लेडीज़ टेलर – V

By   August 25, 2016

इतना सब कुछ होने पर भी अभी शैलजा की हवस शांत नहीं हुई थी। टेलर की भी तो प्यास बुझना बाकि है अभी। इन sexy tailor stories का अंतिम भाग।

Hindi Sex Stroy के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5


वह बोली “नहीं तुम्हें मेरी तभी मिलेगी जब तुम उसकी लेना बन्द कर दोगे। तब तक मुझे दोबारा छूना भी नहीं”। वह झूठ बोल रही थी और उसी समय मेरी बाहों में आने को बेताब थी पर वह मुझे जताना चाहती थी कि वह मुझसे सच्चा प्यार करने लगी है और उसे मेरे अपनी पत्नी के साथ यौन सम्बन्धों से ईर्ष्या हो रही है।

मैनें भी एक सच्चे प्रेमी का नाटक करते हुये कहा “ठीक है, अब जब तक तुम मुझे नहीं कहोगी मैं अपनी पत्नी की नहीं लूँगा। अब प्लीज़ मुझे बताओ कि हम फ़िर से कब मिल सकते हैं।” वह मेरे झूठे उत्तर को पाकर खुश हो गयी और लिखा “मैं कल तुम्हारी दूकान पर आऊँगी १२ बजे के आसपास।” मैने सोचा कि दुकान मे तो उसकी लेना मुश्किल होगा इसलिये मैने लिखा “क्या मैं तुम्हारे घर आ जाऊँ १२ बजे?” उसने तुरन्त उत्तर दिया “नहीं, मैं ही आऊँगी क्योंकि हो सकता है कि वो कल घर पर ही रहें या फ़िर ऑफ़िस से जल्दी लौट आयें”।

इसबीच मैं अपनी पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को रगड़ रहा था जोकि शैलजा की योनि की चाहत में तना जा रहा था। शैलजा भी एस एम एस करते हुये अपनी योनि को रगड़ना चाह रही थी। वह शीशे के सामने खड़े होकर मेक-अप कर रही थी और एक दम मौसमी चटर्जी जैसी दिख रही थी। वह जान गयी थी वह अपने कामुक शरीर और मादक अदाओं से किसी भी मर्द को अपना दीवाना बना सकती है। और अब जबकि वह खुल गयी थी उसके लिये मर्दों की कोई कमी नहीं थी बस वह चाहती थी कि सब कुछ सुरक्षित तरह से किया जाय जिससे कि उसके वैवाहिक जीवन बरबाद होने से बच जाय।

तभी उसके दरवाजे की घंटी बजी और वह अपने ख्यालों की दुनिया से बाहर आयी। उसने दरवाजा खोला तो देखा कि दूधिया है। वह मेक-अप के साथ अपने गाउन में बहुत ही कामुक लग रही थी। दूधवाला एक गुज्जर था, लम्बा चौड़ा डीलडौल और बड़ी-बड़ी मूँछें। उसने पूछा “भैया, आज इतना देर क्यों कर दी?” और दूध का बर्तन लाने के लिये मुड़ी। गुज्जर हमेशा से ही उसे देखा करता था पर आज पहली बार वह उसे बिना बाँह के गाउन में देख रहा था।

उसकी आँखों में चमक आ गयी और उसने शैलजा के पूरे शरीर को झीने गाउन में देखने की कोशिश की। उसे देख उसके मुँह में पानी आ गया और उसने अपने होठों पर जीभ फ़िराते हुये बोला “मेमसाहब, मेरी पत्नी की तबियत ठीक नहीं थी इसीलिये देर हो गयी”। वह झूठ बोल रहा था क्योंकि वह शैलजा से देर तक बात करते हुये उसे निहारना चाहता था। शैलजा बर्तन लेकर लौटी और दूध लेने के लिये झुकी (क्योंकि वह नीचे बैठा था) और पूछा “क्या हुआ तुम्हारी पत्नी को?”

झुकने से पहले उसने अपने गाउन को समेट कर अपने दोनों पैरों के बीच दबा लिया था और झुकने की वजह से उसके क्लीवेज साफ़ नज़र आ रही थी और गहरे गले के ब्लाउज़ मे से ब्रा मे लिपटे दोनों स्तनों के उभार दिख रहे थे। वह दूध डालते हुये उसके उरोजों को निहार रहा था और थोड़ा शर्माते हुये बोला “मेमसाहब, उसे माहवारी में कुछ दिक्कत है”। गुज्जर के इस सीधे जवाब को सुनकर शैलजा का चेहरा लाल हो गया और उसने उसकी आँखों की तरफ़ देखा जो कि उसके गाउन के अन्दर झाँक रहीं थीं।

