ठकुराइन का इन्साफ – II

By   June 1, 2016
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तीन मर्दों की दमदार ठुकाई करने के बाद अब ठकुराईन का लंड थोडा आराम फरमा रहा है। इस आराम के लिए बेला मलिन ठकुराईन की मालिश करने के लिए बुलाई गयी है। पढ़िए shemale chudai ki kahani का दूसरा भाग-

Hindi Sex Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3


ठकुराइन निढाल हो भूरा के ऊपर लुढक गई । थोड़ी देर में ठकुराइन उठी और भूरा की गांड से अपनी लंड निकालते हुए बोली-
“हाय बिल्लू मैं तो बहुत थक गयी हूँ,अब मैं गरम पानी से स्नान करूंगी तभी थकान उतरेगी ।

बिल्लू ने कहा ठीक है मालकिन चलिये मैं भी आपकी मदद करता हूँ । वो देख रहा था कि ठकुराइन का लन्ड डबल चुदाई की थकान से निढाल है। उसने उनकी दोनों बगलों में हाथ डाल सहारा देकर ठकुराइन को उठने में मदद की । बगलों में हाथ डालकर उठाने में ठकुराइन की बड़ी-बड़ी चूचियां भी बिल्लू के हाथों में आ गयी । वो उनकी तरफ़ देखने लगा।

बिल्लू को अपनी तरफ़ देखता पा कर ठकुराइन बोली-
“क्या देख रहा है बल्लु !!!.मेरी लंड देख रहा है…. अरे तु चिंचा मत कर, अभी ये तीसरे राऊंड के लिए तैयार हो जाएगा ।”

बिल्लू ने जवाब दिया-
“कुछ नहीं मालकिन देख रहा था साले के गांड बहुत टाईट है …. कैसा रगड़कर आपकी लंड को लाल कर दिया है।”

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ठकुराइन ने मुस्कराते हुए अपनी मुरझे हुए मोटा लण्ड को थामकर सहलाते हुए जवाब दिया-
“तू घबरा मत अभी ठकुराइन में बहुत दम है अभी गरम पानी से स्नान करने के बाद तीसरा राउण्ड में पुरा का पुरा मजा दुंगी तुझे । अगर उसके बाद भी दम बचे तो सारी रात अपनी है।”

बिल्लू मान गया कि एक जबरदस्त गांड चोदने के बाद भी ठकुराइन की लन्ड दुसरे को चोदने का दम रखती है और अपने ठाकुर साहब से किसी तरह कम नहीं है।

ठकुराइन आगे-आगे और व पीछे-पीछे बाथरूम की तरफ़ जाने लगे । बिल्लू बाथरूम की तरफ जाती ठकुराइन
को देख रहा था । वो पूऱी तरह नंगी थी उसकी गोरी गुलाबी भरी हुई चिकनी पीठ उभरी हुई भारी चूतड़ चलने पर थिरक रहे थे । बाथरूम में पहुँचकर ठकुराइन टब का फव्वारा चलाने के लिए झुककर उसकी टोटी घुमाने लगी । झुकी हुयी ठकुराइन की बड़े-बड़े गुलाबी चूतड़ों के बीच में से लम्बा मोटा लन्ड और बडे-बडे अंडे दिखे जिससे वो चोदने वाली थी ।

ठकुराइन टब में घुस गयी ओर बिल्लू एक हाथ में फव्वारा लेकर दुसरे हाथ से ठकुराइन का संगमरमरी गदराया बदन मलमलकर नहलाने लगा । बिल्लू के मर्दाने हाथ बड़े बड़े उरोजों पर फिसल रहे थे। मर्दाने हाथों के स्पर्ष से वो फिर से उत्तेजित होने लगी थी।

बल्लु ठकुराइन को होंठों से पकड़कर चूसने लगा निप्पलो को बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाने चूसने लगा बिल्लू के मरदाने हाथ उनकी मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों उनके बीच में आधी तनी हुई लन्ड और अंडकोष से होते हुए भारी नितंबों सुन्दर टांगों पर फिसल रहे थे।

बिल्लू के होंठ ठकुराइन के बड़े-बड़े उरोजों गदराये पेट गोल नाभी से फिसलकर काले बालों से भरी मूषल लंड पर पहुंचे । बिल्लू ने ठकुराइन की लंड होंठों में दबाकर चूसते हुए कहा-
“हाय मालकिन मैनें कभी सोचा भी नहीं था कि औरतों की भी इतनी बडी लंड होगी !!!! ।”

“अरे …..तुने क्या सोचा था लंड केवल मर्द के पास होगा ?… हम लोगों के पास भी लंड है और मैं पुरी तरह से चोदाई कर सकती हुं..।”
यह कहकर ठकुराइन टॉब से उठ गई और बिल्लू को टॉब में पेल दिया और अपनी साढ़े नौ इंच की मूषल लंड को थाम कर उसकी गांड के छेद पर रगड़ने लगी ।

