माल पड़ोसन की चुदाई

By   August 8, 2016

हेल्लो दोस्तों ! मैं विनय, मैं एक मध्यवर्गीय परिवार से हूँ। मैं शर्मीले स्वभाव का सीधा सा दिखने वाला लड़का हूँ। इस neighbour sex story में मैं आपको अपनी पड़ोसन कविता के साथ हुए पहला अनुभव बताने जा रहा हूँ। वह 20 साल की एक ख़ूबसूरत और गोरी-चिट्टी लड़की है, उसकी भरी भरी चूचियाँ इतनी मदमस्त कर देने वाली हैं कि किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए। मेरा और उसका घर एक दम साथ-साथ था। मेरे को वो बहुत अच्छी लगती थी। पर मैं उससे कभी बात नहीं कर पाया, मेरा मन बहुत करता था उससे बात करने का और उसको पटाने का, पर यह कैसे होगा समझ नहीं आता था।

मेरे को एक आईडिया आया, उसका एक छोटा भाई था सोनू। मैंने उसको पटाने की सोची, अगर इसको पटा लिया तो कविता को पटाना आसान हो जायेगा। इसलिए मैं कविता के भाई को पटाने लगा और उसके साथ खेल खेलने लगा। उसको अपने घर पर बुला कर पी सी पर गेम भी खिलाता, इस तरह वो मेरे साथ रहने लग गया और कभी कभी मैं भी उसके घर भी चला जाता। कुछ समय बाद कविता से भी मेरी थोड़ी-थोड़ी बातें होने लग गई और हम एक साथ मिल कर खेलने लग गए।

मैं तो कविता को पटा कर चोदना चाहता था, पर कैसे हो सकता था ? मैं नए-नए आईडिया सोचने लग गया कि किस तरह कविता को चोदूँ, मेरे मन में फ़िर एक आईडिया आया। मैं एक ब्लू फिल्म की सीडी लेकर आया, उस दिन उसके घर वाले बाहर गए हुए थे। मैंने अपनी छत से उसकी छत पर पर उस सीडी को फेंक दिया और अपनी छत पर घूमने लग गया। उसने मुझे देखा और वो भी छत पर आ गई और आते ही उसको वो सीडी मिल गई।

वो मेरे पास उस सीडी को ले कर आई और बोली- यह सीडी छत पर मिली है।

मैंने पूछा- क्या है इसमें ?

कविता – मुझे नहीं पता, मुझे तो छत पर पड़ी मिली है।

मैं उससे कहा- चलो देखते हैं कि क्या है इसमें !
तो कविता राजी हो गई और मैं अपनी छत से उसकी छत पर आकर उसके घर पर चला गया।
कविता जाते ही सीडी प्लेयर में उस सीडी को लगाने लगी। मेरा दिल बहुत जोर जोर से धक-धक कर रहा था, पता नहीं क्या होगा। कहीं कविता अपने घर वालों को इसके बारे में बता दिया तो?

मैं बहुत डर गया था।

उसने सीडी लगा कर टीवी ऑन किया। मैं अभी भी डर रहा था और टीवी चालू होते ही एक लड़का और एक लड़की आपस बातें कर रहे थे।

कविता ने मुझ से कहा- यह कोई हॉलीवुड फिल्म लगती है ! थोड़ी देर में उस लड़के ने उस लड़की के सारे कपड़े उतार दिए। उसने एक दम अनजान की तरह कहा- ये क्या कर रहे हैं?
तो मैंने कविता से कहा- यह एक ब्लू फिल्म है। पहले नहीं देखी क्या कभी ?
कविता – नहीं तो।

फिर धीरे धीरे वो लड़का उस लड़की की चूचियाँ दबाने और चूसने लग गया। उस लड़की ने उस लड़के के भी सारे कपड़े उतार दिए और फिर उसका काला लम्बा और मोटा लण्ड प्यार से चूसने लग गई।

कविता – मुझे तो शर्म आ रही है, कितने गंदे है ये।

मैंने उससे कहा- ऐसे तो सब लोग ही करते हैं, इसको ही तो सेक्स बोलते हैं।

मैंने उससे पूछा- तूने कभी सेक्स किया है?

कविता – नहीं किया।

मैंने उससे कहा- इसमें बहुत मजा आता है।

तभी मैंने कविता के पास जाकर बैठ गया और अपना हाथ धीरे उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया और बोली- रवी, यह क्या कर रहे हो तुम?

