मजदूर की बहन

By   March 11, 2017
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दोस्तों में एक सरकारी दफ़्तर में ऑडिटिंग ऑफिसर हूँ और हमारे दफ़्तर की शाखा पूरे भारत में है और अक्सर मुझे अपने काम के सिलसिले में हर कभी दूसरे शहर की शाखा में दो तीन महीनों के लिए जाना पड़ता है. इसलिए हर जगह चूत का इन्तेजाम करता चलता हूँ. ऐसी ही एक tour sex kahani पेश है..

फिर पिछले नवंबर में मुझे अपने काम के सिलसिले में चेन्नई में जाना पड़ा, वहां पर मुझे करीब पांच महीने का काम था और इसलिए मैंने अपने एक दोस्त जिसके बड़े भाई का मकान उसी शहर में था और वो अपने परिवार के साथ वहीं पर रहता था, वैसे उसका मकान ज़्यादा बड़ा नहीं था. उसके मकान में एक किचन तीन कमरे और एक बड़ा सा आँगन था और उसकी एक छोटी सी किराने की दुकान भी थी, जो उसके घर से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर थी. मेरे दोस्त के भाई के परिवार का परिचय इस तरह है. भाई जिसका नाम किशोर था, जो कि दुबला पतला और दिखने में वो टीबी के मरीज जैसा था और एक कारखाने में वो मज़दूरी का काम करता था.

उसकी उम्र करीब 33 साल की थी. वो एक नंबर का शरबी था और अक्सर वो देसी शराब पीकर नशे में रहता था और वो जब भी अपने काम से वापस घर पर आता तो वो शराब पीकर आंगन में अपनी खटिया को डालकर उस पर हमेशा एकदम धुत पड़ा रहता था, जिसकी वजह से उसको अपने खाने पीने का भी होश नहीं होता था और उनकी कोई भी औलाद नहीं थी. उसकी शादी को पूरे आठ साल हो गए थे और किशोर की बीवी जिसका नाम नीति जो कि करीब 28 साल की थी. उसका भरा हुआ, बदन बड़े बड़े कूल्हे और वो मस्त गोरे उभरे हुए बूब्स वाली आकर्षक सेक्सी महिला थी.

दोस्तों हालाँकि वो रंग रूप से काली थी, लेकिन उसका चेहरा हर किसी को एक बार देखते ही अपनी तरफ मोहित कर देने वाला था और जब भी चलती तो वो अपनी गांड को मटका मटकाकर चलती थी, तो जिसको देखकर हर कोई उसकी तरफ आकर्षित हो जाए और उसका अपने पति से शारीरिक संबंध पिछले सात साल से मानो पूरी तरह से छूट चुका था, उन्होंने इस बीच ऐसा कुछ भी नहीं किया. दोस्तों यह सभी बातें मुझे भी बाद में पता चली, क्योंकि उसका पति बहुत ही ज्यादा कमजोर था और वो अपनी पत्नी के साथ किसी भी तरह का शारीरिक संबंध बनाने के काबिल नहीं था, क्योंकि वो बहुत कमज़ोर था इसलिए वो बहुत लाचार और मजबूर थी और वो अक्सर अपनी दुकान को चलाती थी. नीति की एक छोटी बहन जिसका नाम रीमा था, जो उम्र में करीब 25 साल की, लेकिन वो दिखने में ठीक अपनी बड़ी बहन जैसी ही थी. उसका वो भरा हुआ शरीर, सुंदर चेहरा नीति से बहुत ज्यादा मिलता था, लेकिन वो उसके जैसी ज्यादा मोटी नहीं थी और काली होने के बाद भी उसका चेहरा, वो बदन बहुत ही मस्त सेक्सी लगता था. वो भी कभी कभी उस दुकान पर बैठती थी और वो एक विधवा औरत थी. दोस्तों उसका पति उससे शादी होने के करीब एक महीने बाद ही दुबई में ड्राइवर की नौकरी करने वहां पर गया था, लेकिन वहाँ पर करीब तीन महीने के अंदर ही एक सड़क दुर्घटना में वो मारा गया और इसलिए वो अब विधवा होने के बाद से ही ससुराल से अपनी बड़ी बहन के घर पर आकर रहने लगी थी. उसकी भी कोई औलाद नहीं थी और उसने केवल अपनी शादी के बाद एक महीने तक ही अपने उस पति के साथ शारीरिक संबंध बनाए रखे, लेकिन उसके बाद वो हमेशा के लिए प्यासी ही रह गयी.

