मेरी बीवी लेस्बियन निकली – III

By   December 25, 2017
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बीवी के लेस्बियन होने से मुझे नयी नयी औरतों के साथ threesome sex का मज़ा मिलने लगा. अब मेरी बीवी का लेस्बियन गैंग बढ़ता जा रहा है, इस group lesbian story का अगला भाग धमाकेदार भाग..

Desi Kahani के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

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पार्ट 4


मैंने बारी बारी से वैशाली ; गरिमा और निशा के साथ दो दो बार संभोग किया. यह खेल काफी देर तक चला. फिर रात होते ही निशा चली गई. लेकिन हम तीनो देर रात तक आपस में संभोग करते रहे.

हम तीनों के अलावा निशा के भी आने के बाद जिंदगी थोड़ी और मजेदार तथा शामें-रातें और भी रंगीन हो गई थी. सप्ताह में काम स काम दो मौके ऐसे आ जाते जब हम चारों एक साथ हो जाते. हम चारों का साथ लगभग दो माह तक रहा. पटेल साहब रिटायर हो गए और उनका परिवार सूरत चला गया. हम तीनों काफी दिन निशा को याद करके उदास रहे. लेकिन रंगीनीयाँ जारी थी.

मणिनगर में वैशाली के एक बहुत दूर के रिश्ते का भाई रहने आया. उसका घर हमारे घर से लगभग दस मिनट के पैदल रस्ते पर था. हम तीनो उससे पहली बार मिलने गए. वैशाली के भाई और भाभी ने गरिमा के बारे में पूछा तो मैंने उसे कह दिया कि वैशाली को घबराहट की बीमारी के चलते हमने डॉक्टरों के कहने पर एक चौबीसों घंटे की नर्स रखी हुई है. ये हमारे साथ ही रहती है और हमारे परिवार की एक अभिन्न सदस्या है. वैशाली के भाई रवि की पत्नी  सविता देखने में थोड़ी अजीब लगी. दिखने में अच्छी थी. सांवला रंग.मान को सुहावना लगता चेहरा. लेकिन वो कभी कभी अजीब तरह से हंसती औए बोलते बोलते छुप हो जाती. जब हम रवाना हुए तो रवि से मैंने अकेले में सविता के बारे में पुच ही लिया.  रवि ने कहा कि सविता का दिमाग थोडा काम विकसित है. वो सब समझती है. लेकिन कभी कभार उसका व्यवहार ऐसा हो जाता है. उसने गरिमा से कहा ” अच्छा हुआ आप मिल गई. अब आप इसका अपने तरीके से इलाज कर दीजिये. मुझ पर बड़ा एहसान होगा आपका.कहिये कब से भेजूं इसे.?” गरिमा हक्का बक्का हो गई. ये कैसी उलझन आ गई? अब इसे क्या जवाब दें? अगर सच बतादें तो सारा खेल बिगड़ सकता है. मैंने रवि से कहा ” ये दोपहर में अकेली रहती है. आप ऐसा करो. सवेरे जाते वक्त इन्हें हमारे यहाँ छोड़ते जाओ और शाम को लौटते वक्त अपने साथ ले जाया करो. अकेलेपन से छुटकारा भी मिलेगा और गरिमा इनका इलाज भी कर देगी.” रवि बहुत खुश हो गया.

रात को गरिमा और वैशाली मुझ पर भड़क गए. उन्होंने कहा कि अब हम तीनों ज्यादा आजादी से नहीं रह पायेंगे. मैंने उन्हें समझाया कि एक बार उसे आने दो. हो सकता है दो दिन के बाद हम रवि से यह कहा देंगे कि गरिमा इसका इलाज नहीं कर सकती. बस. मामला वहीँ ख़त्म हो जाएगा. दोनों मेरे जवाब से खुश हो गई.

रवि अगले दिन ही सविता को छोड़ गया. मैं उस दिन थोडा जल्दी चला गया था. दोपहर को तीनो कोई फिल्म देख रहे थेतभी फिल्म में एक दृश्य में हीरो हिरोइन को चूमता है और दोनों आपस में लिपटकर पलंग पर इधर उधर लोटना शुरू कर देते हैं. वैशाली इसे देख अत्यंत ही उत्तेजित हो गई. उसने गरिमा को बाहों में लिया और उसे चूमते हुए पलंग पर ले गई. फिर दोनों उस फिल्म कि तरह इधर उधर लोटने लगी. सविता ने यह देखा तो वो घबराकर खड़ी हो गई. वो पलंग के पास आकर उन दोनों को देखकर उन्हें अलग करने कि कोशिश करने लगी. वैशाली इतनी उत्तेजित हो गई थी कि उसने सविता को ढका दे दिया. सविता सोफे से जाकर टकराई और उस पर गिर गई. वो फिर लौट कर ई. वैशाली ने उसे एक और धक्का दिया. अब सविता रोने लगी. गरिमा से रहा नहीं गया. वो सविता के पास आई. उसने सविता को अपने गले से लगाया. उसके गालों को थपथपाया और एक छोटा सा चुम्बन उसके गालों का ले लिया. सविता अपने गालों के गीलेपन को पौंछते हुए मुस्कुराने लगी. गरिमा ने उसे सोफे पर बिठा दिया. इसके बाद सविता कुछ ना बोली.

