ज़हरीन का प्यासा सफ़र – V

By   July 29, 2016
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एक के बाद एक धुंआधार चुदाई के बाद जहरीन की बैंड बजी हुई थी पर ज़िन्दगी का मज़ा भी आ रहा था। आपको भी आ रहा है? इस hardcore sex story का अगला भाग-

Hindi Sexy Story के अन्य भाग-

पार्ट 1

पार्ट 2

पार्ट 3

पार्ट 4

पार्ट 5


जहरीन की सिसकारियाँ फूट गयी और उसकी चूत में खलबली मच गयी। उसकी मस्ती पूरे परवान पर थी और वो हिल भी नहीं सकती थी। उसकी कलाइयों को जगबीर ने पूरी ताकत से पकड़ रखा था और उसकी गाँड बिस्तर से हवा में पूरी उठी हुई थी। उसकी गाँड ने एक ज़ोर का झटका दिया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। अब जगबीर ने उसकी कलाइयों को छोड़ा और अपने हाथ उसकी टाँगों के बीच से निकाल लिये। अब वो बिल्कुल धाराशायी हो गयी बिस्तर पर। “ओह गॉड…मज़ा आ गया जगबीर!”

जगबीर ऊपर चढ़ गया और उसके होंठों को चूमने लगा। जहरीन ने जगबीर की बालों से भरी छाती पर हाथ फिराने शुरू कर दिये। अच्छा लगता था उसे जब जगबीर की बालों से भरी छाती उसके चिकने और भरे हुए मम्मों को रगड़ती थी। अजीब तरह की गुदगुदी सी होती थी उसे। अब जहरीन बैठ गयी और उसने जगबीर की पैंट के बटन खोले और उसकी पैंट और अंडरवीयर निकाल कर फेंक दिये। उसने जगबीर के लण्ड को अपने हाथों में लिया और उसकी जड़ से टोपी तक अपना हाथ ऊपर नीचे करने लगी। उसके लण्ड की चमड़ी के पीछे होते ही उसका लाल-लाल गोल सुपाड़ा जैसे हमले की तैयारी में नज़र आता था। जहरीन झुकी और जगबीर का लण्ड चूसना शुरू कर दिया। उसने जगबीर के लण्ड के सुपाड़े को मुँह में लिया और उसका स्वाद अपनी जीभ पर महसूस करने लगी। उसकी जीभ जगबीर के लण्ड के मूतने वाले छेद में घुसने की कोशिश कर रही थी। उसके सुपाड़े को अपनी जीभ में लपेट कर जहरीन उसके हर हिस्से का मज़ा ले रही थी। जगबीर उसके सर पर हाथ रख कर उसे दबाने लगा। अब जहरीन जगबीर के पूरे लण्ड को अपने मुँह में ले रही थी। जगबीर का लण्ड उसके गले तक जा रहा था और उसकी आँखें जैसे बाहर आने को हो गयीं। उसने लण्ड को थोड़ा बाहर निकाला और फिर थोड़ी कोशिश के बाद वो अब उसके लण्ड को अपने मुँह में एडजस्ट कर चुकी थी। अब जगबीर को पूरा मज़ा मिल रहा था। जहरीन बिल्कुल रंडी की तरह अच्छी तरीके से उसका लण्ड चूस रही थी – नीचे से ऊपर… ऊपर से नीचे। फिर जगबीर ने उसे बिस्तर से नीचे उतरने को कहा।

 

जहरीन नशे और मस्ती में झूमती हुई बिस्तर से उतर कर नीचे खड़ी होकर झुक गयी और अपने हाथ बेड पर रख दिये। अब वो बेड का सहारा लेकर गाँड उठाये खड़ी थी। जगबीर उसके पीछे आकर खड़ा हो गया। ऊँची ऐड़ी की सैंडल की वजह से जहरीन की गाँड उठ कर उघड़ी हुई थी और वो गाँड मटकाते हुए आराम से जगबीर के लण्ड का अपनी चूत में घुस जाने का इंतज़ार करने लगी। जगबीर ने जहरीन के पैरों को और फैलाया और अपने लण्ड को पकड़ कर जहरीन कि उठी गाँड पर रगड़ने लगा। वो उसके पीछे खड़ा होकर उसकी उठी हुई गाँड से लेकर उसकी चूत तक अपने लण्ड को रगड़ रहा था। जहरीन की सिसकारियों से कमरा गूँज रहा था। जहरीन की चूत के मुँह पर उसने अपने लण्ड को एडजस्ट किया और धीरे-धीरे बड़े प्यार से लण्ड के सुपाड़े को उसकी चूत में पहुँचा दिया।

 

