पड़ोस का छोकरा – II

By   December 31, 2016
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पड़ोस का वो छोकरा मेरे कबूतरों से खेल रहा था, मेरा टॉप उतार दिया। उसका तना लंड देखके मेरी धड़कने और बढ़ गयी। मेरो इस hot hindi sex story का लास्ट पार्ट..

Indian Sex Stories के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2


मेरे दोनों बड़े बड़े कबूतर उसकी गिरफ़्त में थे। वो उसे सहला सहला कर दबा रहा था। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। मेरे दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी। बस जुबान पर इन्कार था, मैंने उसके हाथ अपने बड़े-बड़े नर्म कबूतरों से हटाने की कोशिश नहीं की।

उसने मेरा टॉप ऊपर खींच दिया, मैं ऊपर से नंगी हो चुकी थी। मेरे बड़े-बड़े सुडौल स्तन तन कर बाहर उभर आये। उनमें कठोरता बढ़ती जा रही थी। मेरे चुचूक सीधे होकर कड़े हो गये थे। मैं अपने हाथों से अपना तन छिपाने की कोशिश करने लगी।

तभी उसने बेशर्म होकर अपनी पैंट उतार दी और साथ ही अपनी चड्डी भी।

यह मेरे मादक जोबन की जीत थी। उसका लण्ड 120 डिग्री पर तना हुआ था और उसके ऊपर उसके पेट को छू रहा था। बेताबी का मस्त आलम था। उसका लण्ड लम्बा मोटा था । मेरा मन हुआ कि उसे अपने मुख में दबा लूँ और चुसक चुसक कर उसका माल निकाल दूँ।

उसने एक झटके में मुझे खींच कर मेरी पीठ अपने से चिपका ली। मेरे चूतड़ों के मध्य में पजामे के ऊपर से ही लण्ड घुसाने लगा। आह्ह ! कैसा मधुर स्पर्श था … घुसा दे मेरे राजा जी … मैंने सामने से अपनी भारी भारी चूचियाँ और उभार दी। उसका कड़क बड़ा बड़ा लण्ड गाण्ड में घुस कर अपनी मौजूदगी दर्शा रहा था।

“वो क्या है? … उसमें क्या तेल है …?”

“हाँ है … पर ये ऐसे क्या घुसाये जा रहा है … ?”

उसने मेरी गर्दन पकड़ी और मुझे बिस्तर पर उल्टा लेटा दिया। एक हाथ बढ़ा कर उसने तेल की शीशी उठा ली। एक ही झटके में मेरा पाजामा उसने उतार दिया,

“बस अब ऐसे ही पड़े रहना … नहीं तो ध्यान रहे मेरे पास चाकू है … पूरा घुसेड़ दूँगा।”

मैं उसकी बात से सन्न रह गई। यह क्या … उसने मेरे चूतड़ों को खींच कर खोल दिया और तेल मेरे गाण्ड के फ़ूल पर लगाने लगा। उसने धीरे से अंगुली दबाई और अन्दर सरका दी। वो बार बार तेल लेकर मेरी गाण्ड के छेद में अपनी अंगुली घुमा रहा था। मेरे पति ने तो ऐसा कभी नहीं किया था। उफ़्फ़्फ़्… कितना मजा आ रहा था।

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“विक्की, देख चाकू मत घुसेड़ना, लग जायेगी …” मैंने मस्ती में, पर सशंकित होकर कहा।

पर उसने मेरी एक ना सुनी और दो तकिये नीचे रख दिये। मेरी टांगें खोल कर मेरे छेद को ऊपर उठा दिया और अपना मोटा सुपाड़ा उसमें दबा दिया।

“देख चाकू गया ना अन्दर …”

“आह, यह तो तुम्हारा वो है, चाकू थोड़े ही है?”

“तो तुम क्या समझी थी सचमुच का चाकू है मेरे पास … देखो यह भी तो अन्दर घुस गया ना ?”

उसका लण्ड मेरी गाण्ड में उतर गया था।

“देख भैया, अब बहुत हो गया ना … तूने मुझे नहीं छोड़ा तो मैं चिल्लाऊँगी …” मैंने अब जानबूझ कर उसे छेड़ा।

पर उसने अब धक्के लगाने शुरू कर दिये थे, लण्ड अन्दर बाहर आ जा रहा था, उसका लण्ड मेरी चूत को भी गुदगुदा रहा था। मेरी चूत की मांसपेशियाँ भी सम्भोग के तैयार हो कर अन्दर से खिंच कर कड़ी हो गई थी।

“नहीं दीदी चिल्लाना नहीं … नहीं तो मर जाऊँगा ..”

