साली आधी घरवाली – III

By   January 3, 2017
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जब मैं नींद से उठी तो देखा जीजाजी मेरी चूत को सहला रहे थे, मैं काँप गयी कि अब क्या होगा? जीजाजी की हिम्मत तो बहुत ज्यादा बढ़ गयी थी. पर मेरी चूत मेरे साथ नहीं थी. मेरी sali sexy story का आखिरी भाग-

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

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हम बाते करने लगे जीजा जी ने लुंगी लगा राखी थी कमरे का गेट खुला था मेने मक्सी पहन राखी थीमें लेटी लेटी बातें कर रही थी और जीजा जी हा हु में जबाब दे रहे थे मेरी बात करते हाथ हिलाने की आदत हे मेरे हाथ कई बार उनके हाथ के लगे उन्होंने अपने हाथ पीछे कर लिए और कहा अब सो जाओ नींद आ रही हे १०.३०–११ बज गए थे जीजाजी को नींद आ गई थी में भी सो गई और मुझे भी नींद आ गई ! कोई रात के २–२.३० बजे थे की अचानक मेरी नींद खुली मुझे लगा की मेरे जीजा जी मेरी चूत पर अंगुली फेर रहे हे..

मेरी मेक्सी और पेटी कोट झांघो पर था थोडा तिरछा इसलिए जीजा जी की अंगुली मेरी चूत के सने को रगड़ रही थी मेरी कच्छी पहनी हुई थी मेरा दिमाग भन्ना गया में सोच नहीं परही थी में क्या करू !मेरे मन में भय,गुस्सा,शर्म आदि सारे विचार आ रहे थे मेने अपनी चूत पर से उनका हाथ झटक दिया और थोड़ी दूर हो गए पर आगे दीवार आ गई वो भी मेरे पीछे सरक गए और मुझे बांहों में पकड़ लिया वो धीमे धीमे कह रहे थे मुझे नींद नहीं आ रही हे प्लीज और मेरे चेहरे पर चुम्बनों की बोछार कर दी में धीमी धीमी आवज में रो रही थी उन्हें छोड़ने का कह रही थी पर वो नहीं मान रहे थे मेने पलटी मार कर उधर मुंह कर लिया उनकी बांहे मेरे शरीर पर ढीली थी पर उन्हीने छोड़ा नहीं था उन्होंने अपनी एक टांग मेरे टांगो पर रख दी मेरे कांख के नीचे से हाथ निकाल कर मेरे स्तन दबा रहे थे कभी नीचे वाला और कभी ऊपर वाला !मेरी गर्दन पर भी चुम्बन कर रहे थे और फुसफुसा रहे थे मुझे कुछ नहीं करना हे सिर्फ तुम्हे आनंद देना हे में मना कर रही थी की मुझे छोड़ दो पर वो कुछ भी नहीं सुन रहे थे जोर से बोल नहीं सकती कही मकान मालिक नहीं सुन ले मेरी बदनामी हो जाती की पहले तो कमरे में सुलाया जयपुर बुलाया अब क्या हुआ ?

में कसमसा रही थी आज मुझे पता चला की जीजाजी में कितनी ताकत हे मुझे छुड़ाने ही नहीं दिया ऐसे १० मिनिट बीत गए मेरा विरोध कमजोर पड़ने लगा में थक सी गई थी उन्होंने जेसे अजगर मुर्गे को दबोचता वेसे मुझे अपनी कुंडली में कस रहे थे धीरे धीरे उन्हें कोई जल्दी नहीं थी !वो बराबर मुझे समझा रहे थे की चुपचाप रहो मजा लो तुम्हारे पति को गए साल भर हो गया क्यों तड़फ रही हो में सिर्फ तुम्हे आनंद दूंगा मुझे कोई जरुरी नहीं हे और आज अब में तुम्हे छोड़ने वाला नहीं हु में कुछ नहीं सुन रही थी में तो रो रही थी कसमसा रही थी और छोड़ने के लिए कह रही थी वो थोडा मोका दे देते तो में कमरे के बाहर भाग जाती पर उन्होंने मुझे झाकड़ रखा था फिर उन्होंने स्तन दबाना बंद कर हाथ नीचे लाये और मेरी कच्छी नीचे करने लगे में तड़फ कर उनके सामने हो गई मेरी आधी कच्छी नीचे हो गई पर मेने उनका हाथ पकड़ लिया और उपर कर दिया वो मेरे पेट को सहलाने लगे फिर दुसरे हाथ से मेरे हाथ को पकड़ लिया और पहले वाले हाथ से फिर कच्छी नीचे करने लगे साथ साथ मुझे सहयोग करने का भी कह रहे थे मेने नहीं मन और मेने उनके सामने सोते सोते अपनी टांगे दूर दूर करने के लिए एक टांग पीछे की पर एक टांग मुझे उनकी टांगो के उपर रखनी पड़ी !

