पहली चुदाई की प्यास – II

By   May 12, 2018
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उसके लंड को पकड़ने के बाद मेरा मन फीर उसके लंड की ओर मुड़ने लगा. उसे मैं सहलाने लगी. फीर मैंने हाँ कह दीया. पढ़िए indian porn stories का अंतिम भाग –


 

उसके लंड को जैसे ही मैंने हाथ मैं लीया था, उसमें उत्तेजना आने लगी. वो बोला, “देखो फीर खड़ा हो रहा है. अगर मन कर रहा है तो बताओ चलते चलत एक बार और चुदाई का मज़ा ले लीया जाये.”

यह कहते हुए उसने लंड को आगे बढ़ा कर चूत से सटा दीया. उस वक़्त मैंने jeans और पैंटी नहीं पहनी थी. वो चूत पर लंड को रगड़ने लगा. उसके रगड़ने से मेरी चूत पानी छोड़ने लगी, मेर मन मैं चुदाई का विचार आने लगा था. मगर मैंने अपनी भावनाओं पर काबू पाने का प्रयास कीया. उसने मेरी चूत मैं लंड घुसाने के लीये हल्का सा धक्का मारा. मगर लंड एक ओर फिसल गया. मैंने जल्दी से लंड को दोनो हाथो से पकड़ लीया, और बोली, “चूत मैं मत डालो. जब रात रंगीन करने का मन बाना ही लीया है तो फीर इतना बेताब क्यों हो रहे हो. या तो इसे ठण्डा कर लो या फीर मैं कीसी और तरीके से इसे ठण्डा कर देती हूँ.”

“तुम कीसी और तरीके से ठण्डा कर दो. क्योंकी ये खुद तो ठण्डा होने वाला
नहीं है.”

मैं उसके लंड को पकड़ कर दो पल सोचती रही फीर उस पर तेज़ी से हाथ फिराने लगी. वो बोला, “क्या कर रही हो?”

“मैंने एक सहेली से सुना है की लड़के लोग इस तरह झटका देकर मुट्ठ मारते
हैं और झाड़ जाते हैं.”

वो मेरी बात सुनकर मुस्करा कर बोला, “ऐसे चुदाई का मज़ा तो लीया जाता है मगर तब, जब कोई प्रेमीका ना हो. जब तुम मेरे पास हो तो मुझे मुट्ठ मारने की क्या जरूरत है?”

“समझो की मैं नहीं हूँ?”

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“ये कैसे समझ लूं. तुम तो मेरी बाहों मैं हो.” कह कर वो मुझे बाहो मैं लेने लगा. मैंने मना कीया तो उसने छोड़ दीया. वो बोला, “कुछ भी करो. अगर चूत मैं नहीं तो गांड मैं…….” कह कर वो मुस्कुराने लगा. मैं शर्म कर बोली, “धात”.

“तो फीर मुँह से चूस कर मुझे झाड़ दो.”

मैं नहीं नहीं करने लगी. आखीर मैं गांड मरना मैंने पसंद कीया. फीर मैं घोड़ी बनकर गांड उसकी तरफ कर घूम गयी. उसने मेरी गांड पर थोडा सा थूक लगाया और अपने लंड पर भी थोडा सा थूक चुप्दा और लंड को गांड के छेद पर टिका कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और अपना आधा लंड मेरी गांड मैं घुसा दीया. मेरे मुँह से कराह नीकल गयी आआआआआईईईईईईई मुम्म्म्म्म्म्य्य्य्य्य्य्य्य माआर्र्र्र दियाआआआअ फ़ाआअद्द्द्द्द्द्द् बहुत दर्द कर रहा है.

उसने दो तीन झटको मैं ही अपना लंड मेरी गांड के आकिरी कोने तक पहुँचा दीया, ऐसा लगा जैसे उसका लंड मेरी आन्तादियों को चीर डाल रहा हो. मैंने गांड मैं लंड दल्वाना इसलिए पसंद कीया था, की पिछली बार मैं गांड मरवाने का पूरा अनंद नहीं ले पाई थी और मेरा मन मचलता ही रह गया था, वो झाड़ जो गया था. ऍम मैं इसका भी मज़ा लूंगी ये सोच कर मैं उसका support करने लगी. गांड को पीछे की ओर धकेलने लगी. वो काफी देर तक तेज़ तेज़ धक्के मारता हुआ मुझे आनंदित कर्ता रहा, मैं खुद ही अपनी २ उँगलियाँ चूत मैं दाल कर अंदर बहार करने लगी, एक तो गांड मैं लंड का अंदर बहार होना और दूसरा मेरा उँगलियों से अपनी चूत को कुचलना दो तरफा अनंद से मैं जल्द ही झड़ने लगी और झाड़ते हुए बद्बदाने लगी, ह्ह्ह्हाआऐईईईईई तेरी गाआअन्न्न्न्न्न्न्द्द्द्द्द्द्द्द् आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् लंड कैसे कास कास कर जा रहा है म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म कहता हुआ वो मेरी पीठ पर ही गीर पड़ा और हांफने लगा.

