पति के बॉस से सामूहिक चुदाई – III

By   May 1, 2018
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दोस्तों जैसा की आपने wife sex story के पिछले भाग में पढ़ा की में उनके दोस्तों के साथ सेक्स के मजे ले रही थी अब आगे –

indian sexy stories के अन्य भाग –

भाग – 1

भाग – 2

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भाग – 3


 

दोनों के हाथ मेरे खास अंगों पर घुम रहे थे। पंकजभाई ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वौ मुझे बेतहाशा चुमने लगे। मैं भी उनका साथ देने लगी। हमारी जीभ एकदूसरे की जीभ से खेलने लगी। किस करते हुए मुझे पंकजभाई का लंड अपनी चुत पर और पीछे से बोस का लंड अपनी गांड पर महसुस हुआ। अब मेरी समझ मेंआ गया था कि आज कैसे मेरी चुदाई दो दो लंडो से होने वाली है।
फिर पंकजभाई ने मुझे बेड पर बिठाया और मेरे सामने खड़े होकर बोले – लो कोमल अब इस लंड को बाहर निकालो। मैने उनकी पेन्ट उतारी और उनकी अंडरवियर मैं हाथ डालकर लंड को बाहर निकाला। मैं बोली-पंकजभाई कितना कडक है ये। तो पंकजभाई बोले कि कया कडक है मेरी जान। मैंने भी अब शर्म छोड़ दी थी। झट से बोली आपका लंड। फिर मैनै बोस को अपने पास बुलाया और उनका लंड भी बाहर निकाला। अब मेरे दोनों हाथों में एक एक लंड था। मेरी एक दबी हुई फेन्टासी आज पुरी होने जा रही थी।
मैने दोनों लंडो पर बारी बारी से किस किया। इस बीच उन दोनो ने मेरा ब्लाउज़ और ब्रा उताल दिए और फिर मेरा पेटीकोट भी उतर गया। पेंटी तो मेरी हाटल में ही उतर गयी थी। उन दोनों ने पहले मेरे बुब्स को बारी बारी से चुसा। पंकजभाई बुब्स को बहुत जोर से चुसतेहैं। अब मुझसे सब्र नही हो रहा था। मैने कहा पंकजभाई अब डालिये। वो बोले क्या डालुं मेरी जान। मैंने कह आपका लंड डालिये। तो वो बोले कहां डालूं। मैंने कहा प्लीज़ तडपाइऐ मत और आपका लंड मेरी चुत में डालकर मुझे चोदिए।
पंकजभाई ने मेरे पैरों के बीच आकर लंड को मेरी गीली चुत मैं घुसा दिया और फिर वो मुझे चोदने लगे। मेरी चुत ने इससे पहले इतना बड़ा लंड नही लिया था। उनका लंड मुझे अंदर तक महसूस होने लगा। बोस हमारी चुदाई देख रहे थे, मैंने उन्हें अपने पास बुलाया और उनका लंड अपने मुँह में ले लिया। अब मेरे दो छिद्रों को दो लंड चोद रहे थे। थोड़ी देर की चुदाई के बाद एक के बाद एक हम तीनों झड गये। बोस मेरे मूूंह में झडै और पंकजभाई मेरी चुत में। मैनै पहले बोस का लंड चाटकर साफ किया और फिर पंकजभाई का लंड मुंह में लिया और तभी मेरे फोन की घंटी बजी। बोस ने देखकर कहा किरवि है याने मेरे पति। मैनै इशारे से कहा कि कह दो बाद में करें। लेकिन पंकजभाई ने कहा कि बात करो। और स्पीकर ओन कर दिया।
मैं-।हेलोरवि
रवि -कैसी हो जान, फार्म हाउस पहुंच गये?
मैं- हां। अच्छे से रवि -क्या कर रही हो
मैं- वो मैं वो
रवि – ओह समझा, मजा आ रहा है ना बोस के साथ।
पंकजभाई ने तभी लंढ को मेरे मुँह में डाल दिया।
मैं-ऊह ऊह पुच
अमीत-क्या हुआ, क्या मुह में है
तभी बोस बोलै 1रवि, कोमल चुस लही है बाद में बात करेगी
रवि1ओ के बोस अच्छे से चुसवाओ औल कोमल बोस को पूरा मजा देना। रवि को पंकजभाई के बारे में कुछ नहीं बताया इसके बाद मैंने पंकजभाई का लंड भी चाटकर साफ किया
अगले अपडेट में पंकजभाई द्वारा कैसे मेरी गांड का उद्घाटन हुआ।