उन्होंने अपना हाथ मेरी गंद की तरफ लाये जहा कच्छी आधी खुली थी और खिंच रही थी उनकी अंगुलियों को गंद के पीछे से चड्डी में गुसने की जगह मिल गई उन्होंने पीछे से चड्डी में हाथ दल कर मेरी चूत सहलाने लगे जिसे अब वो डाइरेक्ट टच कर रहे थे वे मेरी चूत उभरे हुए चने को रगड़ रहे थे में फिर कसमसा रही थी पर उन्होंने मुझ पर पूरी तरह काबू प् लिया था एकदम झकड़ा हुआ था अब तो में हिल भी नहीं प् रही थी उन्होंने ५ मिनट तक मेरी चूर के दाने को पीछे से रगडा मेरी छोटी सी चूत में पीछे से अंगुली डालने की असफल कोसिस भी कर रहे थे !

में कुछ भी करने की इस्थिति में नहीं थी मेरी सारी मिन्नतें बेकार जा रही थी इतनी मेहनत से हम दोनों को पसीने आ रहे थे पर पता नहीं आज जीजाजी का क्या मूड था में उन्हें यहाँ आने का कह के और होटल में नहीं जाने का कह के पछता रही थी अगर मेरे बस में काल के चक्र को पीछे करने की शक्ति होती तो में पीछे कर उन्हें यहाँ नहीं सुलाती !खैर अब क्या होना था मेने जो इज्जत ३० साल में संभाल के रखी थी आज जा रही थी और में कुछ भी नहीं कर पा रही थी मेने अपने सारे देवताओ को याद कर लिया की जीजाजी का दिमाग चेंज हो जाये और वो अब ही मुझे छोड़ दे पर लगता हे देवता भी उनके साथ थे फिर अचानक वो थोड़े ऊँचे हुए एक हाथ से मुझे दबा कर रखा और दुसरे हाथ से मेरी चड्डी पिंडलियों तक उतार दी और एक झटके में मेरी एक टांग से बाहर निकाल दी अब चड्डी मेरे एक पांव में थी और मेरी चूत पर कोई पर्दा नहीं था

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जीजाजी का लंड, मेरी चूत

वो मेरी दोनों टांगो को सीधा कर अपने भारी पांव से दब लिया फिर वे एक झटके से उठे और नीचे हुए उनका लम्बा हाथ मुझे सीधा सुला रह था जबरदस्ती मेरी टांगे चोडी की एक इस तरफ और दूसरी उस तरफ में छटपटा रा ही थी की अचानक उन्होंने अपना मुंह मेरी चूत पर लगा दिया बस मुंह लगाने की देर थी की में फ्रीज हो गई हिलना डुलना बंद आज तक किसी ने मेरी चूत नहीं चाटी थी पिछले एक साल से में चुदी नहीं थी पिछले आधे घंटे से में मसली जा रही थी पर मेरी चूत के मुह लगते ही में क्लीन बोल्ड हो गई सब सही गलत भूल गई मेरे शरीर में आनद का श्रोत उमड़ पड़ा मुझे बहुत आनद आने लगा जीजा जी जोर जोर से मेरी चूत चूस रहे थे चाट रहे थे हलके हलके कट रहे थे म्रेरे चने को दांतों और जीभ से चिभाल रहे थे मेरी पूरी चूत की फंको को मुंह में भर रहे थे अपनी जीभ लम्बी और नोकीली बना कर जहा तक जाये वहा तक मेरी चूत में डाल रहे थे मेरे चुचक कड़े हो गए थे मुह से सेक्सी आहे निकाल रही थी में उनके सर पर हाथ फेर रही थी उनके आधे उड़े हुए बालो को भिखेर रही थी !

उन्हें मेरी आन्हे और उनके बालो में हाथ फेरने से पता चल गया की अब मुझे भी मजा आ रहा हे उन्होंने मेरे कमर के पास अपने दोनों हाथ लम्बे कर के मेरे दोनों स्तन पकड़ लिए और मसलने लगे मुझे और ज्यादा मजा आने लगा मेने उनके मुह को इतनी जोर से आपनी झांगो में भींचा की उनकी साँस रुकने लगी और उन्होंने ने मेरे स्तन जोर से भींचे और मेरी चूत में काटा की मेने झंगे ढीली कर दी वो जेसे मेरी चूत चाटने ही आये ऐसे वो बुरी तरह से चूस रहे थे उनकी लार बह कर नीचे बिस्तर तक पहुँच रही थी मेने जितनी टांगे उपर उठा सकती थी उठाली और जोर जोर से सिसक रही थी उन्हें जोर से चाटने का कह रही थी कोई १५ मिनट हो गए उन्हें कहते की मेरा पानी उबल पड़ा उन्होंने मुह नहीं उठाया और ज्यादा चाटा मेरे में पूरा पानी निकाल गया में ठंडी पद गई मुझे जिन्दगी का पहला आनद आ गया