रीना की चूत की तड़प

By   November 26, 2016
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हेल्लो दोस्तों, ये sex stories है रीना की चूत की तड़प की। अपने पति के देहांत के बाद रीना की चूत प्यासी ही रहती है और उसकी हवस बढ़ते बढ़ते उसको पागल ही कर रही है। फिह्र वो एक दिन अपनी तड़प मिटाने की ठान लेती है-

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

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मेरा नाम रीना माथुर है। मेरे पति मनोज ठेकेदारी का काम करते थे। उनका ठेकेदारी का काम बेहद लंबा चौड़ा था। उनका एक मैनेजर था जिसका नाम गौरव सिंह था। वो उनका दोस्त भी था और उनका सारा काम देखता था। वो हमारे घर सुबह के आठ बजे आ जाता था और नाश्ता करने के बाद मेरे पति के साथ साईट पर निकल जाता था। मैं उसे उसके नाम से हीगौरव कह कर बुलाती थी और वो भीमुझे सिर्फरीना कह कर बुलाता था। उस समय उसकी उम्र करीब तेईस साल की थी और वो दिखने में बहुत ही हैंडसम था। वो मुझसे कभी कभी मज़ाक भी कर लेता था। शादी के पाँच साल बाद मेरे पति की एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गयी। अब उनका सारा काम मैं ही संभालती हूँ और गौरव मेरी मदद करता है।

मेरे पति बहुत ही सैक्सी थे और मैं भी। उनके गुज़र जाने के बाद करीब छः महीने तक मुझे सैक्स का बिल्कुल भी मज़ा नहीं मिला तो मैं उदास रहने लगी। एक दिन गौरव ने कहा, “क्या बात है रीना, आज कल तुम बहुत उदास रहती हो!”

मैंने कहा, “बस ऐसे ही!”

वो बोला, “मुझे अपनी उदासी की वजह नहीं बताओगी? शायद मैं तुम्हारी उदासी दूर करने में कुछ मदद कर सकूँ।”

मैंने कहा, “अगर तुम चाहो तो मेरी उदासी दूर कर सकते हो। आज पूरे दिन काफ़ी काम है। मैं शाम को तुम्हें अपनी उदासी की वजह जरूर बताऊँगी। मेरी उदासी की वजह जान लेने के बाद शायद तुम मेरी उदासी दूर कर सको। मेरी उदासी दूर करने में शायद तुम्हें काफ़ी ज्यादा वक्त लग जाये, हो सकता है पूरी रात ही गुज़र जाये… इसलिए आज तुम अपने घर बता देना कि कल तुम सुबह को आओगे। मैं शाम को तुम्हें सब कुछ बता दुँगी!”
वो बोला, “ठीक है।”

हम दोनों सारा दिन काम में लगे रहे। एक मिनट की भी फुर्सत नहीं मिली। घर वापसआते-आते रात के आठ बज गये। घर पहुँचने के बाद मैंने गौरव से कहा, “मैं एक दम थक गयी हूँ। पहले मैं थोड़ा गरम पानी से नहा लूँ… उसके बाद बात करेंगे… तब तक तुम हम दोनों के लिये एक-एक पैग बना लो।”

वो बोला, “नहाना तो मैं भी चाहता हूँ। पहले तुम नहा लो उसके बाद मैं नहा लुँगा।”

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मैं नहाने चली गयी और गौरव पैग बनाने के बाद बैठ कर टी.वी देखने लगा। पंद्रह मिनट बाद मैं नहा कर बाथरूम से बाहर आयी तो मैंने केवल गाऊन पहन रखा था। गाऊन के बाहर से ही मेरे सारे जिस्म की झलक एक दम साफ़ नज़र आ रही थी। गौरव मुझे देखकर मुस्कुराया और बोला, “आज तो तुम बहुत सुंदर दिख रही हो।” मैं केवल मुस्कुरा कर रह गयी। उसके बाद गौरव नहाने चला गया। मैं सोफ़े पर बैठ कर टी.वी देखते हुए अपना पैग पीने लगी। थोड़ी देर बाद गौरव ने मुझे बाथरूम से ही पुकारा तो मैं बाथरूम के पास गयी और पूछा, “क्या बात है?”

वो अंदर से ही बोला, “रीना! मैं अपने कपड़े तो लाया नहीं था और नहाने लगा। अब मैं क्या पहनुँगा!”

मैंने कहा, “तुम टॉवल लपेट कर बाहर आ जाओ। मैं अभी तुम्हारे लिये कपड़ों का इंतज़ाम कर दुँगी।” गौरव एक टॉवल लपेट कर बाहर आ गया। मैंने कहा, “तुम बैठ कर टी.वी देखो, मैं एक-एक पैग और बना कर लाती हूँ। उसके बाद मैं तुम्हारे लिये कपड़ों का इंतज़ाम भी कर दुँगी।” वो सोफ़े पर बैठ कर टी.वी देखने लगा। मैंने व्हिस्की के दो तगड़े पैग बनाये और मैंने गौरव को एक पैग दिया। वो चुप चाप सिप करने लगा। मैं भी सोफ़े पर बैठ कर पैग पीने लगी।

गौरव ने मुझसे पूछा, “अब तुम अपनी उदासी की वजह बताओ। मैं तुम्हारी उदासी दूर करने की कोशिश करूँगा।”

मैं उठ कर गौरव की बगल में बैठ गयी। फिर मैंने उसके लंड पर हाथ रख दिया और कहा, “मेरी उदासी की वजह ये है। मेरे पति को गुजरे हुए छः महीने हो गये हैं और तब से ही मैं एकदम प्यासी हूँ। वो रोज ही जम कर मेरी चुदाई करते थे। छः महीने से मुझे चुदाई का मज़ा बिल्कुल नहीं मिला है और ये कमी तुम पूरी कर सकते हो!”

