मेरे अकेले पापा – II

By   September 11, 2017
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दर्द अब बिल्कुल ख़तम हो गया था और अब मुझे अपनी इस नयी मिली जवानी का मज़ा आने लगा था, मैं चाहती थी कि अब पापा मुझे जोर जोर से चोदे. इस hot beti sex stories का अगला धमाकेदार भाग..

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3


दर्द अब बिल्कुल ख़तम हो गया था और उसकी जगह वाक़ई अब मुझे इतना मज़ा आ रहा था के मैं बता नहीं सकती. मैं सोच रही थी के मम्मी भी इसी तरह पापा से चुदवाते हुए मज़ा लेती होंगी.

 

जब मज़ा मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया, और पापा उन्ही मेरे ऊपेर पड़े हुए थे, तो मुझ से रहा ना गया: “पापा, कुत्छ करो ना …. मेरी चूत मैं आग लगी हुई है ….”

इस के साथ ही मैं ने नीचे से पापा को ऊपेर की तरफ पुश किया. पापा अपनी बेटी का इशारा समझ गये.

 

“चलो अब अपनी जान को गौद मैं ले कर चोदुन गा”

 

यह कहते हुए पापा ने मुझे अपनी गौद मैं भर लिया; इस तरह के मेरी दोनो टांगे उन्हो ने अपनी कमर (वेस्ट) के गिर्द लपट लीं, और मेरे दोनो बाज़ू अपनी नेक के गिर्द लपट लिये, और इस तरह मेरी गांद को नीचे से पकड़ते हुए वो बेड से उतर कर मुझे गौद मैं ले कर फर्श पर खड़े हो गये. पापा का लंड उसी तरह से पूरा मेरी चूत मैं फँसा हुआ था.

 

इसी तरह उठाए हुए पापा मुझे ड्रेसिंग रूम के फुल साइज़ मिरर के सामने ले गये.

 

“जान, देखो मिरर मैं. कैसे लग रहे हैं हम दोनो बाप बेटी?”

 

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मैं मिरर मैं देख कर बुरी तरह शर्मा गयी.

 

“पापा … आप बड़े वो हैं …”

 

पापा मिरर के सामने इस तरह खड़े थे के मेरी बॅक साइड मिरर की तरफ थी. मैं ने एक बार फिर अपनी नेक घुमा कर मिरर की तरफ देखा. हम दोनो बाप बेटी बिल्कुल नंगे थे. मैं पापा की गौद मैं बंदरिया की तरह लिपटी हुई थी. पापा ने अपने दोनो हाथों से मेरी गांद को थामा हुआ था. पापा की उंगलियाँ मुझे अपनी गांद के गोश्त के अंदर घुसती हुई दिखाई दे रही थी. मेरी गांद का सुराख पूरी तरह से खुला हुआ था. और उसके नीच पापा का मोटा सख़्त लंड जड़ तक मेरी चूत मैं फँसा हुआ था. मेरी चूत के छेद ने पापा के लंड को रब्बर बॅंड की तरह ग्रिप किया हुआ था.

 

“कैसी बुरी लग रही हूँ मैं पापा …. ”

 

“नही जान, तुम बहुत हसीन लग रही हो. बिल्कुल उतनी हसीन जितनी एक लड़की मज़े ले कर चुदवाते हुए लगती है…. इतना हसीन जिसम हे मेरी बेटी का …. बिल्कुल ब्लू बॅंड मार्जरिन की तरह .. देखो मिरर मैं, कैसे पापा ने अपनी बेटी की मोटी ताज़ी गांद को पकड़ा हुआ हे … और मेरा लंड कैसा लग रहा अपनी जान बेटी की टाइट चूत मैं ….”

 

पापा ने यह कहते हुए मेरी गांद को ऊपेर उठाया, यहाँ तक के उनका लंड खींचता हुआ टोपी तक बाहर आ गया.

 

“बहुत टाइट चूत हे मेरी बेटी की. उफ़ मज़ा आ गया जान …. इस तरह तो 3 या 4 धक्कों मैं हे मेरी मनी निकल जाए गी”

यह कहते हुए पापा ने मेरी गांद को नीचे करते हुए अपने लंड को मेरी चूत मैं पुश किया. फिर बाहर निकाला, फिर किया. और फिर बगैर रुके तेज़ी से वो अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करते रहे. पापा पूरी तरह जोश और मस्ती मैं आ गये था. उनके गले से अजीब अजीब आवाज़े निकल रही थी. मुझे अब पता चला के चुद रही हूँ. इसे चोदना कहते हैं. मेरी अपनी हालत खराब हो चुकी थी. मेरे मुँह से भी है हाई की और बिल्ली की तरह घुर्रने की आवाज़ निकल रही थी.

