साली आधी घरवाली – II

By   October 22, 2017
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मेरे पति अधिकांशतः दुसरे शहर में रहते थे, तो मैं अपने पीहर में. बहुत लोगो की मुझपे बूरी नज़र पड़ती और जीजाजी की नज़र तो बुरी थी ही. मेरी इन sali sex stories का अगला भाग-

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

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पार्ट 2


बेटा होने के बाद कुछ विशेष नहीं हुआ ! में प्राइवेट पढ़ती रही , मेरे पति साल में एक बार आते जब में ससुराल चली जाती और मेरे पति महीने डेढ़ महीने तक रहते में उनके साथ रहती और जब वे वापिस चेन्नई जाते तो में अपने पीहर आ जाती इसका कारण था कई लोंगो की मेरे उपर पड़ती गन्दी नज़र ! मेरे गाँव में खेती थी उसे में दूसरों को बोने के लिए दे देती थी जब फसल आती तो वे मुझे मेरा हिस्सा देने के लिए बुलाते थे ज्यादातर में शाम को मेरे पीहर आ जाती थी एक बार मुझे रत को रुकना पड़ा में मेरे घर पर अकेली थी मेरे जेठों के घर आस पास ही थी मेरी जिठानी ने कहा तू अकेली केसे सोएगी डर जाएगी तू मेरे बेटे को अपने घर लेजा ! मेरा वोह जेठुता करीब १८-१९ साल का था में तो २७-२८ की थी मेने सोचा बच्छा हे इसको साथ ले जाती हु ! खाना खाकर हम लेट गए बिस्टर नीचे की पास पास किये हुए थे थोड़ी देर बातें करने के बाद मुझे नींद आ गई ! आधी रत को अचानक मेरी नींद खुल गई मेरा जेठुता मेरे पास सरक आया था और एक हाथ से मेरा एक वक्ष भींच रहा था और दुसरे वक्ष को अपने मुह में ले रहा था हालाँकि ब्लाउज मेरे पहना हुआ था मेरे गुस्से का पार नहीं रहा में एक झटके में खड़ी हो गई लाइट जलाई और उसे झंजोड़ के उठा दिया !

मेरे गुस्से की वजह से मुंह से झाग निकल रहे थे वो आँखे मलता हुआ पूछने लगा :- “क्या हुआ काकी ?” मुझे और गुस्सा आया मेने कहा :-“अभी तू क्या कर रहा था ?” पठ्ठा बिलकुल मुकर गया और कहा में तो कुछ नहीं कर रहा था मेने उसको कहा अपने घर जा वो बोला इतनी रात को मेने कहा हा उसका घर सामने ही था वो तमक कर चला गया और में दरवाजा बंद कर के सो गई सुबह मेने अपनी जिठानी उसकी माँ को कहा तो वो हंस कर बात को तलने लगी कहा इसकी आदत हे मेरे साथ सोता हे तो भी नींद में मेरे स्तन पीता हे मेने कहा अपने पिलाओ आइन्दा मेरे घर सोने की जरुरत नहीं हे मुझे उसके कुटी इरादों की कुछ जानकारी मिल गई थी उसकी माँ चालू थी गाव वालो ने उसे मुझे पटाने के लिए लालच दिया था इसलिए वो अपने बेटे के लिए मेरी टोह ले रही थी उसे पता था उसके देवर को गए १० महीने हो गए थे शायद ये पिघल जाये पर में बहुत मजबूत थी अपनी इज्जत के मामले में इससे पहले कईयों ने मुझ पर डोरे डाले थे मेरे घर के पास मंदिर था उसमे आने का बहाना लेकर मुझे ताकते रहते थे उनमे एक गाँव के धन्ना सेठ का लड़का भी था जिसने कही से मेरे मोबिल नंबर प्राप्त कर लिए और मुझे बार बार फोन करता पहले मिस कॉल करता फिर फोन लगा कर बोलता नहीं में इधर से गलियां निकलती रहती फिर एक दिन हिम्मत कर उसने अपना परिचय दे दिया और कहा में तुमको बहुत चाहता हु इसलिए बार बार मंदिर आता हु मेने कहा तुम्हारे बीबी बच्चे हे शर्म नहीं आती फिर भी नहीं मन तो मेने उसको कहा शाम को मंदिर में आरती के समय लौड़ स्पीकर पर ये बात कह दो तो सोचूंगी तू उस समय तो हा कर दी फिर शाम को उसकी फट गई फिर उसने कहा की मुझे आपकी आवाज बहुत पसंद आप सिर्फ फोने पर बात कर लिया करे में कुछ गलत नहीं बोलूँगा मेने कहा ठीक हे जिस दिन गलत बोला बात चीत कट और मेरा मूड होगा या समय होगा तो बात करुँगी ये सुनते ही वो मुझे धन्यवाद् देने लगा और रोने लगा और कहने लगा चलो मेरे लिए इतना ही बहुत हे कम से कम आपकी आवाज तो सुनने को मिलेगी में बोर होने लगी और फोन काट दिया उसके बाद वो दो चार दिनों के बाद फोन करता मेरा मूड होता तो बात करती वर्ना नहीं वो भी कोई गलत बात नहीं करता मेरी तारीफ करता इस से मुझे कोई परेशानी नहीं थी मेरे बी.ऐ. हो चूका था मेने गाँव में स्कूल ज्वाइन कर लिया पेरा टीचर बन गई वहा भी और टीचर मुझ पर ट्राई करते पर मेने किसी को घास नहीं डाली फिर मेरे पति वापिस चेन्नई चले गए तो मेने भी स्कूल छोड़ दी और पीहर आ गई !