रात बहुत हो चुकी थी। फिर हम सब बाथरूम में जाकर फ्रेश हो गय थकान की वजह से नींद आ रही थी। बोस और पंकजभाई ने मुझे बीच में सुलाया
मेरु गांड पंकजभाई की तरफ थी। मैंने नयी खरीदी हुई ब्रा और पेंटी पहनी थी। उपर से एक सेक्सी नाईटी डाल रखी थी। पंकजभाई का हाथ अब भी मेरी गांड को सहला रहा था। फिर थोडी ही देर मेंमुझे नींद आ गयी।
जब मेरी नींद खुली तो हल्का सा उजाला हो गया था। मैने देखा कि वो दोनो सो रहे हैं। पंकजभाई का एक पैर मेरे जांघ पर था और बोस का हाथ मेरे बुब्स पर था। मैने दोनों के हाथ धीरे से हटाए और बाथरूम में गयी। थोड़ी देर बाद जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो देखा कि पंकजभाई जाग गए थे। वो उठे और मुझे पकड़ा। फिर मेरी गांड दबाते हुए बोले कि जिन तैयार हो जाओ अब तुम्हारी गांड मारूंगा
वो भी बाथरूम जाकर आयेऔर सामने सोफे पर बैठ गये। उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और मुझे अपनी गोद में बिठाया, उन्होंने पाजामा पहना था और उसके अंदर कुछ भी नहीं था। मेरी नाइटी भी एकदम शोर्ट थी, उनके गोद में बैठते ही मेरी गांड मैं उनका लंड छुभने लगा। एकदम कडक था उनका लंड। उन्होंने आवाज देकर बोस को उठाया और कहा कि आशीष उठो, कोमल गांड मरवाने के लिए तैयार है। मुझे उनकी बातें सुनकर हंसी भी आ रही थी और मजा भी। मैंने उनके गले में बाहें डालीऔर उन्हें किस करने लगी। बोस भी उठ गये थे। हम जोर जोर से किस करने लगे जैसे कि एक-दूसरे को खा जायेंगे। बोस भी र्फेश हो गये थे। उन्होंने भी मुझे पकड़ा और वो मेरी पीठ और गर्दन पर चुमने लगे।


