ससुर बहु की पिपासा

By   September 5, 2017
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ससुर जी रोज़ मेरी लेते थे, और क्यूँ न ले. ऐसा नामर्द बेटा पैदा किया है तो भरपाई तो करनी पड़ेगी न.. पर ससुर जी ने आज तो हद कर दी.. एक शानदार bahu porn story पढ़िए..

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3


बहु तुमने क्या साफ़ की?”

“धीरे बोलिए पिताजी, चीकू सुन लेगा. पूरी हजामत कर दी, एक बाल नहीं छोड़ा.” ऐसा फुसफुसा कर कामिनी कमरे के कोने में खेलते हुए अपने बेटे चीकू को पढ़ाने लगी.

एक कमरे की खोली में रहते वागले परिवार के सदस्य किसी तरहं जीवन निर्वाह कर रहे थे. विनोद वागले दफ्तर में पियोन का काम करता था और रात को अक्सर शराब के नशे में आता था. उस रात भी वह नशे में धुत आया और खाना खा कर फर्श पर बिछे बिस्तर पर ढेर हो गया. विनोद के पिता साथ रखी खटाई पर लेट गए. कामिनी बत्ती बुझा पति और बच्चे के साथ सो गई.

खिड़की से आती बिजली के खम्बे की रौशनी कमरे को उजागर कर रही थी. कामिनी और उसके ससुर जगे हुए एक दुसरे को देख रहे थे. खटाई की ऊंचाई पर ससुर करवट लिए अपने पजामे से ढके गुप्तांग सहला रहे थे. फर्श पर पुत्र और पोते के साथ लेटी कामिनी से धीमी आवाज़ में पूछा, “अब तो दिखा दो बहु.”

कामिनी ने आहिस्ता से अपना साड़ी व पेटीकोट उठाया और गोश्तदार जांघें फैला दी. पैंटी तो पहनी ही नहीं थी. बेशर्म बहु अपनी नंगी बुर ससुर को दिखाने लगी. खाट पर लेटे ससुर ने तुरंत अपना पजामा खोल दिया और अपने पांच- इंच खड़े हुए लिंग को हिलाने लगे. कामिनी ने अपनी चूत के सारे बाल ससुर के आदेश पर दोपहर में शेव कर दिए थे. फैली हुई मांसल जाँघों के बीच से झांकती सफा-चट योनी ससुर के बुढ़ापे को जवान कर रही थी. ससुर खाट से उठ कर फर्श पर आ गए.

“पिताजी थोड़ी देर और रुकिए, चीकू कहीं जग न जाए. ये तो खर्राटे मार कर सो रहे हैं पर चीकू की नींद अभी कच्ची है.” कामिनी धीरे से बोली.

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कामिनी चूत की फांकें खोल गीली सुराख़ प्रदर्शित कर रही थी. पायल उसके सुन्दर पैरों पर खनक रही थी. बुर दिखाती कामिनी ससुर के उठे लंड को निहारते हुए लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी. बहु के गुप्तांग पे ससुर का पूरा ध्यान केन्द्रित था.

“आइये पिता जी, आज मुझ पर उलटे चढिये.” कामिनी ने साड़ी-पेटीकोट पेट के ऊपर खींच कर अपना निचला बदन पूर्णतया नग्न कर दिया. ससुर ने अपना पजामा उतार कर कामिनी के मुख पर अपना लौड़ा सिधाया और उस पर उलटे लेट गए. फिर उसकी मांसल जांघों के बीच अपना मुख धर दिया. 69 मुद्रा में कामिनी अपने ससुर की लुल्ली चूसने लगी और ससुर अपनी बहु की चूत लपक-लपक कर चाटने लगे. विनोद और चीकू साथ गहरी नींद में सो रहे थे.

“बहु झांटों के बिना युवा लड़की जैसी बुर लग रही है तुम्हारी.” चाटना रोक कर ससुर मुड कर फुसफुसाए.

“आह…आह… आप ही के लिए गंजी करी है पिताजी. चुपचाप चाटिये, कहीं ये दोनों उठ न जाएँ … आह… आह…” कामिनी ससुर के कठोर लौड़े की चुस्की लेते हुए मतवाली हो रही थी.

विनोद वागले खांसने लगा, “ए कामिनी पानी पिलाओ.” खांसते खांसते लेटा हुआ विनोद उठ कर बैठ गया. अब तक ससुर तेज़ी से उठ खाट पर वापस लेट गय थे और अपने बेकपड़ा बदन को चादर से ढक लिया था.

“देखो तुम्हारी साड़ी घुटनों के ऊपर तक चढ़ी हुई है, बाबा देखेंगे तो क्या कहेंगे.” विनोद पत्नी की उजागर निचली काया देख बोला. वह कुछ पल पहले हो रही रतिक्रिया से बेखबर था.

कामिनी सोने का नाटक करते हुए बोली, “सॉरी चीकू के बाबा, साड़ी सोते हुए उठ गई होगी, मैं आपके लिए पानी लाती हूँ.”

“नहीं रुको कामिनी, देखो बाबा सो रहे हैं क्या?”