मैंने कुछ न बोलते हुए फिर से अपना हाथ उसकी भारी भारी चूचियों पर रखा और उसके टॉप के ऊपर से चूचियाँ दबाने लगा। उस समय उसकी शक्ल देख कर ऐसा लग रहा था कि उसको मजा आ रहा था। फिर मैं दोनों चूचियों को एक साथ मसल मसल कर दबाने से ऐसा लगा और फिर मैं उसके टॉप मैं हाथ डाल कर चूचियों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा और वो सिसकियाँ लेने गई।

अब मुझे पता चल गया कि उसको मजे आ रहे हैं।

मैंने उसको पूछा- मज़ा आ रहा है क्या?

कविता – हाँ, आ रहा है। क्या इसको ही सेक्स कहते हैं?

मैंने कहा- कविता अभी तो कुछ भी नहीं हुआ है, अभी तो और बहुत मजे आयेंगे।

कविता – कहा कैसे?

maal padosan ki chudai neighbour sex story

मेरी माल पड़ोसन कविता

तो मैं कहा- कविता तुझे मेरा साथ देना होगा !

तो उसने हामी भर दी।

मैंने उसका टॉप और जींस उतार दी। उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। वो बहुत ही गोरी थी और गोरे रंग पर लाल रंग बहुत सुन्दर लग रहा था। फिर मैंने दोनों को उतार फेंका।

मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत के दर्शन कर रहा था, उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे।
कविता – मुझे शर्म आ रही है !

और उसने अपने दोनों हाथ अपनी चूत और मोमो पर लगा लिए।

कविता – इसमें शर्माने की क्या बात है? सेक्स तो नंगे होकर ही किया जाता है।
मैंने प्यार से उसके दोनों हाथ हटा दिए और उसकी दोनों चूचियों को चूमने लगा तो वह पागल होने लगी।

मैंने दूसरा हाथ कविता की चूत पर रखा, उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी। अब मैं समझ गया कि कविता एक दम चुदने को तैयार है।

पर मैं उस को इतनी जल्दी नहीं चोदना चाहता था। इसलिए मैं कविताकी चूत में अपनी एक उंगली डालने लगा और थोड़ी सी उंगली अन्दर जाते ही वह चिहुँक उठी,”दर्द हो रहा है।”

मैंने कहा,”कविता मेरी जान पहली बार ज़रा दर्द होता है, आज तो इस दर्द सहन करना ही पड़ेगा।”

उसने कहा,” ठीक है।”

फिर मैं उसको ऊँगली से चोदने लगा और उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी। फिर मैंने उसको मेरी शर्ट-पैंट उतारने के लिए बोला।

उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है।

मैंने कहा- अब काहे की शर्म !

मेरे कपड़े उतारने के लिए बोला तो उसने मेरी शर्ट-पैंट उतार दी और लगे हाथ अण्डविनययर भी उतारने को बोला। ना ना करते हुए उसने उसको भी उतार ही दिया। उसने मेरा लण्ड देखा और अपनी आँखें बंद कर ली।

मैंने उससे कहा- कविता यह प्यार करने की चीज है इससे मुँह नहीं मोड़ा करते।

फिर मैंने उसके दोनों हाथ आँखों से हटा दिए और उसको अपना लण्ड दिखाते हुए कहा- इसको लण्ड बोलते हैं और इसको ही चूत में डाल कर चुदाई करते हैं जिससे चूत और लण्ड का मिलन होता है। इस को अन्दर डालने से दोनों को बहुत मजा आता है !

तो कविता ने कहा- इतना बड़ा और मोटा लंड मेरी चूत में कैसे जायेगा? यहाँ तो उंगली भी ठीक से अन्दर नहीं जा रही है।

मैंने कहा- मेरी जान तुम चिंता मत करो, सब कुछ हो जायेगा। पर इसको चूत में डालने से पहले चूसना पड़ता है।

मैंने अपना लण्ड पकड़ कर उसके मुँह में डाल दिया। पहले तो उसने मुँह में लेते ही निकाल दिया। मैंने उसके मुँह में फिर से अपना लण्ड डाल दिया तो इस बार वो धीरे धीरे मेरे लण्ड का लाल लाल सुपारा चूसने लग गई और धीरे धीरे अपना सारा लण्ड उसके मुँह में अंदर-बाहर करने लग गया।
फिर मैंने उस को बेड पर लिटाया और 69 की अवस्था में आकर उसकी चूत को उंगली और जीभ से चोदने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और बोली- विनय ! थोड़ा धीरे करो, मुझे दर्द हो रहा है।