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फिर पंकजभाई ने मुझे गोद से उठाया और मेरी नाइटी को उतार फेंका। फिर पंकजभाई ने मेरी चड्डी उतारी और बोस ने मेरी ब्रा उतारी। इस बीच उन दोनों ने भी अपने कपड़े उतार दिए थे। अब हम तीनों नंगे थे। पंकजभाई ने मुझे बेड पर लिटाया। बोस और पंकजभाई मेरे एक एक बुब पर टुट पडे। मुझे बहुत मजा आ रहा था। फिर पंकजभाई धीरे-धीरे नीचे कीओर जाने लगे, वो मेरी नाभि तक पहुंच कर रुक गये और मेरी नाभि को चुमने लगे। अब उनकी जीभ मेरी नाभि को टटोल रही थी। मैं मदहोश सी होने लगी। अपने घर से दूर मैं एक पढी लिखी शादीशुदा हाउसवाइफ अपने पति के बोस और उनके बड़ी उम्र के दोस्त के सामने नंगी सोई हुई थी और वो दोनों मेरे जिस्म से खेल रहे थे।
पंकजभाई अब और नीचे जाने लगे थे, वो मेरी चुत तक पहुंच चुके थे। मेरी उत्सुकता बढती जा रही थी। बोस नेअब मेरे दोनों स्तनों पर कब्जा कर लिया था।पंकजभाई ने अपने होंठ मेरी चुत पर रखे। उन्होंने मेरी चुत को हल्के से किस किया। फिर उन्होंने मेरी चुत की फांको को खोला और अपनी जीभ अंदर डाली। वो मेरी चुत मेंअपनी जीभ घुमा रहे थे। मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुंच गई थी। वो अब जोर जोर से मेरी चुत चाटने लगे थे। उनका एक हाथ मेरी गांड को सहला रहा था। बोस मेरे बुब्स चुसते हुये एक उंगली से मेरी नाभि को सहला रहे थे। मेरा हाथ अपने आप पंकजभाई के लंड तक पहुंच गया था। मैंने उनका लंड कसकर पकड लिया। पंकजभाई ने मेरी चुत को चाटना जारी रखा। वो मेरी कलिट्स दबाते और जीभ से चाटते। मेरी चुत से मानो नदी बहने लगी। उन्होंने मेरी चुत को चाटना और चुसना जारी रखा। मैं झडने लगी थी। अपनी अब तक की लाइफ में मै पहली बार इतनी झडी थी।
मेरा शरीर अकडता देख पंकजभाई समझ गये। एकाध मिनट रूकने के बाद वो बोस से बोले – आशीष अब हम कोमल की गांड मारेंगे।
मैं बोली-पंकजभाई मुझे डर लगता है, आप मेरी गांड को बख्श दिजिये, मैंने सुना है बहुत दर्द होता है। चाहे तो आप फिर से मेरी चुत मार लिजिए।
पंकजभाई – डरो मत कोमल मुझे पता है कि थोड़ा दर्द तो होगा पर बाद में तुम्हें बहुत मजा आयेगा, और जब रवि ने पहली बार तुम्हें चोदा था तब भी दर्द हुआ होगा लेकिन बाद में तुमने उछल उछल कर चुदवाया होगा ना। ओर मैं एक क्रीम भी लाया हूं जिससे तुम्हें बहुत कम दर्द होगा।
तभी बोस बोले-कोमल हम तेरी चुत भी मारेंगे और गांड भी। तुझे बहुत मजा आयेगा ।
मैं – बोस मैंने आज तक अपनी गांड मरवाई नहीं है और पंकजभाई कालंड कितना मोटा और बड़ा है छोटे से छेद में कैसे जायेगा।