“हाँ, सो रहे हैं.”

विनोद पत्नी की ओर आया और उसकी साड़ी पूरी ऊपर चढ़ा दी. “अरे तुमने पैंटी नहीं पहनी हुई!”

“भूल गई होंगी.”

विनोद वागले ने पत्नी की टांगें फैलाईं और स्वयं झुक कर बुर के सम्मुख हो गय. “अरे तुमने यहाँ मेरा रेज़र चलाया, बहुत चिकनी लग रही हो.”

विनोद कामिनी की मांसल रानों के बीच लेट कर पत्नी की चूत चाटने लगे, “बड़ी गीली हो, क्या बात है.”

“अब गीली तो हूँगी ही, आप महीनों तक मेरे साथ कुछ नहीं करते तो रात को मेरा निजी भाग रिसता है. आप की जीभ बहुत अच्छी लग रही है.” कामिनी ने ससुर की राल में लेप गीली बुर का कारण होशियारी से छिपा लिया. पति के सर को अपनी योनी में समाए हुए विनोद के बालों को पकड़ कामिनी उसके चेहरे को अपने बालहीन योनिमार्ग पर रगड़ रही थी.

खटिया पर लेटे ससुर छिप कर अपने बेटे और बहु की यौन क्रिया देख रहे थे. क्योंकि विनोद का चेहरा जाँघों के बीच के अँधेरे में लिप्त था, ससुर मौका देख कामिनी के उठे हुए पाजेब पहने पैरों को कोमलता से छू रहे थे. काम-क्रिया में मस्त हुई कामिनी ससुर से आँखें मिला मुस्करा रही थी. पुत्र से चूत चटवाती बहु को देख ससुर धीमे-धीमे हस्त मैथुन कर रहे थे

विनोद अनजान था की जो कामुक रस वह चपड़-चपड़ उत्सुकतापूर्वक ग्रहण कर रहा था वह उसके पिता का झूटन था. बस चीकू ही वागले परिवार की खोली का इकलौता सदस्य था जो वास्तव में सो रहा था.
“आई दादा के पेट के ऊपर क्यों बैठी हो?” नादान चीकू ने ससुर के ऊपर चढ़ी हुई अपनी माँ से जिज्ञासा पूर्वक पूछा. नाइटी पहनी कामिनी लेटे हुए ससुर की सवारी कर रही थी. चुदासी बहु ऊपर-नीचे, आगे-पीछे होते हुए ससुर का लंड निगल रही थी.

“चीकू मैंने कितनी बार तुम्हें कहा है, तुम टी.वी. पर कार्टून देखो और मुझे परेशान मत करो.” भारी साँसें लेती कामिनी ने चीकू को फटकारा. नाइटी पहनी कामिनी अपने ससुर के ऊपर बैठ कर चुदवा रही थी. नाइटी ने खुद के बदन को ढका हुआ था और नीचे लेटे ससुर की इज्ज़त भी बरक़रार थी. नाइटी के अन्दर जो चल रहा था वह चीकू नहीं देख सकता था.

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बहु की गंजी चूत

गुसलखाने से बहते पानी के बंद होने की आवाज़ आई. सम्भोग करती कामिनी तुरंत उठ खड़ी हुई और अपनी नाइटी गिरा दी. चूत के रसों में भीगा हुआ ससुर का खड़ा लंड स्पंदन करने लगा. ससुर भी झट से खड़े हो गए, लौड़ा संभाला और पायजामा बांधने लगे. गुसलखाने से विनोद वागले बाहर आया और सब साधारण पाया – कामिनी चाय बना रही थी, पिताजी अखबार पढ़ रहे थे और चीकू कार्टून देख रहा था. कामिनी और उसके ससुर ऐसे ही समय चुरा के कामुक खेल खेलते थे.

“आइये पिताजी, ये कपड़े सुखाने बाहर गए हैं.” कामिनी शौचालय में गई और नाइटी चढ़ा कर नाली पर बैठ गई. कामिनी का सुडौल गोश्तदार बदन, मोटी-मोटी चिकनी जांघें, खरबूज जैसे भारी नितम्ब और बीच में बच्चे दानी के छेद को ससुर घूरने लगे. मादक योनी मुंडी हुई पंखुड़ियों से ढकी थी. कामिनी पेशाब करने लगी. ससुर मूतती बहु के सामने जा बैठे और अपना हात गरम बहती मूत्र धार में धोने लगे.

शौचघर के खुले दरवाज़े की दहलीज पर बैठे ससुर प्रसन्न थे. बहु के ताज़े प्रवाह में अपना हात गीला करते हुए बोले, “बहु तुम मूत्रत्याग करते हुए अत्यंत कामोत्तेजक दिखती हो, मन करता है तुम्हारी मूत की बौछार में स्नान कर लूँ.”

“आइये न पिताजी, नीचे मुंह रखिये, मैं आपके मुख पर पेशाब करती हूँ.” ससुर ने यह सुन शीघ्रता से अपने चेहरे को नाली और बहु की चूत के बीच में धर दिया.

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