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मेरी चूत अब प्यासी थी..

इस बीच में कई बार में अपनी दीदी के गाँव गई वहा जीजा जी मुझसे मजाक करते रहते दीदी बड़ा ध्यान रखती मुझे कोई गलत लगता नहीं फिर एक बार जीजा जी मेरे पीहर में आये दीदी नहीं आई थी वे रत को कमरे में लेटे हे थे टीवी देख रहे थे मेरे पापा मम्मी दुसरे कमरे में सोने चले गए मेरी मम्मी ने आवाज आजा सोजा मेरा मनपसंद प्रोग्राम आ रहा था मेने कहा आप सोवो में आती हु में जहा जीजा जी चरोई पर सो रहे थे उसी चारपाई पर बेठ कर टीवी देखने लगी तोड़ी देर में जीजाजी बोले बेठे बेठे थक जाओगी सो कर देख लो मेने कहा नहीं फिर उन्होंने कहा मेने कहा मुझे देखने दोगे या नहीं नहीं तो में चली जाउंगी थोड़ी देर तो वो सोये रहे फी उन्होंने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे अपने साथ सुलाने की कोशिश करने लगे मेने उनके हाथ झटके और खड़ी हो गई वो डर गए मेने टीवी बंद की और माँ के पास जाकर सो गई सुबह चाय देने गई तो वो नज़रे चुरा रहे थे मेने भी मजाक समझा और इस बात को भूल गई फिर जिंदगी पहले जेसी हो गई फिर में वापिस गाँव गई मेरे पति आये हुए थे अब स्कूल में तो जगह खली नहीं थी पर में ऍम ऐ कर रही थी और गाँव में मेरे जितनी पढ़ी लिखी कोई और नहीं थी सरपच जी ने मुझे आँगन बाड़ी में लगा दिया साथ ही अस्पताल में आशा सहयोगिनी का काम भी दे दिया फिर एक बार तहसील मुख्यालय पर हमारे प्रक्शिष्ण में एक अधिकारी आये उन्होंने मुझे शाम को मंदिर में देखा था और मुझ पर फ़िदा हो गए मेने उनको नहीं देखा फिर उनका एक दिन फोन आया मेने पूछा कोन हो तुम उन्होंने कहा में उपखंड अधिकारी हु आपके प्रक्षिशन में आया था मेने कहा मेरा नंबर कहा से मिला उन्होंने कहा रजिस्टर में नाम और नंबर दोनों मिल गए मेने पूछा काम बोलो उन्होंने कहा ऐसे ही याद आ गई मेने सोचा केसा बेव्फूक हे

खेर फिर कभी कभी उनका फोन आता रहता फिर मेरा बी.एड. में नंबर आ गया और मेने वो नोकरी भी छोड़ दी फिर उनका तबादला भी हो गया कभी कभी फोन आता लेकिन कभी गलत बात उन्होंने नहीं की एक बार बी.एड. करते में कोलेज की तरफ से घुमने घना अभ्यारण गए तब उनका फोन आया मेने कहा भरतपुर घुमने आये हे तो वो बड़े खुश हुए उन्होंने कहा में अभी बरतपुर में ही एस डी एम् लगा हुआ हु में अभी तुमसे मिलने आ सकता हु क्या मेने मन कर दिया मेरे साथ काफी लडकिया और टीचर थी में किसी को बातें बनाने का अवसर नहीं देना चाहती थी और वो मन मसोस कर रह गए !फिर कई साल बाद उनका फोन आया और उन्होंने कहा आप जयपुर आ जाओ में यहाँ उपनिदेसक लगा हुआ हु यहाँ एन जी ओ की तरफ से सविंदा पर लगा देता हु १०००० महिना हे मेने मन कर दिया वे बार बार कहते एक बार आकर देख लो तुम्हे कुछ नहीं करना हे कभी कभी ऑफिस में आना हे मेने कहा सोचूंगी फिर बार बार कहने पर मेने अपने फोटो स्टेट डिग्रिया डाक से भेज दी फिर उनका फोन आया आज कलेक्टर के पास इंटरव्यू हे नहीं गई उन्होंने कहा मेने तुम्हारी जगह एक टीचर को भेज दिया हे तुम्हारा नाम फ़ाइनल हो गया हे किसी को लेकर आ जाओ में मेरे पति को लेकर जयपुर गई उनके ऑफिस में वो बहुत खुस हुए हमारे रहने का इंतजाम एक होटल में किया शाम का खाना हमारे साथ खाया मेरे पति ने कहा तुम ये नोकरी करलो दो दिन बाद हम वापिस आ गए साहब ने कहा अपने बिस्तर वगेरह ले आना तब तक में तुम्हारे लिए किराये का कमरे का इंतजाम कर लूँगा उस वक्त मेरे ३० साल का होने में २ महीने घट रहे थे पर साहब ने चला लिया उस नोकरी में ३० साल का होना जरुरी था ! फी १०- १५ दिनों के बाद मेरे पति चेन्नई चले गए और में अपने पापा के साथ जयपुर आ गई साहब से मिलकर में पापा ने भी नोकरी करने की सहमती दे दी में मेरे किराये के कमरे में रही जो की एक रिटायर आदमी का था कमरा घर के अन्दर था जिसमे वो उसके दो बेटे बहुए पोते पोतियों के साथ रहता था

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