वो जल्दी जल्दी मेरी गाण्ड चोदने लगा पर मैंने अपने नखरे जारी रखे,”तो फिर हट जा … मेरे ऊपर से… आह्ह … मर गई मैं तो !” मैंने उसे बड़ी मस्त नजर से पीछे मुड़ कर देखा।

“बस हो गया दीदी … दो मिनट और …” वो हांफ़ता हुआ बोला।

pados ka chhokra hot hindi sex story

दीदी बोल बोल के मार ली साले ने

“आह्ह … हट ना … क्या भीतर ही अपना माल निकाल देगा? ” मुझे अब चुदने की लग रही थी। चूत बहुत ही गीली हो गई थी और पानी भी टपकाने लगी। इस बार वो सच में डर गया और रुक गया। मुझे नहीं मालूम था कि गाण्ड मारते मारते सच में हट जायेगा।

“अच्छा दीदी … पर किसी को बताना नहीं…” वो हांफ़ते हुये बोला।

अरे यह क्या … यह तो सच में पागल है … यह तो डर गया… ओह… कैसा आशिक है ये?

“अच्छा, चल पूरा कर ले … अब नहीं चिल्लाऊंगी…” मैंने उसे नरमाई से कहा। मैंने बात बनाने की कोशिश की- साला ! हरामजादा … भला ऐसे भी कोई चोदना छोड़ देता है … मेरी सारी मस्ती रह जाती ना !

उसने खुशी से उत्साहित होकर फिर से लण्ड पूरा घुसा दिया और चोदने लगा। आनन्द के मारे मेरी चूत से पानी और ही निकलने लगा। उसमे भी जोर की खुजली होने लगी … अचानक वो चिल्ला उठा और उसका लण्ड पूरा तले तक घुस पड़ा और उसका वीर्य निकलने को होने लगा। उसने अपना लण्ड बाहर खींच लिया और अपने मुठ में भर लिया। फिर एक जोर से पिचकारी निकाल दी, उसका पूरा वीर्य मेरी पीठ पर फ़ैलता जा रहा था। कुछ ही समय में वो पूरा झड़ चुका था।

“दीदी, थेन्क्स, और सॉरी भी … मैंने ये सब कर दिया …” उसकी नजरें झुकी हुई थी।

पर अब मेरा क्या होगा ? मेरी चूत में तो साले ने आग भर दी थी। वो तो जाने को होने लगा, मैं तड़प सी उठी।

“रुक जाओ विक्की … दूध पी कर जाना !” मैंने उसे रोका। वो कपड़े पहन कर वही बैठ गया। मैं अन्दर से दूध गरम करके ले आई। उसने दूध पी लिया और जाने लगा।

“अभी यहीं बिस्तर पर लेट जाओ, थोड़ा आराम कर लो … फिर चले जाना !” मैंने उसे उलझाये रखने की कोशिश की। मैंने उसे वही लेटा दिया। उसकी नजरें शरम से झुकी हुई थी। इसके विपरीत मैं वासना की आग में जली जा रही थी। ऐसे कैसे मुझे छोड़ कर चला जायेगा। मेरी पनियाती चूत का क्या होगा।

दीदी अब कपड़े तो पहन लूँ … ऐसे तो शरम आ रही है।” वो बनियान पहनता हुआ बोला।

“क्यूँ भैया … मेरी मारते समय शरम नहीं आई ?… मेरी तो बजा कर रख दी…” मैंने अपनी आँखें तरेरी।

“दीदी, ऐसा मत बोलो … वो तो बस हो गया !” वो और भी शरमा गया।

“और अब … ये फिर से खड़ा हो रहा है तो अब क्या करोगे…” उसका लंबा मोटा लण्ड एक बार फिर से मेरे यौवन को देख कर पुलकित होने लगा था।

“ओह, नहीं दीदी इस बार नहीं होने दूंगा…” उसने अपना लण्ड दबा लिया पर वो तो दूने जोर से अकड़ गया।

“भैया, मेरी सुनो … तुम कहो तो मैं इसकी अकड़ दो मिनट में निकाल दूंगी…” मैंने उसे आँख मारते हुये कहा।

“वो कैसे भला …?” उसने प्रश्नवाचक निगाहों से मुझे देखा।

“वो ऐसे … हाथ तो हटाओ…” मैं मुस्करा उठी।

मैंने बड़े ही प्यार से उसे थाम लिया, उसकी चमड़ी हटा कर सुपाड़ा खोल दिया। उसकी गर्दन पकड़ ली। मैंने झुक कर मोटे सुपाड़े को अपने मुख में भर लिया और उसकी गर्दन दबाने लगी। अब विक्की की बारी थी चिल्लाने की। बीच बीच में उसकी गोलियों को भी खींच खींच कर दबा रही थी। उसने चादर को अपनी मुठ्ठी में भर कर कस लिया था और अपने दांत भीच कर कमर को उछालने लगा था।