मकान मालकिन से चक्कर

By   January 9, 2017

हेलो दोंस्तों, मैं शिखर आपका My Hindi Sex Stories में स्वागत करता हूँ। सभी पाठकों को सलाम करता हूँ। दोंस्तों, मैंने हमेशा से कहा है कि बिना औरत और उसकी चूत के ये जग सुना है। बस ऐसी ही hot story आपको सुना रहा हूँ।

ये बात कुछ हफ्तों पहले की है। मेरी नौकरी जूनियर इंजीनयर के पद पर बलरामपुर में उत्तर प्रदेश बिजली विभाग में हो गयी थी। मैं बलरामपुर में खुसी खुसी नौकरी करने लगा। क्योंकि दोंस्तों मैं बहूत गरीब था। मेरा घर भी सही कंडीशन में नही था। मुझे अपना घर बनवाना था। इसलिए मैं खुशि ख़ुसी बलरामपुर में नौकरी करने लगा। पर वो जगह बड़ी देहात टाइप थी। ये बात सही है कि पैसा मुझे बराबर मिलता रहा पर बलरामपुर में कोई लाइफ स्टैण्डर्ड नही था।  इसलिये मैंने लखनऊ जाने के लिए ट्रांसफर की अर्जी दे दी।

कुछ दिन बाद मेरा ट्रांसफर हो गया। मैं लखनऊ के चौक में आकर रहने लगा। मुझे खाने पीने का काफी शौक था, इसलिये मैंने चौक में किराए पर कमरा लिया। यहाँ के बाजार में मुझे तरह तरह के वेज नॉनवेज पकवान खाने को मिल जाते थे। अब मैं लखनउ में रहने लगा। दिन बीतने लगे और चुदास की तलब भी लगने लगी। मैं एक राजपूत घर में किराए पर रहता था। राजपूत फ़ौज में था और कश्मीर में पोस्टेड था। उनकी बीवी जिसको मैं आंटी कहने लगा। पर वो बिलकुल जवान थी, कोई 25  26 की होगी। मैं भी परेशान था उसको क्या कहूँ।

मेरा कमरा ऊपरी मंजिल पर था। वहां बड़ा था बाथरूम में। इसमें मेरी मकान मालकिन और उनके परिवार के सदस्य नहाने जाते थे। एक दिन मुझे 7 बजे ऑफिस जाना था, इसलिये मैं टॉवेल, नेकर, बनियान लेकर बाथरूम की तरह बढ़ा। देखा मेरी आंटी नहा रही थी। उन्होंने सोचा होगा सायद अभी 7 बजे इतनी जल्दी कोई नही आयेगा। पर मैं आ गया। आंटी को पैरों को साबुन लगाते हुए मैंने देख लिया। छातियों पर लाल रंग का पेटीकोट बांधे थी। अपने हाथ पैरों पर लक्स साबुन मल रही थी।  दोंस्तों, मेरा तो लण्ड खड़ा हो गया।

मैं बाहर आंटी का वेट करने लगा। जब वो निकली तो मैं बाथरूम के दरवाजे को ही घूर रहा था। मैं थोड़ा झेप गया।
जाओ शिखर!! नहाओ जाके! वो बोली। मैं भी मुस्कुरा दिया। उनका नाम रशमी चौहान था। रश्मी जी बाकी माकन मालकिन जैसी नही थी तो किराएदारों से सीधे मुँह बात नही करते है। रश्मी जी का व्यवहार दोस्ताना था। दोंस्तों दूसरे दिन, मेरे ऑफिस में फिर 7 बजे बुलाया गया था, मैं अगले दिन फिर बाथरूम में नहाने पहुँच गया। रश्मी जी अंदर थी, मैं देख नही पाया। मैं कोई फ़िल्मी गाना गुनगुनाते हुए धड़ाक से अंदर घुस गया। रश्मी बिलकुल अपनी प्राकृतिक रूप में यानि की नँगी थी। अपनी चूचियों में साबुन मल रही थी। बाल काले घने बहुत लंबे और खुले थे। और यहाँ मैंने उनके रूप का आज तो दीदार कर लिया।