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फिर मेरे दोस्त ने मेरे रहने का इंतज़ाम उसके बड़े भाई के घर पर कर दिया था. जब में उनके घर पर पहुँचा, तब में अपने साथ बहुत सारे फल मिठाईयाँ लेकर गया था. अब मैंने देखा कि उस समय भी किशोर भाई जान तो हमेशा की तरह बहुत शराब पीकर नशे में धुत थे, लेकिन उन दोनों बहनों ने मेरी बहुत खातिरदारी की जो मुझे बहुत अच्छा लगा और में उनके इस व्यहवार से बड़ा खुश हुआ मुझे उनके साथ कुछ समय में ही कुछ अपनापन सा लगने लगा.

फिर मैंने कुछ ही दिनों में गौर किया कि वो दोनों बहनें मेरे गठीले शरीर को देखकर बहुत खुश थी. वो मेरी तरफ बहुत आकर्षित थी और उन दोनों का झुकाव मेरी तरफ कुछ ज्यादा ही था और जल्दी ही में भी उनसे बहुत अच्छी तरह से घुल मिल गया था. हम सभी एक दूसरे से बहुत हंसी मजाक बहुत अच्छी तरह से खुलकर बातें करने लगे थे मेरे साथ साथ वो भी बहुत खुश रहने लगी थी. दोस्तों हर बार शनिवार और रविवार को मेरे ऑफिस में मेरी छुट्टी होती थी, इसलिए में धीरे धीरे उनके साथ मिलकर अपनी छुट्टी के दिनों में अब में भी सुबह से लेकर रात तक उनकी वो दुकानदारी सम्भालने लगा था. फिर मेरे लिए दोपहर का खाना कभी नीति लेकर आती तो कभी रीमा और उनकी वो दुकान दो कमरों की थी, जिसके आगे के हिस्से में उनकी दुकान थी और उसके पीछे के हिस्से में एक कमरा बना हुआ था, जिसमें कुछ सामान भरा हुआ था और जहाँ पर उठने बैठने की भी उचित व्यवस्था थी और दोपहर को 2 से 4-5 बजे तक उनकी वो दुकान हमेशा बंद रहा करती थी, इसलिए जो भी उस समय दुकान पर होता वो दोपहर को दुकान को बंद करके उसके पीछे बने उस कमरे में उन दो तीन घंटे आराम कर लेता था. दोस्तों यह बात दिसंबर महीने के गुरुवार की बात है, उस दिन सुबह उठने में मुझे थोड़ी देर हो गई थी इसलिए रीमा मुझे उठाने चली आई और उस वक़्त में ना तो नींद में था और ना ही में जाग रहा था. में बस अपनी दोनों आखें बंद करके लेटा हुआ था, लेकिन उस समय मेरा लंड उठकर मेरे उठने से पहले ही सलामी दे रहा था और वो मेरी अंडरवियर से बाहर निकलकर मेरी लुंगी से बाहर निकलकर खंबे की तरह तनकर खड़ा था.

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रीमा की मस्त जवानी

अब वो आकर मेरे पलंग के पास आकर खड़ी हो गई और जब उसकी तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने धीरे से अपनी आँख को खोलकर देखा तो उस समय रीमा मेरे तने हुए मोटे लंबे लंड को देखकर अपने दांतों तले अपनी उँगलियों को दबाते हुए कई देर तक लंड को निहार रही थी.

फिर वो धीरे से कमरे के बाहर चली गयी और उसने दरवाजा बंद कर दिया और वो कुछ देर बाद बाहर खड़ी होकर दरवाजे को खटखटाने लगी. मैंने वो आवाज सुनकर उठकर लंड को ठीक किया और दरवाजा खोला तो रीमा बोली कि भाई जान क्या उठना नहीं है? और फिर में घड़ी की तरफ देखकर तुरंत फ्रेश होकर कपड़े पहनकर रसोई की तरफ जाने लगा तो मुझे रीमा और नीति की हल्की हल्की कुछ बातें सुनाई देने लगी और में वहीं पर खड़ा होकर उनकी वो बातें सुनने लगा.

फिर रीमा कहने लगी कि आज तो गजब ही हो गया. फिर नीति उससे पूछने लगी कि ऐसा क्या हुआ रीमा जिसकी वजह से तेरे चेहरे का रंग इतना उड़ा हुआ है और तू इतनी ज्यादा बैचेन दिख रही रही है? तब रीमा ने कहा कि में जब आज सुबह सुबह संजय भाई को उठाने के लिए उनके कमरे में गयी थी तो मुझे उनकी मोटे लंबे तनकर खड़े लंड का दीदार हो गया और में उनके लंड की मोटाई और लंबाई को देखकर तो एकदम दंग ही रह गयी. मुझे अभी भी वो सब अपनी आखों के सामने घूमता हुआ दिखाई दे रहा है.

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