नि:संतानता का पक्का इलाज

By   October 10, 2017
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कोमल को देखते ही मैं समझ गया था की उसमे कोई कमी नही है, पति ही नाकारा. वो माँ बन सकती है, और मैं बनाऊंगा उसे माँ. उसकी कोमल छूट का उद्घाटन करूँगा. आखिर ये एक डॉक्टर का फ़र्ज़ है की उसकी पेशेंट की नि:संतानता दूर हो.. एक अत्यंत कामुक hindi doctor sex story पेश है..

मेरी पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के एक गाँव में हो गयी. गाँव वासियों ने अपने जीवन में गाँव में पहली बार कोई डॉक्टर देखा था. इसके पहले गाँव नींम हकीमों, ओझाओं और झार फूँक करने वालों के हवाले था। जल्द ही गाँव के लोग एक भगवान की तरह मेरी पूजा करने लग गए। रोज ही काफ़ी मरीज आते थे और मैं जल्दी ही गाँव की जिंदगी मैं बड़ा महत्व पूर्ण समझा जाने लगा। गाँव वाले अब सलाह के लिय भी मेरे पास आने लगे. मैं भी किसी भी वक़्त मना नहीं करता था अपने मरीजों को आने के लिये।

 

गाँव के बाहर मेरा बंगला था. इसी बंगले मैं मेरी डीस्पेंसरी भी थी. गाँव मैं मेरे साल भर गुजारने के बाद की बात होगी यह. इस गाँव मैं लड़कियाँ और औरतें बड़ी सुंदर सुंदर थी। एसी ही एक बहुत खूबसूरत लड़की थी गाँव के मास्टरज़ी की। नाम भी उसका था कोमल. सच कहूँ तो मेरा भी दिल उस पर आ गया था पर होनी को कुछ और मंजूर था। गाँव के ठाकुर के बेटे का भी दिल उस पर आया और उनकी शादी हो गई. कहाँ कोमल, और कहाँ जतिन. जतिन बड़ा सूखा सा मरियल सा लड़का था। मुझे तो उसके मर्द होने पर भी शक़ था. और यह बात सच निकली करीब करीब. उनकी शादी के साल भर बाद एक दिन ठकुराइन मेरे घर पर आई. उसने मुझे कहा की उसे बड़ी चिंता हो रही है की बहू को कुछ बच्चा वगेरह नहीं हो रहा. उसने मुझसे पूछा की क्या प्रोब्लम हो सकता है. लड़का बहू उसे कुछ बताते नहीं हैं और उसे शक है की बहू कहीं बांझ तो नहीं।

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मैने उसे ढाढ़स दिया और कहा की वो लड़का -बहू को मेरे पास भेज दे तो मैं देख लूँगा की क्या प्रोब्लम है. उसने मुझसे आग्रह किया मैं यह बात गुप्त रखूं, घर की इज़्ज़त का मामला है। फिर एक रात करीब शाम को वो दोनो आय. जतिन और उसकी बहू. देखते ही लगता था की बेचारी कोमल के साथ बड़ा अन्याय हुआ है. कहाँ वो लंबी, लचीली एकदम कोमल लड़की. भरे पूरे बदन की बला की खुबसूरत लड़की और कहाँ वो जतिन, काला कलूटा मरियल सा. मुझे जतिन की किस्मत पर बड़ा रंज हुआ. वो धीरे धीरे अक्सर इलाज करवाने मेरे क्लिनिक पर आने लगे और साथ साथ मुझसे खुलते गये. जतिन बड़ा नर्म दिल इंसान था. अपनी बला की खूबसूरत बीवी को ज़रा सा भी दुख देना उसे मंजूर ना था।

उसने दबी ज़ुबान से स्वीकार किया एक भी दिन अभी तक वो अपनी बीवी को चोद नहीं पाया है. मैं समझ गया की क्यों बच्चा नहीं हो रहा है. जब कोमल अभी तक वर्जिन ही है तो, सहसा मेरे मन मैं एक ख्याल आया और मुझे मेरी दबी हुई हसरत पूरी करने का एक हसीन मौका दिखा. कोमल का कौमार्या लूटने का. दरअसल जब जब जतिन कोमल के सुंदर नंगे जिस्म को देखता था अपने अप र काबू नहीं रख पाता था और इससे पहले की कोमल सेक्स के लिय तैयार हो जतिन उस पर टूट पड़ता था।

नतीजा यह की लंड घुसाने की कोशिश करता था तो कोमल दर्द से चिल्लाने लगती थी और कोमल को यह सब बड़ा तकलीफ़ वाला मालूम होता था. उसे चिल्लाते देख बेचारा जतिन सब्र कर लेता था फिर. दूसरे जतिन इतना कुरूप सा था की उसे देख कर कोमल बुझ सी जाती थी। सारी समस्या जानने के बाद मैने अपना जाल बिछाया. मैने एक दिन ठकुराइन और जतिन को बुलाया. उन्हें बताया की खराबी उनके बेटे मैं नहीं बल्कि बहू मैं है. और उसका इलाज करना होगा. छोटा सा ऑपरेशन. बस बहू ठीक हो जाएगी. बुडिया तो खुश हो गयी पर बेटे ने बाद मैं पूछा , डॉक्टर साहब. आख़िर क्या ऑपरेशन करना होगा? हा जतिन तुम्हे बताना ज़रूरी है. नहीं तो बाद मैं तुम कुछ और समझोगे।