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शाम को उस घटना से मैं परेशां हो गया. अगले दिन रवि उसे फिर छोड़ गया. सविता ने आते ही गरिमा से अपने गालों को चूमने और सहलाने को कहा. गरिमा ने ओस कर दिया. सविता खुश हो गई. इसके बाद नयी मुसीबत आ गई. उसने गरिमा को कल के फ़िल्मी सीन को दोहराने कि जिद की. वैशाली और गरिमा ने बात बाहर तक ना जाए इसके डर से दोनो ने उसके साथ थोडा सा वैसा ही कर दिया. अब सविता छुप हो गई. धीरे धीरे सविता की यह रोज रोज की आदत वैशाली और गरिमा से सहन नहीं हुई. हमने अगले दिन रवि से यह बहाना किया की हम तीनों कल कहीं जानेवाले हैं. उस दिन मैंने भी छुट्टी ले ली. दोपहर को हम तीनों काफी दिनों के बाद मिली इस आजादी का पूरा मजा ले रहे थे. हमारा संभोग चल रहा था. तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया. गरिमा ने तुरंत कपडे पहने और जाकर दरवाजा खोला. सविता खड़ी थी., उसने गरिमा को भीतर धकेला और अन्दर आकर उससे लिप्त गई और बोली ” मुझसे झूठ क्यूँ बोला. चलो अब मुझे चूमो. मुझे चूमो.” गरिमा ने उसे पीछे धकेलना चाह तो सविता दौड़ते हुए बेडरूम में आ गई. मैं और वैशाली आपस में लिपटे हुए थे और हम पूरी तरह से नग्न थे. वो हमें देख मुस्कुराई. उसने कहा ” आप लोग परेशान ना हो. मैं आपको ज्यादा परेशान नहीं करुँगी. मैं पागल नहीं हूँ. एकदम ठीक हूँ और सामान्य हूँ. मैंने जानबूझकर ये नाटक कर रखा है. इसका कारण रवि खुद है. वो बहुत कमजोर और ठंडा है. महीने भर में बड़ी मुश्किल से एक बार गरम होता है और उस पर भी मुझे अभी तक पूरी तरह से नहीं भेद पाया है. मैं परेशान हूँ. मैं कई बार खुद को नंगा कर बिस्तर पर लोटती हूँ. नंगी होकर खुद की ऊंगलीयाँ अपने जननांग में लेजाने की कोशिश करती हूँ.

आप ही अब बताइये मैं क्या करूँ? मैं अगर ऐसे ही जीती रही तो सचमुच में पागल हो जाऊंगी. आपको देखकर मैंने सोचा कि आपसे शायद मुझे कोई मदद मिल जाये. ” हम तीनों हैरान हो गए. फिर हम तीनों को सविता पर दया आ गई. गरिमा ने सविता से कहा ” तुम रवि के सामने अपना नाटक जारी रखो. यहाँ लगातार आती रहो. हम तीनों तुम्हारी पूरी मदद करेंगे. तुम्हें प्यासी नहीं रहने देंगे. तुम्हारी प्यास बुझेगी. ” गरिमा ने सविता के तुरत फुरत में सारे कपडे उतार दिए और हमारे साथ पलंग पर सुला लिया. वैशाली और गरिमा ने सविता के बदन को सहलाया. खूब मसाज किया. उसके स्तनों को खूब मसल मसलकर उसे मदहोश कर दिया. अब उसे एक दम चरम पर लाने के लिए वैशाली उसके ऊपर लेट गई. उसने सविता के गुप्तांग और जननांग पर अपने गुप्तांग और जननांग से दबाव पैदा कर उसमे जबरदस्त प्यास पैदा कर दी. गरिमा ने मुझे उस पर लेट जाने को कहा. मैं उस पर लेट गया. यह जानते हुए कि रवि अभी तक सविता के जननांग को पूरी तरह से नहीं भेद सका है. मैंने अपने गुप्तांग को उसके जननांग में पूरे जोर से धकेला. लगभग चार पांच मिनट के बाद मुझे सफलता मिल गई. सविता कि प्यास आज पहली बार बुझी थी. मैंने सविता के जननांग को अपने लिंग से करीब एक घंटे तक बंद किये रखा. जब सविता का सारा जिस्म पसीने से भीग गया और उसके होंठ ठन्डे और गीले हो गए तो मैंने उसके होंठों का एक जोरदार खींच पैदा करनेवाला किस लिया और उसे छोड़ दिया. सविता के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गई.अब वैशाली और गरिमा को भी थोड़ी थोड़ी देर के लिए मैंने अपने साथ लिया और संभोग किया.

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