सॉरी आँटी!! मैंने कहा। रश्मी थोड़ा घबरा गयी। उन्होंने तुरंत टॉवल खिंच ली और अपनी इज्जत यही अपनीं छातियों को ढक लिया। मैं बाहर आ गया। कुछ देर में रश्मी बाहर निकली। मुझे आंटी मत कहा करो। काल मी रश्मी!! गलती मेरी ही थी, मैंने दरवाजा बंद नहीं किया और नहाने लगी! रश्मी बोली और चली गयी। मैं सोचने लगा की कितनी मस्त जवान औरत हैं। उसको पूरा नँगे देख लिया। पर फिर भी कुछ ना बोली। अगर मैं किसी दिन इसको पकड़ के इसका बलात्कार भी कर दूँ तो भी सायद ये मुझे कुछ नही कहेगी।

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मकान मालकिन का मस्त बदन

ऐसी ही कुछ दिन निकल गए दोंस्तों। मैं तो अभी कुंवारा था। कोई 22 की उम्र होगी मेरी। शादी तो अभी कम से कम 6 7 साल दूर थी। इसलिए मैं मुठ मारके ही अपनी चुदास शांत करता था। अब जब जब मैं मुठ मारने जाता था रश्मी की नग्न तस्वीर मेरे जहन में आ जाती थी। कितनी खूबसूरत औरत है। औरत का बिलकुल लड़की है। ऊपर वाले ने भी क्या खूब उसको फुर्सत में बैठ के बनाया होगा। तब ही तो इतनी खूबसूरत है मेरी मकान मालकिन। बस दोंस्तों, यही सब सोचते सोचते मैं मुठ मारने लगा। मैं सिर्फ और सिर्फ रश्मी का ध्यान कर रहा था।

कुछ देर बाद मैंने अपना माल गिरा दिया। दोंस्तों उस दिन मुठ मारने में खास मजा आया था। लगा की असली बुर आज चोदी है। जी तो कर रहा था कि किसी दिन अपनी मकान मालकिन को पकड़ लूँ। एक दिन रात में 10 बजे जब मैं टॉयलेट गया जो की बाथरूम में अटैच था कुछ देखकर मेरे होश उड़ गए। रश्मी हसमैथुन कर रही थी। दरवाजा अभी भी खुला था क्योंकि उसको दरवाजा बंद करने पर घुटन लगती थी। बाथरूम में ही एक आईने के ठीक पीछे एक अलमारी थी जो मुझे आज तक नही पता थी। रश्मी वहीँ अपना डिलडो रखती थी। मैंने साफ साफ अपनी आँखों से देखा की वो डिलडो को अपनी बुर में जल्दी जल्दी डाल निकाल रही थी। और इतने में रश्मी ने मुझे देख लिया।

मैं आज नही भगा और भीतर चला गया। मैंने दरवाजा बंद कर लिया अंदर से। रश्मी थोड़ा भयभीत हो गयी।
डरो मत!! मैं तुम्हारा रेप नही करूँगा!! तुम्हारा की काम करने आया हूँ। मैंने कहा। डिलडो मैंने हाथ में ले लिया और रश्मी की चूत में अंदर बाहर करने लगा। उसकी परिस्थिति में समझ सकता था। उसके पति तो कश्मीर में थे। उसका भी सेक्स करने का, चूदने का मन करता होगा। बेचारी आर्टिफीसियल लण्ड से ही काम चला रही है। अब रश्मी से मेरा आत्मीय रिश्ता बन गयी। मैंने उसके साथ कोई जोर जबर्दस्ती नही की। चाहता तो कर सकता था। अब रश्मी मुझे कोई हैवान नही बल्कि दोस्त मानने लगी। मैंने उस दिन उसकी मुठ खुद अपने हाथों से मार दी।