हा.. हा.. बोलिय ना डॉक्टर साहब. देखो जतिन. तुम्हारी बीवी का गुप्ताँग तोड़ा सा खोलना होगा ऑपरेशन करके. तभी तुम उससे संभोग कर पाओगे और वो माँ बन सकेगी. क्या? पर क्या यह ऑपरेशन आप करेंगे. मतलब मेरी बीवी को आपके सामने नंगा लेटना पड़ेगा? हा.. यह मजबूरी तो है. पर तुम तभी उसकी जवानी का मज़ा लूट पाओगे ! वरना सोच लो यू ही तुम्हारी उमर निकल जायगी और वो कुँवारी ही रहेगी. तो क्या आप जानते हैं यह सब बात. वह भोंचक्का सा बोला. हाँ ! ठकुराइन ने मुझे सारी बात बता दी थी. अब वो नरम पड़ गया. प्लीज़ डॉक्टर साहब. कुछ भी कीजिए. ऑपरेशन कीजिए चाहे जो जी आय कीजिए पर कुछ एसा कीजिए की मैं उसके साथ वो सब कर सकूँ और हमारा आँगन बच्चे की किलकरी से गूँज उठे. वरना मैं तो गाँव मैं मुँह नहीं दिखा सकूँगा किसी को. खानदान की इज़्ज़त का मामला है डॉक्टर साहब. उसने हाथ जोड़ लिये । ठीक है घबराओ नहीं.. बहू को मेरे क्लिनिक मैं भर्ती कर दो.. दो चार दिन मैं जब वो ठीक हो जायगी तो घर आ जायगी.. जब तुम गाँव वापस आओगे तो बस फिर बहू के साथ मौज करना. ठीक है डॉक्टर साहब. मेरे आने तक ठीक हो जायगी तो मैं आपका बड़ा अप कार मानूँगा..

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कोमल की कोमल जवानी

और इस तरह कोमल मेरे घर पर आ गई. कुछ दीनो के लिय. शिकार जाल मैं था बस अब. करने की बारी थी. कोमल अच्छी मिलनसार थी. खुल सी गई थी मुझसे. पर जब वो सामने होती थी अपने अप र काबू रखना मुश्किल हो जाता था. बला की कमसिन थी वो जवानी जैसे फुट फुट कर भरी थी उसके बदन मैं. पर मैं जब्त किय था. मौका देख रहा था. महीनों से कोई लड़की मेरे साथ नहीं सोई थी. लंड था की नारी बदन देखते ही खड़ा हो जाता था. दूसरी प्रोब्लम यह थी मेरे साथ की मेरा लंड बहुत बड़ा है. जब वो पूरी तरह खड़ा होता है तो करीब 8” लंबा होता है और उसका हेड का सिरा 3” का हो जाता है. जैसे की एक लाल बड़ा सा टमाटर हो. और पीछे लंबा सा, पत्थर की तरह कड़ा एक दम सीधा लंबा सा खीरे जैसा मोटा सा लंड!

कोमल को मेरे घर आय एक दिन बीत चुका था. पिछली रात तो मैने किसी तरह गुज़ार दी पर दुसरे दिन बदहवास सा हो गया और मुझे लगा की अब मुझे कोमल चाहिय वरना कहीं मैं उससे बलात्कार ना कर बैठू. एसी सुंदर कमसिन काया मेरे ही घर मैं. और मैं प्यासा. रात के भोजन के बाद मैने कोमल से कहा की मुझे उससे कुछ खास बातें करनी हैं उसके केस के बारे मैं। क्लिनिक बंद करके मैने उससे कहा की वो अंदर मेरे घर मैं आ जाए. गाँव की एक वधू की तरह वो मेरे सामने बैठी थी. एक भरपूर नज़र मैने उस पर डाली. उसने नज़रें झुका ली. अब मैने बे रोक टोक उसके जिस्म को अपनी नज़रों से टोला. उफफफ्फ़ कपड़ों मैं लिपटी हुई भी वो कितनी काम वासना जगाने वाली थी। देखो कोमल मैं जानता हूँ की जो बातें मैं तुमसे करने जा रहा हूँ वो मुझे तुम्हारे पति की अनुपस्थिति मैं शायद नहीं करनी चाहिय, पर तुम्हारे केस को समझने के लिय और इलाज के लिय मेरा जानना ज़रूरी है और अकेले मैं मुझे लगता है की तुम सच सच बताओगी. मैं जो पूछूँ उसका ठीक ठीक जवाब देना।

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