ठकुराइन ने अपना एक पैर टब की दीवार पर जमायी और उस पर बिल्लू ने अपना जांध चढ़ाया अब ठकुराइन की लण्ड का सुपाड़ा ठीक छेद के मुंह पर था । बिल्लू न अब अपने दोनों हाथों की उंगलियां उनके भारी चूतड़ों पर जमा गांड उचकाया तो सट से ठकुराइन की पूरी लण्ड उसके गांड के अन्दर चला गया । पूरा लण्ड अन्दर जाते ह़ी ठकुराइन ने सिसकारी भरी-
“उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म महा ।”

ठकुराइन ने भी तीन चार धक्का कस के लगाई फिर लण्ड को गांड के अन्दर ही रहने दिया और बिल्लू को वैसे ही गोद में उठा लिया । बिल्लू ने अपना दोनो टॉगें ठकुराइन की उभरी गुदाज गांड के इपर लपेट लिया और अपना बाहें उनकी गले में डाल दिया ।

ठकुराइन की बड़ी-बडी स्तन बिल्लू के छाती से टकरा रहे थे । ठकुराइन अपने दोनो हाथ बिल्लू के चूतड़ों पर जमाये हुए उसे कमरे की तरफ़ ले चली । चलने से लगने वाले हिचकोलों से ठकुराइन की लण्ड बिल्लू की गांड में थोड़ा अन्दर- बाहर हो रहा था। कमरे में पहुँचकर उन्होंने देखा दीनू और भूरा जमीन वाले से गद्दे से उठकर पलंग पर सो रहे हैं।

ठकुराइन को हॅंसी आ गयी व बोली-
“काफ़ी समझदार हैं साले हमारे चुदायी के खेल के लिए पूरा ही गद्दा खाली कर दिया।”

फिर व हॅंसते हुए बिल्लू को गोद से उतार दिया जिससे ठकुराइन की लण्ड बिल्लू की गांड से झटके से निकल गया और उनकी मुँह से “हाय” निकल गयी । उसने एक तौलिया बिल्लू को दिया क्योंकि वो भी भीग गया था दूसरे से अपना बदन पोंछने लगी । बदन पोंछकर दोनों गद्दे पर आ गये। ठकुराइन की लण्ड मीनार की तरह खड़ा था ।

ठकुराइन और बिल्लू ने एक दूसरे की तरफ करवट ली बिल्लू ठकुराइन की बड़े-बड़े उरोजों और निप्पलों को टटोलते हुए बोला-
“हाय मालकिन अब तो शुरू करें।”

ठकुराइन ने बिल्लू के पीछे लेट गई और पीछे से उसे अपनी बाहों में भर कर उसकी पीठ पर स्तनों को रगडने लगी । बिल्लू ने भी गरदन पीछे कर ठकुराइन की रसीले होंठों को चुमने लगा । ठकुराइन की लंड एकदम खडी हो गई थी और बिल्लू के गांड पर रगड खा रहे थे । तभी ठकुराइन ने अपनी एक उंगली बिल्लू के मुंह में घुसा दी।
बिल्लू ने ठकुराइन की उंगली को चुस के पुरा गीला कर दिया ।

फिर ठकुराइन अपनी गीली उंगली को बिल्लू की मुंह से निकाल के सीधे उसकी गांड छेद में डाल दी और गोल-गोल घुमाने लगी । बिल्लू को ठकुराइन की हरकतों से मजा आने लगा था । कुछ देर उसक गांड में उंगली अंदर-बाहर करने बाद ठकुराइन ने बिल्लू की एक टांग उपर उठा दी, अब उसके गांड का छेद फैल गया ।

ठकुराइन अब अपनी लण्ड को हाथ से पकड़ कर सुपाड़ा ठिकाने से लगाया और धक्का मारा । उनका पूरा का पूरा लण्ड अन्दर चला गया और उनकी मुँह
से सिसकारी निकला गई–
“ओहहहहहहहहहहह भई वाह।”

thakurain ka insaaf shemale chudai ki kahani

ठकुराइन का फनफनाता लंड

ठकुराइन अब बिल्लू के पीठ पर अपनी चुचीयों के निप्पलों को दबाती हुई धीरे-धीरे कमर चला कर रगड़ते हुए चोदने लगी । बिल्लू के एक हाथ की उंगलियां ठकुराइन की मोटी-मोटी संगमरमरी चिकनी जांघों को सहला गद्देदार भारी नितंबों को दबा रह था।

करीब आधे घंटे तक दोनो गद्दे भर में लेटे हुए चुदायी करते रहे । तभी ठकुराइन ने अपनी टांग उपक उठा ली और बिल्लू के टांग पक चढा लुया । जिससे उनकी चौडी चुतड और फैल गई और अब ठकुराइन आराम से नितम्ब उछा- उछाल कर अपनी लण्ड बिल्लू के गांड में अंदर-बाहर कर चोदने लगी ।

तभी बिल्लू ने दाऐं हाथ में ठकुराइन की उभरी चूतड़ों को दबोचकर अपने गांड को ठकुराइन की लण्ड पर दबाने लगा ।और ठकुराइन भी बिल्लू की पीठ पर उभारों को दबाते हुए उसे कस के बाहों में भर लिया और उसके गांड में जड तक लंड पेल कर झड़ने लगी और जोर से कराहने लगी-
“उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्ह आहह।”