 

“चोद रहा हूँ अपनी जान को …. लंड जा रहा तेरी चूत मैं जान … चुद मेरे लंड से …. चुद अपने पापा के लौरे से …. मज़ा आ रहा से …. टाइट चूत है मेरी बेटी की …. ”

 

“पापा चोदो अपनी बेटी को …. चोदो मुझे ….. फाड़ दो मेरी चूत को ….. उफ़ मरगई पापा … बोहत सख़्त लंड है आप का …… उफ़ लंड पेट मैं चला गया मेरे ….. पापा फॅट गई मेरी चूत …. चोदो ….. चोदो ….. उफ़ चुद गई मैं मम्मी. ओ’ मम्मी पापा ने चोद दिया मुझे …… पापा ज़ोर से चोदो …. और ज़ोर से चोदो ….. धक्के लगाओ ज़ोर ज़ोर से …… मज़ा आ रहा है …”

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पापा की पेशाब की बारिश

अब मेरा जिस्म अकड़ना शुरू हो रहा था. मुझे अपना दिमाग़ घूमता हुआ महसूस हो रहा था. मेरी चूत के सारे मुस्छले अकड़ने लगे थे. और चूत के अंदर पापा का लंड फूलने और पिचकने लगा था.

 

“उफ़ जान मेरी मनी निकल रही तेरी चूत मैं.” इस के साथ ही पापा का जिस्म बुरी तरह मुझे गौद मैं लिये झटके मारने लगा. मेरी गांद को पूरा नीचे खींच कर अपने लंड के साथ जमा दिया, और नीचे से अपने पूरी तरह मेरी चूत मैं फँसा दिया.

 

पापा की गरम गरम मनी की पिचकारिया मुझे अपनी चूत की गहराइयों मैं जाती हुई सॉफ महसूस हो रही थी. इस के साथ ही मैं भी ख़तम हो रही थी और मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.

 

हम दोनो बाप बेटी का जिसम अब ढीला पड़ता जा रहा था. पसीने मैं हम दोनो नहा चुके थे. मेरी चूत मैं बिल्कुल ठंडी पड़ गई थी. पापा का लंड भी ढीला पड़ने लगा था. मगर अभी तक मेरी चूत मैं ही.

पापा इसी तरह मुझे गौद मैं लिये लिये, सोफे पेर बैठ गये, और मैं अपने पापा के सीने के साथ यूँही चिपकी रही. मेरी पसीने मैं भीगी हुई छातियाँ पापा के बालों भरे सीने से पिसी हुई थी.

 

पापा का लंड आख़िर नरम हो कर मेरी चूत से बाहर निकल आया, और इसके साथ ही मेरी चूत से पापा की मनी बह बह कर बाहर आने लगी.

 

सोफा खराब ना हो जाए, इस ख़याल से मैं ने नीचे अपनी चूत पर हाथ रख दिया, और पापा की मनी अपने हाथो मैं ले ले कर अपने पैर ऑर बूब्स पर मलने लगी.

पापा और मैं अब थक चुके थे. हम दोनो बाप बेटी बेड पेर जा कर एक दूसरे की बाँहों मैं लिपट कर लेट गाए. मैं पाप के सीने से बरी तरह चिप टी हुई थी, और पापा के होंठों को किस कर रही थी. मेरे टिट्स पापा के सीने से मिले हुए थे.

 

“कैसा लगा मेरी जान को?” पापा ने आहिस्ता से मेरे कान से मुँह लगा कर पूछा.

 

“आप को कैसा लगा पापा?

 

“जान, मुझे टॉ बहुत अछा लगा. तुम्हारी अम्मी के बाद आज तुम ने वो मज़ा दिया हे के बता नहीं सकता. बहुत टाइट चूत हे मेरी श्रेया की. आज मुझे पता चला के मेरी बेटी का जिस्म कितना सेक्सी हे. जी चाहता के बस अपनी श्रेया जान को चोदता रहूं.” यह कहते हुए पापा ने मेरी गाड़ की दोनो गोलाईयों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

 

मैं ने अपनी एक टाँग पापा के दोनो टाँगों के बीच मैं डाल कर पापा को अपने से और क़रीब कर लिया, के पापा का लंड मेरी चूत के उपर रगर खाने लगा.

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