मेरी माल बहन – I

By   April 24, 2018
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गेट के बाहर हर रोज घर ले जाने के लिये रिक्शावाला, मेरा इन्तेजार कर रहा था। मेरे बैठते ही रिक्शावाला तेजी के साथ दीदी के स्कूल की तरफ रवाना हो गया। ये मेरा हर रोज का रूटीन था। पहले रिक्शावाला मुझे लेता था, क्योंकि मेरे स्कूल की छुट्टी ११:३० बजे होती थी फिर दीदी को, जोकि १२वीं क्लास में पढती थी मैं दसवीं कक्षा का छात्र हुं। पढ़िए मस्त sister chudai stories –

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भाग – 1

भाग – 2


 

और उनके स्कूल की छुट्टी १२:०० बजे होती थी। कुछ ही देर में मैं दीदी के कोन्वेन्ट स्कूल के सामने पहुंच गया। अभी ११:४५ हुए थे, रिक्शावाला बगल की दुकान पर चाय पीने चला गया और मैने अपने बेग में से दो किताबे निकल ली। ये दोनो किताबे मेरे दोस्त सोहन ने मुझे दी थी। एक किताब में औरत-मर्द के नन्गे चित्र थे, और दुसरी किताब में कहानियां थी। कहानियों की किताब को मैने बाद में पढने का निश्चय किया, और पिक्चर वाली किताब को अपनी हिस्टरी बुक के बिच में रख कर वहीं रिक्शा पर देखने लगा। पिक्चर्स काफि सेक्षी और ईरोटीक थी। पिक्चर्स देखते-देखते मेरा लंड खडा होने लगा, और मेरे चेहरे का रंग उत्तेजना के मारे लाल हो गया। अपने खडे लंड को छुपाने के लिये, मैने अपना स्कूल बेग अपनी गोद में रख लिया और औरत-मर्द के चुदाई के विभिन्न आसनो में ली गई उन तसवीरों को देखने लगा। तभी स्कूल की घंटी बज उठी। मैने जल्दी से किताबों को मोड कर अपने स्कूल बेग में घुसाया, अपने लंड को अपनी पेन्ट में एडजस्ट किया और रिक्षे से उतर कर अपनी डार्लिंग बहन का इन्तेजार करने लगा।

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ठीक बारह बजे मुझे मेरी प्यारी, सेक्षी गुडिया जैसी बहना रिक्शा की तरफ बढती हुई दिख गई। सच में कितनी खूबसुरत थी, मेरी बहन! उसको देखा कर, किसी भी मर्द की रीड की हड्डी में जरुर एक सिहरन उठ जाती होगी। मेरी बहन इतनी खूबसुरत और सेक्षी है कि, मैं उसके प्यार में पुरी तरह से डुब गया हुं। वो भी मुझ से उतना ही प्यार करती है। बाहर की दुनिया के लिये हम भले ही भाई-बहन है, मगर घर में अपने कमरे के अंदर हम दोनो भाई-बहन, एक-दुसरे के लिये पति-पत्नी से भी बढ कर है। आपको ये सुन कर शायद आश्चर्य लगेगा, मगर यही सच है। मेरी दीदी इस वक्त १९ साल की है, और मैं १८ साल का। हम दोनो अपने मम्मी-पापा के साथ, शहर से थोडी दूर उपनगरीय क्षेत्र में रहते है। मेरे पापा अभी ४० साल के, और मम्मी ३५ साल की है। हमारा एक मध्यम वर्गीय परिवार है। मेरी मां बहुत ही खूबसुरत महिला है, और पापा भी एक खूबसुरत व्यक्तित्व के मालिक है। दोनो ने लव-मैरीज की थी, इसलिये उन्हे परिवार से अलग हो कर रहना पड रहा है। जोकि हमारे लिये अच्छी बात है। पापा एक प्राईवेट बैंक में उंचे पद पर है, और मम्मी गवर्नमेन्ट जोब करती है। इस नये शहर में आकर, पापा ने जानबुझ कर शहर से बाहर शांति भरे माहोल में एक बंगलो खरीदा था। हमें स्कूल ले जाने और ले आने के लिये, उन्होने एक रिक्शा तय कर दिया था। घर की उपरी मंझिल पर, एक कमरे में मम्मी और पापा रहते थे और दुसरे कमरे में हम दोनो भाई-बहन। हमारे घर से स्कूल तक की दूरी, रिक्शा के द्वारा करिब ३० मिनट में तय हो जाती थी।

रिक्शा के पास आते ही बहन ने पुछा,
“और भाई, कैसे हो ? बहुत ज्यादा देर से इन्तेजार तो नही कर रहे ?”