वह और झेंप गयी और बोली “भैया, उसका ध्यान रखा करो और जल्दी करो साहब अन्दर इन्तजार कर रहे हैं”। उसने तुरन्त अपनी आँखें हटाकर उसकी आँखों में देखते हुये कहा “मेमसाहब, जब पत्नी की तबियत खराब हो तो घर पर आदमी को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ती है” और उठकर जाने लगा। शैलजा अपने बदन पर गुज्जर की नज़र देखकर उत्तेजित हो गयी और उसने सोचा कि कभी कभी उसे अपना थोड़ा बदन दिखाकर उसमें उसकी रुचि को जीवित रखना चाहिये। तबतक मेरा एस एम एस आ गया कि “कल समय से आ जाना और वही गहरे गले वाला पार्टी ब्लाउज़ पहन कर आना”।

उसने उत्तर दिया “ठीक है” और मन ही मन में मुस्कुराई और शीशे मे खुद को देखते हुये अपने स्तनों को थोड़ा सा दबाया। उसे पता था कि कल उसके स्तनों और पूरे बदन की ढंग से मालिश होने वाली है और वह भी एकदम मुफ़्त। वह अन्दर से काफ़ी खुले ख़्यालों वाली औरत बन रही थी पर अपने पति, प्रेमी और अन्य सभी लोगों के लिये वह शर्मीली, पुराने ख़यालात वाली भारतीय नारी ही बनी रहना चाहती थी।

रात तक शैलजा की योनि में असह्य पीड़ा होने लगी थी जिसकी वजह से वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। उसे देख विक्रम ने पूछा “क्या हुआ?” शैलजा ने गुस्सा जताते हुये कहा “मैनें तुम्हें पहले ही बोला था कि आराम से करो और तुम तो आज एक जंगली जानवर की तरह मुझ पर टूट पड़े थे, अब मुझे और दर्द होने लगा है”। विक्रम ने कहा “लेकिन जब मैं कर रहा था उस समय तो तुमने कुछ बोला नहीं, मैनें सोचा तुम ठीक हो”।

शैलजा ने कहा “तुम एकदम बेवकूफ़ हो। क्या उस समय मेरे लिये तुम्हें रोक पाना सम्भव था? मैं पूरे माहौल को बरबाद नहीं करना चाहती थी और उस समय कामोत्तेजना में मुझे दर्द का पता भी नहीं चल रहा था। अब विक्रम को लगने लगा कि शायद वह अपनी पत्नी के बारे में गलत सोच रहा था और बेवजह ही उसे दण्डित कर दिया। परन्तु अन्दर से अभी भी उसे पूरे सत्र का रोमांच महसूस हो रहा था जिसमें उसने अपने पूरे यौन जीवन का सर्वाधिक आनन्द उठाया था। उसने पीछे से आकर शैलजा की कमर में हाथ डालकर उसकी गर्दन का चुम्बन लिया बोला “प्रिये मुझे माफ़ कर दो, तुमने आज मुझे पागल कर दिया था और उत्तेजना में मुझे तुम्हारी चोट के बारे में ध्यान ही नही रहा। क्या तुम्हें आज मज़ा आया?”

उसे अन्दर ही अन्दर बहुत सुकून मिला कि उसने विक्रम को सामान्य कर लिया है, वह बोली “हाँ, उस समय तो बहुत मज़ा आया था पर अब बहुत दर्द हो रहा है”। विक्रम ने फ़िर उसे चूमते हुये गाउन के ऊपर से उसके पेट और योनि की मसाज शुरू कर दी और बोला “ठीक है प्रिये आज मैं तुम्हें ठीक होने में मदद करता हूँ और धीरे धीरे तुम्हें मेरे वहशीपने की आदत पड़ जायेगी”। यह सुनकर दोनो हँस पड़े और एक दूसरे की बाँहों में आ गये। शैलजा को लगा जैसे उसने पुनः अपने पति का विश्वास पा लिया है और आगे से उसने मेरे या किसी और से सम्बंध बनाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की ठान ली।

जबकि विक्रम को अभी भी शैलजा के स्वभाव में परिवर्तन की वजह समझ नहीं आ रही थी क्योंकि बिस्तर पर हमेशा चुप रहने वाली शैलजा अब संभोग के समय बोलने लगी थी और उसकी मांग करने लगी थी। उसने सोचा कि शायद शादी के कुछ समय बाद औरतों में यह परिवर्तन स्वाभाविक है।

अगले दिन शैलजा ठीक बारह बजे मेरी दुकान पर आ गयी। उस समय एक और औरत मेरी दुकान पर मुझसे बात कर रही थी। वह भी बहुत सुन्दर थी मैं उसमें भी उतनी ही दिलचस्पी ले रहा था पर उससे अधिक समय तक बात करके मैं अपने प्राथमिक शिकार यानि शैलजा को नाराज़ नहीं करना चाहता था। शीघ्र ही वह औरत चली गयी और मैने शैलजा से कहा “हेलो मेरी प्यारी शैलजा रानी, इन कपड़ों में बहुत ही खूबसूरत लग रही हो” और फ़िर उसके खुले हुये पेट और पल्लू के पीछे छिपे स्तनों को घूरने लगा।