लेडीज़ टेलर – III

By   August 22, 2016
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मौका देखके मैंने शैलजा के तन बदन में आग लगा दी थी, मुझे यकीं अब जल्दी ही उसके मस्त बदन के साथ पूरा खेल खेलूँगा। पढ़िए इस tailor sexy story का अगला भाग-

Hindi Sex Stories के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5


शाम ठीक पाँच बजे मैं शैलजा के घर उसका ब्लाउज़ देने पहुँच गया। वह मेरा ही इन्तज़ार कर रही थी। उसने कसी हुयी जीन्स और टीशर्ट पहन रखी थी जिसकी वजह से उसके बदन के सभी उभार बहुत खूबसूरती के साथ उजागर हो रहे थे। सभी लोग अन्दर बैठे थे, शैलजा दरवाज़ा खोलने के लिये आयी। वह जैसे जैसे आगे बढ़ रही थी उसकी योनि में कुलबुली हो रही थी। जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला मैने मुस्कुराते हुये उसे आँख मारी। फ़िर कसे हुये कपड़ों में लिपटे उसके बदन को ऊपर से नीचे तक निहारने लगा। वह शर्माते हुये नीचे देख रही थी परन्तु अन्दर ही अन्दर उसे मज़ा आ रहा था और वह उत्तेजित हो रही थी।

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फ़िर उसने चुप्पी तोड़ते हुये बोला “मास्टर जी अन्दर आ जाइये, मैं ब्लाउज़ पहन के देख लेती हूँ कि और तो कोई कमी नहीं है दूर करने के लिये”।

मैनें उससे इशारों में पूछा कि घार के बाकी लोग कहाँ हैं, उसने भी इशारों में बताया कि सभी अन्दर कमरे में हैं। जब वह अन्दर जाने के लिये पीछे मुड़ी तो मैं भी उसके पीछे हो लिया और एक बर पीछे से उसके नितम्बों पर हाथ फ़ेर दिया। वह थोड़ा सहम गयी और दौड़ कर ब्लाउज़ पहनने अन्दर कमरे में चली गयी। मैं उसके कमरे के बाहर ही खड़ा रहा।

करीब दो मिनट बाद उसने दरवाज़ा खोला पर अन्दर ही रही। जीन्स और काले ब्लाउज़ मे वह गजब की कामुक लग रही थी। काले ब्लाउज़ में लिपटे उसके उरोज़ और उसमें से दिख रही उसकी क्लीवेज बहुत ही खूबसूरत लग रहे थे। उसे देखकर मैं बेहोशी में उसके कमरे की तरफ़ बढ़ने लगा पर झट से उसने दरवाज़ा बन्द कर लिया। फ़िर अपने साधारण कपड़े (जीन्स और टीशर्ट) पहन कर वह बाहर आयी शर्मा कर नीचे देखते हुये बोली “मास्टर जी ब्लाउज़ ठीक है”।

मैं बड़े की कामुक अन्दाज़ में उसके पूरे बदन को घूर रहा था और अभी तुरन्त उसे अपनी बाहों मे लेकर उसके साथ संभोग करना चाहता था पर मुझे पता था कि यह सम्भव नहीं है। मैं कामाग्नि में जल रहा था और शैलजा इसका आनन्द लेते हुये मुझे छेड़ने के उद्देश्य से बोली “मास्टर जी क्या आपको प्यास लग रही है, आप कुछ पीना पसन्द करेंगे?” मैने अपने होंठों को चाटते हुये उसके स्तनों को देखा और बोला “हाँ, ताज़ा दूध मिलेगा क्या?” वह झेंप गयी पर सम्भलते हुये बोली “ठीक है मैं आपके लिये पानी लेकर आती हूँ”। वह मेरी आँखों में उसके प्रति वासना को देखकर खुश हो रही थी।

उसे लग रहा था कि अब दिन के समय में उसकी शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति के लिये अच्छा इन्तजाम हो गया है। वह ये सब इतनी चतुरता से करना जानती थी कि उसके पति को इसकी भनक न लगे।

वह अपने हाथ में पानी का गिलास ले कर लौटी और मुझे देने के लिये मेरे पास आयी। गिलास लेते समय मैने उसके हाथों को प्यार से सहला दिया। मैं उसके बदन को बड़ी कामुकता से निहारते हुये धीरे धीरे पानी पीने लगा। वह मुस्कुराते हुये इसका आनन्द उठा रही थी और इस बार बिना शर्माये हुये मेरी आँखों को उसके उरोजों और जांघों को निहारते हुये देख रही थी। जब मेरे और शैलजा के बीच यह सब चल रहा था

