मेरी हमदर्द बहू

By   November 9, 2017
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वैसे तो यह आम सी बात है और बहुतों की जिंदगी आपसी समझ की कमी से कुछ इसी तरह की हो जाती है और अलगाव बढ़ जाता है। पर फिर जिंदगी में कोई आ जाता है तो दुनिया महक उठती है रंगीन हो जाती है। मैं आपको अपनी इस hindi sex story में उसी महक के बारे में बताऊंगा जिसने ढलती उम्र में Bahu ki chudai ने मेरी दुनिया रोशन कर दी.. अब में अपनी hindi sex story पर आता हूँ..

मेरी उमर अब लगभग 46 वर्ष की हो चुकी है। मैं अपना एक छोटा सा बिजनेस चलाता हूँ। 20 साल की उम्र में शादी के बाद मेरी जिंदगी बहुत खूबसूरत रही थी, ऐसा लगता था कि जैसे यह रोमान्स भरी जिंदगी यूं ही चलती रहेगी। उन दिनों जब देखो तब हम दोनों खूब चुदाई करते थे। मेरी पत्नी गीता बहुत ही सेक्सी युवती थी। फिर समय आया कि मैं एक लड़के का बाप बना। उसके लगभग एक साल बीत जाने के बाद गीता ने फिर से कॉलेज जॉयन करने की सोच ली। वो ग्रेजुएट होना चाहती थी। नये सेशन में जुलाई से उसने एडमिशन ले लिया… फिर चला एक खालीपन का दौर… गीता कॉलेज जाती और आकर बस बच्चे में खो जाती। मुझे कभी चोदने की इच्छा होती तो वो बहाना कर के टाल देती थी। एक बार तो मैंने वासना में आकर उसे खींच कर बाहों में भर लिया… नतीजा … गालियाँ और चिड़चिड़ापन।

मुझे कुछ भी समझ में नहीं आता था कि हम दोनों में ऐसा क्या हो गया है कि छूना तक उसे बुरा लगने लगा था। इस तरह सालों बीत गये।

उसकी इच्छा के बिना मैं गीता को छूता भी नहीं था, उसके गुस्से से मुझे डर लगता था। मेरा लड़का भी 21 वर्ष का हो गया और उसने अपने लिये बहुत ही सुन्दर सी लड़की भी चुन ली। उसका नाम समीरा था। बी कॉम करने के बाद उसने मेरे बिजनेस में हाथ बंटाना चालू कर दिया था। मेरी पत्नी के व्यवहार से दुखी हो कर मेरे लड़के प्रवीण ने अपना अलग घर ले लिया था। घर में अधिक अलगाव

होने से अब मैं और मेरी पत्नी अलग अलग कमरे में सोते थे। एकदम अकेलापन …

गीता एक प्राईवेट स्कूल में नौकरी करने लगी थी। उसकी अपनी सहेलियाँ और दोस्त बन गये थे। तब से उसके एक स्कूल के टीचर के साथ उसकी अफ़वाहें उड़ने लगी थी… मैंने भी उन्हें होटल में, सिनेमा में, गार्डन में कितनी ही बार देखा था। पर मजबूर था… कुछ नहीं कह सकता था। मेरे बेटे की पत्नी समीरा दिन को अक्सर मुझसे बात करने मेरे पास आ जाती थी। मेरा मन इन दिनों भटकने लगा था। मैं दिनभर या तो देसी मासला लैव पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ता रहता था या फिर पोर्न साईट पर चुदाई के वीडियो देखता रहता था। फिर मुठ मार कर सन्तोष कर लेता था। समीरा ही एक स्त्री के रूप में मेरे सामने थी, वही धीरे धीरे मेरे मन में छाने लगी थी। उसे देख कर मैं अपनी काम भावनायें बुनने लगता था। इस बात से कोसों दूर कि कि वो मेरे घर की बहू है। समीरा को देख कर मुझे लगता था कि काश यह मुझे मिल जाती और मैं उसे खूब चोदता … पर फिर मुझे लगता कि यह पाप है… पर क्या करता… पुरुष मन था… और स्त्री के नाम पर समीरा ही थी जो कि मेरे पास थी।

एक दिन समीरा ने मुझे कुछ खास बात बताई। उससे दो चीज़ें खुल कर सामने आ गई। एक तो मेरी पत्नी का राज खुल गया और दूसरे समीरा खुद ही चुदने तैयार हो गई।