पंकजभाई – तुम सब मुझपर छोड दो कोमल और बस मजे लो। अब एक काम करो जरा घोडी बन जाओ।
फिर उन्होंने मुझे घोडी बनाया और एक क्रीम की डिब्बी निकाली। पहले उन्होंने अपना थुंक मेरी गांड के छेद पर लगाया और थोड़ा जीभ से चाटा भी। मैं- पंकजभाई ये क्या कर रहे हैं, इतनी गंदी जगह मुंह लगा रहे हैं।
पंकजभाई – कोमल ये गंदी जगह नहीं, ये तो मेरे लिए जन्नत है। और तुम्हारी तो गांड कितनी साफ सुथरी है।।। और वो मेरी गांड चाटने लगे। मुझे बहुत मजा आ रहा था। फिर उन्होंने मेरी गांड के छेद पर क्रीम लगाईं और अपने लंड पर भी थोड़ी क्रीम लगाई।
अब पंकजभाई ने अपना कडक लंड मेरी गांड के मुहाने पर रखा, बोस मेरे सामने आ गये और मुझे कंधों से पकड़ा। पंकजभाई ने पहले धीरे से लंड का एक धक्का मेरी गांड पर लगाया, थोडा सा लंड छेद में गया। अब उन्होंने मेरी गांड को पकडकर एक जोर क धक्का लगाया ऊई मां, मेरे मुंह से निकला, मैंऔर जोर से चिल्लाती उसके पहले मेरे सामने खड़े बोस ने अपना लंड मेरे मुंह में ठूंस दिया। मैं घों घौं करती रह गयी। अब पंकजभाई ने एक ओर धक्का लगाया। मेरे तो आंसु निकल गये। यहां इतना दर्द हो रहा था और मुंह में दुसरा लंड होने की वजह से चिल्ला भी नहीं सकती थी। एक मिनट ठहरने के बाद पंकजभाई ने मेरी गांड मारनी शुरू की। दर्द तो हो रहा था पर मुझे उनका साथ देना था। फिर पंकजभाई लय मेंआने लगे और लंड को अंदर बाहर करने लगे। अब धीरे-धीरे दर्द मीठा लगने लगा। पंकजभाई ने जब देखा कि मैंसाथ दैने लगी हूं तो वो जोर जोर से मेरी गांड मारने लगे। उधर मुझे बोस के लंड का एहसास हुआ और मैं उसको चुसने लगी। एक तरफ पंकजभाई अपने मोटे लंड से मैरी गांड मार रहे थे और दूसरी ओर बौस मेरे मुँह को चोद रहे थे। कुछ ही देर में पहले पंकजभाई झडे और फिर बोस भी मेरे मुंह मे ही झड गये। मेरी गांड में दर्द हो रहा था पर मुझे अच्छा भी लग रहा था।
इसके बाद मैने उन दोनों के लंड चाटकर साफ किए। फिर उस दिन हम तीनों साथ में नहाये। पंकजभाई ने मेरे पीछे साबुन लगाया और बोस ने आगे। मैंने भी दोनों को साबुन लगाया और उनके लंडों को साबुन से रगड रगड कर धोया। उन्होंने मुझे बाथरूम में भी चोदा और डायनिंग टेबल पर भी। शाम तक चार पांच बार चुदने के बाद आखिर हम घर की ओर रवाना हुए। रास्ते में डिनर लेकर हम रात को घर पहुंचे। मैंने बोस को रवि से पंकजभाई के बारे मे बताने से मना किया। इस तरह से मेरी गांड का उद्घाटन हुआ और मेरा स्लट बनने की और एक बड़ा कदम रहा। इसके बाद मेरा नया अनुभव और भी इरोटिक होने वाला था। अगले अपडेट में उसके बारे में बताऊंगी।