तभी अचानक पायल कमरे में आ गयी। उसे देखकर हम दोनों सामान्य हो गये। पायल को देखकर मैं उसके प्रति सम्मोहित होने लगा। वह भी शैलजा के समान ही सुन्दर और कामुक थी पर उसका रंग थोड़ा साँवला था। तभी शैलजा ने बोला “दीदी ये मेरा दर्जी है, बाबू”। पायल मुझे देखकर थोड़ा मुस्कुराई और मैं नादान बनने की कोशिश करता हुआ वापस मुस्कुराते हुये नीचे देखने लगा।

पायल बोली “शैलजा मैं पहले तुम्हारे कपड़े देखूँगी कि इसने कैसे सिले हैं अगर मुझे पसंद आते हैं तो मैं भी अपने ब्लाउज़ और सूट इसी से सिलवाउंगी”। यह सुनकर मेरी तो बाँछें खिल गयीं पर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुये मैने एकदम सामान्य दिखने का प्रयास किया और वहाँ से लौट आया।

पार्टी के दौरान सभी पुरुषों की नज़र शैलजा पर थी, वह काले कपड़ों में सभी पर कहर ढा रही थी। झीनी शिफ़ान की साड़ी से उसका गोरा बदन दिख रहा था। उसमे से उसकी क्लीवेज भी दिख रही थी। जब भी उसका पति विक्रम उसे देखता था तो वह सावधानी पूर्वक उसे छुपाने की कोशिश करती थी पर उसे पूरा यकीन नहीं था कि वह विक्रम की नज़रों से बच पायेगी। खासकर आनन्द शैलजा के आसपास ही रहने की कोशिश कर रहा था और मौका मिलते ही उसके बदन को यहाँ वहाँ छू लेता था।

वह मेरे द्वारा किये गये उसके शरीर के नेत्रपान और मर्दन के बारे में सोचते हुये उसका आनन्द उठा रही थी। जब तक पार्टी समाप्त हुई सभी लोग थक चुके थे और विक्रम शैलजा के बदन की आग को बिना बुझाये ही सो गया। विक्रम खर्राटे मार कर सो रहा था जबकि शैलजा अभी भी अपने पार्टी के कपड़ों में ही थी। तभी मैने उसे एक एस एम एस भेजा “थिंक आफ़ मी व्हाइल गिविंग इट तो योअर हसबैंड (उसको अपनी देते समय मेरे बारे मे सोचना)”।

उसका तुरन्त जवाब आया “वो तो पहले ही सो गये हैं, जितनी जल्दी हो सके मुझसे फ़ोन पर बात करो”। फ़िर उसने दूसरे कमरे में जाकर उसे अन्दर से बन्द कर लिया और बिस्तर पर लेटकर मेरे फ़ोन का इन्तजार करने लगी। जैसे ही फ़ोन बजा वह उसे तुरन्त उठाकर बोली “हाय बाबू”। मैने कहा “रानी, मेरी बहुत याद आ रही है क्या?” उसने केवल “हूम” बोला और अपनी योनि पर हाथ रख कर घर्षण करने लगी। मैने कहा “ठीक है मैं तुम्हें स्खलित होने में मदद करता हूँ”।

मुझसे बातें करते हुये उसने अपने सारे कपड़े उतार दिये। अब वह पूरी तरह से नंगी अपने बिस्तर पर लेटी हुयी थी। उसके एक हाथ में उसका फ़ोन था तो दूसरे हाथ में उसका स्त्रीत्व। उसने अपनी योनि को मसलना जारी रखा और मैं उसे अपने बारे मे याद दिलाकर उसे शीघ्र ही स्खलित होने में मदद करने लगा।

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शैलजा का नंगा मखमली बदन

उसके हस्तमैथुन के बाद जैसे ही योनि रस बाहर निकला वह भारी साँसों के साथ बोली “बाबू, मै तुमसे कल मिलती हूँ”। मुझे पता था कि ये कामुक गुड़िया मेरी कामुक रखैल बनने को तैयार है। मैं भी हस्तमैथुन से खुद को स्खलित करके सो गया।

शैलजा सुबह उठकर अपने पति को ऑफिस भेजकर नहाने चली गयी। और इधर अपनी दुकान खोलने जाते समय मैं सोच रहा था कि शैलजा को कैसे अपने नीचे लाया जाय और उसके बदन को अच्छी तरह से भोगा जाय।

मुझे पता था कि दुकान मे यह मुश्किल होगा इसलिये मैने सीधे उसके घर जाने का ख़तरा उठाने की ठान ली। मैने सोचा कि अबतक उसका पति ऑफिस चला गया होगा और अगर नहीं भी गया होगा तो बोल दूँगा कि ब्लाउज़ के पैसे लेने आया था। मैनें उसके घर के दरवाजे पर पहुँच कर घंटी बजायी पर शैलजा अभी भी नहा रही थी और काम वाली भी जा चुकी थी। उसने सोचा कि अभी कौन आ सकता है? और जल्दी से अपने भीगे बदन पर बस गाउन पहन कर बाथरूम से निकली और हल्का सा दरवाज़ा खोल कर देखा।

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