अब हमदोनो की सेटिंग हो गयी थी। अगली सुबह मैं नहाने गया तो रश्मी ने मुझको अंदर बाथरूम में खींच लिया। हमदोनो ने चुम्मा चाटी सुरु कर दी। मैं जान गया कि भले ही मेरी शादी कई साल बाद होगी पर चूत का इंतजाम तो आज हो गया है। रश्मी से शावर खोल दिया। हमदोनो साथ में नहाने लगा।
शिखर!! आई लव यू!! रश्मी बोली
रश्मी! आई लव यू टू!! मैंने भी कहा।
हम दोनों में अब हर बात आँखों से ही हो रहीं थी। हम दोनों एक दूसरे को आँखों ही आँखों में चोद रहे थे। रश्मी ने भी बहुत दिन से लण्ड नही खाया था और इधर मैंने भी 1 साल से बुर के दर्शन नही किये थे। अभी हम दोनों नँगे नही हुए थे। मैंने रश्मी को बाँहों में भर लिया था। शावर का पानी सीधे हमदोनो पर गिर रहा था।

मैं जादा सोच विचार ना करते हुए रश्मी के लबों को मुँह में भर लिया था। बिलकुल गुलाबी होठ थे उसके। रश्मी काफी गोरी थी। मैंने उसके होंठो पर अपनी उँगलियाँ रख दी और कामुकता से सहलाने लगा। उसने कोई विरोध् नही किया। फिर मैं उसके होंठो को पीने लगा। अब हम दोनों मकान मालकिन और किरायेदार अब पूरी तरह भीग चुके थे। रश्मी की साड़ी जब पूरी भीग गयी तो उसका ब्लॉउज़ भी पूरा भीग गया। उसके 2 बड़े मम्मे मुझे दिख गए। अब मेरे आकर्षण के केंद्र वो दो मम्मे हो गए। मैंने पानी से भीगा और पानी चूता पल्लु हटा दिया। मैंने रश्मी के काले ब्लॉउज़ की बटने खोल दी। उसने ब्रा नही पहन थी। इसलिए दोनों मम्मे साफ साफ बड़े बड़े गोरे गोरे मेरे सामने आ गये।

मैंने ब्लॉउज़ पूरा उसके कन्धों से निकाला ही नही, इतनी जल्दी में था कि ऐसी ही खड़े खड़े मैं उसके दूध पीने लगा। दोंस्तों, मेरी जिंदगी आज पूरी तरह बदल गयी थी। सायद आज मुझे इतनी ख़ुशी और सुख मिला था कि नौकरी वाले दिन भी मैं कितना खुश नही हुआ था। रश्मी शावर में सीधे खड़ी रही, बिना किसी विरोध् के और मैंने उसके भीगते दूध को खूब पिया। दोंस्तों, पीते पीते थोड़ी हैवानियत जाग गयी। 2 3 बार उसकीं चुच्ची के काले घेरे में बीच में स्तिथ निपल्स को काट लिया। रश्मी सिहर उठी। मैं फिर से खड़े खड़े दूध पीने लगा। रश्मी मेरे साथ बाथ टब में नहाना चाहती थी, इसलिये उसने जरा बाये झुक्क्कर बाथिंग टब का पानी खोल दिया। मैं बिना रुके उसके भीगे बूब्स पीता रहा। उसकी साड़ी अब पूरी पानी में भीग रही थी और नीचे सरक चुकी थी। आज मेरी मकान मालकिन काले पेटीकोट में थी और कमाल की माल लग रही थी।

मैंने अपनी इस रासलीला का पूरा मजा लिया। एक हाथ मेरा स्वतः रश्मी के काले पेटीकोट के अंदर चला गया। मैंने उसके दूध पीना बन्द नही किया। और एक हाथ से अपनी मकान मालकिन की बुर ढूंढने लगा। आज उसने चड्डी भी नही पहनी थी। आखिर मुझे कामयाबी मिल गयी। मेरी उँगलियाँ रश्मी की बुर तक पहुँच गयी। दोंस्तों, मैंने अपनी 2 लम्बी उंगलियां उसकी चूत में डाल दी और जल्दी जल्दी अंदर बाहर करने लगा। रश्मी को मजा आ गया। उसके बदन में कम्पन होने लगा। यह देख मुझे बड़ा सुख मिला। मैं और जल्दी जल्दी उसकी बुर को अपनी ऊंगलियों से फेटने और चोदने लगा। कुछ देर तक उसकी बुर मथने के बाद उसका कुछ माल मेरी ऊँगली में चुपड़ गया।