समीरा के बताये अनुसार मैंने रात को एक बजे गीता को उसके कमरे में खिड़की से झांक कर देखा तो… सब कुछ समझ में आ गया… वो अपना कमरा क्यों बंद रखती थी, यह राज़ भी खुल गया। एक व्यक्ति उसे घोड़ी बना कर चोद रहा था। गीता वासना में बेसुध थी और अपने चूतड़ हिला हिला कर उसका पूरा लण्ड ले रही थी। उस व्यक्ति को मैं पहचान गया वो उसके कॉलेज टाईम का दोस्त था और उसी के स्कूल में टीचर था।

मैंने यह बात समीरा को बताई तो उसने कहा- मैंने कहा था ना, मां जी का राजेश के साथ चक्कर है और रात को वो अक्सर घर पर आता है।

“हाँ समीरा… आज रात को तू यहीं रह जा और देखना… तेरी सासू मां क्या करती है।”

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“जी , मैं प्रवीण को बोल कर रात को आ जाऊंगी…”

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मेरी बहू, मेरी हमदर्द

शाम को ही समीरा घर आ गई, साथ में अपना नाईट सूट भी ले आई… उसका नाईट सूट क्या था कि बस… छोटे से टॉप में उसके स्तन उसमे आधे बाहर छलक पड़ रहे थे। उसका पजामा नीचे उसके चूतड़ों की दरार तक के दर्शन करा रहा था। पर वो सब उसके लिये सामान्य था। उसे देख कर तो मेरा लौड़ा कुलांचे भरने लगा था। मैं कब तक अपने लण्ड को छुपाता। समीरा की तेज नजरों से मेरा लण्ड बच ना पाया।

वो मुस्करा उठी। समीरा ने मेरी वासना को और बाहर निकाला- पापा… मम्मी से दूर रहते हुए कितना समय हो गया… ?

“बेटी, यही करीब 16-17 साल हो चुके हैं !”

“क्या ?? इतना समय… साथ भी नहीं सोये…??”

“साथ सोये ? हाथ भी नहीं लगाया…!”

“तभी… !”

“क्या तभी…?” मैंने आश्चर्य से पूछा।

“पापा… कभी कोई इच्छा नहीं होती है क्या?”

“होती तो है… पर क्या कर सकता हूँ… गीता तो छूने पर ही गन्दी गालिया देती है।”

“तू नहीं और सही…। पापा प्यार की मारी औरतें तो बहुत हैं…”

“चल छोड़ !!! अब आराम कर ले… अभी तो उसे आने में एक घण्टा है…चल लाईट बंद कर दे !”

“एक बात कहूँ पापा, आपका बेटा तो मुझे घास ही नहीं डालता है… वो भी मेरे साथ ऐसे ही करता है !” समीरा ने दुखी मन से कहा।

“क्या तो … तू भी… ऐसे ही…?”

“हाँ पापा… मेरे मन में भी तो इच्छा होती है ना !”

“देखो तुम भी दुखी, मैं भी दुखी…” मैंने उसके मन की बात समझ ली… उसे भी चुदाई चाहिये थी… पर किससे चुदाती… बदनाम हो जाती… कहीं ???… कहीं इसे मुझसे चुदना तो नहीं है… नहीं… नहीं… मैं तो इसका बाप की तरह हूँ… छी:… पर मन के किसी कोने में एक हूक उठ रही थी कि इसे चुदना ही है।

समीरा ने बत्ती बन्द कर दी। मैंने बिस्तर पर लेते लेटे समीरा की तरफ़ देखा।

उसकी बड़ी बड़ी प्यासी आँखें मुझे ही घूर रही थी। मैंने भी उसकी आँखों से आँखें मिला दी। समीरा बिना पलक झपकाये मुझे प्यार से देखे जा रही थी। वो मुझे देखती और आह भरती… मेरे मुख से भी आह निकल जाती। आँखों से आँखें चुद रही थी। चक्षु-चोदन काफ़ी देर तक चलता रहा… पर जरूरत तो लण्ड और चूत की थी।

आधे घण्टे बाद ही गीता के कमरे में रोशनी हो उठी। समीरा उठ गई। उसकी वासना भरी निगाहें मैं पहचान गया।

“पापा वो लाईट देखो… आओ देखें…”

हम दोनों दबे पांव खिड़की पर आ गये। कल की तरह ही खिड़की का पट थोड़ा सा खुला था। समीरा और मैंने एक साथ अन्दर झांका। राजेश ने अपने कपड़े उतार रखे थे और गीता के कपड़े उतार रहा था। नंगे हो कर अब दोनों एक दूसरे के अंगों को सहला रहे थे। अचानक मुझे लगा कि समीरा ने अपनी गाण्ड हिला कर मेरे से चिपका ली है। अन्दर का दृश्य और समीरा की हरकत ने मेरा लौड़ा खड़ा कर दिया… मेरा खड़ा लण्ड उसकी चूतड़ों की दरार में रगड़ खाने लगा।

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