थोड़ी देर ऐसे ही पडे रहने के बाद, हम दोनो ने अपने अपने कपडे पहने और वहाँ से वापस आ गई. ड्राइवर का घर पास मैं ही था. उसके पास जाकर मैंने उसे कार दे कर कहा की हम लोग आज कहीँ पार्टी मैं जा रहे हैं. मैंने उसे समझा दीया की वो घर मैं कह दे की मैं एक सहेली के घर चली गयी हू. आज रात उसके घर पर ही रहूंगी. फीर मैंने उसे ५०० का कै नोट पकडा दीया. रुपये पाकर वो खुश हो गया, बोला, “मैडम जी ! आप बेफिक्र हो जाईये. मैं सब संभल लूँगा. मालकिन को ऐसा सम्झौंगा की वो कुछ नहीं कहेंगी आपको.”

उसके बाद हम दोनो वहाँ से नीकल गई. एक जगह रूक कर अभिजीत ने टेलीफोन बूथ से अपने दोस्त को फ़ोन कर दीया. उसके बाद उसने मुझे बताया की उसका दोस्त मौजूद था और उसने कह दीया है की वो सारा इंतज़ाम कर देगा.

“सारे इंतज़ाम से तुम्हारा क्या मतलब?”

“मतलब खाने पीने से है.” अभिजीत ने मुस्करा कर कहा. हम दोनो एक आटो के ज़रीये उसके दोस्त के बंग्लोव मैं पहुंच गई. अच्चा खासा बंग्लोव था, काफी अच्छी तरह सजा हुआ.

अभिजीत के दोस्त ने हम दोनो का स्वागत कीया. वो भी आकर्षक लड़का था. वो अभिजीत से तो खुलकर बात करने लगा मगर मुझसे बात करने मैं झीझक रहा था. अन्दर जाने के बाद मैंने कहा की मैं अपने घर फ़ोन करना चाहती हूँ.

उसने सहमति जताई तो मैंने मम्मी को फ़ोन करके कह दीया की मैं आज रात नीमा के घर मैं हूँ और कल सुबह ही आऊंगी. मम्मी कुछ खास विरोध नहीं कर पाई. नीमा का नाम मैंने इसलिए लीया था की उसके घर का फ़ोन नुम्बेर मम्मी के पास नहीं था. वो उससे फ़ोन करके पूछ नहीं सकती थी की मैं उसके पास
हूँ या नहीं. फीर एक एक विचार आया की अगर मेरी मम्मी को मील गयी तो उसमें फ़ोन नुम्बेर है. इसलिए मैंने नीमा को भी इस बारे मैं बता देना ठीक समझा. नीमा को फ़ोन कीया तो वो पहले तो हंसने लगी फीर बोली, “लगता है अभिजीत के साथ मौज मस्ती करने मैं लगी हुई है. अकेले अकेले मज़े लेगी अपनी सहेली का कुछ ख़्याल नहीं है तुझे.”

वो बड़ी Sexy लडकी थी. मैंने भी हंस कर कहा, “अगर तेरा मन इतना बेताब हो रह है चुदवाने का तो फीर तू भी आजा, वैसे भी यहाँ दो लड़के हैं. एक तो विनय है और दूसरा उसका दोस्त. आजा तो तेरा भी काम बन जाएगा. मैं उसे तेरे लिए मना कर रखती हूँ.

“वो मान जाएगा?”

“क्यों नहीं मानेगा यार. तेरी जैसे लडकी की चूत को देखकर कोई भी लड़का
चोदने के लिए मन नहीं करेगा. तू है ही ऐसी की, कोई मन करे ये नामुमकिन है.”

“ठीक है तो फिर मैं भी घर में कोई ना कोई बहन बाना कर आ रही
हूँ.”

उसने फ़ोन काट दीया. मैंने उसके बारे मैं अभिजीत को बताया, तो वो अपने दोस्त को बोला ले यार अजय तेरा भी इंतज़ाम हो गया है. इसकी एक सहेली है नीमा, वो आ रही है.”

अजय के चहरे पर निखार आ गया. बेड रुम मैं आ कर हम तीनो बातें करने लगे. कुछ देर मैं ही अजय से मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी. उसने बताया की वो भी पहले एक लडकी से प्यार कर्ता था मगर बाद मैं उसने धोखा दे दीया तो उसने कीसी और को प्रेमीका बनने के बारे मैं सोंचा ही नहीं.

थोड़ी देर तक बैठे बैठे मुझे बोरियत महसूस होने लगी. अभिजीत ने मेरी मानो स्तीथी भांप ली. वो अपने दोस्त से बोला, “यार अजय ! ज़रा उस तरफ देखना.” अजय दूसरी ओर देखने लगा तो अभिजीत ने मुझे बाहो मैं ले लीया और मेरी चूचियों को दबन लगा. होंठो को भी हौले हौले कीस करने लगा. तभी वहाँ नीमा आ गयी. अभिजीत मुझसे लिप्त हुआ था, उसे देखकर हम दोनो अलग हो गई. मैंने कहा, “हम तेरी ही राह देख रहे थे, वह भे बेचैनी से.”

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