मैंने घी समझ् के चाट लिया और बचा कुचा रश्मी को चटा दिया। अब बाथिंग तब भर गया था। अपनी प्रेमिका की तरह उसका हाथ पकड़ मैं उसको तब में ले आया। पानी ठंडा था और गर्मियों में आदमी को और क्या चाहिये। हम दोनों अब पानी में लेटकर चुम्मा चाटी करने लगे। उसको शरारत सूझी और मेरे ऊपर पानी की छीटें मारने लगी। तो मैंने भी जवाब दिया और ठंडे पानी से भरे बाथिंग टब में मैं भी अपने हाथों ने पानी अपनी जवान बेहद खूबसूरत मकान मालकिन पर फेकने लगा। कुछ देर बाद हमारी चुदाई शुरू ही गयी दोंस्तों।

रश्मी बाथिंग तब में आराम से लेट गयी। मैं भी उसके साथ आ गया और पानी में ही मैंने उसकी बुर में लण्ड डाल दिया। मैं उसको पानी में ही चोदने लगा। दोंस्तों आप लोग भी ये पानी वाली चुदाई ट्राय करे। इसमें भी काफी मजा मिलता है। खूब कसावट भी इसमें मिलती है। और नार्मल से थोड़ा हटकर टेस्ट मिलता है। रश्मी ने बाथरूम में खुश सेंटेड मोमबत्तियां जला दी थी। पानी में गुलाब की ताजी पंखुड़ियां बिखेर दी थी। इसलिए आज तो हम 5 स्टार वाले लक्ज़री होटल का मजा घर में ही ले रहे थे। मैंने पानी में छप छप करते हुए उसको खूब पेला दोंस्तों।

ओहः गर्म आहे भर्ती रही। आआआ हहहहहह आया अहा करती रही। मैं उनके कमर पकड़ कर उसको ठोकता और हौकता रहा।फिर कुछ देर बाद उसकी बुर में ही पानी छोड़ लिया। रश्मी के साथ कुछ फुर्सत के पल बिताए मैंने। देखा की उसकी बुर पर थोड़ी झांटे थी।
रश्मी तेरी झाँटे बना दूँ?? मैंने पूछा।
उसने सिर हिला दिया। मैने शेविंग ब्रश से उसकी झांटों पर शेविंग क्रीम लगायी और खूब मला। बुर पर हर तरफ झाग ही झाग हो गया। फिर मैंने शेविंग मशीन से उसकी बुर बनायीं। झांटे शेव करने के बाद उसकी बुर बड़ी खूबसूरत लग रही थी। गोरी और चिकनी निकल आयी थी। अब मैं उसकी बुर पीने लगा। मैंने जीभ गड़ा गड़ा के खूब उसकी बुर पी। खूब मज़ा आया दोंस्तों।

अब रश्मी को मेरा लण्ड पीने की चुदास बड़ी तेज लगी। मैं बाथिंग टब के अंदर मजे से साइड्स पर दोनों हाथ करके लेट गया। थोड़ा पानी मैंने बहा दिया। अब तब में आधा पानी था। मेरा लण्ड पानी की सतह से ऊपर था। अब रश्मी बिना किसी दिक्कत के मेरा लण्ड चूसने लगी। वो जल्दी जल्दी मेरा लण्ड अपनी कोमल नाजक उँगलियों से उपर नीचे फेंटने लगी और लण्ड पीने लगी। मैं सुख संसार में डूब गया। उसके बाद दोंस्तों हमने 5 बार और चुदाई की। मैंने रश्मी की गाण्ड भी मारी। अगले हफ्ते उसका पति लौट आया और अब वो उसको चोदने लगा। अब रश्मी मुझसे नही मिलती थी। हमेशा घर में घुसी रहती थी।

अब मैं फिरसे हस्तमैथुन करने लगा था और बार बार अपनी माकन मालकिन के साथ हुई उस गरमा गरम चुदाई के बारे में मैं याद करता था और मुठ मरता था।

———समाप्त———

दोस्तों, अब तो बस यही इन्तेजार था की कब उसका पति वापिस जाये और फिर से मेरा नंबर आये। तो कैसी लगी आपको मेरी ये hot story?

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