फार्म हाउस की जोरदार चुदाई के बाद मेरी सेक्स के प्रति भूख बहुत बढ गयी थी। बोस कभी कभार हमारे घर आते तब मैं काफ़ी आक्रामक होकर चुदवाती। अब मैं किसी को अपनी तरफ घूरते हुए देखती तो एक्साइट हो जाती। अमीत अपने बिजनेस में बिजी रहते। मैं जब भी बाहर जाती, अपने आप को ज्यादा एक्सपोज करने लगी थी। साडी को नाभि से काफ़ी नीचे पहनना, स्लीवलेस और लो कट ब्लाउज़ पहनकर और साडी को एकदम टाइट बांधकर गांड मटकातेचलने में मुझे मजा आता।
कभी बस में या किसी माल में कोई मुझे टच करता या मेरे अंगो को सहलाता तो मैं बजाय गुस्सा होने के एक्साइट होती और मजे लेती। वैसे तो मुझे बस में सफर करने की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि मैं खुद अपनी कार चलाकर ले जाती हूं पर अब मैं बस में ही जाना पसंद करती। कभी भीड की वजह से कोई मेरे अंग सहलाता या अपना लंड पीछे से मेरी गांड पर दबाता तो मैं उसे रोकने की बजाय उल्टा अपनी गांड उसके लंड पर दबाती।
जब मै हमारी सोसाइटी से बाहर जाती या वापस आती तो सब मुझे घूरते। मैं भी जान बूझकर अपनी चाल से या अपने कपड़ों को सही करने के बहाने उन लोगों को ललचाती। उन दिनों हमारी सोसाइटी मेंएक नया वॉचमैन आया था। उसको रवि के किसी दोस्त ने रखवाया था तो वो रवि की बहुत इज्जत करता था । वो मराठी था और उसका नाम सुधाकर था। शुरू शुरू में मैं और रवि जब बाहर जाते तो वो हमेशा हमें विश करता। वौदिखने में ठीक-ठाक था पर उसकी बॉडी एकदम एथलीट जैसी थी। धीरे-धीरे वो जब मैं अकेली आती-जाती तो मुझसे बात करने की कोशिश करता। कभी जब मैं बाजार से आती तो जल्दी से गाड़ी तक आ जाता और सामान उठाने में मदद करता। मैंने कई बार उसको मेरे बुब्स को घूरते भी देखा। लेकिन जैसे ही मैं उसके सामने देखती वो नजर नीची कर लेता। अब मुझे उसको टीज करने में मजा आता। मैं जान बूझकर उसके सामने पल्लू ठीक करती या उसके टेबल पर हाथ रखकर झुकती और उसको अपनी क्लीवेज दिखाती। जब वो मेरी ओर देखता तो मैं मुस्कुरा देती। अब उसकी हिम्मत बढने लगी थी।
हमारी सोसाइटी मैं दो विंग्स हैं और हर विंग में दो लिफ्ट हैं। एक दिन में बाजार से आयी तो मेरे पास सामान कुछ ज्यादा था। सुधाकर हमेशा की तरह गाड़ी तक आया और सामान उठाया। हम दोनों लिफ्ट तक आये तो मैने देखा कि उस दिन एक ही लिफ्ट चालू थी। वहां आलरेडी 6-7 लोग खड़े थे। सुधाकर मुझसे बोला – भाभी सामान ज्यादा है मै आ जाता हूं छोडने। और जैसे ही लिफ्ट आयी वो मेरे साथ लिफ्ट में आ गया। हम सबसे ऊपर की मंजिल पर रहते हैं। मैं थोड़ा पीछे जाकर खड़ी हो गई। वो धीरे से मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। उसके दोनों हाथों में सामान था। मुझेउसके हाथ का दबाव अपनी गांड पर महसूस हुआ, मैने पीछे देखा तो वो मुझे देखकर मुस्कराया। मैं भी उस दिन थोड़ी हार्नी थी। मै थोड़ा और पीछे हटी और उसके हाथ पर अपनी गांड का दबाव डाला। उसने अपने हाथ को और एडजस्ट किया। हाथ में सामान की थैली होने से वो ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहा था। पर फिर भी उसकी हिम्मत की दाद देनी होगी कि उसने जल्दी से अपनी दो ऊंगलियां मेरी गांड की दरार में फंसा दी। तब तक लिफ्ट आधी खाली हो चुकी थी। मै भी थोड़ा आगे सरक गयी। फिर उसने लिफ्ट से ही मुझे बाहर छोडा और वो नीचे लोबी में लौट गया
इसके बाद दो तीन बार इसी तरह लिफट में मेरे साथ ऊपर आया और मेरे पीछे टच करता। एक दिन जब मैं बाजार से आयी तो बहुत बारिश हो रही थी। उस दिन भी एक ही लिफ्ट चालू थी। मैं काफ़ी भीग गयी थी। सुधाकर ने सामान लिया और लिफ्ट में मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। मैं थोड़ा पीछे हूई तो वो मुझसे सट गया और मेरी गांड पर अपने लंड का दबाव दिया। उसका लंड कडक हो गया था। मैं मस्त हो गयी थी। मैंने अपन गांड को उसके लंड पर और दबाया। मैंने उसकी गर्म सांसें अपनी गर्दन पर महसूस की। उसने लंड को मेरी गांड पर दायें बायें हिलाया और मेरी गांड की दरार में लगा दिया। मुझे उसका लंड बहुत बड़ा फील हो रहा था।
उस दिन तो इससे ज्यादा कुछ नहीं हुआ। पर इसके बाद जब भी मैं उसके सामने आती तो वो मुझे दिखाकर अपना लंड सहलाता। मुझे अब इस टिजिंग में मजा आता। मैं भी उसके सामने जब कोई नहीं होता तो अपना पल्लू हटाती और कभी-कभी तो अपनी चुत भी खुजा देती।

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