ससुर जी ने तृप्त किया

By   June 21, 2017
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मैं एक गाँव की साधारण बहु हूँ जो अपने पति की याद में तरस रही थी. लेकिन एक दिन ससुर जी के साथ अचानक घटी घटना ने मेरा तरसना बंद करवा दिया. पढ़िए मस्त sasur sex story, मज़ा आ जायेगा.


मेरा नाम सुमन है और मैं अपने ससुर के साथ रहती हूँ.. मेरी उम्र 34 साल है और मेरी शादी को सात साल बीत चुके है.. लेकिन अभी तक मेरे कोई बच्चा नहीं है क्योंकि मेरा पति मुंबई में काम करता है और मैं अपने ससुर जी के साथ गाँव में रहती हूँ और वो यहाँ पर रहकर हमारी खेती संभालते हैं. मैं चुदाई के लिए बहुत तड़पती हूँ और मेरा पति घर पर साल में एक या दो ही बार आता है और उसका लंड बहुत छोटा है और वो मेरी ठीक तरह से चुदाई भी नहीं करता. इस कारण हमे बच्चे भी नहीं हैं और मेरी सासू माँ को मरे हुये भी बहुत साल हो चुके हैं मेरे पापा जी मतलब ससुर 56 साल के हैं.. लेकिन खेती करने और मेहनत करने के कारण अभी भी तंदरुस्त हैं. उनकी लम्बाई 6.2 इंच हैं और बहुत तगड़े हैं और बहुत आकर्षक हैं.

मैं एक घरेलू औरत हूँ.. लेकिन में दिखने में बहुत मस्त हूँ मेरा सबसे प्यारा शरीर का अंग है मेरे बूब्स.. और मेरा फिगर 38DD-30-36 है. फिर कई बार खेत में काम करते वक़्त और वहीं पर नहाते वक़्त मैंने बाबू जी का लंड बहुत बार देख लिया और अब मुझे उसको लेने की चाहत होने लगी थी. वो 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है और जब भी मैं काम करती वो भी मुझे घूर घूरकर देखते थे और फिर मैं भी आज कल उनको अपने बूब्स के लगातार दर्शन दे रही थी.. नहाने के बाद जानबूझ कर टावल में उनके सामने आ जाती और वैसे ही कभी चाय तो कभी खाना बनाती और फिर बाद में कपड़े पहनती.

फिर एक दिन शाम को मेरे ससुर जी ने कहा कि बहू मुझे रात को खेत पर किसी काम से जाना है और मैं रात को थोड़ा देर से आऊंगा. तो मैंने उनसे कहा कि मैं भी आपके साथ चलूंगी क्योंकि यहाँ पर अकेले में रात को मुझे बहुत डर लगता है. तभी बाबू जी ने कहा कि ठीक है.. लेकिन तुम वहाँ पर क्या करोगी?

मैंने कहा कि जो आप कहे वही और वो हंस पड़े और मान गये. फिर मैंने जल्दी से खाना बनाया और हम खाना खाकर साथ में चल दिए. हमारा खेत बहुत दूर था और पैदल जाने में 20 मिनट लगते थे.. तो इसलिए हम दोनों साईकिल से गये ताकि हम लोग वहां पर जल्दी पहुँच जाए और मैं साईकिल के सामने वाले डंडे पर बैठ गयी और वो साईकिल चलाने लगे.

तभी उनके पैर साईकिल चलाते वक्त मेरी गांड पर लग रहे थे और उनकी छाती मेरी पीठ से लग रही थी.. जो की बिल्कुल नंगी थी क्योंकि मैंने पीछे से खुले टाईप का ब्लाउज पहना था और मैं हमेशा शहर आती जाती थी तो फैशन के बारे में मुझे थोड़ा बहुत मालूम था.

उन्होंने बनियान और लूँगी पहनी थी और अंदर कुछ नहीं पहना था और यह मैंने साईकल पर बैठते वक़्त देख लिया था. मैंने भी साड़ी पहनी थी और अंदर पेंटी नहीं पहनी थी और ब्रा भी नहीं पहनी और फिर हम थोड़ी ही दूरी पर पहुंचे थे इतने में ही बहुत ज़ोर की बारिश आ गई और हम थोड़ा बहुत पानी से भीग भी गए.

उस अंधेरी रात में हम दोनों एक पेड़ के नीचे खड़े होकर बारिश के रुकने का इंतजार करने लगे.. हमे दूर दूर तक कोई भी नजर नहीं आ रहा था और ना ही कहीं छिपने की जगह दिख रही थी. तभी मुझे ठंड लगने लगी और गीले होने की वजह से पेशाब भी आने लगा

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मैंने बाबू जी से कहा कि मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब आ रहा है अब मैं क्या करूं? मुझे कहीं पेशाब करने के लिए जाना है.

