं देखी थी। बेडरूम में अपने रंडियों जैसे अंदाज़ से शादी के 3 माह के अंदर ही उसने अपने मकान मालिक विक्रम को अपना चोदू बना लिया था और उसका पति भी बेबस होकर कुछ नहीं बोलता था क्योंकि साला नपुंसक था, शीतल की गांड और चूत की खुजली मिटाने में असफल रहता था।

चूंकि विक्रम दौलतमंद भी था सो शीतल के पति को दारु भी मिल जाती थी और वो भी कुछ नहीं बोलता था और इस तरह विक्रम को शीतल ने अपना दीवाना बना लिया था। विक्रम को डर था कि शीतल को यह बात पता चल गई कि उसकी निगाह स्नेहा की कमसिन जवानी पर है तो ना जाने वो गुस्से में क्या कर बैठे।

जबकि वास्तव में उसका यह डर सिर्फ़ एक डर ही था क्योंकि शीतल विक्रम की इच्छा को बहुत अच्छे से पहचान गई थी। स्नेहा को घूरते हुये विक्रम के चेहरे पर झलकती वासना उसने तो कब की पहचान ली थी, सच तो यह था कि वो खुद इतनी कामुक थी कि विक्रम से हर रात चुद कर भी उसकी कामुकता को तृप्ति नहीं मिलती थी l

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शीतल का मस्त बदन

ऊपर से वो अपने पति की बहन को भी बिगाड़ कर उसे अपने वश में करना चाहती थी क्योंकि शादी से पहले शीतल एक लेस्बियन लड़की थी और उसने अपने स्कूल के दिनों में अपनी कुछ टीचर्स और ख़ास सहेलियों के साथ संबंध बना रखे थे। उसको लेस्बियन सेक्स में काफ़ी आनन्द आता था।

रात की चुदाई के बाद दोपहर तक उसकी चूत में फिर से खुजली होने लगती थी, वासना से उद्दीप्त योनि की अग्नि पर किसी कमसिन कन्या या खाई खेली औरत की जीभ की ठण्डक पाने के लिए उसकी निगाह भी स्नेहा पर थी लेकिन फिलहाल उसे हस्तमैथुन से अपनी आग शांत करनी पड़ती थी।

शादी के बाद वो किसी और मर्द से संबंध नहीं रखना चाहती थी लेकिन क्योंकि संजय जैसे नपुंसक से उसकी शादी और घर में ही मजबूत काठी का विक्रम और उसकी मस्त जवानी और मज़बूत लंड उसके पुरुष सुख के लिए पर्याप्त था। वो भूखी तो थी ही पर उसकी पहली पसंद तो लेस्बियन सेक्स ही थी। अब उसकी इच्छा यही थी कि कोई उसके जैसी चुदक्कड़ लड़की या औरत मिल जाए तो मज़ा आ जाए।

पिछले दो माह में वो भी स्नेहा की उभरती जवानी की ओर बहुत आकर्षित होने लगी थी। अब शीतल मौका ढूँढ रही थी कि स्नेहा को कैसे अपनी चंगुल में फंसाया जाए। विक्रम के दिल का हाल पहचानने पर उसका यह काम थोड़ा आसान हो गया।

एक दिन उसने जब विक्रम को स्कूल के ड्रेस ठीक करती स्नेहा को वासना भरी नज़रों से घूरते देखा तो स्नेहा के स्कूल जाने के बाद विक्रम को ताना मारते हुये बोली- क्यों लाला, मुझसे मन भर गया क्या? जो अब इस कच्ची कली को घूरते रहते हो, और वो भी अपने दोस्त की सग़ी छोटी बहन को?

विक्रम के चेहरे से हवाइयाँ उड़ने लगी कि आख़िर उसकी चोरी पकड़ी गई, वो कुछ ना बोल पाया।तब शीतल ने उसको एक दो और बातें सुनाई, फिर खिलखिला कर हंस पड़ी और विक्रम के होंठो को चूमते हुए कहा- मैं भी इस कमसिन गुड़िया की दीवानी हूँ, इसके बदन से खेलना चाहती हूँ और इससे अपनी फ़ुद्दी की आग ठण्डी करवाना चाहती हूँ। तो विक्रम खुशी से उछल पड़ा।

शीतल ने विक्रम से कहा- तुम तो ऑफीस चले जाते हो दोपहर को, इधर अपनी वासना शांत करने में मुझे बड़ी तकलीफ़ होती है, मैं उंगली से ही अपनी मार मार कर परेशान हो जाती हूँ। इस चूत की आग बुझती ही नहीं, तुम बताओ मैं क्या करूँ?

उसने अपनी शादी के पहले की अपनी सारी समलैंगिक प्रेम-वासना-कथाएँ विक्रम को बता दी।

विक्रम उसको चूमते हुये बोला- पर डार्लिंग, मैं तो हर रात तुमको चोदता हूँ।

शीतल उसे दिलासा देते हुये बोली- तुम तो लाखों में एक हो जानू, इतना मस्त लंड तो किस्मत वालियों को ही मिलता है। पर मैं ही ज़्यादा गर्म हूँ और मुझे लेस्बीयन सेक्स की आदत पड़ गई है, मुझे भी किसी लड़की की चूत चाटने और चूसने का दिल करता है। स्नेहा पर मेरी नज़र बहुत दिनों से है, क्या रसीली छोकरी है। दोपहर को ये मेरी मस्त ननद मेरी बाहों में आ जाए तो मेरी किस्मत ही खुल जाए।

विक्रम फ़ौरन ही मान गया और उसने शीतल से कहा- अभी तो तूने मेरे लौड़े को ही खड़ा कर दिया है रानी, अब जरा जल्दी से मेरे लौड़े को बैठाने का इंतजाम कर दे !आप ये कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।