मैने कहा,
“नही दीदी, ऐसा नही है।”,
और उसको देखते हुए मुस्कुराया।


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दीदी की मस्त जवानी

मैने देखा कि, उसके गाल गुलाबी हो गये थे, और चेहरे पर शर्म की लाली और आंखो में वासना के डोरे तैर रहे थे। मैं सोचने लगा कि, मेरी प्यारी बहना के गाल गुलाबी और आंखे वासना से भरी भरी क्यों लग रही है ? क्या दीदी स्कूल में गरम हो गई थी ? मेरी बहन ने रिक्शा पर बैठने के लिये, अपने एक पैर को उपर उठाया। इस तरह करते हुए उसने बडे ही आकर्षक और छुपे हुए तरिके से, अपनी स्कर्ट को इस तरह से उठ जाने दिया कि, मुझे मेरी प्यारी बहन की मांसल, चिकनी और गोरी जांघे, उसकी पेन्टी तक दिख गई। एक क्षण में ही दीदी रिक्शा पर बैठ गई थी, पर मेरे बगल में शैतानी भरी मुस्कुराहट के साथ बैठ गई। मैं जानता था कि, यह उसका मुझे सताने के अनेक तरिको में से एक तरीका है। जब वो मेरे बगल में बैठी तो उसके महकते बदन से निकलती सुगंध ने मेरे नाक को भर दिया, और मैने एक गहरी सांस लेकर उस सुगंध को अपने अंदर और ज्यादा भरने की कोशिश की।

मेरी बहन मेरी उत्तेजना को समझ सकती थी।उसने मुस्कुराते हुए पुछा,
“क्यों भाई, तुम्हारा चेहरा इस तरह से लाल क्यों हो रहा था, और तुम्हारी आंखे भी लाल हो रही है, क्या बात है ?”

मैने मुस्कुराते हुए उसकी ओर देखा और कहा,
“देखो दीदी, तुम तो मेरे दोस्त सोहन को तो जानती ही हो। उसने मुझे दो बहुत ही गर्म किताबे दी है। तुम्हारा इन्तेजार करते हुए, मैं उन्हे देखा रहा था और फिर तुम जब रिक्शे पर बैठ रही थी, तब तुमने मुझे अपनी पेन्टी और जांघे दिखा दी। अब जब कि तुम मेरे बगल में बैठी हो, तो तुम्हारे बदन से निकलने वाली खूश्बु मुझे पागल कर रही है।”मेरी बहन हंसने लगी। रिक्शावाले ने रिक्शे को आगे बढा दिया था और हम दोनो भाई-बहन धीमे स्वर में फुसफुसाते हुए आपस में बात कर रहे थे, ताकि हमारी आवाज रिक्शा वाला ना सुन सके।

मेरी बहन मेरे दाहिने तरफ बैठी थी, और अपनी दाहिने हाथ से उसने अपने किताबों को अपनी छाती से चिपकाया हुआ था। पथरीले रास्ते पर चलने के कारण रिक्शा बहुत हिल रहा था, और इसलिये अपना बैलेंस बनाने के लिये काजल दीदी ने अपने बांये हाथ को उपर उठा कर, रिक्शा का हुड पकड लिया। ऐसा करने से मेरी प्यारी बहन की चिकनी, मांसल कांख, (जोकि पसिने की पतली परत और उससे भीगे हुए उसके स्कूल ड्रेस के ब्लाउस से ढके हुए थे।)से निकलती हुई तीखी गंध सीधी मेरी नाक में आ कर समा गई। मेरी गोद में रखे मेरे बेग के निचे मेरा लंड अब पुरी तरह से खडा हो गया था, और ऐसा लग रहा था कि उसने मेरे बेग को अपने उपर उठा लिया है। यह मेरी बहन का एक और अनोखा अंदाज था मुझे सताने का, वो जानती थी कि मुझे उसकी कांख और उस से निकलने वाली गंध पागल बन देती है। उसके बदन की खुश्बु मुझे कभी भी उत्तेजित कर देती है।

उसने मुझे अपनी आंखो के कोनो से देखा, और सीट की पुश्त से अपनी पीठ को टीका कर आराम से बैठ गई। उसने अभी भी अपने बांये हाथ से हुड को पकड रख था, और अपनी किताबों को अपने छातियों से चिपकाये हुए थी। रिक्षा के हिलने के कारण उसकी किताबे, जोकि उसकी छातियों चिपकी हुई थी, बार-बार उसकी चुचियों पर रगड खा रही थी। जैसे ही रिक्शा एक मोड से मुडा तो मैने ऐसा नाटक किया कि, जैसे मैं लुढक रहा हुं और अपने चेहरे को उसकी मांसल कांखो में गडा दिया और लम्बी सांस खिंचते हुए उसकी कांखो को चाट लिया और हल्के से काट लिया। मेरी बहन के मुंह से एक आनंद भी चिख निकल गई और उसने मुझे जानवर कहा और बोली,
“देखो भाई, तुम एक जानवर की तरह से हरकत कर रहे हो। देखो, तुमने कैसे मेरी कांखो को चाट कर गुदगुदा दिया और काट लिया। मुझे दर्द हो रहा है, मुझे लगता है, तुम्हरे दोस्त की दी हुई कितबों ने तुम्हे कुछ ज्यादा ही गरम कर दिया है।”

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