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जहरीन ने मदहोश होकर अपनी गाँड और उठा दी और जगबीर ने अपना लण्ड एक झटके से पूरा का पूरा जहरीन की चूत में ढकेल दिया। जहरीन को एक झटका सा लगा और उसकी सिसकारियाँ फूटने लगीं। जगबीर ने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ा और नीचे से जोर-जोर से झटके मारने शुरू कर दिये और जहरीन की कमर को पकड़ कर एक लय में उसके जिस्म को हिलाने लगा। जहरीन का पूरा जिस्म हिल रहा था। उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसकी चूत को कोई उठा-उठा कर जगबीर के लण्ड पर पटक रहा था,  और जगबीर का लण्ड उसकी चूत को चीरते हुए उसके पेट में घुस रहा था।

 

जहरीन की सिसकारियाँ अब मदहोशी की चीखों में बदल चुकी थी। उसकी चूत के थपेड़े जगबीर के लण्ड पर बेतहाशा पड़ रहे थे। जगबीर ने उसकी कमर को कस कर पकड़ रखा था और जहरीन की गाँड से लेकर उसके कंधों तक उसके जिस्म को झकझोर कर रख दिया था। जगबीर उसे बुरी तरह चोदे जा रहा था और जहरीन के सैंडल वाले पैर ज़मीन से उठने लगे थे। जगबीर ने उसकी कमर को छोड़ दिया और उसकी जाँघों को अंदर की तरफ़ से पकड़ कर उसे ऊपर उठा लिया। अब जहरीन अपने हाथों को बेड पर टिकाये हवा में लहरा रही थी और जगबीर उसकी चूत में बेतहाशा धक्के लगाये जा रहा था। जगबीर के धक्के एक दम तेज़ हो गये और जहरीन की चूत में जैसे ज्वालामुखी फट गया। पता नहीं किसका पानी कब गिरा,  दोनों के जिस्म अब शाँत पड़ने लगे। जगबीर ने जहरीन की जाँघें छोड़ दीं तो खटाक की आवाज़ के साथ शाबाना के पैरों में बंधे सैंडल ज़मीन पर पड़े। जहरीन घूमी और धड़ाम से बेड पर गिर गयी। “जगबीर मज़ा आ गया.. लव यू डार्लिंग!” जगबीर भी उसकी बगल में लेट गया और जहरीन ने उसके होंठों को चूम लिया।

 

जहरीन की मौज हो चली थी। अच्छे दिन निकाल रहे थे चुदाई में। कभी जगबीर तो कभी विक्रम और कभी दोनों से खूब ज़ोरों में चुदाई करवा रही थी जहरीन! या यूँ कहें चुदाई के पूरे मज़े लूट रही थी वो!

 

एक दिन सुबह युसूफ अभी निकला ही था कि फोन की घंटी घनघना उठी। अशरफ़ का फोन था। अशरफ़ जहरीन का छोटा भाई था। उसका फोन कभी आता नहीं था – हमेशा उसके अम्मी-अब्बा ही फोन करते थे।

 

“हैलो, बोलो अशरफ़, सब ठीक तो है?” जहरीन ने पूछा।

 

“ठीक है आपा! आप सुनाओ!” अशरफ़ जहरीन से आठ साल छोटा था और उसे आपा ही बुलाता था।

 

“मेरी सगाई तय हुई है और आपको लड़की देखने आना है। परसों सुबह से पहले पहुँचना है!” अशरफ़ ने जल्दी से बात पूरी की।

 

“इतनी जल्दी कैसे आऊँ…? और युसूफ नहीं आ सकेंगे इतनी जल्दी में!” जहरीन को पता था कि युसूफ अगले दिन काम से बाहर जाने वाला था, तो उसे अकेले ही जाना पड़ेगा। दूसरी परेशानी यह थी कि युसूफ की गैर-हाज़री में उसने विक्रम और जगबीर दोनों को अगली रात अपने यहाँ चुदाई के मज़े लूटने के बुला रखा था।

 

“क्या शब्बो आपा! इसमें क्या प्रॉब्लम है? आप कोई बच्ची तो हो नहीं कि अकेली नहीं आ सकती… सीधी बस है और कोई बदली भी करनी है नहीं – सीधे वहाँ से बैठ जाओ और यहाँ पर मैं लेने आ ही जाऊँगा!” अशरफ़ ने आराम से कहा।

 

“लेकिन शाम की ही बस लेनी पड़ेगी अब!” जहरीन तय नहीं कर पा रही थी,  इस हालात से कैसे निपटा जाये!

 

“प्लीज़ आपा! सफ़र है ही कितना… सात-आठ घंटे में यहाँ पर पहुँच जाओगी और मैं बस स्टैंड से ले आऊँगा!” अशरफ़ ने ज़ोर दिया।

 

“देखो अशरफ़, बस रात को दो बजे पहुँचेगी… तुम लेने आ जाना… कोई गड़बड़ नहीं होनी चाहिये… इतनी रात को कोई रिक्शा वगैरह भी नहीं मिलती वहाँ और सब कितना सुनसान होता है!”

 

“आप चिंता ना करो आपा! कोई गड़बड़ नहीं होगी!” अशरफ़ ने उसे यकीन दिलाया। खैर बहुत इल्तज़ा करने के बाद जहरीन राज़ी हो गयी।

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