तो उन्होंने कहा कि हाँ आया तो मुझे भी है.. तुम भी यहीं पर कर लो क्योंकि आगे बहुत अंधेरा है और कोई साँप वगेरह ना आ जाए.

मैंने कहा कि ठीक है और मैं वहीं पर दो चार कदम की दूरी पर अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर उठाकर अपने दोनों हाथों में लेकर नीचे बैठ गई और सस्शह की आवाज़ से मूतने लगी. फिर ससुर जी भी अपनी लूँगी को थोड़ा ढीली करके मेरी दूसरी तरफ मुड़कर मूतने लगे.. लेकिन तिरछी निगाह से मैंने उनका लंड देख लिया था. फिर वो जल्दी से पेशाब करके खड़े हो गए थे..

तभी बहुत ज़ोर से बिजली चमकी और में चिल्लाते और डरते हुए सीधा बाबू जी से चि

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बहु सुमन की प्यासी जवानी

पक गयी. इस हलचल में बाबू जी की लूँगी खुलकर नीचे गिर गयी और वो बिना लूँगी के हो गए और मेरी नंगी चूत उनके लंड से चिपक गयी और में उनकी बाहों में कसमसाने लगी..

मैं बहुत डर गयी थी और अब धीरे धीरे उनके हाथ भी मेरी पीठ पर घूमने लगे थे और मेरी पीठ को सहलाने लगे.. मुझे उनके हाथ का स्पर्श मेरी कमर पर बहुत अच्छा लग रहा था. तो उन्होंने पूछा कि क्या हुआ बहू इतना क्यों डर गयी? सही तरह से मूत पाई या नहीं?

मैंने कहा कि हाँ बाबू जी मैं बहुत डर गयी हूँ और मेरा तो उस बिलजी की आवाज से पेशाब भी बंद हो गया. आपने मूता या नहीं?

वो बोले कि कहाँ मूत पाया तुम जो आकर मुझसे चिपक गयी.

मैं थोड़ा शरमा गयी और तभी फिर से एक बार और ज़ोर से बिजली कड़की और उसकी आवाज से मेरा सारा मूत खड़े खड़े ही उनके लंड के ऊपर पर निकल गया जो कि मेरी चूत के मुहं से चिपका हुआ था. तो मैं उनकी बाहों में कसमसाने लगी और तड़प उठी.

तभी बाबू जी बोले कि ओहआहह बरसात के ठंडे पानी में कुछ अजीब सा गरम गरम लग रहा है. तो अब मेरे ससुर की दोनों आँखे भी बंद हो गई और वो बोले कि बहू इतनी ठंड में भी तुम्हारा गरम पेशाब क्या जादू कर रहा है और मेरा भी मूत निकलने वाला है. मेरी मूत की धार तेरी धार में मिलने दे..

मेरी भी हालत खराब हो गई. मैंने कहा कि बाबू जी मुझे क्या हो रहा है? आपका लंड सीधा मेरी चूत के मुहं पर अपना मूत गिरा रहा है ऊहह हमारा पानी मिल रहा है.

तभी मुझे मेरे पैर पर कुछ महसूस हुआ और मैं चीखकर उचक पड़ी और बाबू जी से लिपट गयी और मेरे दोनों पैर बाबू जी की कमर से लिपट गए थे और मेरी चूत उनके लंड के ऊपर आकर खुद ब खुद सेट हो गई थी और एकदम से उचकने के कारण सपोर्ट के लिए उनके हाथ भी मेरी नंगी गांड पर आ गए थे और एक हाथ मेरी गांड की दरार में घुस गया था..

अह्ह्ह मेरा मूत पिताजी के लंड पर बह रहा था और उनका मूत मेरी चूत और गांड को गरम कर रहा था और हम सिर्फ़ आह्ह्ह ऐसे ही चिपक कर खड़े रहे.

तभी बाबू जी बोले कि सुमन बहू तेरी क्या मस्त गांड है?

मैंने कहा कि बाबू जी आपका लंड मेरी चूत को गीला कर रहा है और आपका हाथ मेरी गांड में घुसा जा रहा है शईई. तभी बाबू जी बोले कि वाह क्या मस्त गांड है.. सुमन बहू तुम्हारी गांड में एक बाल भी नहीं हैं और तू मेरे लंड पर बैठकर मूत रही है कुतिया.

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