वो कुछ नहीं बोला। मैंने गौरव के लंड पर से टॉवल हटा दिया। गौरव का लंड एक दम ढीला था लेकिन था बहुत ही लंबा और मोटा।

मैंने कहा, “तुम्हारा लंड तो उनके लंड से ज्यादा लंबा और मोटा लग रहा है। मुझे तुमसे चुदवाने में बहुत मज़ा आयेगा!”

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रीना की चूत बेचारी अकेली थी

वो बोला, “मैं तुम्हें नहीं चोद सकता!”

मैंने पूछा, “क्यों?”

गौरव ने अपना सिर झुका लिया और बोला, “मेरा लंड खड़ा नहीं होता!”

उसकी बात सुन कर मैं सन्न रह गयी। मैंने कहा, “तुम्हारी शादी भी तो दो महीने पहले हुई है!”

वो बोला, “मेरा लंड खड़ा नहीं होता इसलिए वो अभी तक कुँवारी ही है। मेरी बीवी मुझसे इसी वजह से बेहद खफ़ा रहती है। वो कहती है कि जब तुम्हारा लंड खड़ा नहीं होता था तो तुमने मुझसे शादी क्यों की!”

मैंने गौरव से कहा, “ठीक है, जब मैं अपने लिये कोई अच्छा सा मर्द ढूँढ लुँगी जिसका लंड खूब लंबा और मोटा हो और जो खूब देर तक मेरी चुदाई कर सके… उसके बाद तुम एक दिन अपनी बीवी को भी यहाँ बुला लाना, मैं तुम्हारी बीवी को भी उससे चुदवा दुँगी। इस तरह तुम्हारी बीवी सुहागरात भी मना लेगी और उसे चुदवाने का पूरा मज़ा आ जायेगा। उसके बाद वो तुमसे कभी खफ़ा नहीं रहेगी। क्यों ठीक है ना?”

गौरव बोला, “क्या तुम सही कह रही हो कि वो फिर मुझसे खफ़ा नहीं रहेगी?”

मैंने कहा, “हाँ… मैं एक दम सच कह रही हूँ लेकिन जब तुम अपनी बीवी को यहाँ लाना तो उसे कुछ भी मत बताना!”

गौरव बोला, “ठीक है!”
दूसरे दिन मैं गौरव के साथ एक साईट पर गयी। वो साईट मेरे घर से करीब करीब अस्सी किलोमीटर दूर थी। उस साईट पर करीब चालीस मज़दूर काम करते थे। उस साईट का मैनेजर उन सब को पैसे दे रहा था। सारे मज़दूर लाईन में खड़े थे। मैं मैनेजर की बगल में एक कुर्सी पर बैठ गयी। सभी ने निक्कर और बनियान पहन रखा था। मैं निक्कर के ऊपर से ही उन सबके लंड का अंदाज़ लगाने लगी।

जब मैनेजर करीब बीस-पच्चीस मज़दूरों को पैसे दे चुका तो मेरी नज़र एक मज़दूर के लंडपर पड़ी। मैंने निक्कर के बाहर से ही अंदाज़ लगा लिया कि उसका लंड कमज़कम आठ-दस इंच लंबा और खूब मोटा होगा। उसकी उम्र करीब बाईस-तेईस साल की रही होगी और जिस्म एक दम गठीला था। मैंने उस मज़दूर से पूछा, “क्या नाम है तुम्हारा!”

वो बोला, “मेरा नाम राजू है!”

मैंने पूछा, “तुम्हारे कितने बच्चे हैं?”

वो शर्माते हुए बोला, “मालकिन, अभी तक मेरी शादी नहीं हुई है!”

मैंने कहा, “मुझे अपने घर के लिये एक आदमी की ज़रूरत है। मेरे घर पर काम करोगे?”

वो बोला, “आप कहेंगी तो जरूर करूँगा!”

मैंने गौरव से कहा, “इसे घर का काम करने के लिये रख लो!”

गौरव समझ गया और बोला, “ठीक है!”

गौरव ने उस मज़दूर से कहा, “राजू तुम घर जा कर बता दो और अपना सामान ले आओ। आज से तुम मैडम के घर पर काम करोगे।”

वो बोला, “जी साहब!”

वो अपने घर चला गया। करीब एक घंटे के बाद वो वापस आ गया। उसके बाद हम सब कार से घर वापस चल पड़े। रात के आठ बजे हम सब घर पहुँचे। मैंने राजू को घर का सारा काम समझा दिया और उसे ड्राईंग रूम में सोने के लिये कह दिया। घर में केवल एक ही बाथरूम था इसलिए मैंने राजू से कहा, “घर में केवल एक ही बाथरूम है। तुम इसी बाथरूम से काम चला लेना।”
वो बोला, “ठीक है मालकिन।”

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